COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): 2018

Thursday, August 16, 2018



I Miss You image 3

आज तो नायरा की हद ही हो गयी , पीहू ने बुलाया तो भी नहीं आयी आती भी क्यों !! उसको अब्रॉड जो जाना था पियाली ने तो पहले ही कह दिया था ''i m  busy '' तो उसको कुछ ना सुझा और वो बहार झूले पे जाकर सो गयी
तभी उसकी गहरी झपकी लग गयी |

उसने देखा वो तीनो सहेलिया ब्यूटी पार्लर में बैठी हैं , और अपना मैनीक्योर पैडीक्योर करवा रही हैं तभी मॉम की आवाज़ आयी और वो जाग गयी | मुस्कराहट में उसकी पलकों पे ओस की तरह दो बूँद जम गयी | वह उठी कोल्ड वाटर की बॉटल लायी और एक सांस में पी गयी |

फिर अपनी पसंद का म्यूजिक सुना और स्नैक्स का पैकेट ओपन किया मिक्रोवेव में डाला और फिर टाइमर सेट कर दिया | तभी मोबाइल की रिंग बजी और उसकी फेवरेट सखी आ रही हैं यह सुनकर वह गार्डन गार्डन हो गयी। ...

चलते - चलते =
                        मंजिले और भी बहुत हैं मिलेंगे फिर उस जहाँ
                                   में जहाँ पर हर  मोड़ पर वही है ||
                                        परियों की तरह हस्ते हस्ते फिर मिलेंगे ||

Thursday, April 12, 2018

MYSTERY

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यह एक काल्पनिक कहानी है। ...... 

ऊंची - ऊंची चाहरदीवारी ने उस मनमोहक खूबसूरत महल को चरों तरफ से घेर रखा था , यद्यपि वो खूबसूरत महल ही आकर्षण का केंद्र नहीं था ! तथपि वहां की खूबसूरत वारिस ''अद्वितीया '' सबके मन को मोह रही थी | 
''यथा नाम तथा गुण '' वाली कहावत को चरितार्थ करती वह अद्वितीय सुंदरी, जितनी भी उसके बारें में कसीदे पढ़ लो कम ही लगते थे !!

एक बार मैं किसी काम से जा रहा था और मुझको उस महल के सामने से जाना था , तभी एक उड़ती नज़र से मैंने ''उसको '' देखा था , उसके बारें में ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी , की ''दिल में अनाहत नाद नृत्य करने लगा घंटिया सी बजने लगी '' अब तक मैंने उसके बारें में सिर्फ सुना ही था , देखा आज था और अफ़सोस इस बात का हो रहा था की में उसको अपलक दृष्टि से नयन भर देख ना सका | अब तक जो अनाहत नृत्य कर रहा था अब वहां से अचानक ठंडी आह निकल रही थी , क्योंकि मैं ''उसको '' पा नहीं सकता था | हां दोस्तों ! ये मानव जीवन की विडम्बना है , की हम उसी चीज़ को पाना चाहते है , जिसका हमको पता है की ये हमारे नसीब में नहीं है '' !!!

'' उसको '' देखने के बाद कदाचित मैं अपने लक्षय से भटक गया था , मगर कुछ देर के लिए , ज्यूँ ही मेरे पाँव में एक छोटा सा नुकीला रास्ते का पत्थर टकराया , मैं यथार्थ की  भूमि पर वापस लौट आया  | मैंने अपने ऑफिस का काम जल्दी से निपटाया और , '' उसकी '' छवि को मन में बसाये पथ पर निकल पड़ा | शाम का धुधंलका बढ़ता जा रहा था, '' सूरज ने करवट बदल ली थी , चाँद ने तारों की चादर ओढ़ ली थी '' और हम पथ पर थे , तभी मैंने किसी को झुरमुट में  जाते देखा , मुझको क्षण भर भी नहीं लगा ये पहचानने में की यह कोई तरुणी है | 

