''A1939 love story''
''दिलीपजी 22 सितम्बर'' को अपनी बर्थडे वाले दिन ही ''मीनाजी'' से मिले थे ,मीनाजी उसी दिन उनके पास वाले घर में रहने के लिए आई थी, अपने मम्मी ,पापा के साथ |तब दिलीपजी 9th क्लास में पढते थे (''1939'')में,मीना भी उन्ही की क्लास में थी |मीनाजी ने भी उन्ही के स्कूल में admission ले लिया,और उन्ही की क्लास में,तब coeducation में लडके -लडकिया अलग बैठा करते थे |
''दिलीपजी 22 सितम्बर'' को अपनी बर्थडे वाले दिन ही ''मीनाजी'' से मिले थे ,मीनाजी उसी दिन उनके पास वाले घर में रहने के लिए आई थी, अपने मम्मी ,पापा के साथ |तब दिलीपजी 9th क्लास में पढते थे (''1939'')में,मीना भी उन्ही की क्लास में थी |मीनाजी ने भी उन्ही के स्कूल में admission ले लिया,और उन्ही की क्लास में,तब coeducation में लडके -लडकिया अलग बैठा करते थे |
उनकी क्लास में मीना अकेली लड़की थी,क्युकी तब लडकियों को गर्ल्स स्कूल में ही पढाया जाता था |मगर वो सारे स्कूल इतने अच्छे नहीं होते थे ,''मीनाजी के परेंट्स लडके -और लडकियों'' में कोई फर्क नहीं समझते थे|वैसे भी वो इकलोती थी ,तो अपनी मम्मी -पापा का ''लड़का'' थी|
दिलीपजी सोच रहे थे, और मन ही मन प्रयेर कर रहे थे ,की काश मीना उनके पास बैठ जाए |पर उनकी ये प्रार्थना स्वीकार नहीं हुई ,क्युकी उनके क्लास teacher ने मीनाजी के लिए अलग से सीट लगवा दी |मीना किसी से भी बात नहीं करती थी ,सिर्फ अपनी किताबो में ही डूबी रहती थी |
दिलीपजी घर पहुचते ही सबसे पहले छत्त पर जाते थे ,उनकी मम्मी जब पूछती तो एक ही जवाब देते अगले साल बोर्ड का है न ,इसलिए अभी से ही बहुत पढाई करनी पड़ती है |मगर उनका मकसद होता था, मीना पर नज़र रखना |
मीना क्लास में उनसे 1%marks ज्यादा लायी, दिलीप के 60 % और मीना के 61 % मगर सच बात तो ये है ,की वो एक नंबर का question जान -बुझ कर नहीं कर के आये थे |क्युकी पूरे शहर के स्कूल में वो ही नंबर एक पर थे|और वो हमेशा मीना को पढते हुए ही देखते थे ,इसलिए ............|क्रमश:
चलते -चलते =मुस्कराना ही ख़ुशी नहीं होती
उम्र बिताना ही जिंदगी नहीं होती
खुद से भी ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है ,दोस्तों का
क्युकी दोस्त कहना ही दोस्ती नहीं होती ||


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