COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): mano ya na mano(xxii) part (STORY)

Monday, April 4, 2011

mano ya na mano(xxii) part (STORY)

गतांक से आगे.......Tree in a Bubble
तनु ने सोचा जो होगा उसका सामना करना होगा,अभी वो ये सोच ही रही थी की उसका ध्यान अपने हाथ पर गया उसके हाथ में त्रेता युग का एक पत्थर था उसने उसे ही शिवलिंग समझ लिया |तनु शनैः - शनैः आगे बढ़  रही थी अभी वो थोडा ही आगे गयी थी की वो एक बुलबुले में कैद हो गयी,उसने देखा की एक ज्वालामुखी जैसा है पर उसमे से अग्नि नहीं निकल रही वरन बुलबुले निकल रहे हैं |तनु बुलबुले में कैद किसी पंछी की भांति उड़ रही थी हवा का झोंका कभी तनु को ऊपर ले जाता और कभी नीचे ले आता, तनु ने बचपन में जब वो छोटी थी तब कभी ऐसा खवाब देखा था परिंदों की तरह उडने का और आज वह सच में किसी परिंदे की तरह उड़ रही थी |बस फर्क सिर्फ इतना था ,परिंदे अपनी मर्ज़ी से उडते हैं और तनु को हवा के झोंको की प्रतीक्षा करनी पड़ रही थी 
     Its Freedom     Its FreedomIts Freedom

तनु बहुत देर तक तो उसमे ऐसे ही बैठी रही फिर वो सब कुछ भूल कर अपने चित्त को एकाग्र करने लगी अगग्र चित्त हो जाने पर वो ऋषिजी अपने द्वापर युग के गुरूजी का स्मरण करने लगी धीरे -धीरे जब वो बिलकुल एकाग्र हो गयी तो वह मानसिक तरंगो के द्वारा अपने गुरूजी से बात करने लगी |उसने गुरु जी को अपनी व्यथा सुनाई उन्होने तनु से कहा की तनु तुम्हारे साथ इतनी विचित्र -विचित्र बाते हो रही हैं और होती रहेंगी तुम घबराना मत षडिक रुक कर वो बोले तनु हम पांच तत्वों से बने हैं प्रथिवी ,अग्नि ,जल ,वायु ,और आकाश इन पांचो तत्वों में समता होनी बहुत जरुरी होती है संसार में बहुत कम ऐसे लोग होते हैं जिनमे ये सम मात्रा में होते हैं |तनु तुम्हे अपने जैसे चार और ढूँढने हैं वे व्यक्ति,वृक्ष ,या कोई पंची भी हो सकते हैं इनको इकठ्ठा करने पर ही तुम आगे की यात्रा कर पओगी इतना कहकर वो थोडा रुके ,इतनी में ही तनु ने पूछ लिया की वो उन्हे पहचानेगी कैसे और उसे क्या करना होगा |गुरूजी मानसिक तरंगो के माध्यम से बोले तनु जब भी तुम अपने जैसे किसी के भी संपर्क में जोगी तो तुम्हारे हाथ का निशान चमकने लगेगा फिर थोडा रुक कर बोले तनु दो तरह के लोग होते हैं एक वो जिनसे मिल कर हमारे भीतर शक्ति का संचार होता है जीने की ललक हो उठती है और एक तरह के वे होते हैं ,जिनसे मिल कर इनका विपरीत होता है |तनु जब तुम्हारा निशान चमकने लगेगा तो बाकी के साथ भी ऐसा ही होगा उसके बाद तुम सब आपस में एक दुसरे के हाथ पकड़ लेना तनु ने कहा की अगर वो पक्षी,या वृक्ष हुआ तो गुरूजी तनिक रुक कर बोले तनु ये तुम्हे तभी बताया जायेगा और इसके साथ ही तनु का सम्पर्क गुरूजी से टूट गया तनु ने देखा की वो खेतो के ऊपर से उड़ रही है इसका मतलब यहाँ कोई गांव है |तभी तनु ने देखा की और भी बुलबुले उड़ रहे हैं |
   तनु अभी कुछ सोच ही रही थी की अचानक उसे लगा की उसका निशान कुछ हल्का -हल्का सा चमक रहा है |तनु ने सोचा इसका मतलब कोई आस-पास है |तनु बुलबुले को रोकना चाह रही थी पर वो रुकेगा कैसे ये तनु नहीं जानती थी अभी तनु ने बुलबुले को रोकने का सोचा ही था की वह रुक गया |तनु उससे बहार आई अब वो निशान नहीं चमक रहा क्या वो पीछे रह गया है |तनु हरएक के पास जाकर देखने लगी की कहाँ निशान चमक रहा है तनु ने वृक्ष,खेतो में बैठे पंछियों के पास भी जाकर देखा परन्तु वो निशान नहीं चमका तनु थक कर वहीं बैठ गयी |
                                                                    क्रमश:
 

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