
''आर्या''
आर्या बालकनी में खड़ी थी, आती हुई गुलाब की खुशबू आर्या को बीते कल की गलियों में ले गयी ।उस दिन आर्या ने अपनी पसंद का बिलकुल खिलते गुलाब के रंग का ड्रेस पहना था, तब आर्या सिर्फ अपने में ही गुम रहती थी ।सुंदर -सुंदर कपडे पहनना और ''बाळ पुस्तको '' में खोये रहना बस यही उसकी जिंदगी थी ।'माँ ' तभी बहार से आती रोहित की आवाज़ ने मानो आर्या को मीठी नींद से जगा दिया हो, पूरा साहस इकठ्ठा करके आर्या बोली 'हाँ बेटा m here' रोहित चट से आकर माँ से लिपट गया और बोला 'love you mom, you are great mom in the whole world' 'o मेरा बच्चा '
तभी घनघनाती मोबाइल फ़ोन की घंटी बज उठी,आर्या ने देखा तो फ़ोन उसकी माँ का था।'हाँ माँ कैसी हो' ? '' में तो ठीक हु '' '' तू अपनी सुना '' '' सुना है रोहित बोर्डिंग से घर आया हुआ है ''।'हाँ माँ', तो ''रोहित को लेकर यहाँ क्यूँ नहीं आ जाती '' 'नहीं माँ अभी तो आना संभव नहीं हो पायेगा ,रोहित के पापा ने हिल स्टेशन का प्रोग्राम बना लिया है ' '' ठीक है ,तो आ जाती रोहित को लेकर तो मुझे और तेरे पापा को अच्छा लगता, चल बच्चे खुश रहे तो उसी में ही बड़ो की ख़ुशी है ,अपना, रोहित का और दामादजी का धयान रखना ...रखती हु ''
रोहित तब तक बहार खेले जा चूका था । आर्या अपने बालो को कंघी करने के लिए 'ड्रेसिंग टेबल' पर आई, और बालो को काढते -काढते फिर से अपनी दुनिया में खो गयी ......उस दिन अपनी गुलाब के रंग की ड्रेस पहन कर आर्य जैसे ही बहार हॉल में आई उसे मनु और उसका भाई अभिनव दीखाई दिया , अभिनव गहरे नीले रंग के कोट में किसी फ़िल्मी हीरो से कम नहीं लग रहा था, जहाँ आर्या अभिनव को देख कर मन्त्र मुग्ध हो गयी थी , वहीँ अभिनव भी आर्या को देख कर अपना सब कुछ भूल बैठा था ।
मनु आर्या की बचपन की सहेली थी, अभिनव ने मनु से कहा की मैं 'चलता हु' तो मनु बोली भैया बस पाच मिनट में मैं भी चलती हु । और उन पाच मिनटों में मनु ने आर्या से क्या कहा , आर्या को कुछ भी याद नहीं !!
मानस के घर आने का टाइम हो गया था , तभी पोर्च में कार के रुकने की आवाज़ सुनाई दी ।मानस ने घर में घुसते ही आर्या से पूछा पैकिंग हो गयी? बस अभी डिनर के बाद करती हु, ज्यादा टाइम नहीं लगेगा ।
अगले दिन रात को आर्य अपनी फॅमिली के साथ हिमाचल के हिल स्टेशन पर थी ।जब आर्या अपने पति और बच्चे के साथ होटल के रूम में जा रही थी, तो वहीँ कोरिडोर में अभिनव से सामना हो गया ! आर्या स्तब्ध सी रह गयी , नज़रें झुक कर या यु कहिये की चुप कर अपने रूम में पहुची ।आर्या को लगा की अभिनव भी उससे बचना चाहते हैं।अभिनव के साथ उसकी वाइफ रूही भी थी , दोनों की जोड़ी बहुत अच्छी लग रही है ,आर्या ने सोचा ।
मानस के घर आने का टाइम हो गया था , तभी पोर्च में कार के रुकने की आवाज़ सुनाई दी ।मानस ने घर में घुसते ही आर्या से पूछा पैकिंग हो गयी? बस अभी डिनर के बाद करती हु, ज्यादा टाइम नहीं लगेगा ।
अगले दिन रात को आर्य अपनी फॅमिली के साथ हिमाचल के हिल स्टेशन पर थी ।जब आर्या अपने पति और बच्चे के साथ होटल के रूम में जा रही थी, तो वहीँ कोरिडोर में अभिनव से सामना हो गया ! आर्या स्तब्ध सी रह गयी , नज़रें झुक कर या यु कहिये की चुप कर अपने रूम में पहुची ।आर्या को लगा की अभिनव भी उससे बचना चाहते हैं।अभिनव के साथ उसकी वाइफ रूही भी थी , दोनों की जोड़ी बहुत अच्छी लग रही है ,आर्या ने सोचा ।
आर्या को घुमने का ज़बरदस्त शौक है ,मानस तो एक बैंच पर बैठ गए की तुम लोग घूम लो ! रोहित वहीँ के विडियो पार्लर में चला गया, अब तीन - चार घंटे को तो उसे कोई होश नहीं रहेगा । आर्या अकेले ही आगे बढ़ने लगी , थोडा आगे जाने पर उसे अभिनव दीखाई दिए ,रूही उनके साथ नहीं थी !अभिनव आर्या के पास ए और बोले ''कैसी हो''? आर्या के मुह से कोई भी बोल नहीं फुटा तो अभिनव स्वयम ही बोलते चले गए और आर्या से पूछ बैठे ''तुमने मेरा इंतज़ार क्यूँ नहीं किया'' उत्तर में आर्या की रुलाई फुट गयी ।और बस इतना ही बोल पाई की हम दोनों के लिए यही ठीक था ,और भरे कदमो से मानस के पास लौट चली आर्या ।
चलते -चलते में कुछ मशहूर पंक्तियाँ
चलते -चलते =
With this passing year,
lose the pains and keep the memories.
May you always shower a smiling face,
in years to come.
I wish you a very Happy New Year.2013
