COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY )

Thursday, January 26, 2017

''Kitty''



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                                                ''Kitty''

किटी ने जल्दी-जल्दी अपने पैर आगे बढ़ाये। माँ इंतज़ार कर रही होंगी, बहार गेट पे खड़ी ये सोच कर मानो उसके पंख ही लग गए। आज तो कोई 'ऑटो वाला भैया भी नहीं मिल रहे!' तभी पीछे से उसको हॉर्न की आवाज़ सुनाई दी। जब उसने पीछे पलट कर देखा तो ऑटो वाला भैया बोला, ''दीदी, आपकी वजह से मैंने चार सवारियों को इनकार कर दिया है!' किटी जल्दी से उसके ऑटो में बैठते हुए बोली '' थैंक यू भैया। '' रामु ने रिक्शा आगे बढ़ा दिया । 

किटी यादों के गलियारे में पंहुच गयी। आज से चार साल पहले राजू बेरोजगार था और अपनी माँ के साथ उसकी यहाँ घर का काम कराने आया करता था। ऐसा नहीं कि राजू पढ़ा -लिखा नहीं है, आठवी तक पढाई की है। न जाने क्यों किटी को उसमे अपना छोटा भाई दिखाई देता था। तभी उसने बॉस से अपनी तीन महीने की एडवांस तनख्वाह लेकर राजू के लिए इस ऑटो का प्रबन्ध कर दिया। राजू की माँ ने तो उसकी कितनी बलाए ले थी, राजू भी मुह छिपा कर कितना रोया था। और हर महीने ना - ना करते हुए भी उसके हाथ में 400-500 रुपये रख ही देता है । 

''दीदी घर आ गया , कहाँ खोयी हुई हो ? तबियत ठीक नहीं है क्या ? ऑफिस में कुछ हुआ क्या ? '' एक ही साथ उसने इतने सवालों की बौछार कर दी। किटी ने नकली मुस्कान ओढ़ कर कहा नहीं भैया कुछ भी तो नहीं हुआ है, तुम तो बेकार में इतना परेशान हो रहे हो । जबकि सच बात तो ये थी की उसको अपने छोटे भाई की बहुत याद आ रही थी। हाई स्कूल में पूरे स्टेट में टॉप किया था उसने, पता नहीं उसको पापा की एक बात क्या बुरी लगी की सब कुछ छोड़ कर अपने दोस्त के साथ कंट्री के बहार चला गया। उसके साथ के दोस्त से ही उसकी कुशलता की खबर मिल जाती है । किटी एक ठंडी सांस लेकर घर के अंदर दाखिल हुई जो पांचवे माले पे है । 

उसे घंटी बजाने की भी जरुरत नहीं पड़ी, माँ दरवाज़े पर ही खड़ी थी। ''बड़ी देर लगा दी तूने। तो चल हाथ मुह धो ले मैं तेरे लिए कॉफ़ी बनाती हूँ ।'' उसको कॉलेज टाइम से ही दिन में 5-6  बार कॉफ़ी पीने की आदत पड़ी हुई है। माँ उसके लिए बड़े प्यार से कॉफ़ी बना के ले आयी। तब तक उसने अपने 'लगजरी बाथरूम' में जाकर अपने मुँह पे ठंडे पानी के बेतहाशा छीटे मार लिए थे ताकि माँ को उसके आँसू दिखाई ना दे सके। फिर वो धीरे से चलकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी। माँ ने कॉफ़ी उसके आगे बढ़ा दी और फिर प्यार से उसके सर पे हाथ फेरा और बोली तेरे भाई का फ़ोन आया था आज। ''क्या ?!'' कॉफ़ी का मग उसके हाथ में ही रह गया। 'हाँ ' माँ फिर से बोली। उनके चेहरे पे 400 वोल्ट की चमक थी, मगर अगर भाई सामने होता तो यही  440 वोल्ट की चमक होती उनकी  आँखों में सितारों की तरह आंसू जगमगा रहे थे। उन्होंने बताया की अगले सप्ताह  तेरा भाई एक मेम ले कर आ रहा है और कह रहा है कि पहले ''दी '' की शादी अतुल जीजू से कर दो उसके बाद ही मैं शादी करूँगा। फिर थोड़ा रुक कर बोली, ''देख, अतुल भी तेरा कब से इंतज़ार कर रहा है। तेरी ही ज़िद थी ना कि जब तक भाई नहीं आएगा तब तक मैं विदा नहीं होऊँगी, देख तेरा भाई भी आ रहा है। अब तो अतुल को हाँ बोल दे। ''अरे सुन! तू उसे अभी डिनर पे ही क्यों नहीं बुला लेती?'' ये कहते हुए माँ ने अतुल का नंबर मिला कर उसको दे दिया तो उसने हाथ में लेते हुए पुछा, ''और पापा ''? -''तेरे पापा भी यही चाहते हैं.....'' -''माँ !'' माँ को उसने एक हाथ से बाँहों में भर लिया और दूसरे हाथ से उसने मोबाइल कान पर लगा दिया। .... 

