
''Devyani''
फ़ोन की बजती हुई घंटी के साथ ही देवयानी की तन्द्रा भंग हुई, फ़ोन उसकी सबसे प्यारी सहेली रेनू का था ।दोनों ने घंटो बात की इस बीच पार्थ फैक्ट्री के लिए जा चुके थे, और देवयानी को खबर भी नहीं थी ! दोनों सहेलियों की बात ''चल फिर सन्डे को मिलते हैं बाय टेक केयर ''के साथ ख़तम हुई ।तब कहीं जाकर सावित्री ने बताया की साहब फैक्ट्री के लिए चले गए हैं ।
देवयानी अपने कमरें में चली आई के तभी ''कौरिएर''की एक आवाज़ आई देवयानी बहार गयी ''कौरिएर'' लेने ये सोचती हुई की किसका है ? 'एक बड़ा प्यारा सा सुगन्धित पिंक कलर का लिफाफा' था । उस पर देवयानी का नाम लिखा था , किसका होगा ये सोचते हुए उसने लिफाफा खोला और लिफाफा उसके हाथ से छूट गया सारे शब्द बिखर गए सारा कमरा उसे घूमता हुआ नज़र आने लगा वो धम से नीचे बैठ गयी ।
तभी सावित्री ने आ कर उससे पूछा ''मेमसाब खाने में क्या बनेगा'' देवयानी के होंठो से बड़ी मुश्किल से शब्द निकले '' जो तेरी मर्जी हो बना ले '' देवयानी किसी तरह भारी कदमो से बाथरूम में गयी और वहां पानी का नल खोल दिया और बहुत तेज -तेज आवाज़ में रोने लगी बीता कल उसके सामने इस तरह खड़ा हो जायेगा उसने कभी सोचा भी नहीं था । दीपंकर और देवयानी स्कूल से लेकर collage में साथ ही पढ़ते थे , दोनों में दोस्ती से ज्यादा कुछ नहीं था , वो तो जब दीपंकर mba करने USA गए थे तभी एअरपोर्ट में देवयानी को कहकर गए थे की '' देवयानी मेरा इंतज़ार करना में लौट तुम्ही को अपना जीवन साथी बनाऊंगा '' और देवयानी ने पुरे पांच सालो का लम्बा इंतज़ार किया था इन पाच सालो में दीपंकर का कभी एक फ़ोन भी नहीं आया था !!!फिर पार्थ उसको देखने आये और देवयानी ने हाँ कर दी ।
देवयानी की आंखे रोते-रोते लाल होकर सूज गयी थी ,पर अब देवयानी को बहुत अचछा लग रहा था ।फिर उसने एक निर्णय लिया वो बहार आई फिर उसने पार्थ की पसंद की साड़ी निकली हल्का सा मकेउप किया फिरी candle जलाई और पिंक लिफाफे को जला दिया ।
चलते-चलते= में कुछ मशहूर पंक्तियाँ
aazmaya to ishq ne hame bahut
hum bhi dete rahe imthane ishq
par jab humne lena chaha sirf ek imtha
to aap khafa ho gaye ,..,..,
Khuda ne jab ishq banaya hoga,.,.,
To khud ajmaya hoga,.,.,
Hamari to aukaat hi kya hai,.,.,
Is ishq ne khuda ko bhi rulaya hoga,.,.,
देवयानी अपने कमरें में चली आई के तभी ''कौरिएर''की एक आवाज़ आई देवयानी बहार गयी ''कौरिएर'' लेने ये सोचती हुई की किसका है ? 'एक बड़ा प्यारा सा सुगन्धित पिंक कलर का लिफाफा' था । उस पर देवयानी का नाम लिखा था , किसका होगा ये सोचते हुए उसने लिफाफा खोला और लिफाफा उसके हाथ से छूट गया सारे शब्द बिखर गए सारा कमरा उसे घूमता हुआ नज़र आने लगा वो धम से नीचे बैठ गयी ।
तभी सावित्री ने आ कर उससे पूछा ''मेमसाब खाने में क्या बनेगा'' देवयानी के होंठो से बड़ी मुश्किल से शब्द निकले '' जो तेरी मर्जी हो बना ले '' देवयानी किसी तरह भारी कदमो से बाथरूम में गयी और वहां पानी का नल खोल दिया और बहुत तेज -तेज आवाज़ में रोने लगी बीता कल उसके सामने इस तरह खड़ा हो जायेगा उसने कभी सोचा भी नहीं था । दीपंकर और देवयानी स्कूल से लेकर collage में साथ ही पढ़ते थे , दोनों में दोस्ती से ज्यादा कुछ नहीं था , वो तो जब दीपंकर mba करने USA गए थे तभी एअरपोर्ट में देवयानी को कहकर गए थे की '' देवयानी मेरा इंतज़ार करना में लौट तुम्ही को अपना जीवन साथी बनाऊंगा '' और देवयानी ने पुरे पांच सालो का लम्बा इंतज़ार किया था इन पाच सालो में दीपंकर का कभी एक फ़ोन भी नहीं आया था !!!फिर पार्थ उसको देखने आये और देवयानी ने हाँ कर दी ।
देवयानी की आंखे रोते-रोते लाल होकर सूज गयी थी ,पर अब देवयानी को बहुत अचछा लग रहा था ।फिर उसने एक निर्णय लिया वो बहार आई फिर उसने पार्थ की पसंद की साड़ी निकली हल्का सा मकेउप किया फिरी candle जलाई और पिंक लिफाफे को जला दिया ।
चलते-चलते= में कुछ मशहूर पंक्तियाँ
aazmaya to ishq ne hame bahut
hum bhi dete rahe imthane ishq
par jab humne lena chaha sirf ek imtha
to aap khafa ho gaye ,..,..,
Khuda ne jab ishq banaya hoga,.,.,
To khud ajmaya hoga,.,.,
Hamari to aukaat hi kya hai,.,.,
Is ishq ne khuda ko bhi rulaya hoga,.,.,