
निदा ने ड्रेसिंग टेबल रखे हुए स्टूल पे बैठ कर ओवी के नाम का का सिन्दूर अपनी बीच की निकली हुई लम्बी सी मांग में भर लिया दप - दप करता हुआ सिन्दूर उसके दूध जैसे गोरे मुखड़े पे क़यामत ढा रहा था तभी बहार सड़क पर किसी वेहिकल में ज़ोर का गाना बजता हुआ निकला , '' अब तेरे बिन हम जी नहीं सकते, तुम नहीं आते तो हम ... '' अपने ज़माने का काफी मशहूर गाना हुआ करता था |
मौसम बदले , दिन बदले , कई शताब्दियों ने करवट बदली , नहीं बदले तो आप और हम यह बुदबुदाते हुए निदा ने अपनी लम्बी - लम्बी भरी हुई घनी पलकों को सोनी - जागनी गुड़िया की तरह झपकाया और पास पड़े स्टफ टॉय को अपने से चिपका कर उस पर अपनी साड़ी किचकिची निकल दी \
फेस बुक , का होम टटोलते हुए शायद वो किसी खास पोस्ट का इंतज़ार कर रही थी , और फिर अपनी मनमुताबिक पोस्ट के न मिल पाने की वजह से वो fed up हो गयी , और कुर्सी की पुश्त से सर लगा कर दोनों हाथो को अपने सिर पर बांध लिया और आँखे बंद करके वो , अपनी प्रीवियस लाइफ में चली गयी। ......
हौले - हौले से नींद ने निदा को अपने आगोश में ले लिया , उसने सपने में अपनी माँ को देखा जो उसको मनुहार करके कह रही हैं , की '' निदू '' मेरी प्यारी बिटिया गुनगुन गुंझिया खायेगी न ? और निदा चेतन अवस्था में लौट आयी और बोली हाँ माँ ! और ये कहते हुए उसने अपना बड़ा सा मुँह खोल दिया , और फिर जैसे ही उसको स्तिथि का भान हुआ , वो स्वयं पर ही शर्माकर हसने लगी |
तभी जीवा का फोन आ गया , जीवा उसकी कजिन , दोनों में किसी फेमस पॉपुलर टॉपिक को लेकर थोड़ा डिस्कशन हुआ , और फिर होते - होते पति , और फिर रोज़ के खाने में क्या बने , नाश्ते में क्या बने as वेल
मौसम बदले , दिन बदले , कई शताब्दियों ने करवट बदली , नहीं बदले तो आप और हम यह बुदबुदाते हुए निदा ने अपनी लम्बी - लम्बी भरी हुई घनी पलकों को सोनी - जागनी गुड़िया की तरह झपकाया और पास पड़े स्टफ टॉय को अपने से चिपका कर उस पर अपनी साड़ी किचकिची निकल दी \
फेस बुक , का होम टटोलते हुए शायद वो किसी खास पोस्ट का इंतज़ार कर रही थी , और फिर अपनी मनमुताबिक पोस्ट के न मिल पाने की वजह से वो fed up हो गयी , और कुर्सी की पुश्त से सर लगा कर दोनों हाथो को अपने सिर पर बांध लिया और आँखे बंद करके वो , अपनी प्रीवियस लाइफ में चली गयी। ......
हौले - हौले से नींद ने निदा को अपने आगोश में ले लिया , उसने सपने में अपनी माँ को देखा जो उसको मनुहार करके कह रही हैं , की '' निदू '' मेरी प्यारी बिटिया गुनगुन गुंझिया खायेगी न ? और निदा चेतन अवस्था में लौट आयी और बोली हाँ माँ ! और ये कहते हुए उसने अपना बड़ा सा मुँह खोल दिया , और फिर जैसे ही उसको स्तिथि का भान हुआ , वो स्वयं पर ही शर्माकर हसने लगी |
तभी जीवा का फोन आ गया , जीवा उसकी कजिन , दोनों में किसी फेमस पॉपुलर टॉपिक को लेकर थोड़ा डिस्कशन हुआ , और फिर होते - होते पति , और फिर रोज़ के खाने में क्या बने , नाश्ते में क्या बने as वेल
टिपिकल गृहणियों वाली बातें होते हुए , कब मिलना है ये फिक्स करते हुए दोनों ने अपनी बातों को पूर्णविराम दिया |
तभी ओवी ने वीडियो कॉल किया और दोनों पति - पत्नी में प्रेमी जोड़े की तरह कन्वर्सेशन हुआ , और जल्द ही वो देश लौट रहा है इस खुशखबरी के साथ दोनों ने फ्लाइंग किस देते हुए कॉल एन्ड की | और निदा को भूक का अहसास हुआ और वो किचन में जाकर अपना मनपसंद फ़ूड प्लेट में डालने लगी |
कहानी का अभी अंत नहीं हुआ है , ना जाने ऐसी ही कितनी निदाऔ की कहानी अभी बाकि है , एक नयी कहानी लेकर में जल्द ही आप सब से फिर मिलती हु , .......
चलते चलते = पल दो पल की ज़िंदगी कुछ यूँ
रहगुज़र हुई , की दोनों हाथों से वक़्त
रेत की भांति निकल गया ||
किसी का दोष नहीं किसी की खता नहीं
जुर्म भी अपना और सितमगर भी खुद ही ||
सागर से मोती मुट्ठी में भर कर
यूँ बिखराये मानो बहार आ गयी हो ||