चलते - चलते = छू लो तुम यूं मुझको ज़रा सा,, 
                         कि मैं मर भी जाऊं तो मुझसे तेरे प्यार की सुगंध आये…! .

Tuesday, January 24, 2017

Harshita


A huge bouquet of flowers Images





                                                                harshita 


हरतालिका तीज की ही बात तब, जब हर्षिता निधि के घर गयी थी और उसने वही उसके साथ अपना बायना निकाला  था । अभी तक तो वो अपनी सास के साथ ही सारे त्यौहार मानती आयी है , शादी के बारह साल बाद सास के जाने के बाद ही वो आज अपनी अतरंग सहेली के साथ अपना कोई  त्यौहार शेयर कर रही है । अपनी सास की याद आते ही उसके नेत्र सजल हो उठे हमेशा अपनी बेटी की तरह ही उसको प्यार किया कितना लाड लड़ा कर उसको अपने हाथों के बने पकवान बना - बना कर खिलाती थी , उसने अपने पलले से अपनी दोनों आँखों को पौछते  हुए सोचा उसके एक ही पुत्र है , एक बेटी को कितना तरस रही है काश उसकी सास ही उसकी पुत्री बन कर आ जाये । 

''मौसी'', तभी पायल ने उसको आवाज़ लगायी, '' निधि की बेटी पायल बिलकुल निधि की ही ज़ीरॉक्स लगती है'' बड़े दिनों बाद आज  उसके होठों पे आयी  स्माइल आयी है ।  हर्षिता उठ कर रूम से निकल कर बहार लॉबी में आ गयी और अपनी सवालिया दृष्टि पायल पे टिका दी , मौसी की नज़रों में सवाल देखकर  पायल बोली आपको अपनी ड्रेस दिखानी है , देखिये  न  मेरी ये ड्रेस 'हरे रंग का शनील का ईवनिंग गाउन बहुत प्यार लग रहा था '  उसने पायल का चेहरा अपने हाथों में ले कर कहा ' इसे पहन कर बड़ी प्यारी लगी मेरी गुड़िया ' । तभी अनुपम की पास आती आवाज़ सुनाई दी ' क्या बात हो रही है मौसी भांजी में ? दोनों मौसी भांजी ये बात सुन कर एक दूसरे को देख कर हंस पड़ी । तब तक टेबल पे महाराज ने कहना लगा दिया था , सभी लोग एक साथ डिनर के लिए डाइनिंग टेबल की और बढ़ चले । 

