COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): AALAAP

Monday, May 1, 2017

AALAAP


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आलाप ने घडी की तरफ नज़र डाली, रात के दो बजे थे उसने अपने मोबाइल को थोड़ा थपथपाया इस उमीद्द से की शायद उसमे थोड़ी बैटरी  बची हो और वो थपथपाने से चल जाये शायद, पर अफसोस हुआ उसको, मोबाइल तो पहले की ही भांति बड़ी ख़ामोशी से सब देख रहा था |

अलास्का तो अब तक सो गयी होगी ''पापा '' का यानि उसका इंतज़ार करते - करते वो हमेशा अपनी मम्मी से अपना फेवरेट भजन सुन कर सोती है उसने प्रज्ञा अपनी पत्नी की आवाज़ रिकॉर्ड कर रखी है , ( अलास्का का फेवरेट भजन सुनने के  लिए यहाँ क्लिक करें ) | 
https://youtu.be/Ay4bmy0wApQ

आलाप अपने फ्रेंड की पार्टी में गया था वहीँ उसको इतनी देर हो गयी थी और वो कार की चाबी अपने उसी फ्रेंड  यहाँ कही भूल आया शायद उसको यद् ही नहीं आ रही वो घर पे फ़ोन भी नहीं कर सकता  बैटरी ख़तम हो गयी थी वो  अपने फ्रेंड के घर गया भी था मगर तब तक वो लोग घोड़े बेच कर सो चुके थे | 

उसने मन ही मन कहा " माता रानी कुछ तो मेहर कर '' माता रानी ने अपनी कृपा का हाथ उसके सर  दिया तभी वहां से एक व्हीकल गुज़रा उसने रुक कर उससे पूछा '' बाबू जी कहीं जाना है क्या ? '' हाँ भैया जाना है न ज़रा चौक तक ले चलो !! 'जी बाबू जी ' और आज आलाप ऑटो में बैठ कर खुद को राजा महसूस कर रहा था जैसे ही वो कुछ दूर गया तो बदल गरजने लगे वो परेशान हो गया प्रज्ञा उसका इंतज़ार कर रही होगी | 

हलकी फुलकी छींटो के साथ बादलों का गर्जना रुक गया पता नहीं कैसे - कैसे ख़याल उसके मन में आने लगे जैसे - तैसे वो घर पंहुचा उसने अपना कोट जैसे ही हाथ से उत्तार के कंधे पे टांगा कार की चाबी नीचे गिर गयी 

तभी उसको याद आया की शोफ़र ने कार की चाबी उसको देते वक़्त कहा था की साहब पेट्रोल डलवाना है पर उसने उसकी एक ना सुनी और कार लेकर ऐसे ही चल दिया था , वो भला हो ऑटो वाले भैया का जिन्होंने उसको घर तक पंहुचा दिया | 

चलते - चलते = रात को नींद बुलाने से आती है 
                        दिन में ना जाने कहाँ से आती है 
                        उस आसमान से पूछो जो हर पल 
                        जाग कर हमको बेफिक्रे सुलाता है || 

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