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Wednesday, February 1, 2012

mano ya na mano ''mera sapna'' sonali



                                                            सोनाली 

सोनाली ,  नई  भाभी  ने  अपनी  रस  टपकती  वाणी  में  कहा, सोनाली  गहरी  नींद  में  सोयी  थी, पर  नयी  भाभी  की  एक  आवाज़  पर  ही  उठ  कर  खड़ी  हो  गयी । भाभी  बोली  सोनाली   तुम  मुझे  ''कच्ची इमली'' लाकर  दोगी ? हाँ  भाभी  मुझे  पेड़  पर  से  इमली  तोडनी  आती  है, भाभी  बोली  नहीं  तोडनी  नही  है ।तो !! सोनाली   बोली ?? सोनाली  को पैसे  देते  हुएय  भाभी  बोली,  वो जो  बच्चे  पेड़  के  नीचे  टोकरी  में  इमली  लिए  बैठे  रहते  हैं  न,  उनसे  ले  आओ । अच्छा  भाभी  कहती  हुई  गीतिका  उछलती  हुई  बहार  की  तरफ भाग गयी । 

मगर  आज  पेड़  के  नीचे  एक  भी  इमली  वाला  नहीं  था । सोनाली   ने  छोटे- छोटे पत्थर  उठाये  और  इमली  पर  साध- साध  कर  निशाना  लगाने  लगी, उसने  ढेर  सारी  इमली  जमीन  पर गिरा  दी, फिर अपनी  फ्राक  में  सारी  इमली  इकठी  कर  ली । भाभी  के  दिए  हुएय  पैसे  बच  गए  थे , वो  बहुत  दिन  से  ''सकोरे में लाल रसगुल्ला '' खाने  का  सोच  रही  थी, पर  अम्मा  के  दिए  सारे  पैसे  उसने  चाट-पकोड़ी  में  उड़ा दिए  थे । ''जय प्रकाश  हलवाई'' के  यहाँ  से  उसने  दो  रसगुल्ले  लिए  एक अपने  लिए  एक  अपनी  नयी  भाभी  के  लिए ।

एक  हाथ  से  उसने  अपनी  फ्राक  को  पकड़  रखा  और  दुसरे  हाथ  में  सकोरा  पकड़  रखा  था । घर  पर  लेकर  आई  तो  देखा  भाभी  भैया  के  साथ  बहार  जाने  के  लिए  सज- धज  कर  खड़ी  हैं ।भाभी  इतनी  सुंदर  लग  रही  थी  की , सोनाली   अपलक  दृष्टि  से  भाभी  को देखती  रही ।फिर  अचानक  उसे  जैसे  कुछ   ध्यान  आया  हो ,मानो  वो  किसी  सपने  को  देख  कर  जागी   हो । सोनाली   बोली  भाभी, इमली  और रसगुल्ले  भाभी  ने  अपने  दोनों  फूल  जैसे  हाथ  आगे  बढाये  और  बहार  गाड़ी  की चरमराती  आवाज़  सुनाई  दी  और  .............सोनाली   की  आँख  खुल  गयी ......!

चलते-चलते = वो  कागज़  की  कश्ती,वो जादू की नाव
                      वो आँगन का झरोखा,वो बहता सा गाव
                     वो  अम्मा की साडी,वो बापू की छाँव
                      '' कोई लौटा दे वो मेरा बीता सा कल'' ।।       


hello