निधि ने हर्षिता के कान में आकर कहा सुन, तुझसे कुछ बात करनी है सुन के जाना , भोजन से निमट कर दोनों सहेलिया हाथ पकड़ कर लॉन के कोने में आ गयी वही निधि ने उसे बताया की पायल ने लड़का पसंद कर लिया है , और अब पायल के पापा अतुल को मनाने  का जिम्मा तेरा है , वो तेरी कितनी सुनते है प्लीज करेगी न मेरा ये काम , उसने कहा ऐसा क्यों कह रही है अतुल तो तुम्हारी भी सुनते है तुमको कितना चाहते है ॥ निधि बोली तू ऐसा समझती है , तो चल में ही बात करके देखती हूँ पर तो भी मुझसे कनेनेक्ट रहना हाँ मेरी प्यारी सखी मेरे साथ ही हूँ , और देखना सब ठीक होगा , लड़का अच्छा है और पायल को पसंद है , घर अच्छा है और सबसे बड़ी बात की वो लड़का भी पायल को लाइक करता है तो सब ठीक ही होगा और तुझको ' सास बनने की बधाई एडवांस में ' और दोनों सहेलिया सजल नयन लिए एक दूसरे से लिपट गयी । 


चलते - चलते = मौसम में मस्त अजब सी ख़ुमारी छा रही है..!! 
                         सुना है कि मोहब्बत की "फरवरी"आ रही है..

Thursday, December 8, 2016


congratulations on your engagement  Images


                                                              katyayani


कात्यायनी ने जल्दी से राहुल का टिफिन पैक किया और उसको बैग में डाल दिया। राहुल अभी नहाने में था तभी उसकी आवाज़ आयी ''मम्मी पानी बहुत ठंडा है कैसे नहाऊँ ?'' कात्यायनी को पता था कि ये ऐसे ही स्कूल के लिए लेट कर देगा और फिर जब स्कूल बस निकल जाएगी तो फिर उसको ही छोड़ कर आना पड़ेगा। वो बाथरूम में गयी, जल्दी से गीज़र में से गर्म पानी निकाला और फिर राहुल को खुद ही नहला दिया। उसने सोचा 'ये लड़का भी न दस के बराबर है!' राहुल को टॉवल से पौछते- पौछते उसे शैलेश की याद आ गयी। बिज़नेस के काम से लंदन गए हैं, पता नहीं कितना टाइम लग जायेगा। 

इतने में घर के बाहर उसको बस का हॉर्न सुनाई दिया। लटपट वो राहुल को लेकर बाहर भागी, साथ ही स्कूल बैग व राहुल के हाथ में सैंडविच देना नहीं भूली। राहुल को स्कूल बस में बैठा कर वो अब काफी फ्री महसूस कर रही थी। वो अपने रूम में गयी और अपना एंगेजमेंट वाला एल्बम निकल कर अपनी पुरानी यादों के पन्ने उलटने लगी। शैलेश ने जब  उसको अंगूठी पहनाने  के लिए स्पर्श किया था तो उसका प्रथम स्पर्श वो आज तक नहीं भूल पायी।

और वो दिन जब वो जयमाला डालने के लिए स्टेज पर आयी और लड़खड़ा गयी थी। वो गिरने ही वाली थी कि मज़बूत इरादे और मज़बूत बाहों वाले 'शैल' ने उसको गिरने नहीं दिया और हाथ बढ़ा कर उसको थाम  लिया था। उसकी सेहली सुचेता तो शैल की कितनी बड़ी फैन है। तभी उसकी मोबाइल की घंटी बजी। शैल का फोन था। वो एक घंटे के बाद उसके पास होंगे, ये सुनकर उसके गुलाबी होठों पर हँसी और आँखों में नमी आ गयी.... अरे ! ख़ुशी की ....... । 

चलते -चलते =  Itni aasani se kaise bhul jata hai koi,
                        Dur rehkar bhi yaad ata hai koi,
                        Umar bhar yaad karte rahenge hum,
                        Dekhte hain kab tak hame bhulta hai koi…

