COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): '' मृगनयनी '' (third episode )
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Monday, November 28, 2016


Rain image 2 Images

                                     '' मृगनयनी '' (third episode )                      अभी तक आपने पढ़ा की मृगनयनी पुजारी जी की दी हुई वस्तु को साथ लेकर आगे बढ़ती चली गयी। .... अब उससे आगे। ...... कई किलोमीटर  का फासला तय करके वह एक खुले  नीले आसमान के नीचे थी । ऊपर शरद पूर्णिमा के चन्द्रमा की छिटकती चांदनी और उस पर अमृत बरसाता हुआ आसमान अद्धभुत !ऐसा नज़ारा उसने अपने छोटे से जीवन में पहली बार देखा था ।           

अब उसको पहली बार ठण्ड का अहसास हुआ , और उसको इतनी ठण्ड का आभास हुआ की वह काँप गयी उसके goose bumps खड़े हो गए , उसके मन में गर्म पोशाक की चाहना प्रकट हुई.,अचानक उसके हाथ की पोटली में कुछ हलचल हुई उसने खोल के देखा तो उसके नाप के बेहद ख़ूबसूरत गर्म वस्त्र थे उसने वो वस्त्र पहन लिए और आगे बढ़ने लगी ।  

आगे जाने  पे उसे एक सफ़ेद रंग की चाँदी  की चमकती हुई झोपड़ी दिखायी दी उसने पहले तो दरवाज़े पे नॉक किया जब कोई उत्तर नहीं मिला तो वह दरवाज़ा ठेल कर अंदर आ गयी आग पे केतली में चाय बन रही थी , एक बेड  पे करीने से बिस्तर लगा था ,पास में ही एक टेबल व एक चेयर पड़ी हुई थी अंदर ऊर्जा होने के कारण काफी गर्म था , एक जगह बर्तनो को करीने से लगाया हुआ था  उसने उफनती चाय को कप में डाला और बेड  पे जाकर गहरी नींद  में सो गयी , काफी वक़्त गुजर जाने पे बहार पदचाप सुनाई देने लगे , वह कुनमुनाई। ..... 
क्रमश:
चलते- चलते =  ये ज़िन्दगी जो मुझे कर्ज़दार करती रही 
                         कभी अकेले में मिले तो हिसाब करूँ।,,,,,,,,,,,
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