COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): June 2011

Saturday, June 18, 2011

mano ya na mano (aapkey anmol pal) GAURI+RAJAT(2)



dancing scraps

                                                              ''गौरी+रजत''
                                                                   
अभी तक आपने पढ़ा गौरी और रजत साथ में पढते थे अब उससे आगे .....................
रजत गौरी के घर गया देखा,गौरी अपनी गुडिया से खेल रही है |रजत ने गौरी से कहा की मुझे भी अपने साथ खेलने दे ना,और फिर दोनों उस गुडिया के साथ खेलने लगे| 
                          teddy bear scraps for orkut
ऐसे ही खेलते-खेलते कब वो दोनों बडे हो गए पता ही नहीं चला,दोनों के परिवार गाव से निकल कर शहर चले गए |और वहां भी उनके घर पास- पास ही थे,रजत और गौरी दोनों ही पांच साल के अथक परिश्रम से डॉक्टर बन चुके थे|अब तक दोनों के बीच कभी भी कोई ऐसी बात नहीं हुई थी,की जिससे उन दोनों को ये पता चलता की उनके बीच कुछ है |दोनों के लिए ही शादी के रिश्ते आ रहे थे,पर दोनों ही हर रिश्ते को रिजेक्ट कर देते थे |

उन दोनों के परेंट्स ने भी कभी ये नहीं सोचा की,हम अपनी इस दोस्ती को रिश्तेदारी में बदल दे |क्युकी रजत की माँ को घरेलु लड़की चाहिए थी,इसी तरह सात साल निकल गए|एक बार गौरी रजत से मिलने उनके घर गयी,रजत की माँ ने कहा की वो अपने कमरे में हैं|गौरी रजत के कमरे में गयी,वो अपने कमरे में नहीं थे|गौरी वही उनके कमरे में ही बैठ कर उनका इंतज़ार करने लगी,सामने नीले रंग की डायरी रखी थी,गौरी ने उठा कर देखा तो ................!!!doll scraps

उसके बाद गौरी ने उसी  डायरी में अपनी भी दिल की बात लिख दी,और फिर दोनों सात फेरो में बंध गए |आज उनके बच्चो की भी शादी हो चुकी है,दोनों को थैंक्स अनमोल पल में आने के लिए !!       

चलते -चलते =प्रसिद्ध पंक्तिया 
                   
                       इतना ऐतबार रखना खुदा के लिए 
                       मेरी सारी वफाये हैं तेरे लिए 
                       जब तक खुदा ने ये जिंदगी बनायीं है 
                       मै जियूँगा तो सिर्फ तेरे लिए ||

                                                                    हर शाम कह जाती है एक कहानी
                                                                     हर सुबह ले आती है एक नई कहानी 
                                                                      रास्ते तो बदलते हैं हर दिन लेकिन 
                                                                      मंजिल रह जाती है वही पुरानी ||

rain scraps

Wednesday, June 15, 2011

mano ya na mano (aapkey anmol pal) GAURI+RAJAT(1)


doll scraps

                                                             ''गौरी+रजत''
1958u.p का एक छोटा से गाओ(village) गौरी और रजत घर से अकेले ही स्कूल के लिए निकले थे,अभी वो दोनों पहली कक्षा में ही थे,घर की गली से बहार निकलते ही,दोनों ने एक दुसरे का हाथ पकड़ लिया|आजकल गौरी की अम्मा और रजत की माँ दोनों में बोलचाल बंद है,इस कारण गौरी और रजत को भी अलग रहना पड़ रहा है |

दोनों एक ही क्लास में पढते हैं और एक साथ ही बैठते हैं|आधी- छुट्टी (lunch time)में दोनों स्कूल के विशाल बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गए,गौरी ने रजत से कहा की हम घर में एक साथ कब खेलेंगे,रजत ने कहा पता नहीं पर हम यहाँ तो एक साथ खेलते हैं ना,गौरी ने अपनी नीली- नीली आँखों से रजत को देखा और अपनी काली-काली बड़ी -बड़ी पलके झपका दी |फिर रजत ने गौरी से कहा की माँ आज पंजीरी(मिठाई)बनायगी मै तेरे लिए छत्त पर लेकर आऊंगा,तू आएगी ना ??गौरी ने हाँ मै सर हिला दिया,इतने मे घंटी बज गयी,दोनों क्लास की तरफ चले गए|स्कूल की छुट्टी होने पर दोनों साथ -साथ हाथ पकडे आये घर की गली आते ही दोनों अलग हो गए|                                doll scraps