Friday, December 2, 2016



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                                                  '' मृगनयनी '' (सिक्स्थ एपिसोड )
अभी तक आपने पढ़ा की मृगनयनी थकी होने के कारण सो जाती है।  अब इससे आगे ...... बालक के रोने से मृगनयनी की नींद खुल गयी। उसने बालक को गोद में उठाया और उसको चुप करने लगी । इतनी में वहां एक स्त्री आयी और कहने लगी मृगनयनी से, ''लाओ इसे मुझे दे दो। मेरे कोई औलाद नहीं है, में इसे पाल लूंगी।'' मृगनयनी ने उसको सवालिया दृष्टि से देखा मानो पूछ रही हो की क्यों दे दू। वह स्त्री उसकी सवालिया दृष्टि को समझ गयी और एक मीठी हंसी के साथ बोली ''मेरा नाम सुकन्या है, में आदि काल से यही रहती हूँ और सब बरसो से तुम्हारे यहाँ आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं'', और बोली कि, ''तुम जो यह बालक देख रही हो न,'' फिर क्षणिक रुक कर बोली, ''ये मायावी है''। ''मायावी?'' मृगनयनी अपनी आश्चर्यजनक आवाज़ में आँखों को चौड़ी करके बोली ! 'हाँ', वह स्त्री बोली। ''ये वही बाघ है जिसको तुम पाल रही थी, जब तुम अपने काबिले से यहाँ आ गयी तो वह बाघ तुमको बालक के रूप में मिल गया'', फिर थोड़ा रुक कर बोली कि ''तुम जब - जब मुसीबत में पड़ोगी यह बालक तुम्हारे पास किसी न किसी रूप में बचाने के लिए चला आएगा। बालक को उस स्त्री को देकर मृगनयनी ने उसको प्रणाम किया और आगे का रास्ता तय करने के लिए उससे इज़ाज़त मांगी। उस स्त्री ने मृगनयनी के सर पर आशीर्वाद भरा हाथ रखा और सजल नेत्रों से उसको विदाई दी । 
करीब तीन - चार घंटे की यात्रा करने के बाद उसको हम उम्र साथी खेलते हुए दिखाई दिए, हालाँकि वो उनको जानती नहीं थी तथापि वो उसको बहुत अपने लगे। बहुत दिनों के बाद उसको हमउम्र दिखाई दिए थे। वह भी उनके साथ पकड़म - पकड़ाई खलने लगी तभी उनमे से एक लड़का बोला ''आओ मृगनयनी मुझे पकड़ो'', मृगनयनी अब तक समझ चुकी थी की वह एक '' दिव्य काल '' में प्रवेश कर चुकी है, और जहां वह किसी बहुत बड़े उदेश्श्य को पूरा करने के लिए आयी है। मगर अब तक उसको अपना ही उद्देश्य पता नही चला है, न जाने उसको अभी और कितना चलना है और कहाँ और किसके पास जाना है?  । क्रमश: 

चलते - चलते = हाथ ऊपर वाले ने दिए हैं 
                        मगर लकीरें अपनी मेह्नत से खुद बनायीं हैं। ...... 

Wednesday, November 30, 2016

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                                 '' मृगनयनी ''   (फिफ्थ एपिसोड )
अभी तक आपने पढ़ा मृगनयनी जूते पहन कर आकाश में उड़ जाती है। अब इससे आगे ..... वो बहुत ऊँची  उड़ान उडना  चाहती है , पर वो अपना मन एकाग्र नहीं कर पाती सो वह डगमगाने लगती है और नीचे आ जाती है । वह अपने जूतों को अपनी पोटली में बांध लेती है और अपने नन्हे से मन में ये सोच लेती है की शायद ये भी किसी उचित समय  काम आएंगे । 
मृगनयनी दृढ़ कदमो के साथ आगे बढ़ने लगी। सुरम्य वातावरण था, मंद -मंद बयार चल रही थी, प्रकृति ने रात का आँचल ओढ़ लिया था, रजनीगंधा के पुष्पो की महक बड़ी अच्छी लग रही थी । तभी अपनी मस्ती में चलती मृगनयनी को  बालक के रोने की आवाज़ सुनाई दी। वो ठिठकी और चारो ओर देखने लगी कि कहाँ से आवाज़ आ रही है। फिर जिस तरफ से आवाज़ आ रही थी, वो उसी दिशा में आगे बढ़ चली । नदी किनारे कमल के पत्ते पे एक नवजात शिशु लेटा था। उसने उसको अपने छोटे- छोटे हाथों में  उठा लिया और आस -पास देखा मगर दूर - दूर तक भी कोई दिखाई नहीं दिया ।  

