
''चेतन''
चेतन ने अपनी घडी में टाइम देखा सुबह के तीन बजे थे वह रूम से बहार निकलकर 'लोन' में आ गया वह ''पालनखेत'' इसीलिए आया था, की सुबह-सुबह मुह अँधेरे वह घुमने जायेगा | किसी का न कोई डर, न कोई चिंता, प्रकृति की छांव में अपनी दिलचस्प कहानियां लिखेगा | बहुत सारे प्लाट उसके दीमाग में थे, वो सोच रहा था, की देखो आज उसकी कलम किस टोपिक पर चलती है .........|
और आज उसकी कलम (वह लपटॉप में ड्राफ्ट सेव कर रहा था ) चली एक ''फेनटेसी नोवेल'' पर, उस नोवेल के हीरो का नाम था ''अलादीन'' अलादीन एक ''जादुई गुफा'' में फस जाता है, नीले और काले रंग की वह गुफा सोने,चाँदी और हीरे-जवाहरात के 'आभूषण' से जगमगा रही थी |चारो तरफ बर्फीला पानी टपक रहा था, पैदल जाने का रास्ता बंद था, अलादीन को समझ नहीं आ रहा था की ,वह आगे कैसे बढे |
अलादीन के पास बस एक तलवार थी | अलादीन को एक घास का गट्ठर दिखाई दिया, वो उस पर कूद कर पहाड़ पर लहराती बेल को पकड़ना चाहता था | अलादीन उस घास के गट्ठर पर कूदा मगर यह क्या ....! गट्ठर उपर उठ गया, अलादीन ने बेल को पकड़ लिया और उस बेल के सहारे वो पहाड़ तक पहुच गया |अब उसे दुसरे पहाड़ तक पहुचने के लिए जबरदस्त 'ट्रिक' लगनी पड़ी उसे ऐसे कूदना था की वो उसी पहाड़ के दुसरे छोर पर पहुच जाए | अलादीन अपनी सारी ताकत लगा कर अपना 'बैलेंस' आगे की तरफ करकर, पहाड़ी के दुसरे छोर पर कूद गया |धीरे-धीरे वह ढलान से नीचे उतरा तो सामने ''आदमखोर मछलियों'' से भरी एक छोटी से नदी थी | मछलियाँ आदमखोर हैं इसका पता अलादीन को ऐसे लगा की,'ज्यूँही उसने अपना पाव नदी में डाला मछलियों ने उसके पाव में दात से काट डाला'' |अलादीन ने देखा की वहां पर 'गोल्ड के पत्थर' पडे हैं अलादीन उनको उठा कर पानी में फकने लगा मगर वो चार ही पत्थर थे इसलिए, उसने इस स्टाइल में पत्थर फेके की चारों पत्थर समान दूरी पर गिरे | अब अलादीन उन पर कूद - कूद कर नदी के पार पहुच गया, तभी वहां 'चमकीली सफ़ेद' चांदनी बरसी और ........!इतने में ही चेतन की नींद टूट गयी ..........!!
चलते -चलते =बहुत हो चुकी है रात अब सो भी जाइये
खयालो में अपनों के खो भी जाइये
जो करते हैं प्यार बेइन्तहा आपको
एक बार सपनो में जाकर उनसे मिल तो आइये
