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Sunday, January 15, 2012

mano ya na mano ''mera sapna'' BABLOO

                                                           ''बबलू''

बबलू  भाग  कर  अपनी  दादी  के  पल्लू  में  छुप  गया, माँ  उसके  पीछे  डंडा  लेकर  भाग  रही  थी | शैतानी  भी  तो  बबलू   खूब  करता  था |अपनी  मम्मी  की  सारी  'लिपस्टिक'  तोड़  आया  था, मम्मी  को  अभी  ही,क्लब  जाना  था , दूसरी लिपस्टिक  लाने का  टाइम  भी नही  था, वो  लिपस्टिक  साड़ी  के साथ  की  मचिंग  की  थी | मम्मी  दादी  से  बोली  आज  आप  बबलू  को  छोड़  दो, आज  ये  मेरे  हाथ  से  नही  बचने वाला | और  बबलू  को  मारते वक़्त  दादी  के  भी  दो- चार  डंडे  लग  गये  थे .......      : p

 
पर  दादी  मम्मी  को  अपनी  'बेटी'  से  भी  ज्यादा  प्यार  करती  थी :) बबलू  ने  'कान'  पकडे  और  कभी  भी 
 मेकअप   के  सामान  को  हाथ  नहीं  लगाऊंगा,ऐसा  कह  कर  बबलू  रोता  हुआ  बहार  भाग  गया | तभी  बबलू  ने  देखा  की  ''रामलीला''  के  आर्टिस्ट  आज  के  शो  की  प्रक्टिस  कर  रहे  थे | बबलू  बहुत  देर  तक  उनको  देखता  रहा, और बडे होकर  मै  ''रावण''  बनूगा ये  सोच  कर  घर  चला आया  : D 

 
मम्मी  से  बबलू  बोला  ''मम्मी  मै  बडे  होकर  रावण  जैसा  बनूगा''  मम्मी  ने  बबलू के  'दो चपत' लगा  दी  और  बोली ''न जाने कहाँ से ये सब सीख  कर  आता है'' बबलू  रोने  लगा  और  रोते -रोते  बोला  अब  आपसे कभी   बात   नहीं   करूँगा | मगर  थोड़ी  देर  में  ही ,आकर  बोला मम्मी  पतंग  लाने  के  लिए  पैसे  दो  न ......पतंग  लेकर  बबलू  छत्त  पर  चला  गया......और  पतंग  लुटने  के  चक्कर  में ........इतनी  में बबलू की  आंखे  खुल  गयी  वो  बेड  के  नीचे  था .....!:)        


चलते-चलते = अब  तो  रात  के  पल  भी  हसीं  नज़र  आते  हैं
                       हमे  तो  अब  बिस्तर  के  नीचे  भी  सितारे  नज़र  आते  हैं ||:)

hello