उसने बालक को उठा लिया और आगे की ओर बढ़नेलगी। एक जगह रात का अलाव जल रहा था, उसने रात को वही रुकने का निशचय कर लिया । बालक भूखा था, उसने अपनी पोटली में देखा तो उसमे दूध की बोतल थी।  अब उसकी समझ में आ गया कि उसकी छोटी- मोटी जरूरतों को तो ये पोटली ही पूरा कर देगी । बालक को दूध पीला कर उसने जमीन पर एक कपडा बिछा कर उसे सुला दिया। थकी  होने के कारण उसे भी नींद आ गयी क्रमश: 

चलते - चलते  = उड़ान मेरी कोई मत रोको आज
                        उड़ने दो उड़ने दो आज मुझे गगन विशाल ।  ....... 

Monday, November 28, 2016

       
                               If friends were flowers, I would pick You Images                                             '' मृगनयनी '' (फोर्थ एपिसोड )
अभी तक अपने पढ़ा की मृगनयनी बेड पे लेट कर सो गयी थी, उसको बहार से पदचाप सुनाई दिए वह कुनमुनाई अब इससे आगे। ....... पास आते पदचाप को सुनकर वह उठी और बेड के नीचे छुप गयी वह पदचाप झोपडी में एंटर हो गए , मृगनैनी ने नीचे से लेटे - लेटे ही देखा की की अंदर आने वाले शख्स के पैर बहुत मोटे -मोटे हैं, उसे आने वाले शख्स की लंबाई का अंदाज़ा नहीं हुआ फिर उसने सोचा झोपडी ज्यादा बड़ी नहीं है 
सो जो आया है या आयी है ज्यादा ऊँची नहीं होगी अपने इस कैलकुलेशन पे उसे बड़ी हंसी आयी । 

उसने सोचा की वो चुपके से निकल कर यहाँ से भाग जाएगी, तभी उसे एक भारी सी आवाज़ सुनाई दी ''बाहर  आओ मृगनयनी '' वह चुपचाप बहार आ गयी उसने देखा की वो एक मोटा नाटा व्यक्ति है वैसे उसे व्यक्ति नहीं कह सकते वो तो एक भूत सा लग रहा था । परंतु मृगनयनी एक बहुत ही समझदार लड़की थी उसने इतने समय में बहुत दुनिया देख ली थी । उसने बदसूरती को नज़र अंदाज़ कर दिया , और बोली '' आप मुझको कैसे जानते है '' वो बोला मेरा नाम  शिरोधार्य '' है, में बरसों से यही रहता हूँ मुझको तो अपनी सही उम्र भी याद नहीं है , फिर थोड़ा रुक कर बोला जो भी यहाँ आता है वो किसी न किसी कार्य से ही यहाँ आता है , तुम भी यहाँ किसी उद्देश्य से ही यहाँ आयी हो । पर शायद इससे और भी कुछ बताने के लिए में उपयुक्त नहीं हूँ ।उसने उसको जूते दिए जिसमे दो - दो पंख लगे थे , फिर बोला ये मन की गति से चलते है इसलिए सावधान ! मन  में कुछ भी बुरे विचार नहीं आने चाहिये ।  

वहां से शिरोधार्य को प्रणाम करके वो आगे गंतव्य की और बढ़ चली, थोड़ा रुक कर उसने एक गहरी सांस ली । उसने अपने जूतों  की और देखा फिर उनको पहन लिया वो जूतों को अपनी बगल में दबा कर लायी थी  : p उसने अपने मन में संकल्प किया और आकाश में उड़ चली .... क्रमश:  

