
पल्लव ने अधरा की कमर में चिकोटी काट दी। अधरा चिहुँक पड़ी, ''उई माँ! क्या करते हो?!'' और फिर उसको प्यार भरी मार मारने के लिए उसने अपना हाथ उठाया ही था की पल्लव भाग निकला और अधरा उसके पीछे -पीछे दौड़ने लगी |
पल्लव भागते - भागते छत्त पे निकल गया। वहां देखा तो एक चिड़िया प्यास से तड़प रही थी। वो बहुत चीं - चीं कर रही थी और नल में अपनी बीक को मार रही थी | पल्लव बैचेन हो गया और जल्दी से उसको पानी पिलाया जो उसने अपनी दोनों हथेलियों की ओक में रख रखा था। चिड़िया पहले तो उसके कंधे पे आयी फिर उसकी कलाई पर बैठकर पानी को धीरे - धीरे पीने लगी। कदाचित उसके मन से भय निकल गया था , वह चिड़िया पल्लव के साथ फ्रेंडली हो गयी थी | पल्लव ने उसका रख दिया ''चुनचुन '' उस चिड़िया चुनचुन ने अपना घर ( घोसला ) अधरा - पल्लव के घर में बना लिया था अब वो पुरे घर में चहचाती हुई घूमती रहती थी |
एक दिन अधरा का बेटा जो कुछ ही महीने का था उसको वह बेड पे अकेला छोड़ कर फोन पे बात करने में बिजी हो गयी बच्चा गिरने ही वाला था की चुनचुन ने देख लिया वो अधरा पे अपनी बीक मरने लगी ज़ोर -ज़ोर से अधरा समझ गयी की कुछ तो गड़बड़ है, उसे अपना बच्चा याद आ गया वो बैडरूम में भागी और अपने बेटे को उसने गिरने से बचा लिया | उसने फिर चुनचुन को ढेर सा प्यार किया |
चलते - चलते = दर्पण बोलै हे चकोरी
मुख अपना दिखला जा
मुझमे भांति - भांति के
मूंगे जड़े हैं अब तो गले लगा जा ||




