COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): May 2011

Tuesday, May 31, 2011

mano ya na mano (aapkey anmol pal)''NEHA''





                                                                ''नेहा'' 

राहुल collage कैंटीन में बैठा हुआ,नेहा का इंतज़ार कर रहा था |नेहा ने राहुल से कहा की तुम कैंटीन में बैठो मै बस दस मिनट में आती हूँ ,और ये बात बीते पूरे तीन घंटे हो चुके हैं ,पर नेहा अभी तक नहीं आई है | उसका का मोबाइल भी धीरज के पास है ,कह रहा था की एक message करना है और अभी तक नहीं दिया|मना कर नहीं सकते क्युकी उसे भी धीरज के मोबाईल की जरुरत पड़ती रहती है |राहुल कैंटीन से उठ कर bike स्टैंड की तरफ बढ़ गया |

रास्ते मे ही धीरज सिग्नल पर मिल गया,ले ......अपना सेल राहुल ने ले लिया धीरज ने अपनी bike आगे बढाते हुएय कहा की शाम को माल मे मिलते हैं,तीन टिकेट मैने ले लिए है ,ठीक टाइम पे नेहा को साथ लेकर पहुच जाना,और कह कर फुल स्पीड मे अपनी bike आगे बढ़ा ली |

राहुल ने शोर्ट कट से bike ले ली की,वही नेहा का घर पड़ेगा बहार से ही देखता हुआ चला जायेगा |उसकी स्कूटी खड़ी होगी तो नेहा घर पर है ,नहीं तो होगी रचना के साथ ,राहुल ने मन ही मन सोचा कितनी बार मना करा है की ,रचना के साथ मत रहा करो पर सुनती ही नहीं |

रचना राहुल को बेहद न पसंद है, क्युकी उसकी जिंदगी मे सिवाय पढने के और कुछ नहीं है जब देखो तब library 
मे बैठी रहती है,कोई भी इंजॉय नहीं करती,और नेहा भी उसके साथ रह कर उसके जैसी ही होती जा रही है|राहुल ने देखा की नेहा की स्कूटी खड़ी है ,उसकी अटकी सांसे फिर से चलने लगी आ गयी |

शाम को राहुल और धीरज दोनों माल टाइम से पहुच गए,पर नेहा नहीं आई फ़ोन पर जब राहुल की बात हुई थी तो कह रही थी, की टाइम से पहुच जाएगी ,पर आई ही नहीं|राहुल ने सोचा की जरुर रचना ने मना कर दिया होगा|  

राहुल ने नेहा का नंबर मिलाया पर वो फ़ोन पिक ही नहीं कर रही थी,राहुल का मन हुआ की सेल को यही फेक दे राहुल ने धीरज से कहा ....तू  देख ले मै जा रहा हूँ ,और कह कर अपनी favorite जगह जा कर बैठ गया|ये पार्क का सबसे शांत कोना है, यहाँ कोई नहीं आता वह यहाँ घंटो बैठ जाता है,जब भी नेहा उसके साथ ऐसा करती है |

राहुल ने सोचा की कल तो मिलेगी|अगले दिन भी जब राहुल को नेहा नहीं मिली तो,वह परेशान हो गया,ना ही नेहा मोबाइल पिक कर रही है |उसने नेहा के घर जाकर देखा, तो घर पर ताला लटक रहा था|इसी तरह कई दिन और फिर महीने और फिर पांच साल गुज़र गए|

इन पांच सालो मे कभी ऐसा नहीं हुआ की राहुल नेहा के घर ना गया हो| आज सुबह ही राहुल के पापा ने कहा था की तुम्हे ट्रेन से,इंदौर जाना है ये रहा तुम्हारा टिकेट और कुछ नहीं करना, बस इस एड्रेस पर चले जाना और दो -तीन दिन वही रुक कर चले आना|रागिनी बहुत अच्छी लड़की है ,तुम्हे बहुत पसंद आएगी,राहुल अब सारी बात समझ गया था|पर पापा से कुछ भी नहीं कह सकता था ,और मम्मी भी पापा की साइड ही थी |

शाम को राहुल ट्रेन मे था,अपनी बर्थ पर जा कर लेट गया |सामने की सीट खाली थी,तभी एक लड़की आकर वहां बैठ गयी |ना जाने क्यों उसे देख कर राहुल को नेहा की बहुत याद आ गयी,और उसमे झलक भी नेहा की बहुत मार रही थी |कुछ देर बाद वहा एक लड़का भी आकर बैठ गया,दोनों बाते करने लगे, उस लड़की की आवाज़ सुन कर राहुल दांग रह गया |बिलकुल नेहा की आवाज़ जैसी ,फिर राहुल की नज़र उस लड़की के हाथ पर गयी तो बिलकुल नेहा के हाथ जैसा निशान |बस ...ये तो नेहा ही है और ये कहा चली गयी थी ?और ये इसके साथ कौन है और क्या इसने सर्जरी करवा ली ??

राहुल ने सोचा की पूछे भी कैसे ,अभी वो ये सब सोच ही रहा था की वो दोनों एक स्टेशन पर उतर गए |और सारे सवाल ऐसे ही रह गए |:'(  @ चलते -चलते मे कुछ famous line          
              
 चलते -चलते=क्यू ना फिर उसी मोड़ से शुरू किया जाए 
                      जब हम तुम अजनबी थे ||
                       
                       दोस्ती अच्छी हो तो रंग लाती है
                       दोस्ती गहरी हो तो सबको भाती है 
                       दोस्ती नादाँ हो तो टूट जाती है 
                       पर दोस्ती अगर अपने जैसी हो तो 
                       ''इतिहास'' बनाती है ||  
                




Sunday, May 29, 2011

mano ya na mano (aapkey anmol pal)AISA BHI HOTA HAI



                                                        ''ऐसा भी होता है ''


की सुबह छ: बजे ही ''door बेल'' बजती है,घर के अंदर सब गहरी नींद में सोये हैं |रीना उठती है अंदर से ही पूछती है ,''कौन है'' बहार से एक आवाज़ आती है |''भाभी मैं'', रीना को समझ नहीं आया की ''मैं '' कौन जल्दी से गाउन के उपर ही चुन्नी डाल कर बहार जाकर देखा |

बाहर कोई जाना पहचाना सा चेहरा लगा ,वैसे भी नींद में तो कुछ भी समझ नहीं आता |''जी कहिये'' भाभी आपने मुझे पहचाना नहीं मै रवि ,हाँ आओ ना ,रीना ने  उसको drawing room में ले जाकर बैठा दिया | फिर  रवि  बोला भाभी ज़रा ''भैया'' को बुला दो|

