COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): mano ya na mano (aapkey anmol pal)''NEHA''

Tuesday, May 31, 2011

mano ya na mano (aapkey anmol pal)''NEHA''





                                                                ''नेहा'' 

राहुल collage कैंटीन में बैठा हुआ,नेहा का इंतज़ार कर रहा था |नेहा ने राहुल से कहा की तुम कैंटीन में बैठो मै बस दस मिनट में आती हूँ ,और ये बात बीते पूरे तीन घंटे हो चुके हैं ,पर नेहा अभी तक नहीं आई है | उसका का मोबाइल भी धीरज के पास है ,कह रहा था की एक message करना है और अभी तक नहीं दिया|मना कर नहीं सकते क्युकी उसे भी धीरज के मोबाईल की जरुरत पड़ती रहती है |राहुल कैंटीन से उठ कर bike स्टैंड की तरफ बढ़ गया |

रास्ते मे ही धीरज सिग्नल पर मिल गया,ले ......अपना सेल राहुल ने ले लिया धीरज ने अपनी bike आगे बढाते हुएय कहा की शाम को माल मे मिलते हैं,तीन टिकेट मैने ले लिए है ,ठीक टाइम पे नेहा को साथ लेकर पहुच जाना,और कह कर फुल स्पीड मे अपनी bike आगे बढ़ा ली |

राहुल ने शोर्ट कट से bike ले ली की,वही नेहा का घर पड़ेगा बहार से ही देखता हुआ चला जायेगा |उसकी स्कूटी खड़ी होगी तो नेहा घर पर है ,नहीं तो होगी रचना के साथ ,राहुल ने मन ही मन सोचा कितनी बार मना करा है की ,रचना के साथ मत रहा करो पर सुनती ही नहीं |

रचना राहुल को बेहद न पसंद है, क्युकी उसकी जिंदगी मे सिवाय पढने के और कुछ नहीं है जब देखो तब library 
मे बैठी रहती है,कोई भी इंजॉय नहीं करती,और नेहा भी उसके साथ रह कर उसके जैसी ही होती जा रही है|राहुल ने देखा की नेहा की स्कूटी खड़ी है ,उसकी अटकी सांसे फिर से चलने लगी आ गयी |

शाम को राहुल और धीरज दोनों माल टाइम से पहुच गए,पर नेहा नहीं आई फ़ोन पर जब राहुल की बात हुई थी तो कह रही थी, की टाइम से पहुच जाएगी ,पर आई ही नहीं|राहुल ने सोचा की जरुर रचना ने मना कर दिया होगा|  

राहुल ने नेहा का नंबर मिलाया पर वो फ़ोन पिक ही नहीं कर रही थी,राहुल का मन हुआ की सेल को यही फेक दे राहुल ने धीरज से कहा ....तू  देख ले मै जा रहा हूँ ,और कह कर अपनी favorite जगह जा कर बैठ गया|ये पार्क का सबसे शांत कोना है, यहाँ कोई नहीं आता वह यहाँ घंटो बैठ जाता है,जब भी नेहा उसके साथ ऐसा करती है |

राहुल ने सोचा की कल तो मिलेगी|अगले दिन भी जब राहुल को नेहा नहीं मिली तो,वह परेशान हो गया,ना ही नेहा मोबाइल पिक कर रही है |उसने नेहा के घर जाकर देखा, तो घर पर ताला लटक रहा था|इसी तरह कई दिन और फिर महीने और फिर पांच साल गुज़र गए|

इन पांच सालो मे कभी ऐसा नहीं हुआ की राहुल नेहा के घर ना गया हो| आज सुबह ही राहुल के पापा ने कहा था की तुम्हे ट्रेन से,इंदौर जाना है ये रहा तुम्हारा टिकेट और कुछ नहीं करना, बस इस एड्रेस पर चले जाना और दो -तीन दिन वही रुक कर चले आना|रागिनी बहुत अच्छी लड़की है ,तुम्हे बहुत पसंद आएगी,राहुल अब सारी बात समझ गया था|पर पापा से कुछ भी नहीं कह सकता था ,और मम्मी भी पापा की साइड ही थी |

शाम को राहुल ट्रेन मे था,अपनी बर्थ पर जा कर लेट गया |सामने की सीट खाली थी,तभी एक लड़की आकर वहां बैठ गयी |ना जाने क्यों उसे देख कर राहुल को नेहा की बहुत याद आ गयी,और उसमे झलक भी नेहा की बहुत मार रही थी |कुछ देर बाद वहा एक लड़का भी आकर बैठ गया,दोनों बाते करने लगे, उस लड़की की आवाज़ सुन कर राहुल दांग रह गया |बिलकुल नेहा की आवाज़ जैसी ,फिर राहुल की नज़र उस लड़की के हाथ पर गयी तो बिलकुल नेहा के हाथ जैसा निशान |बस ...ये तो नेहा ही है और ये कहा चली गयी थी ?और ये इसके साथ कौन है और क्या इसने सर्जरी करवा ली ??

राहुल ने सोचा की पूछे भी कैसे ,अभी वो ये सब सोच ही रहा था की वो दोनों एक स्टेशन पर उतर गए |और सारे सवाल ऐसे ही रह गए |:'(  @ चलते -चलते मे कुछ famous line          
              
 चलते -चलते=क्यू ना फिर उसी मोड़ से शुरू किया जाए 
                      जब हम तुम अजनबी थे ||
                       
                       दोस्ती अच्छी हो तो रंग लाती है
                       दोस्ती गहरी हो तो सबको भाती है 
                       दोस्ती नादाँ हो तो टूट जाती है 
                       पर दोस्ती अगर अपने जैसी हो तो 
                       ''इतिहास'' बनाती है ||  
                




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