घर पहुचते ही रजत ने अपना स्कूल बैग खूंटी पर टांगा और झट से डिब्बा खोल के, अपने पसीने से भीगे हाथो मे दो पंजीरी निकाली और छत्त पर लेकर भाग गया|उसे ज्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा,उसे जीने में आती गौरी के पायल की रुनझुन सुनाई दी,आसमानी रंग की लहंगा-चोली में गौरी जैसे मक्खन में चुटकी भर सिन्दूर मिला दिया हो किसी सोनी -जागनी गुडिया से कम नहीं लग रही थी|
rose scraps
रजत ने हाथ बढ़ा कर पसीने से भीगी गीली पंजीरी गौरी के सामने कर दी,गौरी ने कहा देख में भी तेरे लिए कुछ लायी हूँ,और उसने अपनी आसमानी रंग की सितारों जड़ी चुनरी खोली उसमे ढेर सारे छोटे-छोटे बेर और कच्ची इमली थी,रजत ने कहा की मुझे ये अच्छी नहीं लगती तू ही खा,इतना सुनते ही गौरी ने कहा ले वापस अपनी पंजीरी मुझे नहीं खानी,और अपनी बेर और इमली से भरी चुनरी छत्त पर ही फैक कर सीढियों से दौड़ती हुई नीचे चली गयी |रजत ने सारे बेर और इमली समेट कर वापस उसकी चुनरी में  इक्कठा करके बाँध कर वही रख दीये

अपने कमरे में आकर रजत लेट गया और सो गया,माँ ने आकर देखा तो रजत तेज़ बुखार में तप रहा था|रजत की माँ ने सोचा की जिज्जी(गौरी की अम्मा)कितना अच्छा ''श्याम तुलसी का काढ़ा'' बनाती हैं,बुखार चट से उतर जाता है,पर मै उनके यहाँ जाऊ कैसे ??तभी याद आया की डाकिया जिज्जी की चिट्ठी उनके यहाँ दे गया है रजत की माँ ने जल्दी से चिट्ठी उठाई और जिज्जी के घर चल दी|बहार से ही जिज्जी-जिज्जी की आवाज़ लगा दी गौरी की अम्मा ने बहार आते हुएय कहा,की छोटी क्या बात है??कुछ नहीं जिज्जी तुम्हारी चिट्ठी हमारे यहाँ आ गयी थी,लो चिट्ठी गौरी की अम्मा के सामने चिट्ठी बढ़ाते हुएय कहा,गौरी की अम्मा ने सोचा की पढ़ना तो इस पूरे गाव मे सिर्फ छोटी को ही आता है,स्कूल के मास्टरजी भी पास के गाव से पढ़ाने आते हैं,पर मे छोटी से चिठी पढने को कहू कैसे,फिर बात बदलते हुएय बोली की छोटी जरा पढ़ कर तो देख अम्मा की तबियत तो ठीक तो है ना??हाँ जिज्जी लाओ अभी पढ़ देती हूँ,पूरी चिट्ठी पढ़ कर सुना दी|फिर गौरी की अम्मा ने कहा की इतनी दिनों बाद आई हो कुछ देर बैठ कर जाना,नहीं जिज्जी रजत बुखार मे तप रहा है मुझे जाना है,अरे ऐसे कैसे मे भी काढ़ा बनाकर तुम्हारे साथ चलती हूँ |

काढ़ा पीने के दो घंटे बाद ही रजत का बुखार उतर गया|तभी बहार से बच्चो की टोली ने आवाज़ लगायी रजत चल गुल्ली-डंडा खेलने रजत ने बेमन से अपना गुल्ली- डंडा(indian game ) उठाया और बहार की तरफ चल दिया|पहली बारी(chance)रजत की थी और ये क्या!गिल्ली पांच कदम की दुरी पर ही गिर गयी,रजत ने डंडा वही फैक दिया और अपने पैरो में सर रख कर रोने लगा|सबने समझा रोज़ तीनसो डंडो की नपाई करता है आज पांच कदम की दुरी पर गिल्ली गयी है तो रो रहा है,विकी ने कहा रजत कोई बात नहीं तू मेरी बारी ले ले |रजत वापस अपने घर आ गया |           क्रमश:
                       