रीना ने डरते -डरते सुधाकर को जगाया ,''सुनो कोई दूर के तुम्हारे जानपहचान के आये हैं''|सुधाकर को कोई नींद से जगाये मतलब उसकी ''शामत'' और आज लग गया ''रीना का नंबर''| बड़ी मुश्किल से सुधाकर ने जाकर देखा ,मूड ऑफ हो गया,वह इन सबसे दूर भागते हैं |

रीना को नहीं मालूम की उन दोनों की क्या बाते हो रही हैं ,रीना kitchen में गयी और चाय -नाश्ता लगाकर drawing room में ले गयी |सुधाकर चाय -नाश्ता देख कर वहां से उठ कर चले गए |

रीना ने रवि से पूछा की घर पर सब ठीक हैं ना?,नहीं मम्मी की तबियत बहुत ख़राब है,रवि ने कहा|रीना बहुत दु:खी हुई,फिर सुधाकर आये और उन्होने रीना को बताया की ''रुपयों'' के लिए कह रहा है |

रीना ने कहा की दे दो जिन्दगी का सवाल है ,सुधाकर बोले ठीक है ,तुम कह रही हो तो दे देता हूँ |सुधाकर ने रूपये दे दिए |और सुधाकर अपने ऑफिस चले गए ,अभी सुधाकर को रवि को रूपये दिए ज्यादा वक़्त नहीं हुआ था , की सुधाकर के सामने 'रवि  की मम्मी बिलकुल सही सलामत बैठी हैं' |और वो भी पैसे लेने आई हैं,रवि की 'शादी' के लिए|  

अब सोचिये की सुधाकर की क्या हालत हुई होगी ??सुधाकर बिलकुल स्तब्ध रह गए ,झट से उठे ,और ऑफिस की बैक साइड में जाकर रीना को फ़ोन लगाया |और सारी बात बताई की,कहीं रीना ज्यादा emotional हो कर अपने पास से भी रूपये ना दे दे |

रीना और सुधाकर को पैसे जाने का दुःख नहीं है,जितना की ऐसे 'लोगो' को देख कर हुआ, की पैसे के लिए लोग क्या -क्या करते हैं |''पैसा आराम से बैठे -बैठे मिले, उसके लिए ज़रा सी महनत ना करनी पड़ जाए'' काश कोई  ''beware'' का बोर्ड 'ऐसे लोगो' के लोगो के लिए के लिए भी होता |

@चलते -चलते में मशहूर पंक्तिया 

चलते -चलते =मिलती है अच्छी दोस्ती खुश नसीबो को 
                       मेरी किस्मत से जलना छोड़ दो 
                       अगर तमन्ना हो मेरे दोस्त से मिलने की 
                       तो बस अपनी नज़र आइने की तरफ मोड़ दो ||     

           

flower Orkut scraps  

Thursday, May 26, 2011

mano ya na mano(aapkey anmol pal) ''MAA''(STORY


Mothers Day Scraps, Comments and Glitters

                                                              ''माँ''

''माँ'' विकास बहार से ही कहता हुआ आया,स्कूल बैग एक तरफ फैक दिया और झट से माँ की कमर पर झूल गया|माँ ने चावल में से कंकड़ निकलते हुएय कहा ,की आज पापा से क्या लाने को कहना है |ओ मेरी अच्छी माँ ,वो जो सोनू के पास है, ना वो बड़ा सा खिलौना मुझे वही चाहिए|

विकास तो कह कर चला गया पर माँ ने सोचा ,की विकास के पापा को खेल -खिलोने बिलकुल पसंद नहीं |वो कहते हैं की मुझसे पढने के लिए किताबे चाहे जितनी माँगा लो ,पर खिलोने तुम खुद लाया करो |

माँ जल्दी से तैयार हुई ,और विकास को साथ लेकर उसकी पसंद का टॉय दिलवा दिया |विकास बहुत खुश था 
माँ विकास की हर इच्छा पूरी करती है ,चाहे उसके लिए कुछ भी करना पडे |इसी तरह वक़्त बीतता जा रहा था,आज विकास ने एक entrance exam दिए थे जिसमे वो आ गया था |

मगर वो बहुत उदास था ,कारण था की donation मांग रहे है,विकास जनता था की पापा बहुत उसोलो वाले है |वो ऐसा नहीं करेंगे |बस एक माँ ही आखिरी सहारा थी ,माँ ने देख लिया था,की विकास आज सीधे अपने कमरे में गया है |वो समझ गयी की परेशान होगा ,माँ विकास के पास गयी ''लल्ला'' क्या बात है |

कुछ नहीं माँ विकास ने कहा ,माँ के बहुत पूछने पर उसने बता दिया ,साथ ही ये भी कह दिया की माँ पापा को मत बताना |माँ बिना कुछ बोले वहां से चली गयी ,जब लौटी तो हाथ में गहनों का डिब्बा था |माँ ये क्या ?विकास ने कहा ,नहीं माँ नहीं माँ ने अपनी कसम दे दी ,विकास ने कहा की पर पापा |माँ ने कहा उनको कुछ नहीं पता, ये अम्मा ने चलते वक़्त मुझे दिये थे |

ओ मेरी अच्छी ''माँ '' |विकास ने अपना ''मुकाम'' हासिल कर लिया,पर माँ के गहने उसे कचोटते रहते थे |पर माँ को उसने हमेशा बहुत खुश देखा,धीरे -धीरे वो सब भूल गया |माँ ने उसकी शादी बहुत अच्छी लड़की से कर दी ,बहुत बडे घर की थी |गहनों से सजी ममता अपने साथ ढेर सा सामान लायी थी ,विकास के पापा के मना करने के बाद भी ममता के पापा ने उसको बहुत सा सामान दिया था| 

विकास के पापा बहुत दुखी थे ,और उसका कारण विकास को जल्द पता चल गया |ममता जल्द ही अलग हो गयी,विकास को माँ की बहुत याद आती |कुछ समय बाद ,विकास भी एक प्यारी से ''शुभी''  के पापा बन गए|आज शुभी के स्कूल में एक फंक्शन है जिसमे विकास और ममता दोनों को जाना था |

दोनों स्कूल में गए ,सबसे पहली परफोर्मेंस शुभी की ही थी |वो stage पर आई शुभी ने अपनी सुरीली आवाज में गाना शुरू किया |''माँ, प्यारीsss माँ, मम्मा''  ना जाने विकास को क्या हुआ की वो सुन ही नहीं पाए और वहा से भाग कर सीधा माँ के पास पहुचे ,और माँ कह कर रो पडे |और उस दिन के बाद सब साथ रहने लगे | 

