'' किला ''
तनु ने रिंकी के मुह से सुना की वो दुसरे गृह पर जाने की बात कर रही है |अब आगे .........
रिंकी तनु के पास आई और बोली की उसे अब जाना होगा फिर वो तनु को अपने साथ एक किले में ले गयी तनु एक बात जानती थी, की वो सिर्फ एक परछाई है उसको कुछ नहीं हो सकता ,पर ये भी जानती थी की अगर उसको कुछ होगा तो उसकी परछाई लुप्त हो जायेगी |तनु उस किले में आगे बढ़ी तो उसको कुछ भी दिखाई नहीं दिया देखाई दिया तो एक विराना सा किला तभी तनु के सामने से किले की दीवार हट गयी और एक मार्ग बन गया तनु उसी में प्रवेश कर गयी ,तनु ने आगे जाकर देखा तो चारो तरफ हरियाली फैली थी |और झरने बह रहे थे बड़ी ही सुंदर जगह थी |तभी तनु ने देखा की सामने रिंकी किसी खजाने के पास खड़ी है|
तनु ने सोचा की अगर रिंकी को यहाँ पर आना था तो उसे क्यों बुलाया तनु वापस जाने के लिए मुड़ी तो रिंकी उसके सामने आ गयी और कहने लगी की आज तो तुम्हे मैने इसीलिए यहाँ भेजा था |क्युकी ये खज़ाना सिर्फ पवित्र व्यक्ति के इस किले में आने पर ही मिलता ,इसीलिए तुम्हे यहाँ भेजा था |तनु ने पूछा की तुम इसका क्या करोगे तो रिंकी ने कहा की ये हमारे साम्राज्य को हासिल करने के कार्य में लगेगा | क्रमश:
चलते -चलते =फूल बनकर मुस्कराना जिंदगी
मुस्करा के गम भुलाना जिंदगी
जीत कर कोई खुश हो तो क्या हुआ
हार कर खुशिया मानना भी जिंदगी ||
चलते -चलते =फूल बनकर मुस्कराना जिंदगी
मुस्करा के गम भुलाना जिंदगी
जीत कर कोई खुश हो तो क्या हुआ
हार कर खुशिया मानना भी जिंदगी ||

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