


"ना जाने हम क्यूँ इतने बडे हो गए''
तनु ने कहा की इश्वर हमे किसी ना किसी रूप में अपना अहसास करते रहते हैं ...अब इससे आगे
तनु राजन ने तनु को पुकारा तनु ने राजन की तरफ देखा आज वो कुछ अलग से ही लग रहे थे |तनु ने राजन से पूछा की क्या बात है |तो राजन थोडा भावुक होते ही बोले की तनु हम क्यू इतने बडे हो गए |तनु पहले तो राजन की तरफ देखती रही फिर उसने राजन के शब्दों को एक माला में पिरो दिया |
'' वो बचपन के दिन भी क्या दिन थे
वो मम्मी की गोद,वो पापा के कंधे
ना पैसो की चिंता ,ना लाइफ के फंडे
ना कल का गम ,ना future की सोच ,अब कल की है सोच ,और
अधूरे से हैं सपने ,मुड कर देखा जो ज़रा हमने ,तो बहुत दूर हैं अपने
ये मंजिलो को ढूंडते कहा आ गए हम ,जाने हम क्यूँ इतने बडे हो गए
ना जाने हम क्यूँ इतने बडे हो गए ''

असली तनु तो पहले ही मुश्किलों के समंदर में थी अब उसकी परछाई को भी मुश्किलों का सामना करना होगा |
तनु ने रिंकी को मयंक से ये कहते सुना की आधा अर्थ तो पानी में डूब ही चूका है अब बाकी बची दुनिया भी प्रलय के गर्त में समां जाए उससे पहले ही हमे एक दूसरा गृह ढूंड लेना चाहिए |क्रमश:

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