चलते -चलते =जिंदगी की उलझने शरारतो को कम कर देती हैं ,
                       और लोग समझते हैं की वो बडे हो गए ||
                                               
                       दो पंछी सोच समझ कर एक दसरे से अलग हुए,
                       पर फिर भी वो ना रहे ,क्यों ?क्यूंकि उन्हे मालूम ना था ,
                       की नजदीकिया पहले आदत ,फिर जरुरत और फिर ,
                       जिंदगी बन जाती हैं ||     

Wednesday, May 25, 2011

mano ya na mano (aapkey anmol pal)''saarthak''



                                                               ''Saarthak''
आज शोभा सुबह से ही बहुत बीजी थी,आज सार्थक का बर्थडे जो था |आज, सार्थक पूरे तीन साल का हो जायेगा|अभी nursery में ही था ,उसने अपने सब friends को बुलाया था |शोभा यही सब सोचे जा रही थी,उसने बर्थडे में बच्चो के लिए बहुत सारे गेम सोच रखे थे |

Happy Birthday Musical Scraps for Orkut, Myspace


शाम को बहुत सारे बच्चे आ गए थे ,शोभा बहुत बीजी हो गयी क्युकी उसने भी बहुत लोगो को बुलाया था |और उसको सबसे बात भी करनी पड़ रही थी,एक बार को तो वो सार्थक को भी भूल गयी थी |क्युकी जब उसके सारे friends और उसकी सिस्टर आ जाती है तो उसे उनके सिवा कोई भी दीखाई नहीं देता |

सब बच्चे खेलने में लग गए ,आइस-पाईस खेल रहे थे |एक बच्चे को बाकि सभी बच्चो को ढूँढना था,सब बच्चे एक ग्रुप में ही थे |वो जिस जगह जा कर छुपे वहां ना जाने वो कैसे लॉक हो गए |

जो बच्चा उनको ढून्ढ रहा था ,जब बहुत देर तक उसको बच्चे नहीं मिले ,तो उसने जाकर शोभा से कहा मगर उसने हस कर कहा की मिल जायेंगे |इतने में उस बच्चे के परेंट्स आ कर उसको ले गए |

सार्थक और दुसरे बच्चे जहाँ बंद थे ,उन्होने बहुत आवाजे लगायी पर किसी ने सुना ही नहीं |ये तब की बात है जब मोबाइल फ़ोन नहीं हुआ करते थे ,सब बच्चो ने तय किया की दरवाजे को तोड़ देंगे |क्युकी वहां कोई विंडो भी नहीं थी ,सब बच्चे एक साथ दरवाजे को तोडने लगे |

थोड़ी देर में दरवाज़ा तो नहीं टुटा ,मगर लॉक खुल गया |सार्थक ने बहुत दिनों तक अपनी मम्मी से बात नहीं की शोभा को अपनी गलती का अहसास हुआ या नहीं ये तो पता नहीं ,पर उस दिन के बाद सार्थक ने अपनी बर्थडे कभी नहीं मनाई |
scrap orkut
पर सभी बच्चे ठीक  से बहार आ गए यही भगवान् की बहुत बड़ी कृपा रही |आज सार्थक अपने बच्चो का बहुत धयान रखते हैं |

चलते -चलते = ऐसी क्या ''दुआ'' दे आपको ....
                       जो आपके लबो पे हसी खिला दे .....
                       बस यही दुआ है हमारी ,उस ''रब'' से ,
                       की वो सितारों की रौशनी से आपकी ''तकदीर'' सजा दे |


Life Quotes, Scraps, Animated Graphics, Life Messages

Sunday, May 22, 2011

mano ya na mano(aapkey anmol pal)''siddha''


orkut scraps

तारो भरी रात थी ,चंद्रमा अपनी सोलह कलाओ के साथ अपनी ''शीतल'' चांदनी बरसा रहा था | सिदधा ''नोवेल'' पढ़ रही थी,बहुत ही emotional नोवेल था |सिदधा रोती जा रही थी ,और पढ़ती जा रही थी ,आज अरमान अपने घर गए थे ,सिदधा ,स्निग्धा के साथ अकेली थी |

आज की पूरी रात वो नोवेल ही पढने वाली थी ,(1990august )सिदधा जब भी नावेल ले कर बैठती थी ,पूरा किये बिना नहीं उठती थी |इसके लिए वो रात का वक़्त ही चुनती थी ,इसलिए कभी -कभी अरमान से उसकी ''cold war''भी हो जाती थी ,जो पूरे हफ्ते ,दस दिन तक तो चलती ही थी |(ऐसा उसने लिखा है ) स्निगधा जानती थी की मम्मी आज नोवेल ले कर बैठगी,इसलिए वो अपने कमरे में ही सोयी थी अभीpaanchसाल की ही थी ,पर सब समझती थी | 
 स्निधा सोयी थी ,की एक आवाज़ से उसकी नींद टूट गयी ,उसने विंडो में से देखा तो सामने के घर से आवाज़ आ रही थी |उसनी सिदधा से कुछ नहीं कहा ,जानती थी की वो नोवेल में इतना डूब जाती है ,की सारे रिश्ते नाते भूल जाती है |

सामने वाले घर में curtain पड़ा हुआ था, अंदर की लाइट जली थी |बहार अँधेरा था ,अंदर का सुब कुछ साफ़ दिखाई दे रहा था | उसने देखा की अंदर जो भी है ,उसके हाथ में कुछ है ,और जो उसके सामने खड़ा है उस पर वार कर रहा है |

स्निगधा के पापा उसके लिए, एक सायरन की आवाज़ वाला टॉय लाये थे |उसको और कुछ नहीं सुझा तो उसने वो टॉय चला दिया |उसकी आवाज़ बहुत तेज थी ,वो व्यक्ति उसे भागता हुआ नज़र आया |उस घर के लोगो ने   सबको इकठ्ठा कर लिया |

सबको मालूम था ,की ये टॉय स्निगधा का है क्युकी वो हर वक़्त उसे साथ ले कर घुमती थी |सबने स्निगधा को बहुत प्यार दिया |इतना सब होने के बाद भी,सिद्धा को कोई होश नहीं था |''सच है,की बच्चे भगवान् का रूप होते हैं " |

