COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): Sindoor

Wednesday, March 21, 2018

Sindoor



A single pink rose next to jewels Images


निदा ने ड्रेसिंग टेबल  रखे हुए स्टूल पे  बैठ कर ओवी के नाम का का सिन्दूर अपनी बीच की निकली हुई लम्बी सी मांग में भर लिया दप - दप करता हुआ सिन्दूर उसके दूध जैसे गोरे मुखड़े पे क़यामत ढा रहा था   तभी बहार सड़क पर किसी वेहिकल में ज़ोर का गाना बजता हुआ निकला , '' अब तेरे बिन हम जी नहीं सकते, तुम नहीं आते तो हम ... '' अपने ज़माने का काफी मशहूर गाना हुआ करता था |

मौसम बदले , दिन बदले , कई शताब्दियों ने करवट बदली , नहीं बदले तो आप और हम यह बुदबुदाते हुए निदा ने अपनी लम्बी - लम्बी भरी हुई घनी पलकों को सोनी - जागनी गुड़िया की तरह झपकाया और पास पड़े स्टफ टॉय  को अपने से  चिपका कर  उस पर अपनी साड़ी किचकिची निकल दी \

फेस बुक , का होम टटोलते हुए शायद वो किसी खास पोस्ट का इंतज़ार कर रही थी , और फिर अपनी मनमुताबिक पोस्ट के न मिल पाने की वजह से वो fed  up  हो गयी , और कुर्सी की पुश्त से सर लगा कर दोनों हाथो को अपने सिर पर बांध लिया और आँखे बंद करके वो , अपनी प्रीवियस लाइफ में चली गयी। ......

हौले - हौले से नींद ने निदा को अपने आगोश में ले लिया , उसने सपने में अपनी माँ को देखा जो उसको मनुहार करके कह रही हैं , की '' निदू ''     मेरी  प्यारी बिटिया गुनगुन गुंझिया खायेगी न ? और निदा चेतन अवस्था में लौट आयी और बोली हाँ माँ ! और ये कहते हुए उसने अपना बड़ा सा मुँह खोल दिया , और फिर जैसे ही उसको स्तिथि का भान हुआ , वो स्वयं पर ही  शर्माकर हसने लगी |

तभी जीवा का फोन आ गया , जीवा उसकी कजिन , दोनों में किसी फेमस पॉपुलर टॉपिक को लेकर थोड़ा डिस्कशन हुआ , और फिर होते - होते पति , और फिर रोज़ के खाने में क्या बने , नाश्ते में क्या बने as वेल
टिपिकल   गृहणियों  वाली बातें होते हुए , कब मिलना है ये फिक्स करते हुए दोनों ने अपनी बातों को पूर्णविराम दिया | 

तभी ओवी ने वीडियो कॉल किया और दोनों पति - पत्नी में प्रेमी जोड़े की तरह कन्वर्सेशन  हुआ , और जल्द ही वो देश लौट रहा है इस खुशखबरी के साथ दोनों ने फ्लाइंग किस देते हुए कॉल एन्ड की | और  निदा को भूक का अहसास हुआ और वो किचन में जाकर अपना मनपसंद फ़ूड प्लेट में डालने लगी | 

कहानी का अभी अंत नहीं हुआ है , ना जाने ऐसी ही कितनी निदाऔ  की कहानी अभी बाकि है , एक नयी कहानी लेकर में जल्द ही आप सब से फिर मिलती हु , ....... 


 चलते चलते = पल दो पल की ज़िंदगी कुछ यूँ
                      रहगुज़र हुई , की दोनों  हाथों से वक़्त
                      रेत की भांति निकल गया ||
                     
                        किसी का दोष नहीं किसी की खता नहीं
                        जुर्म भी अपना और सितमगर भी खुद ही ||        
                     
                        सागर से मोती मुट्ठी में भर कर
                         यूँ बिखराये मानो  बहार आ गयी हो || 



Photo of a large pink rose Images
    

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