गतांक से आगे ...........
तनु वहीँ खेतो में थक कर बैठ गयी और तनु का ध्यान लग गया वह भगवन की भक्ति में खो गयी |और
विलग -विलग रूपों में देखने लगी

(यह omजो आप mountain पर देख रहे हैं यह मानसरोवर की फोटो है किन्ही भक्त ने ये यात्रा के दौरान ली है )
तनु ध्यान में बैठी थी उसकी मानसिक तरंगे मुनिवरो से जुड़ गयी थी वह कभी -कभी तो ऐसा महसूस करती थी की जो ज्ञानीजन गुरुजन अपने मन में गयानाअध्यन करते हैं वह जब ध्यान मुद्रा में होती है तो सुन पाती है |
तभी किसी की आवाज़ तनु के कानो में पड़ी तनु ने अपने नेत्र खोल कर देखा तो एक मोर को देखा वो अपने पंख फैओलाये खड़ा था और तनु से बात कर रहा था तनु ने पूछा की तुम बोल भी सकते हो तो मोर ने उत्तर दिया यहाँ तो सजीय व् नीर्जिव दोनों बोलते हैं |तनु ने सोचा की कहीं ये उन चारो में से तो नहीं है जिनको मुझे dhundna

है |तनु ने अपना nishan देखा की कहीं वो चमक तो नहीं रहा पर वो नहीं चमक रहा था |तनु हताश हो गयी तनु ने देखा की उसके पास जो पैड थे, वो स्वयम ही उसके लिए फल गिरने लगे पर तनु का उन्हे लेने का मन नहीं हुआ |तो वो पैड जिन्होने फल दिए थे बोले की तनु ले लो तुम्हे अच्छा लगेगा और तुम हम सब की भाषा भी समझने लगोगी |तनु अब सब की आवाज और भाषा समझ और सुन प् रही थी |सब तनु से बात करने को व्याकुल थे पर तनु का ध्यान तो अपने जैसे व्यक्तियों को ढूंडने में था |तनु को चिंतित देख वो मोर बोला की तनु तुम क्या ढूंड रही हो |हम सब तुम्हारी हेल्प करेंगे | क्रमश:
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