COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): April 2017

Wednesday, April 26, 2017

Dakshina


Have a great day!! Images

'' शनिदान महादान '' बहार से आवाज़ आयी दक्षिणा का मुँह बन गया ''अच्छा बिज़नेस चल रहा है ये '' एक दिन मुझे ही ले जायेगा बाल्टी में डाल के अंगारे की तरह तप गयी वो कदाचित भावावेश में उसके कपोल फूलने और पिचकने लगे, अगर एक बार ये और बोलै ना तो...  तो...  तो.. मैं इसके ऊपर.... तभी उसने खुद को रोका RELAX BABY और फिर वो आँखों को बंद करके बैठ गयी तनिक उसके मन में ये भाव उत्पन्न हुआ की आँखों को झालरो में छिपा लिया है, और उसने अपनी श्वेत मोती नुमा दन्त पंक्ति को अपने लालिमा युक्त ओठ में से बहार चमका दिया |

''डार्लिंग '' ये सुनकर उसने अपनी सीपनुमा आँखों को पलकों रूपी झालर से बहार निकला L.E.D पर एक चैनल पे एक बहुचर्चित सीरियल चल रहा था उसी के ये शब्द थे | वो उठकर बहार आ गयी अपने लॉन में उसका वो सिर्फ और सिर्फ उसका लॉन है यहाँ लुक आफ्टर करने वाले माली के सिवा यहाँ कोई नहीं आता वहां सारे के सारे काले गुलाब लगे हैं !! रंगहीन या यूँ कह लीजिये की वो काले गुलाब सृष्टि के समस्त रंगो को अपने अंदर समेटे हे हैं | ( ब्लैक कलर में समस्त रंगो को अपने अंदर समा लेने का स्टैमिना होता है ) |

Eyes image 6 Images


वो उठी फ्रेषरूम में जाकर उसने अपने फेस पे हैंड शावर से अपने फेस को गीला किया तब तक, जब तक की उसकी बैक बोन में ठण्ड के मारे सिरहन नहीं दौड़ गयी !  उसने  किचन में जाकर इलेक्ट्रिक केतली में ब्लैक कॉफ़ी के लिए पानी बॉयल्ड करने के लिए रख दिया, जब केतली की विसिल बजने लगी तो उसने एक बड़ा कप उठा लिया जिसके हैंडल पे एक नाचती हुई लड़की बनी थी उसमे उसने एक बड़ा चम्मच काफी डाली और फिर बॉयल्ड पानी डालकर चुस्कियां भरते हुए लॉन की चेयर पे बैठ गयी |

यकायक मेघ घुमड़ - घुमड़ कर आकर विशाल गगन में छाने लगे और बरखा की मोती जैसी मोटी - मोटी बूंदे गिरने लगी ''हे राम जी '' उसके मुँह से निकला मैं तो पूरी भीग जाउंगी | और वो कॉफी  की ट्रे को छाते की तरह ढक कर अंदर आयी अपने रूम में | सामने की कोठी में में  नयन जो हर वक़्त टेलिस्कोप से आकाश में देखता रहता था और कभी कभार मूड फ्रेश करने के लिए पड़ोसियों के आँगन और यदा -कदा उनके लिविंग रूम और बेड रूम में भी झांक लेता था, वो दक्षिणा को सर पे कॉफ़ी की ट्रे ढक कर ले जाते देख अपना पेट पकड़ कर हसने लगा और हँसते - हँसते चारों तरफ को गोल - गोल घूम गया हाँ ! यक़ीनन आप सही समझे वो सुबह से दक्षिणा को वाच कर रहा था |

''नयन '' तभी माँ ने उसको आवाज़ लगायी नयन भागा  - भागा नीचे आया सामने तमन्ना खड़ी  थी नयन ने तमन्ना से कहा तुम यहाँ ? हाँ मैं वो बोली तुम collage क्यों नहीं आ रहे ? और सवाल दागते - दागते वो सोफे पे बेलीज़ उतर कर आलथी -पालथी मार के बैठ गयी | नयन बोला माँ से को कुछ मत बताना प्लीज - प्लीज , '' ठीक है कुछ नहीं बताउंगी पर इसकी पेनल्टी लगेगी '' वो बोलै जो तुम चाहो तमन्ना बोली कोल्ड कॉफ़ी विथ आइसक्रीम ( कोल्ड कॉफ़ी बनाने की रेसिपी  कृपया यहाँ क्लिक करे https://youtu.be/VvmnVE1LzcE ) पक्का done अब तुम जाओ यहाँ से | और उसके भेज कर वो सोने चला गया  क्रमश: 