तनिक जिज्ञासा सी उत्पन्न हुई , '' कौन है " ??  यह देखने के लिए  मैं वहां उस ओर , झुरमुट की तरफ बढ़ गया , ज्यू - ज्यूँ मैं बढ़ता जा रहा था , त्यू - त्यू  आश्चर्य से मेरी दृष्टि फैलती जा रही थी  | कारण , जब मैंने झुरमुट की तरफ रुख किया था , तब वहां गहन अन्धकार सा होता देखा था , परुनु अब पूनम के चाँद सी पीली रौशनी बड़ी भली और मन को मोह लेने वाली प्रतीत हो रही थी ! तनिक दृष्टि उठा के देखी तो , मैं मंत्रमुग्ध सा देखता रह गया , उस गहराते नीले आकाश में  , पूरा चाँद खिला था | 

सामने पत्थरों के बीच एक , काला सा विशालकाय दरवाज़ा था , जैसे पुराने ज़माने में हुआ करता था , वह तरुणी उसी में प्रवेश कर गयी | और मैं भी छिपते - छिपाते उस विशालकाय दरवाज़े के अंदर  चला गया | वहां जीरो वाट का बल्ब जल रहा था , कदाचित ज़रा अजीब लगा क्यूंकि आज तो  '' LED '' का ज़माना है | वो आगे बढ़ती जा रही थी, और मैं  उसको फॉलो कर रहा था | 


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हम करीब पचास कदम चले होंगे की , सामने एक आलौकिक  प्रतिमा रखी थी , जिसकी ऊंचाई तक़रीबन दस - बारह फ़ीट होगी , उसमे से दप - दप ऊर्जा निकल रही थी , साथ ही उस जगह बड़ी शांति का अनुभव हुआ | वो तरुणी वहां , प्रतिमा के पास न खड़ी होकर अंदर गुफानुमा मुहाने के अंदर चली गयी | मैंने दो मिनट आँखे बंद करके एक गहरी सांस ली और मुझको लगा मानो सम्पूर्ण ऊर्जा मेरी देह में समा गयी हो जैसे ,  हालाँकि , मैं वहां से वापस लौट सकता था , परन्तु उत्सुकता ने मुझे उस तरुणी के पीछे जाने पर मजबूर सा कर दिया | मैंने उस गुफानुमा मुहाने में जो देखा वो में देखता ही रह गया !! वहां एक एक युवती बैठी थी , जो मेरे से पहले आयी उस तरुणी की किसी बात पर हस  और उसके मुँह से आश्चर्यजनक रूप से बेहद ख़ूबसूरत फूल झड़ रहे थे , और अचानक उस तरुणी से कुछ कहा परन्तु क्या कहा वो में सुनने में असमर्थ  रहा क्यूंकि हमारे बीच काफी फैसला था , और  मैं उसको छिप कर फॉलो कर रहा था | हाँ , तो में आपके साथ शेयर कर रहा था की जैसे ही उस तरुणी ने उस मुँह से फूल झड़ने वाली युवती से कुछ कहा , तो  युवती  की आँखों से मोती झड़ने लगे | जिसे उस तरुणी ने अपने बैग में भर लिए साथ ही वह बड़बड़ाती जा रही थी की इस मोती के तो करोडो मिलेंगे | 
                                                                                                                                                   क्रमशः चलते - चलते = 

जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती जा रही है 
यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सरकती जा रही  है 
पनपने नहीं देता कभी, बेदर्द सी उस ख़्वाहिश को
महसूस तुम्हें जो करने की, एक कोशिश होती जा रही है 

दावे करती हैं ज़िन्दगी, जो हर दिन तुझे भुलाने की ,
 एक नाकाम सी कोशिश होती जा रही है 
आहट से भी चौंक जाए, , 
मालूम नहीं क्यों ज़िन्दगी, 

मुस्कराने से भी डरती है 
मगर एक न एक दिन पाउँगा जरूर तुझको 
इस खवाहिश की कोशिश होती जा रही है 