@चलते- चलते में मशहूर पंक्तिया
                                                 अरबो की गिनती तो मुझे आती नहीं
                                                 पर एक दिल का ख्याल आपसे कह दूं
                                                 पानी की हर एक बूँद ख़ुशी बन जाए जो
                                                 आपके नाम सारा समुन्दर कर दूं ||  
                                                                                                     
                                                            काश दिल की आवाज़ का इतना असर हो जाए
                                                            हम उन्हे याद करे और उन्हे खबर हो जाए ||   

                      scraps              

Tuesday, June 14, 2011

mano ya na mano (aapkey anmol pal) ''VEENA''


Friendship Flower Comments




 



























  
                                                                     ''वीणा''                

                                                           

यह बात 1975 की है,वीणा एक महानगर में रहती थी|तब वह सात,आठ साल की रही होंगी,उनके साथ खेलने के लिए कोई नहीं था |उनके मम्मी,पापा दोनों जॉब करते थे,स्कूल से आने के बाद वो बहुत बोर होती थी|जल्दी ही वीणा के समर विकेशन स्टार्ट हो गए ,अब तो सारा दिन घर पर ही बिताना था|उन दिनों ''holiday home work'' nahi मिलते थे|

अब तो उन्होने एक ही गेम अपना लिया की, वो बालकनी में खड़ी हो जाती और आती जाती कार के नंबर देखती उनको एक कॉपी में नोट करती,धीरे -धीरे उनको इस खेल में बहुत मज़ा आने लगा|उनके परेंट्स सुबह सात बजे घर से निकलते, और रात को नौ बजे तक घर आते थे|


वीणा जब दिन में सो जाती थी,तो रात को देर तक बालकनी में रहती थी|और फिर अपना वही, कार का नंबर नोट करने वाला गेम खेलती रहती थी|वो महानगर पूरी रात चलता था,एक बार उनके सामने के घर के लोग कही गए थे,और उनके घर के सामने एक कार रुकी उसमे से कुछ लोग उतरे,और उनके घर में जाकर उनका कीमती सामन उठा कर ले गए|

वीणा ये सब देख रही थी,उन्होने उस कार का नंबर नोट कर लिया|अगले दिन उनके घर के सामने रहने वाले लोग वापस आ गए,वीणा उनका नाम नहीं जानती थी|उस दिन सन्डे था वीणा के मम्मी,पापा घर पर ही थे,उस घर में बहुत bheed देख कर वीणा के पापा वहा गए,और साथ में वीणा को भी ले गए|तब रास्ते में चलते-चलते वीणा ने पापा को अपना नंबर नोट करने वाले गेम के बारे में बताया|

वहा जाकर उनको पता चला की कोई कार में आया था,और सारा कीमती सामान ले गया,और उसके साथ ही उनके कीमती कागज़ भी चले गए,जो उनके लिए गहनों से भी ज्यादा कीमती थे|तब वीणा के पापा ने बताया की वीणा ने उस कार का नंबर नोट किया है,उस नंबर को ढूंडा गया,जल्द ही वो नंबर मिल गया|और उन पडोसी दास बाबु के कीमती कागज़ भी मिल गए |वीणा को बहुत वाह-वाही मिली,उनके इस गेम ने किसी को ढेर सी खुशिया दे दी |

@चलते-चलते में हम सब की जानी-पहचानी पंक्तिया 
      
                                                      यूँ तो बहुत कुछ है मेरे पास
                                                       फिर भी कुछ कमी सी है 
                                                       घिरा हूँ,चारो तरफ से मुस्कराते चेहरों से 
                                                       फिर भी जिंदगी में उजाले भरने वाली 
                                                       उस मुस्कराहट की कमी सी है 
                                                        
