COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): July 2012

Sunday, July 1, 2012

''Devyani'' ek laghu katha




scraps

''Devyani''  
 
गेसूओ   को   खुला   छोड़कर   देवयानी   पार्थ   के  लिये   kitchen   में    नाशता   तैयार   करने  चली  गयी, 'केसरिया  भात'   के  लिए   चावलों को  धोते  हुए  देवयानी  बीते  कल  में  खो  गयी ।''वो  पुरे  दो  महीने  बाद  गाँव  से  लौटी  थी  , सब  कुछ  कितना  बदला -बदला  सा   लग रहा  है, कहाँ  वो  उत्तर  भारत  के  एक पहाडी   गाँव की  है । जहाँ  कल-कल  कर  बहती  हुई  गंगा  युवान  रूप  में   बहती  है  जिसका   अविरल  तेज     प्रवाह  देखते  ही   बनता   है, फूल  भी   ऐसे  हैं  की  हजारों  छोटे -छोटे  फूल  मिल  कर  के एक  बड़े  फूल  को  बनाते  हैं, शहरों   में  कितने   रंग  बिरंगे  फूलों   को  इकट्ठा   करते  हैं  हैं  तब  जाकर   कहीं  एक  गुलदस्ता  तैयार  होता  हैं, और  यहाँ  किसी  को  एक  फूल  देना  मतलब  पूरा  हज़ार  फूलों   का  एक  गुलदस्ता  देना!''
फ़ोन  की  बजती  हुई  घंटी  के  साथ  ही  देवयानी  की  तन्द्रा  भंग  हुई, फ़ोन  उसकी  सबसे  प्यारी  सहेली  रेनू  का  था ।दोनों  ने  घंटो  बात  की  इस  बीच  पार्थ  फैक्ट्री  के  लिए  जा  चुके  थे, और  देवयानी  को  खबर  भी   नहीं थी ! दोनों  सहेलियों की  बात  ''चल  फिर  सन्डे  को मिलते  हैं  बाय  टेक केयर ''के  साथ  ख़तम  हुई ।तब  कहीं  जाकर  सावित्री  ने  बताया  की  साहब  फैक्ट्री  के  लिए  चले  गए  हैं ।

देवयानी  अपने   कमरें   में चली  आई  के तभी  ''कौरिएर''की एक  आवाज़ आई देवयानी बहार गयी   ''कौरिएर'' लेने  ये  सोचती  हुई  की  किसका  है ? 'एक  बड़ा  प्यारा  सा  सुगन्धित  पिंक  कलर  का  लिफाफा'  था । उस पर  देवयानी  का  नाम  लिखा  था , किसका  होगा  ये  सोचते  हुए  उसने  लिफाफा  खोला  और  लिफाफा  उसके  हाथ  से  छूट  गया  सारे  शब्द  बिखर  गए सारा  कमरा   उसे  घूमता  हुआ  नज़र  आने  लगा वो  धम  से नीचे  बैठ  गयी ।

तभी  सावित्री  ने  आ कर  उससे  पूछा   ''मेमसाब   खाने में  क्या  बनेगा''  देवयानी  के  होंठो  से  बड़ी  मुश्किल  से  शब्द  निकले  '' जो  तेरी  मर्जी  हो  बना  ले '' देवयानी  किसी  तरह  भारी   कदमो  से  बाथरूम  में  गयी  और  वहां  पानी  का  नल  खोल  दिया  और  बहुत  तेज  -तेज  आवाज़  में  रोने  लगी  बीता  कल  उसके  सामने  इस  तरह  खड़ा  हो  जायेगा  उसने   कभी  सोचा  भी  नहीं  था । दीपंकर  और  देवयानी  स्कूल   से  लेकर  collage  में  साथ  ही  पढ़ते  थे , दोनों  में  दोस्ती  से  ज्यादा  कुछ  नहीं  था , वो तो  जब  दीपंकर  mba  करने  USA  गए  थे  तभी  एअरपोर्ट  में  देवयानी  को  कहकर  गए  थे  की '' देवयानी  मेरा  इंतज़ार  करना  में  लौट  तुम्ही को  अपना  जीवन साथी  बनाऊंगा '' और  देवयानी  ने  पुरे  पांच  सालो  का  लम्बा इंतज़ार  किया  था इन  पाच  सालो  में  दीपंकर  का  कभी  एक  फ़ोन  भी  नहीं  आया  था !!!फिर  पार्थ   उसको देखने  आये  और  देवयानी  ने  हाँ  कर  दी ।

देवयानी  की  आंखे  रोते-रोते  लाल  होकर  सूज  गयी  थी ,पर  अब  देवयानी  को  बहुत  अचछा  लग  रहा था ।फिर  उसने  एक  निर्णय  लिया  वो  बहार  आई  फिर  उसने  पार्थ  की  पसंद  की  साड़ी  निकली  हल्का  सा  मकेउप  किया  फिरी  candle  जलाई  और  पिंक  लिफाफे  को  जला  दिया ।
          
चलते-चलते= में कुछ मशहूर पंक्तियाँ

aazmaya  to  ishq  ne  hame  bahut
hum bhi dete rahe imthane ishq
par jab humne lena chaha sirf ek  imtha
to aap  khafa  ho  gaye ,..,..,

Khuda ne jab ishq banaya hoga,.,.,
To khud ajmaya hoga,.,.,
Hamari to aukaat hi kya hai,.,.,
Is ishq ne khuda ko bhi rulaya hoga,.,.,

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