COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): mano ya na mano (aapkey anmol pal )PARUL

Monday, May 16, 2011

mano ya na mano (aapkey anmol pal )PARUL



                                                            ''parul''
पारुल ऑफिस गेट के पास खड़ी थी ,तभी उसके पास नीरा भागती हुई आई की तुम्हारा फ़ोन आया है |यह बात 1995 की है ,पारुल वापस ऑफिस गयी उसने फ़ोन उठाया ,फ़ोन उसकी मम्मी का था |
                                                              
मम्मी ने पारुल को एकदम आने के लिए कहा था ,कारण पूछने पर भी नहीं बताया |पारुल निकल पड़ी, वो अपने वहिकल पर थी | रास्ते में पारुल जाम में रह गयी काफी भीड़ होने के कारन वो वक़्त पे घर नहीं पहुच पायी 

घर पहुचने में पारुल को बहुत समय लग गया ,घर पहुची तो मम्मी गेट पर ही खड़ी थी |उन्होने बताया ,की लडके वाले बहुत इंतज़ार करके गए है |और बहुत ही अच्छा रिश्ता हाथ से निकल गया |

बात आई -गई हो गयी ,इस बात को ज्यादा समय नहीं बीता था |एक दिन पता चला ,की उस लडके की शादी के पंद्रह दिन बाद ही ,लड़की अपने मायके चली गयी है |कभी वापस न आने के लिए ,और भी जानने वाले लोगो से पता चला की ,लड़का ठीक नहीं था |पारुल की मम्मी तभी मंदिर गयी और मत्था टेक कर आई |'

चलते -चलते =लहरों को किनारों की कशिश खीच लाती है 
                       पर सागर के पास वापस लौट जाती है 
                       लहरे सिर्फ किनारों का दर्श देख कर चली जाती हैं
                            की कहीं फना ना हो जाए || 
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