
गतांक से आगे .......
तनु ने सारा दिन आँचल के साथ ही बिताया ,तनु ने आँचल से पूछा की तुम्हारे हाथ में जो मार्क है तुम उसके बारे में जानती हो की इस sign का क्या मतलब होता है |आँचल ने कहा की नहीं, तनु फिर बोली की तुम मुझे कैसे जानती हो |आँचल ने कहा की वो जब सोती थी तो वो सपने में तनु को देखती थी ऐसा उसके साथ बचपन से होता आया है और उस दिन जब तनु मिली तो आँचल को कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्युकी उसको लगता था की सपने में देखि हुई बात जरुर सच्ची होगी ,और एक न एक दिन तुम मुझे अवश्य मिलोगी आँचल के हाथ में प्रज्वलित अग्नि का मार्क था ,व तनु के हाथ में प्रथिवी और प्रक्रति का सम्मलित निशान था |
तनु ने आँचल से पूछा की तुम्हारे साथ कोई आश्चर्यजनक घटना हुई है |तो तनु ने कहा की हाँ एक बार में अपने स्कूल ट्रिप पर गयी थी ,वहां हम रास्ता भटक गए थे ,चारो तरफ अँधेरा हो रहा था मैने सोचा की काश यहाँ पर मशाल होती तो वहा जंगल में जंगल वासियों ने जो मशाले लगा रखी थी ,वो अपने आप अचानक जल उठी |
तभी आँचल की आंटी का लैटर आया उन्होने उसे ले लिया आँचल वहां से उठ कर चली गयी तनु भी उसके साथ जाने लगी आँचल कही अंदर चली गयी तनु वाही कड़ी हो गयी वो कुछ इस तरह खड़ी थी की आंटी उसे नहीं देख पा रहीं थी |तब तनु ने देखा की आंटी का लैटर खुद अपने आप निकल रहा है |
तनु अब मनीषा आंटी के बारे में सोचने लगी की आखिर वो हैं कौन ?क्या वो कोई ज्ञानी कोई महत्मा हैं जो अपनी विद्या के द्वारा ये सब कर रही हैं और उनका मकसद क्या है |आँचल ने बताया था की उसके मम्मी पापा ने उसको संभालने के लिए किसी की जरुरत है ऐसा एक इश्तिहार दिया था |तभी ये मनीषा आंटी मिली हैं |आँचल उनके बीते कल के बारे में कुछ नहीं जानती वो सिर्फ इतना जानती है की मनीषा आंटी बहुत सालो से उसकी देख -भाल कर रही हैं |(आँचल का घर ) क्रमश:


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