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चलते - चलते = मुझमे तुम्हारी चाहत के सिवा कुछ भी नहीं
                       चाहों तो मेरी धड़कनो की तलाशी ले लो ||

                       तुझसे दूर रहकर कुछ यूँ पल बिताये मैंने
                       ना लब हिले फिर भी हर पल तुझको पुकारा मैंने ||

Have a great day Images

Wednesday, April 19, 2017

pankhuri

A rose to say I'm thinking of you  Images

पंखुरी जैसे ही टेरस  पे आयी उसने दो पक्षियों  को आपस में  बतियाते देखा वो अपनी भाषा में बातें कर रहे थे शायद वो कुछ एक दूसरे को अपने भाव व्यक्त कर रहे थे | उसको अपना बचपन याद आ गया जब वो अपनी सखी अपनी क्लासमेट जो प्री क्लास्सेस में से ही उसके  साथ थी उसकी याद हो आयी वो तनिक भावुक हो गयी वो या कदाचित  विह्वल  हो गयी थी   |

तभी जब वो अपनी यादों  के बबल्स को उड़ा रही थी शनैः ही उसकी तन्द्रा भांग हुई तब जबकि पक्षियो ने अपनी नन्ही बाँहों को फैला कर उड़ना शुरू किया | गगन कुछ मटमैला हो रहा था निश्चय ही धूल का गुबार उड़ने वाला है | यह सोचकर वो, तनिक उसके माथे पे लकीरे खींच आयी थी उसने झट - पट  सारे सूखे हुए कपड़ों को एकत्रित करके उनको अपने रूम में ले आयी |

''दीदी '' तभी बहार से आवाज़ आयी  'हाँ ' ये बोलते हुए वो बाहर आयी '' काका '' बोले बिटिया खाने में क्या बनेगा ? वो बोली कुछ भी बना लो  काका आप तो हमारी पसंद जानते हो ! वो तो ठीक है बिटिया काका बोले पर आज तुम्हारा क्या खाने का मन  है ये मुझको कैसे पता चलेगा ?

पंखुरी एक ठहरी हुई मुस्कान के साथ बोली, ठीक है आप आलू के पराठे और कड़ाही पनीर बना लीजिये साथ में स्वीटडिश के लिए रसमलाई रखी ही है हमारे लिए काफी है , ''और हाँ '' आपका जो मन हो वो बनाइये और खाइये'' हाँ दीदी ये भी कोई कहने की बात है'' काका  बोले |

लंच पंखुरी ने अकेले ही किया , अभिलाष  लंच टाइम में  अपने ऑफिस में होते हैं | पंखुरी अपने मोबाइल फ़ोन  बिजी हो गयी , तभी उसको एक साया दिखाई दिया वो विंडो के पास आयी उसने बाहर देखा तो उसको एक सेल्समैन दिखाई दिया ! वो बेहद आशचर्य चकित रह गयी की सोसायटी की सिक्योरिटी को पार करके ये यहाँ पंद्रहवी मंजिल तक कैसे आ गया ? उसके लिए ये बात बहुत चौकाने वाली थी !!

पंखुरी ने उसके लिए ना तो डोर खोला और ना ही उससे कुछ  बात की | उसने अपना ध्यान सेल्समेन से हटा कर मोबाइल गेम  दिया | तभी उसकी सहेली ''मुरलिका '' का फ़ोन आया उससे पहले तो दोनों हाय -हेलो हुई फिर दोनों अपनी अतरंग बातों  में मशगूल हो गयी |

पंखुरी ने मुरलिका से बहुत बाते की पर उसका केंद्रबिंदु तो अभिलाष थे,  बहार से आवाज़ आयी दीदी साहब आ गए हैं वो लगभग भागती  हुई सी आयी उसको आता देखकर अभिलाष बोले देखो पंखुरी अपना सरप्राइज वो ''धक् ''  गयी पापा !!! आप और वो अपने पापा की बाहों में झूल गयी कदाचित किसी अल्हड की तरह :}

चलते चलते = करीब आना भी चाहुँ तो
                     आना नहीं होगा
                     दूर जाना भी चाहुँ तो
                     जाना नहीं होगा
                      ये वो रिश्ता है
                      जिसे आज़माना भी चाहुँ  तो
                      आज़माना नहीं होगा
                      यह तो सिलसिला है
                      तेरे मेरे प्यार का
                       जिसे ठुकराना भी चाहुँ
                       तो ठुकराना नहीं होगा || 

With friendship this rose is sent your way, I'm hope you have a wonderful day!  Images








hello