'' अग्नि कांड''
(यह एक सुनी -सुनाई घटना है)
एक बार शहर में एक exhibition लगी थी |मानसी के परिवार में सब लोग देखने जाने वाले थे, जब वो सब जाने के लिए बहार निकले तो सामने ही मंदिर में आरती हो रही थी | उन्होने सोचा की आरती ले कर चलेंगे |सब मंदिर में चले गए |आरती तभी शुरू हुई थी तो उन्हे वहा कुछ देर लग गयी |आरती लेने के बाद मंदिर में खडे कुछ बच्चे कहने लगे की आज तो एक चैनल का नाम लेकर की उस पर एक मशहूर एक्टर की न्यू पिक्चर आने वाली है वो सबकी favourite पिक्चर थी |सब ने जाने से मना कर दिया ,और वापस अपने -अपने घर आ गए |अभी उनको घर आये ज्यादा देर नहीं हुई थी की बहार अचानक शोर की आवाज़ से घर के बहार आये तो उन्होने देखा की जिस exhibition में वो जाने वाले थे वहां भयंकर आग लगी है |उनके घर के सामने ही वो exhibition लगी थी वो फॅमिली आज भी इस बात को याद करके काँप जाती है,और कहती है की भगवनजी ने ही उन्हे बचाया है उसी के मंदिर में जाने पर हम फिल्म देखने के लिए रुक गए थे |सच है हमे ऊपर वाला कोई न कोई संकेत देता है |कमी है तो हमे उस संकेत को पहचानने की |
ऐसे ही दूसरी घटना एक और फॅमिली के साथ भी हुई दोनों wife ,husband exhibition देखने के लिए गए जब वो वहा पहुचे तो रास्ते मेंtraffic जाम लगा था |मीता(नाम परिवर्तित है )ने कहा की वो जब तक traffic जाम लगा है तब तक वो बस मंदिर में हाथ जोड़ कर आती हैं |वहा मंदिर में चरनामर्त लेकर आई पर तभी कोई उनसे टकरा गया और वो चरनामृत नीचे गिर गया ,उन्हे बहुत दुःख हुआ |वो ऐसे ही exhibition देखने चले गए |अभी वो देख ही रहे थे की अचानक सब भागने लगे वो भी भागने लगे रास्ते में उन्हे अग्नि मिली पर तब तक वो लोग बहार निकल आये थे |पर आते -आते मीता का हाथ अग्नि की चपेट में आ गया था |हाथ ठीक होने में थोडा टाइम जरुर लगा पर वो आज बिलकुल ठीक हैं |वो भी इसका श्रेय भागवानजी को ही देती हैं |
चलते -चलते =दुआ है रब से कभी आपको दुःख का अहसास न दे
पल कोई ऐसा न गुजरे ,जब मुश्किलों में हम साथ ना दे
किसी सांस में हम आपको भूल जाए ,रब हमे ऐसी सांस ना दे ||

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