''Saarthak''
आज शोभा सुबह से ही बहुत बीजी थी,आज सार्थक का बर्थडे जो था |आज, सार्थक पूरे तीन साल का हो जायेगा|अभी nursery में ही था ,उसने अपने सब friends को बुलाया था |शोभा यही सब सोचे जा रही थी,उसने बर्थडे में बच्चो के लिए बहुत सारे गेम सोच रखे थे |

शाम को बहुत सारे बच्चे आ गए थे ,शोभा बहुत बीजी हो गयी क्युकी उसने भी बहुत लोगो को बुलाया था |और उसको सबसे बात भी करनी पड़ रही थी,एक बार को तो वो सार्थक को भी भूल गयी थी |क्युकी जब उसके सारे friends और उसकी सिस्टर आ जाती है तो उसे उनके सिवा कोई भी दीखाई नहीं देता |
सब बच्चे खेलने में लग गए ,आइस-पाईस खेल रहे थे |एक बच्चे को बाकि सभी बच्चो को ढूँढना था,सब बच्चे एक ग्रुप में ही थे |वो जिस जगह जा कर छुपे वहां ना जाने वो कैसे लॉक हो गए |
जो बच्चा उनको ढून्ढ रहा था ,जब बहुत देर तक उसको बच्चे नहीं मिले ,तो उसने जाकर शोभा से कहा मगर उसने हस कर कहा की मिल जायेंगे |इतने में उस बच्चे के परेंट्स आ कर उसको ले गए |
सार्थक और दुसरे बच्चे जहाँ बंद थे ,उन्होने बहुत आवाजे लगायी पर किसी ने सुना ही नहीं |ये तब की बात है जब मोबाइल फ़ोन नहीं हुआ करते थे ,सब बच्चो ने तय किया की दरवाजे को तोड़ देंगे |क्युकी वहां कोई विंडो भी नहीं थी ,सब बच्चे एक साथ दरवाजे को तोडने लगे |
थोड़ी देर में दरवाज़ा तो नहीं टुटा ,मगर लॉक खुल गया |सार्थक ने बहुत दिनों तक अपनी मम्मी से बात नहीं की शोभा को अपनी गलती का अहसास हुआ या नहीं ये तो पता नहीं ,पर उस दिन के बाद सार्थक ने अपनी बर्थडे कभी नहीं मनाई |

पर सभी बच्चे ठीक से बहार आ गए यही भगवान् की बहुत बड़ी कृपा रही |आज सार्थक अपने बच्चो का बहुत धयान रखते हैं |
चलते -चलते = ऐसी क्या ''दुआ'' दे आपको ....
जो आपके लबो पे हसी खिला दे .....
बस यही दुआ है हमारी ,उस ''रब'' से ,
की वो सितारों की रौशनी से आपकी ''तकदीर'' सजा दे |
सब बच्चे खेलने में लग गए ,आइस-पाईस खेल रहे थे |एक बच्चे को बाकि सभी बच्चो को ढूँढना था,सब बच्चे एक ग्रुप में ही थे |वो जिस जगह जा कर छुपे वहां ना जाने वो कैसे लॉक हो गए |
जो बच्चा उनको ढून्ढ रहा था ,जब बहुत देर तक उसको बच्चे नहीं मिले ,तो उसने जाकर शोभा से कहा मगर उसने हस कर कहा की मिल जायेंगे |इतने में उस बच्चे के परेंट्स आ कर उसको ले गए |
सार्थक और दुसरे बच्चे जहाँ बंद थे ,उन्होने बहुत आवाजे लगायी पर किसी ने सुना ही नहीं |ये तब की बात है जब मोबाइल फ़ोन नहीं हुआ करते थे ,सब बच्चो ने तय किया की दरवाजे को तोड़ देंगे |क्युकी वहां कोई विंडो भी नहीं थी ,सब बच्चे एक साथ दरवाजे को तोडने लगे |
थोड़ी देर में दरवाज़ा तो नहीं टुटा ,मगर लॉक खुल गया |सार्थक ने बहुत दिनों तक अपनी मम्मी से बात नहीं की शोभा को अपनी गलती का अहसास हुआ या नहीं ये तो पता नहीं ,पर उस दिन के बाद सार्थक ने अपनी बर्थडे कभी नहीं मनाई |

पर सभी बच्चे ठीक से बहार आ गए यही भगवान् की बहुत बड़ी कृपा रही |आज सार्थक अपने बच्चो का बहुत धयान रखते हैं |
चलते -चलते = ऐसी क्या ''दुआ'' दे आपको ....
जो आपके लबो पे हसी खिला दे .....
बस यही दुआ है हमारी ,उस ''रब'' से ,
की वो सितारों की रौशनी से आपकी ''तकदीर'' सजा दे |

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