
''विशाल''
छत्त पर खड़ी निर्मला ने सामने फैले हुएय विशाल जंगल को देखा, उनके पति फोरेस्ट ऑफिसर हैं । निर्मला नागपुर के जंगलो में रहती है , वहां बारहों महीने जीरों डीग्री तापमान रहता है , सूरज कभी दिखाई नही देता ,क्युकी जंगल बेहद घना है । निर्मला यहाँ अकेले ही रहते है , उसके दोनों बच्चे सौरभ और गौरव दिल्ली के एक हॉस्टल में रहते हैं ,दोनों अभी छोटी क्लास में पढते हैं । आज सुबह से ही निर्मला को उन दोनों की बहुत याद आ रही थी कारण था की , आज सौरभ का बर्थडे था ।
तभी विशाल की म्रदु आवाज़ आई ''निर्मला'' निर्मला की तन्द्रा भंग हुई, वह यथार्थ में लौट आई । धीरे -धीरे थके कदमो से निर्मला नीचे आई , देखा आज विशाल अपने नीले सूट में बेहद खुबसूरत लग रहे थे , कुछ पालो के लिए तो निर्मला मानो सब कुछ ही भूल गयी थी । विशाल निर्मला के मन के भावो को समझ रहे थे , उन्होने आगे बढ़ कर निर्मला को अपने हिरदय से लगा लिया ।
विशाल शहर से एक बेहद खुबसूरत ''गिटार की शेप'' केक बनवा कर लाये थे , दोनों ने मिलकर केक काटा दोनों की आंखे ख़ुशी के आंसुओ से भरी हुई थी । तभी बहार से विशाल की आवाज़ आई मोम -डैड .......!! और निर्मला की नींद खुल गयी ।
चलते- चलते = भीगी- भीगी सी अलसाई सुबह ने जैसे कानो में कुछ कहा
हवा का झोंका आया और मेरे केशो को उड़ाकर मुख पर डाला
ऐसे की जैसे लहराता सा आँचल हो उठकर झरोखे से नज़र डाली जो
उस पार पारिजात के पुष्पों की सुगंध ने आ घेरा, होले से जो दर्पण निहारा
तो स्तब्ध रह गयी ,उनका चेहरा जो नज़र आ गया वही भोला सा मासूम.....
कई सवालों को लिए अपनी निसंदेह पवित्र मुस्कान के साथ जो मेरी औरा को
तृप्त कर रहा था .......और ये सपना ही था .................!