चलते -चलते =कुछ लोग जिंदगी में ,इस कदर शामिल हो जाते है,
                       भुलाना चाहो तो और याद आते हैं ,            
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                       बस जाते हैं ,वो दिल में इस कदर
                       की आंखे बंद करो, तो सामने नज़र आते हैं ||


                                                                                        







Saturday, May 21, 2011

mano ya na mano(aapkey anmol pal) ''NIK''

Scraps
                                                           ''NIK''

24 दिसम्बर 2009 निक अपनी bike पर जा रहे थे ,रात का समय था |उनके घर और ऑफिस के बीच का रास्ता थोडा सुनसान सा पड़ता है |मगर अब उनको इसकी आदत हो चुकी है ,अचानक उनकी नजर लिफ्ट लेती एक लड़की पर पड़ी ,उन्होने अपनी bikeरोकी और उस लड़की को लिफ्ट दी |

उस दिन के बाद दोनों के मिलने का सिलसिला चल निकला ,लड़की ने उनको कभी अपने घर के बारे में नहीं बताया था |जब भी निक जानना चाहते ,वो टाल जाती थी|निक को उसने अपना नाम ऐना बताया था,वो कहते है की ऐना सबसे अलग थी |

निक ऐना को अपने घर ले गए ,अपनी मम्मी -पापा से मिलाया ,दोनों ने उसको पसंद कर लिया |उन्होने ऐना से कहा की, वो सन्डे को उसके घर उसके मम्मी -पापा से मिलने आयेंगे | निक सन्डे का बेसब्री से इंतज़ार करने लगे ,आखिरकार सन्डे आ ही गया |

ऐना की बताई जगह पर वो अपने परेंट्स के साथ पहुचे ,ऐना के परेंट्स उन्हे अपने परेंट्स से बहुत young लगे पूछने पर ऐना के पेरट्स ने बताया, की उनकी शादी बहुत जल्दी हो गयी थी |शादी की डेट भी फिक्स हो गयी थी निक ऐना को और ज्यादा घुमाने लगे ,और ज्यादा गिफ्ट्स देने लगे |
wedding scraps
शादी का दिन भी आ गया ,सारे रिश्तेदारों को बुलाया गया |शादी वाली जगह ,निक सबके साथ पहुचे मगर वो जगह बिलकुल वीरान पड़ी हुई थी |फिर वो ऐना के घर भी पहुचे ,मगर वहा कुछ भी नहीं था |वो अपने घर गए सब बहुत उदास थे |

निक हैरान ,परेशान से अपने कमरे में गए ,वहा पर ऐना को दिए सारे गिफ्ट्स मुजूद थे |कहाँ से आये ?कौन रख गया ?कुछ नहीं पता |पर उनकी हालत बहुत ख़राब हो गई ,वो ऐना के बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे |उन्होने कभी शादी न करने का निर्णय ले लिया |

उनके परेंट्स ने भी उनको फिर कभी शादी करने के लिए नहीं कहा,अपना जीवन उन्होने समाजसेवा में और ''प्रभु चरणों '' में लगा रखा है | (मशहूर शायर की पंक्तिया चलते -चलते )    

चलते -चलते = दर्द क्या होता है ,बतायेंगे एक दिन 
                        कमाल की एक ग़ज़ल ,सुनायेंगे एक दिन
                        उडने दो इन परिंदों को ,आजाद फिज़ाओ में
                        अपने हुएय ,तो लौट के आयेंगे एक दिन ||  
I MISS YOU Scraps

Friday, May 20, 2011

mano ya na mano (aapkey anmol pal)A 1939 love story (2)


                               
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                                                      ''A 1939 love story''
अभी तक आपने पढ़ा ,की दिलीप जी और मीना जी एक ही क्लास में पढने लगे ,अब उससे आगे ............
दिलीप जी मीना जी से बात, करने का मौका ढूंडने लगे ,और उन्हे एक दिन मौका मिल ही गया |एक दिन मीना स्कूल नहीं आई थी , तो वो ''स्कूल का कार्य'' पूछने के लिए ,दिलीप के घर आई |

दिलीप सोच रहे थे की ,''आज मै भगवान'' से कुछ और भी मांगता तो ,शायद आज मुझे वो भी मिल जाता |उस दिन उन्होने पहली बार मीना से ''बात'' की ,मीना की आवाज़ उन्हे, ऐसी लगी जैसे दूर कही ''घन्टिया'' बजी हो कानो में मानो ''शहद'' घुल गया हो | 
                                                    doll scraps
दिलीप की मम्मी और मीना की मम्मी मै अच्छी दोस्ती हो गयी,और एक दिन तो मीना की मम्मी ने दिलीप से ये ही ,कह दिया की अपने साथ मीना को भी स्कूल ले जाया करो !!!उन्हे तो जैसे मुहमांगी मुराद ही मिल गयी मानो आज तो सारी ''कायनात'' ही उनकी झोली मै आ गिरी हो |
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सब कुछ ठीक चल रहा था ,अब तक दोनों मै अच्छी ''फ्रेंडशिप'' हो गयी थी |मगर कहते है ना की ,ज्यादा ''ख़ुशी रास नहीं आती'' उनके साथ भी ऐसा ही हुआ |हुआ यूँ की ''रक्षा बंधन'' के दिन मीना उनके घर ,''राखी बांधने'' के लिए आ गयी |जैसे ही दिलीप की मम्मी ने उन्हे आवाज लगायी ,की आकर राखी बंध वालो |वो ''SHOCKED''हो गए |

और इतने जबरदस्त घबरा गए ,की छत्त से नीचे कूद गए|हाथ ,पैर मै पलस्टर लग गया,वो कहते है की हाथ पैरो का तो कुछ नहीं ,ठीक हो जायेंगे मगर राखी नहीं बंधवाने दी |और उस दिन के बाद तो राखी आने के पहले ही ,वो घर से ऐसे जाते की ,राखी के अगले दिन ही आते |

 मीना का तो पता नहीं ,मगर शायद वो मन ही मन .......|हाई स्कूल का रिजल्ट निकला ,उनका नाम ''मेरिट'' लिस्ट मै था |और मीना केवल फर्स्ट आई थी ,और एक दिन जब वो अपने दोस्तों के साथ खेलकर घर लौटे ,तो उनकी मम्मी ने बताया की ,मीना की शादी हो रही है |

अभी से अभी तो उन्होने ख्वाब भी पूरे नहीं देखे ,और उस दिन वो अपनी जिंदगी मे ''पहली और आखरी'' बार रोये थे |पहली और आखरी बार इसलिए की ,सारे आंसू उसी दिन बहा दिए,और जिंदगी मे अपनों का गम देखने के बाद भी, उस दिन के बाद कभी नहीं रोये |''रोने के बारे मे उनकी philosophy थी,की 1% water &99%feelings''