चलते -चलते =हर रोज बहक जाते हैं मेरे कदम, तेरे पास आने के लिये!
                     ना जाने कितने फासले तय करने अभी बाकी है तुमको पाने के लिये..!
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                                     '' मृगनयनी '' (third episode )                      अभी तक आपने पढ़ा की मृगनयनी पुजारी जी की दी हुई वस्तु को साथ लेकर आगे बढ़ती चली गयी। .... अब उससे आगे। ...... कई किलोमीटर  का फासला तय करके वह एक खुले  नीले आसमान के नीचे थी । ऊपर शरद पूर्णिमा के चन्द्रमा की छिटकती चांदनी और उस पर अमृत बरसाता हुआ आसमान अद्धभुत !ऐसा नज़ारा उसने अपने छोटे से जीवन में पहली बार देखा था ।           

अब उसको पहली बार ठण्ड का अहसास हुआ , और उसको इतनी ठण्ड का आभास हुआ की वह काँप गयी उसके goose bumps खड़े हो गए , उसके मन में गर्म पोशाक की चाहना प्रकट हुई.,अचानक उसके हाथ की पोटली में कुछ हलचल हुई उसने खोल के देखा तो उसके नाप के बेहद ख़ूबसूरत गर्म वस्त्र थे उसने वो वस्त्र पहन लिए और आगे बढ़ने लगी ।  

आगे जाने  पे उसे एक सफ़ेद रंग की चाँदी  की चमकती हुई झोपड़ी दिखायी दी उसने पहले तो दरवाज़े पे नॉक किया जब कोई उत्तर नहीं मिला तो वह दरवाज़ा ठेल कर अंदर आ गयी आग पे केतली में चाय बन रही थी , एक बेड  पे करीने से बिस्तर लगा था ,पास में ही एक टेबल व एक चेयर पड़ी हुई थी अंदर ऊर्जा होने के कारण काफी गर्म था , एक जगह बर्तनो को करीने से लगाया हुआ था  उसने उफनती चाय को कप में डाला और बेड  पे जाकर गहरी नींद  में सो गयी , काफी वक़्त गुजर जाने पे बहार पदचाप सुनाई देने लगे , वह कुनमुनाई। ..... 
क्रमश:
चलते- चलते =  ये ज़िन्दगी जो मुझे कर्ज़दार करती रही 
                         कभी अकेले में मिले तो हिसाब करूँ।,,,,,,,,,,,
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Sunday, November 27, 2016

                                               
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                                                        ''  मृगनयनी ''
                         ( second Episode )
अभी तक अपने पढ़ा कि निडर मृगनयनी उजाले की और बढ़ती चली गयी, अब इससे आगे। .....मृगनयनी आगे बढ़ी तो उसे लगा की वो दूसरी ही दुनिया में आ गयी है। वहां सुनहरी रोशनी एक वृक्ष में से निकल रही थी , मृगनयनी  उस वृक्ष के पास गयी तो उसका  दरवाज़ा अपने आप खुल गया और वो उसके अंदर चली गयी। उसके अंदर जाते ही उस वृक्ष का दरवाजा अपने आप बंद हो गया । 
       

अंदर घुप्प अँधेरा था , वो टटोल -टटोल कर आगे बढ़ने लगी। अचानक वो लड़खड़ाई। वो जिस पर लड़खड़ाई, वो सीढ़ी थी और जैसे ही उसका पूरा पैर उस सीढ़ी पर पड़ा तो उस वृक्ष के अंदर जो गुफा थी उसकी दोनों साइड में मशाले जल उठी। वो हिरनी सी निडरता के साथ सीढिया कूदती चली गयी- सीढियो पर हीरे , मोती, सोना, चांदी के ढेर लगे हुए थे। उनकी छठा देखने लायक थी परंतु वो उन सबको अनदेखा करके आगे बढ़ती चली गयी , शायद उसके लिए ये सब बेमोल थे ।  

