गतांक से आगे .....

राजन के सो जाने के बाद मौसीजी एक आदमकद अलमारी में जाकर खड़ी हो गयी और एक पुतले में तब्दील हो गयी |तनु राजन को बुलाने कमरे में आई पर राजन सो रहे थे |तनु ने मौसीजी को आवाज़ लगायी परन्तु कोई आवाज़ नहीं आई और न ही मौसीजी स्वयं दीखाई दी |तनु ने उनको इधर -उधर जाकर भी देखा पर वो दीखाई ही नहीं दी |
तनु ने राजन को बहुत उठया परन्तु जब वो नहीं उठे तो तनु जाने लगी तो एकदम राजन उठ बैठे और तनु से बोले की तुमने मुझे उठाया क्यो नहीं तनु कुछ नहीं बोली उसने सिर्फ इतना कहा की आओ चलते हैं |तो राजन बोले मौसीजी कहाँ हैं?तनु ने कहा की मैने बहुत ढूंडा है परन्तु वो दिखाई नहीं दे रही हैं |
दोनों रूम से बहार आगये |सुबह कोउनकी नींद आरती की आवाज़ से टूटी दोनों बहार आये और फिर उनका आशीर्वाद लिया |मौसीजी तनु से बोली तनु क्या तुम मुझे अपना शहर घुमोगी तनु ने कहा की आप न भी कहती तब भी में आपको अपना शहर घुमा कर लाती |तनु ने मौसीजी को बहुत जगहे दीखाई और उनको शहर का मेला भी दीखाया ,| क्रमश:

No comments:
Post a Comment