मीना की डोली को उन्होने अपने कंधे ,पर उठा कर विदा किया | और उस दिन के बाद उन्होने ,P .H .D करने की ठान ली और दिन रात किताबो मे डूबे रहने लगे |B.S.C पास करने के साथ ही ,उन्हे खबर मिली की मीना के घर एक ''छोटी से गुडिया'' आई है|

दिलीप जी मीना और उनकी  बेटी जब भी आते, तो वो घर के बहार ही रहते,इस डर से की कहीं मीना की बेटी उनको ''मामा'' ना कह दे |उसके बाद दिलीप जी ने M.S.C की फिर P.H.D की तयारी मे लग गए|उधर मीना की लड़की भी बड़ी होती जा रही थी |

घर मे दिलीप की शादी की बाते होती ,तो वो मना कर देते और एक दिन उन्होने साफ़ मना कर दिया की ,उनको कभी शादी करनी ही नहीं | P.H.D करने के बाद वो अपनी जॉब करने के लिए चले गए ,वो कहते हैं की मीना पहली और आखरी लड़की है ,जिसके लिए उनके दिल मे सोफ्ट कॉर्नर के अलावा भी कुछ ......है | 

और एक दिन वो भी आया जब उनको ये खबर मिली, की मीना की बेटी भी पढ़ लिख कर अपनी ससुराल चली गयी है |उनके दिल का कोना कही चटक कर टूट गया,उनके साथ के सभी दोस्तों की शादी हो चुकी थी ,बच्चे भी बडे -बडे हो गए थे |और एक दिन वो भी आया की ,अब किसी के घर जाने मे भी दिलीप को झिझक  लगने लगी |और वो बिलकुल अकेले हो गए |

वो कहते हैं की इस उम्र मे भी ,वो बिलकुल ठीक हैं |और इसका श्रेय वो मीना को देते है ,जिसकी वजह से उन्होने घर नहीं बसाया,नहीं तो घर गृहस्थी मे पड़कर वो कब के .........हो जाते |अब उन्होने अपनी जिंदगी इश्वर को समर्पित कर दी है |उन्हे मीना से सिर्फ एक सवाल के जवाब का इंतज़ार है ,वो जानते हैं की इस सवाल का जवाब उन्हे इस जनम मे तो क्या किसी भी जनम मे नहीं मिलेगा |फिर भी क्या उनके दिल मे भी कभी कुछ था या सिर्फ वो ही उसको इतना ....करते थे |

I Love You Comments
एक दिन उनके दरवाजे की बेल बजी देखा तो ,मीना की बेटी खड़ी थी उसने एक लैटर दिया |और बिना कुछ भी बोले वो वहां से चली गयी |जब उन्होने लैटर देखा तो उसमे जो डेट लिखी थी ,वो उन्हे वापस २२ सितम्बर उनकी बर्थडे वाले दिन जब मीना उनके घर के पास रहने आई थी ,9th class मे ले गयी |
अब कहने को उनके पास कुछ नहीं था ,और ना ही सोचने को लैटर हाथ से छूट गया |साथ ही envelope मे से एक और चिट्ठी भी गिर गयी ,कांपते हाथो से देखा तो ,वो लैटर मीना की बेटी का था ,लिखा था मम्मी अब नहीं रही उनके जाने के बाद ,ये लैटर ज्वेलरी बॉक्स मे से मिला था |

दिलीप आगे लिखते हैं की ,इतनी बड़ी खबर मिलने के बाद भी वो जिंदा है ,तो सिर्फ उस लैटर की वजह से |अब तो उनके जीने का मकसद भी नहीं रहा ,वैसे भी इतने ''बसंत'' देख लिए हैं की ,अब जीना भी नहीं चाहते ऐसा उन्होने लिखा है |''क्या भरोसा है इस जिंदगी का ,साथ देती नहीं ये किसी का ''@ ''और चलते -चलते मशहूर पंक्तिया''  @आप मेरे गूगल approved '' ऋतू मोहन sms'' भी सर्च करके पढ़ सकते हैं,और GOOgle Images में जाकर ''ritu mohan mano ya na mano''search करके आप scrap,photos,aur pictures download 
kar सकते हैं |
  
                                                                                     
चलते-चलते = जिनकी आंखे आंसुओ से नम नहीं 
                      क्या समझते हो ,उन्हे कोई गम नहीं 
                      आप तड़प के रो दिए ,तो क्या हुआ 
                      गम छुपा के हसने वाले, भी कोई कम नहीं ||

                      आँखों मे आंसुओ को उभरने ना दिया 
                      मिटटी के मोतियों को बिखरने ना दिया 
                      जिस राह पर पडे थे ,तुम्हारे कदमो के निशा 
                      उस राह से हमने किसी को गुज़रने ना दिया ||

                      इस दो पल की जिंदगी मे तन्हाई क्यों है 
                      लोगो को हमसे रुसवाई क्यों है 
                      इस दुनिया मे इंसान कुछ कम तो नहीं 
                      फिर भी मेरे साथ ,सिर्फ मेरी परछाई क्यों है ||     

scrap for orkut

Wednesday, May 18, 2011

mano ya na mano(aapkey anmol pal) A1939 love story

Friendship Angels Scraps
                                                    ''A1939 love story''

''दिलीपजी 22 सितम्बर'' को अपनी बर्थडे वाले दिन ही ''मीनाजी'' से मिले थे ,मीनाजी उसी दिन उनके पास वाले घर में रहने के लिए आई थी, अपने मम्मी ,पापा के साथ |तब दिलीपजी 9th क्लास में पढते थे (''1939'')में,मीना भी उन्ही की क्लास में थी |मीनाजी  ने भी उन्ही के स्कूल में admission ले लिया,और उन्ही की क्लास में,तब coeducation में लडके -लडकिया अलग बैठा करते थे |

उनकी क्लास में मीना अकेली लड़की थी,क्युकी तब लडकियों को गर्ल्स स्कूल में ही पढाया जाता था |मगर वो सारे स्कूल इतने अच्छे नहीं होते थे ,''मीनाजी के परेंट्स लडके -और लडकियों'' में कोई फर्क नहीं समझते थे|वैसे भी वो इकलोती थी ,तो अपनी मम्मी -पापा का ''लड़का'' थी|

