COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): mano ya na mano(xxix) part (STORY)

Wednesday, April 13, 2011

mano ya na mano(xxix) part (STORY)

        
      
गतांक से आगे......
तनु मौसीजी को विभिन्न स्थानों के दर्शन करा रही है |तनु ने कभी- कभी ये महसूस किया की मौसीजी में संवेदनाओ का थोडा आभाव है |पर वो इस पर ज्यादा ध्यान न देकर पूरे मन से उनको भ्रमण करा रही थी|   
                                   ''एक लम्हा ही काफी होता है किसी को पहचानने के लिए
                                   और कभी -कभी जिंदगी गुज़र जाती है ,पर वो एक
                                                              लम्हा नहीं मिलता''
तनु तुम यही रुको में अभी आती हूँ ऐसा कहकर मौसीजी चली गयी और एक पैड के पीछे जाकर मौसीजी ने अपने बैग में से एक diaryनिकाली और उसमे एक पंख अपने आप ही कुछ लिखने लगा |







उसके बाद वो वापस वहां आई तो तनु उन्हे कही दिखाई नहीं दी |उन्होने अपना आकर बढ़ाना शुरू किया और सब जगह देखने लगी उनको तनु आती हुई दिखाई दी वो फिर से नोर्मल हो गयी |उन्होने तनु को कहा की वो बचपन में परियो की कहानिया सुनती थी क्या वो सच होती हैं ,तनु ने कहा की नहीं ये कहानिया तो कवेल मनोरंजन के लिए होती हैं |जिंदगी बिताने के लिए बहुत सी बातो का सहारा लेना पड़ता है ये कहानिया भी उन्ही बातो का एक हिस्सा होती हैं |


Orkut Fairy Scrap: 1 फिर उन्होने कहा की तनु अगर ये बाते सच हो जाये तो?तनु उनको देखती रह गयी फिर तनु बोली की हाँ मौसीजी ये कार्य भी मानव ही कर सकते हैं रोबोट परी बनाकर फिर तनु बोली की मानव कितना भी उस तीसरी शक्ति के समक्ष हनी का दावा कर ले ,और चाहे कितना भी एक हद तक इसमे सफल क्यों न हो जाये पर वो सुपर natural पावर तक नहीं पहुच सकता |तो मौसीजी बोली की एक दिन पहुच जायेगा |तनु बोली मौसीजी मै क्षमा चाहती हूँ मै आपकी इस बात से सहमत नहीं हूँ |मौसीजी ने कहा क्यों ?तनु बोली आज इंसान चन्द्र ग्रह तक पहुच गया है क्या वहां उसे भगवान् के दर्शन हुएय |

इंसान जितना उस सुपर पावर को छुने की कोशिश करता है और एक कदम पीछे हो जाता है |इश्वर तो अनंत हैं 
''हरी अनंत हरी कथा अनंता '' हाँ हम उस पराशक्ति को प्राप्त कर सकते हैं ,अपनी भक्ति के द्वारा फिर तनु बोली की मैने सुना है की हर किसी प्राणी को इश्वर एक बार दर्शन अवश्य देते हैं बशक हम उनको पहचानने के काबिल हो |किसी न किसी रूप मै इश्वर हमे अपनी उपस्तिथि का अहसास करते रहते हैं | क्रमश:
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