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Wednesday, March 21, 2018

Sindoor



A single pink rose next to jewels Images


निदा ने ड्रेसिंग टेबल  रखे हुए स्टूल पे  बैठ कर ओवी के नाम का का सिन्दूर अपनी बीच की निकली हुई लम्बी सी मांग में भर लिया दप - दप करता हुआ सिन्दूर उसके दूध जैसे गोरे मुखड़े पे क़यामत ढा रहा था   तभी बहार सड़क पर किसी वेहिकल में ज़ोर का गाना बजता हुआ निकला , '' अब तेरे बिन हम जी नहीं सकते, तुम नहीं आते तो हम ... '' अपने ज़माने का काफी मशहूर गाना हुआ करता था |

मौसम बदले , दिन बदले , कई शताब्दियों ने करवट बदली , नहीं बदले तो आप और हम यह बुदबुदाते हुए निदा ने अपनी लम्बी - लम्बी भरी हुई घनी पलकों को सोनी - जागनी गुड़िया की तरह झपकाया और पास पड़े स्टफ टॉय  को अपने से  चिपका कर  उस पर अपनी साड़ी किचकिची निकल दी \

फेस बुक , का होम टटोलते हुए शायद वो किसी खास पोस्ट का इंतज़ार कर रही थी , और फिर अपनी मनमुताबिक पोस्ट के न मिल पाने की वजह से वो fed  up  हो गयी , और कुर्सी की पुश्त से सर लगा कर दोनों हाथो को अपने सिर पर बांध लिया और आँखे बंद करके वो , अपनी प्रीवियस लाइफ में चली गयी। ......

हौले - हौले से नींद ने निदा को अपने आगोश में ले लिया , उसने सपने में अपनी माँ को देखा जो उसको मनुहार करके कह रही हैं , की '' निदू ''     मेरी  प्यारी बिटिया गुनगुन गुंझिया खायेगी न ? और निदा चेतन अवस्था में लौट आयी और बोली हाँ माँ ! और ये कहते हुए उसने अपना बड़ा सा मुँह खोल दिया , और फिर जैसे ही उसको स्तिथि का भान हुआ , वो स्वयं पर ही  शर्माकर हसने लगी |

तभी जीवा का फोन आ गया , जीवा उसकी कजिन , दोनों में किसी फेमस पॉपुलर टॉपिक को लेकर थोड़ा डिस्कशन हुआ , और फिर होते - होते पति , और फिर रोज़ के खाने में क्या बने , नाश्ते में क्या बने as वेल
टिपिकल   गृहणियों  वाली बातें होते हुए , कब मिलना है ये फिक्स करते हुए दोनों ने अपनी बातों को पूर्णविराम दिया | 

तभी ओवी ने वीडियो कॉल किया और दोनों पति - पत्नी में प्रेमी जोड़े की तरह कन्वर्सेशन  हुआ , और जल्द ही वो देश लौट रहा है इस खुशखबरी के साथ दोनों ने फ्लाइंग किस देते हुए कॉल एन्ड की | और  निदा को भूक का अहसास हुआ और वो किचन में जाकर अपना मनपसंद फ़ूड प्लेट में डालने लगी | 

कहानी का अभी अंत नहीं हुआ है , ना जाने ऐसी ही कितनी निदाऔ  की कहानी अभी बाकि है , एक नयी कहानी लेकर में जल्द ही आप सब से फिर मिलती हु , ....... 


 चलते चलते = पल दो पल की ज़िंदगी कुछ यूँ
                      रहगुज़र हुई , की दोनों  हाथों से वक़्त
                      रेत की भांति निकल गया ||
                     
                        किसी का दोष नहीं किसी की खता नहीं
                        जुर्म भी अपना और सितमगर भी खुद ही ||        
                     
                        सागर से मोती मुट्ठी में भर कर
                         यूँ बिखराये मानो  बहार आ गयी हो || 



Photo of a large pink rose Images
    

hello