दिलीपजी सोच रहे थे, और मन ही मन प्रयेर कर रहे थे ,की काश मीना उनके पास बैठ जाए |पर उनकी ये प्रार्थना स्वीकार नहीं हुई ,क्युकी उनके क्लास teacher ने मीनाजी के लिए अलग से सीट लगवा दी |मीना किसी से भी बात नहीं करती थी ,सिर्फ अपनी किताबो में ही डूबी रहती थी |

दिलीपजी घर पहुचते ही सबसे पहले छत्त पर जाते थे ,उनकी मम्मी जब पूछती तो एक ही जवाब देते अगले साल बोर्ड का है न ,इसलिए अभी से ही बहुत पढाई करनी पड़ती है |मगर उनका मकसद होता था, मीना पर नज़र रखना |


मीना क्लास में उनसे 1%marks ज्यादा लायी, दिलीप के 60 % और मीना के 61 % मगर सच बात तो ये है ,की वो एक नंबर का question जान -बुझ कर नहीं कर के आये थे |क्युकी पूरे शहर के स्कूल में वो ही नंबर एक पर थे|और वो हमेशा मीना को पढते हुए ही देखते थे ,इसलिए ............|क्रमश: 


चलते -चलते =मुस्कराना ही ख़ुशी नहीं होती
                      उम्र बिताना ही जिंदगी नहीं होती
                      खुद से भी ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है ,दोस्तों का
                      क्युकी दोस्त कहना ही दोस्ती नहीं होती ||
                                                                                     
Summer Pictures

Monday, May 16, 2011

mano ya na mano (aapkey anmol pal )PARUL



                                                            ''parul''
पारुल ऑफिस गेट के पास खड़ी थी ,तभी उसके पास नीरा भागती हुई आई की तुम्हारा फ़ोन आया है |यह बात 1995 की है ,पारुल वापस ऑफिस गयी उसने फ़ोन उठाया ,फ़ोन उसकी मम्मी का था |
                                                              
मम्मी ने पारुल को एकदम आने के लिए कहा था ,कारण पूछने पर भी नहीं बताया |पारुल निकल पड़ी, वो अपने वहिकल पर थी | रास्ते में पारुल जाम में रह गयी काफी भीड़ होने के कारन वो वक़्त पे घर नहीं पहुच पायी 

घर पहुचने में पारुल को बहुत समय लग गया ,घर पहुची तो मम्मी गेट पर ही खड़ी थी |उन्होने बताया ,की लडके वाले बहुत इंतज़ार करके गए है |और बहुत ही अच्छा रिश्ता हाथ से निकल गया |

बात आई -गई हो गयी ,इस बात को ज्यादा समय नहीं बीता था |एक दिन पता चला ,की उस लडके की शादी के पंद्रह दिन बाद ही ,लड़की अपने मायके चली गयी है |कभी वापस न आने के लिए ,और भी जानने वाले लोगो से पता चला की ,लड़का ठीक नहीं था |पारुल की मम्मी तभी मंदिर गयी और मत्था टेक कर आई |'

चलते -चलते =लहरों को किनारों की कशिश खीच लाती है 
                       पर सागर के पास वापस लौट जाती है 
                       लहरे सिर्फ किनारों का दर्श देख कर चली जाती हैं
                            की कहीं फना ना हो जाए || 
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Sunday, May 15, 2011

mano ya na mano(aapkey anmol pal) PAAKHI

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                                                          ''PAAKHI''
पाखी अपने मम्मी -पापा की बहुत लाडली है ,वह स्वयं इस बात को कहती है, की वो अपने मम्मी ,पापा के लाड में बहुत बिगड़ चुकी है |और लाड भी इतना की उसका वेट, दस साल की उम्र में ही  50kg हो गया था|और दिनोदिन, उसकी फरमाएशे बढती ही जा रही थी |

दस साल तक वो अकेली ही थी ,पर अब उसका छोटा भाई भी आ गया था |अब उसके मम्मी ,पापा को उसकी जरूरते भी एक मांग ही लगती थी |एक दिन पाखी के पापा ने उसको बोर्डिंग स्कूल में डाल दिया |पाखी ने कुछ नहीं कहा ,और वो बोर्डिंग स्कूल चली गयी |

बोर्डिंग के स्ट्रीक atmosphere में पाखी बिलकुल ठीक हो गयी थी,ऐसे ही साल दर साल गुजरते गए |और पाखी 8thstandard में आ गयी ,और उसको अब अपनी मम्मी की बहुत जरुरत लगने लगी |और एक दिन वो भी आया जब वो अपनी मम्मी के बिना रह ही नहीं सकती थी |

वो ''GOD ''को याद करती हुई ,हॉस्टल के बैक में बने जंगल में चली गयी |और वहा बैठ कर रोने लगी ,तभी एक सिस्टर nideeya पाखी के पास आ गयी ,और कहने लगी की आज घर की बहुत याद आ रही है न ?आपकी मम्मी का फ़ोन आया है|पाखी तेजी से भागती हुई ,फ़ोन के पास गयी ,पर कोई भी फ़ोन नहीं था |

पाखी वापस जा ही रही थी की ,फ़ोन की घंटी बज उठी पाखी ने उठाया तो आवाज़ उसकी मम्मी की ही थी |और उस दिन उसकी मम्मी ने पहली बार पाखी से बहुत ढेर सी बाते की ,तभी एक सिस्टर  वहा आ गयी ,और पाखी से बोली की किस से बात कर रही हो ??पाखी ने कहा मम्मी से सिस्टर हसने लगी बोली child डैड फ़ोन से !पाखी ने कहा की सिस्टर nideeya ने बताया था ,तो उन्होने कहा की वो तो अब यहाँ है ही नहीं |

उसी दिन पाखी के parents आ गए, और पाखी को न जाने क्यों उसे अपने साथ ले गए,उसने वापस ले जाने का कारण पूछा पर आज तक उसकी मम्मी ने नहीं बताया ,इसे अब और क्या कहे ??