थोड़ा और आगे जाने पे उसे एक मंदिर दिखाई दिया, वहां एक पुजारी जी पूजा कर रहे थे। मृगनयनी वहां गयी तो पुजारी जी उससे बोल उठे, आओ मृगनयनी मुझे तुम्हारा ही इंतज़ार था , ''बड़ी देर कर दी बेटी'' और मृगनयनी !!! आश्चर्य में भर गई !!! उन्होंने उसको एक लाल रेशमी पोटली में कुछ दिया और वह उसे लेकर एक अनजानी दिशा में आगे बढ़ती चली गयी। ..... क्रमश: 

चलते -चलते =   हुईं जो मंज़िलें तमाम, 
                      बहलाएं तुझे  कहाँ - कहाँ। ... 

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Friday, November 25, 2016


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                                                              '' मृगनयनी ''
                                                       (first Episode )     

आज की मेरी ये कहानी, एक धारावाहिक के रूप में हैं '' मृगनयनी '' ये एक बहुत ही साहसी लड़की थी । ये एक काबिले में रहती थी मृगनयनी ने जब से होश संभाल था तबसे खुद को इसने पाया की सब इसके हैं पर ''अपना'' कोई नहीं है,सब काबिले वाले इसका बहुत ख़याल रखते थे परंतु मृगनयनी को माता -पिता की कमी खलती रहती थी :( :(   

समय गुज़रता गया , मृगनयनी बारह बरस की हो चुकी थी, तब तक उसने शस्त्र , घुड़सवारी , भोजन बनाना और खेती करना भी सीख लिया था , और प्रभु भक्ति तो मानो  उसकी रग -रग में बसी थी  सही मायनो में वो एक आल राउंडर हो गयी थी , जहाँ अच्छो - अच्छो को आने में मुद्दत बीत जाती है वही ''सबकी'' मृगनयनी ने बारह बरस की उम्र में सब सीख लिया था । इसे ऊपर वाले का चमत्कार कहे या काबिले वालो का प्यार !! 

एक दिन गाँव के सभी पुरुष शहर  किसी कार्य से गए, तो पीछे से मृगनयनी को तो मानो मौका ही मिल गया इधर पुरुष शहर गए, उधर सारी महिलाये बतियाने बैठ गयी , मृगनयनी को झट से मौका मिला और पट से अपना भला उठा , घने जंगल में भाग गयी । घने  जंगल में भी  उसने अपने मनोरंजन का साधन ढूंढ रखा था ! स्वछ नीला झरना , साथ ही उसका मित्र " बाघा " जो कुछ ही महीनों का बाघ शावक था शायद अपने माता -पिता से बिछड़ कर इस जंगल में आ गया था । मृगनयनी ने ही उसे सबसे छिप - छिप कर पाला है और जब तक वो खुद अपना पेट भरना नहीं सीख जाता तब तक वो उसका ध्यान रखेगी । उसने नन्हे शावक को भाले से मछली पकड़ कर खिलाई और फिर उसे उसकी गुफा में पुआल के ऊपर लिटा दिया और खुद भी वही लेट गयी , और जल्दी ही दोनों गहरी निद्रा में चले गए । 
  
अचानक मृगनयनी को किसी तीसरे का अभास हुआ , उसने आँख खोल कर देखा तो सामने से सुनहरी किरने निकल रही थी निडर मृगनयनी ने उजाले की और अपने कदम बढ़ दिए। .... क्रमश: 

चलते चलते =ज़ुबाँ खामोश होती है , नज़र से काम होता है 
                     शायद मुहब्बत इसी का नाम होता है। .... 

