COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): 2015

Thursday, January 1, 2015

 


                                                                    '' उलझन ''

नैना ने,ज़ोर की अंगड़ाई लेते हुए घडी की तरफ देखा ,रात के दो बजे थे । नैना को पढ़ते वक़्त भी लग रहा था ,की जैसे आज वक़्त की रफ़्तार बहुत काम हो  गयी है।नैना को ,आकाश से मिले काफी समय बीत गया,वो सेमिनारके लिए गए हुए हैं । उसे अपनी वो मुलाकात याद आ गयी जब दोनों चौपटी पे गोल गोल घूमते हुए आपस में फेरे लेने की बात पे रोमांटिक हो जाते थे ।  
 
मम्मी ने कितना बोला उसको,  नैनू  पराग से शादी कर ले,चाय घर का है,और शादी के बाद तू मेरे पास भी रहेगी लेकिन उस पे तोह आकाश का भूत सवार था । आकाश एक बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं,जब देखो तब सेमिनारों अथवा तो बिजनेस के कार्य से विदेशों  में ही घूमते रहते हैं :'( काश की उसने माम की बात मान ली होती तो। .... 
ऐसा नहीं की आकाश उसका धयान नहीं रखते,वो तो  से भी ज्यादा पयार करते हैं । :)
 
बहुत बार उसको अपने साथ फॉरेन भी लेकर जा चुके हैं,लेकिन वो साल के तक़रीबन छह सात महीने विरह में ही कटती है,ऐसा नहींकी वोही ऐसे रहती है उसकी फ्रेंड सोनल भी ऐसेही पति विरहा में तड़पती रहती है । रीतिका को देखो हर टाइम अपने पति के आगोश में रहती है पति के सानिंध्य का सुख क्या होता है,यह तो कोई नैना से पूछे ।
 
अभी वो ऐसी उधेड़बुन में ही थी की बहार से हौंडा का हॉर्न बजा,नैना चिहुक पड़ी लगभग भागते दौड़ते आई बिना चप्पल के और आकाश से लिपट गयी और उसी के साथ उसने जो भी अपनी खयालो की नदी में डुबोया था सब भूल गयी। अब न उसे माँ याद आई न ही रीतिका ,क्यूंकि अब उसके पास आकाश जो था उसका अपना आकाश । … इस रात की कभी सुबह न हो ऐसा सोच कर नैना आकाश के आगोश में समां  गयी । 
 
चलते चलते -
दूर दूर रह कर भी हम कितने करीब हैं,
हमारा रिश्ता भी जाने कितना अजीब है,
बिन देखे ही तेरा यूँ मोहब्बत करना मुझसे,
बस तेरी यही चाहत ही तो मेरा नसीब है,
 
 

hello