चलते -चलते =
चाँद सिर्फ एक है ,लाखो तारो के लिए


                   
लाखो तारे है ,सिर्फ एक चाँद के लिए
हम जैसे लाखो होंगे ,आपके लिए
पर आप लाखो में एक हो ,हमारे लिए ||
good Bye orkut scraps

Saturday, May 14, 2011

mano ya na mano(aapkey anmol pal) DEEPAK

                                                           DEEPAK
Winter Graphics
बात सन 1979 जनवरी की है ,रात का सन्नाटा था ,चारो तरफ से हवा की सांय -सांय की आवाज आ रही थी|ऐसे में दीपक ऋषिकेश से देहली जा रहे थे,बड़ी ही सर्द रात थी |चारो तरफ कोहरा ही कोहरा  था ,कोहरा भी ऐसा की सोफ्टी कोन में भर लो बस में सिर्फ चंद ही लोग थे | बस तेजी से भागी जा रही थी ,दीपक ने गर्म कपड़ो से अपने आपको लपेट  रखा था |

बस में बिलकुल  ख़ामोशी छायी थी ,और बस की ख़ामोशी थी ,की टूटने का नाम ही नहीं ले रही थी| |दीपक का दिल, ऐसे सफ़र में कभी -कभी गुनगुनाने का करने लगता था |पर रात हो रही थी ,और बस में जितनी मुसाफिर थे सब सो रहे थे |दीपक ने अपने मन की बात मन में ही दबा ली ,और सोचने लगे की घर पहुचते ही सबसे पहले अपना पसंदीदा गाना  गुनगुनायेंगे ,तब जाकर उन्हे चैन मिलेगा |
अभी वो ये सोच ही रहे थे ,की बस चिहुक कर रुक गयी |ड्राईवर ने नीचे उतर कर देखा तो सब ठीक था ,पर बस नहीं चल रही थी |मध्य रात्री और वो भी सर्दियों की करे तो क्या करे ,ड्राईवर ने कह दिया की बिलकुल बस स्टैंड के पास ही आकर ख़राब हुई है |एक छोटे से कस्बे का बस स्टैंड ,जहा जरुरी नहीं की कोई बस स्टैंड में अंदर आये भी |ड्राईवर ने कहा की आप सब को यही उतरना पड़ेगा ,तो बस में बैठे पसेंजेर बोले की हम तो बस में ही रुक जायेंगे |जब कोई और बस आएगी तब चले जायेंगे ,तो ड्राईवर कहने लगा की हम तो बस स्टैंड पर जा रहे है |अपनी जिम्मेदारी पर रुकना हो तो रुको |सब यात्री नीचे उतर गए ,दीपक भी मायूस हो कर स्टैंड की तरफ जाने लगे |

अभी वो चंद कदम ही चले थे ,की उन्हे एक आवाज़ सुनाई दी दीपक तुम यहाँ ?? दीपक ने देखा अरे ये तो नरेन्द्र चाचाजी की आवाज़ है ,इतनी ठण्ड में यहाँ ?? चाचाजी ने बताया की आज वो बहुत दिनों के बाद, अपने एक फ्रेंड से मिलने आये थे और ताश खेलने बैठ गए, और टाइम का पता ही नहीं चला |और फिर वो दीपक को अपने साथ अपने घर ले गए |दीपक ने एक बार कोहरे भरे आसमान को देखा मानो कह रहे हो की ''प्रभु तेरी लीला अपरम्पार है ''  (@तो ऐसे ही अपने कोई अनमोल पल मुझे भी लिख भेजिए )  
                                         

चलते -चलते =जीना उसके लिए ,जो जीने का सहारा हो
                       चाहना उसको ,जो जान से भी प्यारा हो
                       राह में तो लाखो मिलेंगे ,लेकिन साथ उसका दो
                       जिसने भीड़ में भी ,आपको पुकारा हो ||                              

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mano ya na mano(aapkey anmol pal) DAASTAA

Rose Pictures
                                                           
               DAASTAA
                                                       
दुनिया का सबसे बड़ा दुःख तब होता है, जब की अपना नहीं रहता |यह एक शाश्वत सनातन सत्य है ,फिर भी न जाने क्यों इस बात को स्वीकारने का दिल नहीं करता |

ऐसी ही एक घटना अम्बर के साथ भी हुई ,बात सन 1996अक्टूबर की है |उस समय अम्बर सोलह साल के थे ,और मसूरी  के एक बोर्डिंग स्कूल में पढते थे |उनके बाबाजी पंचतत्व में विलीन ह गए थे ,परन्तु ये बात अम्बर को  नहीं बताई गयी, क्युकी वो अपने बाबाजी के बहुत करीब थे ,और उनके पेपर चल रहे थे |

एक दिन ना जाने कहाँ से उनके हाथ एक न्यूज़ पेपर लग गया, उसमे उनके बाबाजी की न्यूज़ थी |अम्बर ने जैसे ही पढ़ा, तो वो बोर्डिंग से भाग निकले |और उन्हे सिर्फ अपने बाबाजी के सिवा कुछ भी दीखाई नहीं दे रहा था |वो तब थोडा present में तब आये जब उन्होने अपने बाबाजी जैसे किसी व्यक्ति को अपने सामने देखा, तो उन्होने अपने आपको एक ट्रेन में पाया|

अम्बर के पास तो टिकेट भी नहीं था ,तो उन बाबाजी ने ,अम्बर को  एक टिकेट दिया जो उनके वापस बोर्डिंग जाने का था |अम्बर ने कहा की आपको कैसे पता की ,मैं बोर्डिंग में पढता हूँ |

बाबाजी ने कुछ नहीं कहा, बस अम्बर के सिर पर हाथ रख दिया |
अचानक उनकी झपकी लग गयी ,जागे तो देखा वहा कोई  नहीं है |
और वो जिस ट्रेन में बैठे थे ,वो लेट हो जाने के कारण चली ही नहीं थी |

इतने बरस बीत जाने के बाद भी ,वो आज भी उस हाथ को अपने सिर पर महसूस करते हैं |और आज भी ,उनकी आंखे डबडबा जाती हैं |  

चलते -चलते = संजो कर रख सको तो मेरा ''नाम'' एक निशानी 
                       लम्हों की तरह खो दो तो सिर्फ एक कहानी||
                     
                       सीप जैसे मोती आँखों में झलकते :'(:'(
                       ऊँगली के पोरों पर रखो तो ओस के एक बूँद की कहानी|| 
                     
                       बड़ी मेहनत से भीड़ में अपनी जगह बनायीं है मेरे ''नाम'' ने||                         
                       तो सवालो की बौछार भी पाई है इनाम में||

                       जितना भी गहरा कोई हमे अपनी बातो से दर्द दे
                       उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमारी ||
                                       
                       हजारो ''सीक्रेट'' समेटे हैं हम, अपनी जिंदगी की किताब में
                       और उनको संजो कर रखा है ,जिंदगी की हर सांस में||

                       मेरा नाम एक निशानी ,खो दो तो कहानी ||  
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Monday, May 9, 2011

mano ya na mano(apkey anmol pal)ANJANA


                                          '' अनजाना ''

