COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): mano ya na mano(xxi) part (STORY)

Sunday, April 3, 2011

mano ya na mano(xxi) part (STORY)

गतांक से आगे .......
तनु प्रचीन  युग में थी ||
तनु का हिर्दय बड़ा द्रवित हो गया वो बहुत भावविह्वल हो गयी थी |कहाँ तो वो ये  सोच रही थी की वह भगवन की लिलालो का दर्शन किया|तनु जब बहुत ही दु:खी हो रही थी तो उसे ऋषिजी की आवाज़ गूंजी ''तनु तुम इतनी व्यथित नहो हो सकता है की तुम्हे दोबारा इस युग में आने का मौका मिले'' तनु ने जब ये सुना तो तो उसे थोड़ी शांति मिली |फिर ऋषिजी ने कहा तनु भगवन आज भी यहाँ मौजूद है तनु चाहे कितना भी कलयुग क्यों न आजाये परन्तु सम्पूर्ण विश्व में अयोध्या ही एक ऐसी नगरी है जहाँ पर कलयुग प्रवेश नहीं करेगा यहाँ हमेशा सतयुग का ही वास रहेगा |और इसका प्रमाण रहेगा सरयू नदी का दुग्धावल हो जाना पत्थरो को अगर हाथ से बजाओ तो उसमे से संगीत बजना और |फिर उन्होने कहा की तनु तुम्हे जो भी देखना है देख लो और फिर आगे पदार्पण करो |

तनु ने  झांकी के दर्शन किये और जैसे ही आगे बढने के लिए कदम बढ़ाये तभी न जाने कहाँ से एक आदमकद शीशा सामने आ गया और तनु उस शीशे में फस गयी |                                                                 


                                          
                                          तनु ने शीशे में से बहार आने के लिए बहुत शीशे में हाथ मारे परन्तु वह बहार नहीं
flower Orkut scrapsपायी तनु शीशे में कैद ऐसी दीखाई दे रही थी जैसे वो कोई पेंटिंग हो तनु शीशे में
से सब को देख प् रही थी पर न तो उसे कोई सुन सकता था और देख भी सिर्फ पेंटिंग के रूप में सकता था |तनु ने देखा की कोई उस शीशे को अपने साथ अपने घर ले जा रहा है तनु को वो व्यक्ति अपने घर ले गए तनु को लगा की जैसे उसके आस -पास बडे अजीब से लोग हैं तनु ने पीछे मुड कर देखा तो सिर्फ उसे हसी सुनाई दी तनु बहार आने के लिए बहुत बेचैन थी तनु ने देखा की कुछ बच्चे खेल रहे हैं और उनके हाथ में बाल है ,और वो बाल अचानक शीशे में लगी और शीशा टूट गया तनु का अस्क बिखर गया |बच्चेओ ने डर कर सारे शीशे इकट्ठे कर लिए और उनको एक अलमारी में छुपा दिया |तनु ने रिश्जी को याद किया तो रिश्जी ने तनु को ठीक कर दिया और तनु को वहां से बहार निकल लिया |तनु ने ऋषिजी से पूछा की अब वो कहाँ जाएगी तो वो बोले की ये तो समय ,नियति,प्रकृति हीतय 
                                              करती है |तनु आने वाले अपने अगले समय के बारे में बहुत चिंतित थी परन्तु
फिर उसने सोचा की चिंतित हनी से क्या लाभ जो भी होगा उसे उसका सामना करना ही होगा |क्रमश:








 

No comments:

Post a Comment

hello