                                                        दिख रही है पहचान अपनी तरफ उठती 
                                                        हर नज़र में, फिर भी दिल को छु लेने वाली 
                                                        उस निगाह की कमी सी है 
                                                        गूंजता है हर दिन,नए किस्सों और कोलाहल
                                                        और ठहाको से, फिर भी कानो में गुनगुनाती 
                                                        उस ख़ामोशी की कमी सी है 
                                                        बढ़ रहे हैं,मेरे कदम पाने को नई मंजिले 
                                                        फिर भी इन हाथो से छूट चुके 
                                                        उन नरम हाथों की कमी सी है ||       
                                                         

Friendship Flower Scraps

Monday, June 6, 2011

mano ya na mano(aapkey anmol pal)meenakshi


Summer Codes
                                                     
                                                                ''मिनाक्षी'' 

मिनाक्षी की शादी हुएय तीन साल बीत गया थे ,इन तीन सालो  में उसने अपने मम्मी-पापा को जब भी देखा,उसे वो शादी के पहले से बहुत अलग लगते थे | उसने देखा था की जैसे उनकी जिंदगी के रंग ही खो गए हो,मम्मी,पापा अपना बिलकुल भी ख्याल नहीं रखते थे |मिनाक्षी को यह देख कर बहुत दुःख होता था |

मिनाक्षी के ससुराल में सब अपने आपको बहुत मेंटेन रखते थे,उसके मम्मी,पापा कभी उससे मिलने उसकी ससुराल में नहीं आते थे|हमेशा वही अपने घर आती थी,जब भी उसे अपने परेंट्स की याद आती थी|जब भी वो अपने घर आती, बस अपने मम्मी ,पापा में लग जाती थी|

मम्मी,पापा के hair कलर करना,उनका ब्लीच,facial करना उसके परेंट्स बहुत मना करते की अब तो बस हमारी ''इश्वर स्मरण'' की उम्र है|पर वो नहीं सुनती थी|पर जब वो चली जाती सब पहले जैसा हो जाता,इस बीच मिनाक्षी प्यारे से ''निषद'' की माँ बन गयी थी|

अब वो भी अपने घर आने के बाद,अपने परेंट्स का पहले जैसा धयान नहीं रख पाती थी |इस बार जब वो निषद के साथ पूरे छ: महीनो के लिए रहने आई थी|निषद के पापा अपूर्व कंट्री साइड गए थे,मिनाक्षी ने अपना धयान रखना छोड़ दिया था|वह ना तो अच्छे से ड्रेसअप होती थी,ना ही कोई मकेअप करती थी|
दो तीन दिन तो उसके परेंट्स ने कुछ नहीं कहा,पर जब ज्यादा दिन हो गए तो,उन्होने टोकना शुरू कर दिया|पर मिनाक्षी सब अनसुना कर देती,एक दिन जब उसके परेंट्स ने उसको बहुत कहा की अपना धयान रखा करो,तो वो पहली बार अपने परेंट्स के सामने बोली,की मम्मी अब मेरी भी जिंदगी निषद के आने के बाद ख़तम हो गयी है|तब उसके परेंट्स ने समझाया की नहीं अभी तो तुम्हारी शुरुआत है|

तब मिनाक्षी ने कहा की मम्मी पापा जैसे आपको मुझे देख कर दुःख हो रहा है,same मुझे भी आपको देख कर दुःख होता है|''inlaws '' बनने के बाद जिंदगी ख़तम तो नहीं हो जाती|आप भी मुझसे free हो गए है,बस अपने आपको देखिये,आपको घुमने का बहुत शौक है,तो आप शाम को घुमने क्यों नहीं जाते |अगर आप पहले जैसे हो जायेंगे तो मै भी अपना धयान रखूंगी|फिर उसने आगे कहा की,आपने कभी ये सोचा है की मुझे आपको ऐसे देख कर कैसा लगता है |

मिनाक्षी के परेंट्स उसकी ये बात सुन कर वहां से चले गए,और आज पूरे तीन साल बाद मिनाक्षी के मम्मी पापा ने अपनी wardrobe खोली थी,मिनाक्षी के पापा ने अपने सूट पर बडे प्यार से हाथ फेरा,उसकी मम्मी ने अपनी सबसे अच्छी साडी को हंगेर समेत अपने से चिपका लिया|फिर दोनों बहुत अच्छे से तैयार होकर बहार आये तो मिनाक्षी भी निषद के साथ ऐसे ही तैयार थी, मानों अभी किसी पार्टी मै जाना हो|