ये घटना मुझे जिन्होने बताई है ,यह ''घटना'' उनके साथ ''सन 1981''मे हुआ था |में ये बात उन्ही के बताये ''शब्दों'' में लिख रही हूँ |
''सन 1981june '' ..........सीमा के परिवार के सभी सदस्य ,गर्मियों की छुट्टी बिताने के लिए कहीं पर जाना चाहते थे |सभी ने हिमाचल में ''छुट्टिया'' बिताने का निर्णय लिया|उनको सवेरे चार बजे घर से निकलना था ''प्रभु'' का नाम लेकर वे लोग निकल पडे,रास्ते में बच्चे'' कॉमिक'' पढते हुए जा रहे थे,और उनकी मम्मी सो रही थी ,पापा साईट scene देखते हुए जा रहे थे |(मैं उनके शहर का नाम यहाँ नहीं लिख रही क्युकी वो बताना नहीं चाहते ) काफी सारा रास्ता उन्होने, बडे आराम से पार कर लिया था |

अचानक उनकी गाड़ी में से ''धुआ'' निकालने लगा ,उन दिनों दो तरह की कारे ही, ज्यादा चलती थी|एक तो 'fiat'      
और एक'' ambassador ''  |वो लोग'' fiat ''में थे ,सब बहार निकल गए, ड्राईवर ने बोनेट देखा तो अंदर सिवा धुए के कुछ दिखाई नहीं दिया गाड़ी भी बहुत गरम हो रही थी |

आस-पास भी कुछ नहीं था ,बस ये समझिये की वो लोग, ''जंगल'' में खडे थे |समय तो दिन का ही,था पर उन दिनों में घुमने बहुत ही कम लोग जाया करते थे |तब जब घुमने जाते थे तो कही भी ज्यादा भीड़ -भाड़,नहीं मिला करती थी |

न जाने कितने ''घंटे'' वो सब खडे रहे,कोई भी उम्मीद की ''किरण'' ,उन्हे नज़र नहीं आ रही थी|ड्राईवर ने भी बहुत दूर -दूर तक जा कर देख लिया था |पर कोई भी हल  नहीं निकला ,सब मायूस से नज़र आ रहे थे |

 तभी, न जाने कहा से एक आदमी आया और बिना बोले ,गाड़ी के खुले ''बोनेट'' में ''तारो '' छुने लगा ड्राईवर ने गाड़ी स्टार्ट की तो गाड़ी स्टार्ट हो गयी |

जब उस व्यक्ति को ,''धन्यवाद'' देने के लिए देखा ,तो कोई भी ''दिखाई'' नहीं दिया|बच्चो ने थोडा दूर उन रास्तो पर भी जाकर देखा जो ''पहाड़ी लोगो की पगडण्डी'' होती है पर कही भी दूर -दूर तक कोई नहीं था |   

अब इसे इश्वर का चमत्कार, नहीं तो और क्या कहेंगे|आप के पास भी कोई ऐसे ही ''अनमोल पल'' हो और आप मुझसे शेयर कर सकते हैं ,आप मुझे मेसेज में लिख कर सेंड कर सकते हैं | 

      चलते -चलते= तुम जो चाहते हो मुझे ,तो एक गीत मुझे नज़र कर दो 
                             गूथ लो अपने छंदों में मुझको, महकते हुए सुमन की तरह 
                             हो जो शायर तो अपने, गीत माला में मुझे अमर कर दो ||  
Rainbow Comments            

Sunday, May 1, 2011

mano ya na mano (apkey anmol pal)AGNIKAND


                                                                   
                                                        '' अग्नि कांड''
                         
(यह एक सुनी -सुनाई घटना है)
एक बार शहर में एक exhibition लगी थी |मानसी के परिवार में सब लोग देखने जाने वाले थे, जब वो सब जाने के लिए बहार निकले तो सामने ही मंदिर में आरती हो रही थी | उन्होने सोचा की आरती ले कर चलेंगे |सब मंदिर में चले गए |आरती तभी शुरू हुई थी तो उन्हे वहा कुछ देर लग गयी |आरती लेने के बाद मंदिर में खडे कुछ बच्चे कहने लगे की आज तो एक चैनल का नाम लेकर की उस पर एक मशहूर एक्टर की न्यू पिक्चर आने वाली है वो सबकी favourite पिक्चर थी |सब ने जाने से मना कर दिया ,और वापस अपने -अपने घर आ गए |अभी उनको घर आये ज्यादा देर नहीं हुई थी की बहार अचानक शोर की आवाज़ से घर के बहार आये तो उन्होने देखा की जिस exhibition में वो जाने वाले थे वहां भयंकर आग लगी है |उनके घर के सामने ही वो exhibition लगी थी वो फॅमिली आज भी इस बात को याद करके काँप जाती है,और कहती है की भगवनजी ने ही उन्हे बचाया है उसी के मंदिर में जाने पर हम फिल्म देखने के लिए  रुक गए थे |सच है हमे ऊपर वाला कोई न कोई संकेत देता है |कमी है तो हमे उस संकेत को पहचानने की |

ऐसे ही दूसरी घटना एक और फॅमिली के साथ भी हुई दोनों wife ,husband exhibition देखने के लिए गए जब वो वहा पहुचे तो रास्ते मेंtraffic जाम लगा था |मीता(नाम परिवर्तित है )ने कहा की वो जब तक traffic जाम लगा है तब तक वो बस मंदिर में हाथ जोड़ कर आती हैं |वहा मंदिर में चरनामर्त लेकर आई पर तभी कोई उनसे टकरा गया और वो चरनामृत  नीचे गिर गया ,उन्हे बहुत दुःख हुआ |वो ऐसे ही exhibition देखने चले गए |अभी वो देख ही रहे थे की अचानक सब भागने लगे वो भी भागने लगे रास्ते में उन्हे अग्नि मिली पर तब तक वो लोग बहार निकल आये थे |पर आते -आते मीता का हाथ अग्नि की चपेट में आ गया था |हाथ ठीक होने में थोडा टाइम जरुर लगा पर वो आज बिलकुल ठीक हैं |वो भी इसका श्रेय भागवानजी  को ही देती हैं |

चलते -चलते =दुआ है रब से कभी आपको दुःख का अहसास न दे
                       पल कोई ऐसा न गुजरे ,जब मुश्किलों में हम साथ ना दे  
                       किसी सांस में हम आपको भूल जाए ,रब हमे ऐसी सांस ना दे ||
Take Care Greetings

hello