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Tuesday, November 22, 2016

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                                                              ''Mudra''
मुद्रा मल्टीप्लेक्स के ग्राउंड फ्लोर पर रहती है, रोड उसके घर से बिलकुल साफ़ दिखाई देती है । सुबह का टाइम है , मनु , ऑफिस के लिए निकल गए हैं, और साथ में अपना टिफिन ले जाना नहीं भूले, वो कभी भूलते भी नहीं, उनको मुद्रा के हाथ खाना बहुत लाइक  है :) :)
    
पूरे दस साल हो गए उसको यही रूटीन फॉलो करते-करते, तभी रोड पर से एक युवती अपने साल भर के बच्चे  को लेकर निकली। मुद्रा के दिल में एक हूक सी उठ गयी। उसने मन ही मन ये तय कर लिया की आज वो मनु से बात करके रहेगी। दिन अभी बाक़ी है,काम वाली बाई घर कासारा काम निपटा कर चली गयी थी ।  पूरा दिन मुद्रा ने यू ट्यूब पर विडियो देख कर गुज़ारा , शाम के छह बज रहे थे , मनु के आने का टाइम हो रहा है ,यह देखकर मुद्रा बाथरूम में चली गयी और ठंडे पानी की छीटे अपने फेस पे मारके बैडरूम में आ गयी।  उसने मनु के पसंद लाइट ग्रीन कलरकी साड़ी पहनी,अपने लंबे बालों की ढीलीसी छोटी बना ली और उसमे एक गुलाब की कली लगा ली। लाइट पिंक कलर की लिपस्टिक लगा कर उसने अपने आप को फाइनल टच दे दिया , आज वो किसी अप्सरा से काम नहीं लग रही थी, पर उसके चहेरे पे एक उदासी साफ़ दिखाई दे रही थी ।     
रात का डिनर उसने यू ट्यूब देखते -देखते बना लिया था , पोसत के दम आलू , पाइनएप्पल  रायता ,कश्मीरी पुलाव, और स्वीट डिश में  ठंडी रबड़ी थी । अभी वो टेबल लगा कर हटी ही थी की डोरबेल बजी, उसने दरवाजा खोला  तो सामने मनु खड़े है अपनी वही चित -परिचित मुस्कान लिए हाय ''स्वीट हार्ट '' बोलकर अंदर आ गए फिर सीधा बाथ रूम में चले गए। फ्रेश हो कर नाईट सूट पहन कर आये और आते ही बोले बहुत भूख़  लगी है आज क्या बनाया है ? फिर मुद्रा की ओर देख कर बोले, आज क्या घायल करने का इरादा है तुम्हारा ? मुद्रा ने फीकी मुस्कान के साथ , पोस्ट दम आलू का कैसरोल खोला और मनु को परोस दिया । मनु को वाकई में बहुत भूख लगी थी,उन्होंने रोटी उठा कर अपनी प्लेट में रखी और बहुत मन लगा कर खाने में खोते हुए खाना  खाने लगे। 
खाना  बहुत शांति के साथ फिनिश हो गया। मुद्रा ने बस आधा -अधूरा ही कहना खाया। मुद्रा उठी और ठंडी -ठंडी रबड़ी फ्रिज से निकाल लायी ।'वाह -वाह राबड़ी भी है ',मनु  ने फ्लाइंग  किस देते हुए स्वीट डिश अपने हाथ में ले ली।  मुद्रा को मुह लटकाये बैठा देखकर , मनु खाना छोड़ कर मुद्रा से बोले क्या हुआ ?मुद्रा बिना भूमिका बंधे बोली मनु मुझे तुमसे बात करनी है । तभी मनने बिना कुछ कहे एक रिपोर्ट मुद्रा के सामने कर दी , मुद्रा ने देखा तोह उसके होश उड़ गए अब - अब वो कभी माँ nahiiii :(  
फिर अपने इमोशन पे काबू रख कर बोली कोई नहीं हम एक बच्चा अडॉप्ट कर लेंगे। बचे तो भगवन का रूप होते है ।मनु ने मुद्रा को बाहों में भर लिया ।  
चलते - चलते =
उम्र अपने हसीन ख्वाबों की मैंने तो तेरे प्यार को दे दी...
नींद जितनी थी मेरी आँखों में सब तेरे इंतज़ार को दे दी
Sweet Dreams Images


hello