जैसे माता- पिता अपने बच्चो को हमेशा खुश देखना चाहते हैं,ऐसे ही बच्चे भी परेंट्स को बिलकुल young देखना चाहते हैं|हम पढे -लिखे लोगो की एक ही विडंबना है, की हम हर वक़्त उम्र को देखते हैं|जो लोग अपनी उम्र को नहीं जानते की उनकी बर्थडे कब होती है ,उनको देखिये वो हमेशा जवान रहते हैं |आप अपने आस -पास देखिएगा जरुर, आपको ऐसे लोग जरुर देखाई देंगे जहाँ उम्र भी उनसे हार गयी है| please take care..!!  

चलते-चलते मे कुछ प्रचलित पंक्तिया 

उदास लम्हों की ना कोई याद रखना 
तूफ़ान मे भी वजूद अपना सँभाल कर रखना 
किसी की जिंदगी की ख़ुशी हो तुम 
यही सोच कर तुम,अपना ख्याल रखना ||
                                                              एक दिन इस दुनिया से चले जायेंगे 
                                                              और हजारो तारो मे आपको नज़र आयेंगे 
                                                              आप कोई खवाहिश मांगना 
                                                              और हम उसे पूरा करने के लिए  
                                                              उसी वक़्त टूट जायेंगे ||
                                                                Summer Comments      
  

Wednesday, June 1, 2011

mano ya na mano (aapkey anmol pal)KAARTIK

 
                                                                  ''kaartik'' 
कल कार्तिक के 10th class के रिजल्ट निकलने वाले हैं,उसने आज लग -भग शहर के सभी मंदिरों में मत्था टेका था|और सब ''भगवान्'' से एक ही बात कही थी,की मुझे ''merit'' में नंबर वन मिले |कार्तिक में नंबर वन का एक अलग सा ही जूनून है,वह हर जगह नंबर वन ही चाहता है |

अगले दिन रिजल्ट नेट पर देखा,उसकी नंबर वन की प्रति जो उसका जूनून था,वह पूरा हुआ था|और इसी के साथ यह जूनून और भी बढ़ गया|सबसे पहले मम्मी,पापा को वही विश करता,मार्केट में उसके लिए ही सबसे पहले चीज ली जाती|कभी -कभी कार्तिक के मम्मी पापा उसका यह जूनून देख कर डर जाते थे|

और इसी तरह उसने 11th class पास करके 12th में admission ले लिया,इस बार कपिल ने उसकी क्लास में न्यू admission लिया था,और जल्द ही कार्तिक को पता चल गया,की मुकाबला टक्कर का है|अब तो कार्तिक सब कुछ भूल कर केवल पढाई में खो गए|

और आज उसका बोर्ड का लास्ट पेपर था,अब तो बस कार्तिक को रिजल्ट निकलने का इंतज़ार था |और वह दिन भी आ गया,सुबह से ही नेट पर बैठ गया था,और ज्यूँ ही उसने रिजल्ट देखा ..................|वह मेरीट लिस्ट में सबसे लास्ट नंबर पर था ...........|

उसके दिल में जो आया उसे मै यहाँ नहीं लिख सकती |मगर कार्तिक के मम्मी -पापा को उसको संभालना बहुत ही मुश्किल हो गया|कॉलेज इम्तिहान मे अगर आप थोडा पीछे हो जाते हैं,तो कोई बात नहीं जिंदगी तो कदम -कदम पर इम्तिहान लेती है,उसमे पास होना बेहद जरुरी होती है| ''शरीर वर्चस्व है''take care.                
                                                                                                                                               
@चलते-चलते=मे कुछ मशहूर पंक्तिया 
                       
                        हर नमी मे कुछ तो कमी रहेगी 
                        आंखे थोड़ी शबनमी तो रहेंगी 
                        जिंदगी को आप जितना भी संवारिये 
                        कोई ना कोई कमी तो रहेगी ||                                                               
                                                                                                
   Rose images, rose scraps, rose day wishes for Orkut, Myspace

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