
''गौरी+रजत''
अभी तक आपने पढ़ा गौरी और रजत साथ में पढते थे अब उससे आगे .....................
रजत गौरी के घर गया देखा,गौरी अपनी गुडिया से खेल रही है |रजत ने गौरी से कहा की मुझे भी अपने साथ खेलने दे ना,और फिर दोनों उस गुडिया के साथ खेलने लगे|

ऐसे ही खेलते-खेलते कब वो दोनों बडे हो गए पता ही नहीं चला,दोनों के परिवार गाव से निकल कर शहर चले गए |और वहां भी उनके घर पास- पास ही थे,रजत और गौरी दोनों ही पांच साल के अथक परिश्रम से डॉक्टर बन चुके थे|अब तक दोनों के बीच कभी भी कोई ऐसी बात नहीं हुई थी,की जिससे उन दोनों को ये पता चलता की उनके बीच कुछ है |दोनों के लिए ही शादी के रिश्ते आ रहे थे,पर दोनों ही हर रिश्ते को रिजेक्ट कर देते थे |
उन दोनों के परेंट्स ने भी कभी ये नहीं सोचा की,हम अपनी इस दोस्ती को रिश्तेदारी में बदल दे |क्युकी रजत की माँ को घरेलु लड़की चाहिए थी,इसी तरह सात साल निकल गए|एक बार गौरी रजत से मिलने उनके घर गयी,रजत की माँ ने कहा की वो अपने कमरे में हैं|गौरी रजत के कमरे में गयी,वो अपने कमरे में नहीं थे|गौरी वही उनके कमरे में ही बैठ कर उनका इंतज़ार करने लगी,सामने नीले रंग की डायरी रखी थी,गौरी ने उठा कर देखा तो ................!!!

उसके बाद गौरी ने उसी डायरी में अपनी भी दिल की बात लिख दी,और फिर दोनों सात फेरो में बंध गए |आज उनके बच्चो की भी शादी हो चुकी है,दोनों को थैंक्स अनमोल पल में आने के लिए !!
चलते -चलते =प्रसिद्ध पंक्तिया
इतना ऐतबार रखना खुदा के लिए
मेरी सारी वफाये हैं तेरे लिए
जब तक खुदा ने ये जिंदगी बनायीं है
मै जियूँगा तो सिर्फ तेरे लिए ||
हर शाम कह जाती है एक कहानी
हर सुबह ले आती है एक नई कहानी
रास्ते तो बदलते हैं हर दिन लेकिन
मंजिल रह जाती है वही पुरानी ||








