COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): mano ya na mano(xxxii) part (STORY)

Tuesday, April 26, 2011

mano ya na mano(xxxii) part (STORY)


              "ना जाने हम क्यूँ इतने बडे हो गए'' 

तनु ने कहा की इश्वर हमे किसी ना किसी रूप में अपना अहसास करते रहते हैं ...अब इससे आगे 
तनु राजन ने तनु को पुकारा तनु ने राजन की तरफ देखा आज वो कुछ अलग से ही लग रहे थे |तनु ने राजन से पूछा की क्या बात है |तो राजन थोडा भावुक होते ही बोले की तनु हम क्यू इतने बडे हो गए |तनु पहले तो राजन की तरफ देखती रही फिर उसने राजन के शब्दों को एक माला में पिरो दिया |

                         '' वो बचपन के दिन भी क्या दिन थे 
                           वो मम्मी की गोद,वो पापा के कंधे  
                          ना पैसो की चिंता ,ना लाइफ के फंडे  
 ना कल का गम ,ना future की सोच ,अब कल की है सोच ,और 
अधूरे से हैं सपने ,मुड कर देखा जो ज़रा हमने ,तो बहुत दूर हैं अपने   
ये मंजिलो को ढूंडते कहा आ गए हम ,जाने हम क्यूँ इतने बडे हो गए 
                         ना जाने हम क्यूँ इतने बडे हो गए ''
scraps orkut


तनु रिंकी और मयंक के बारे में अभी सोच ही रही थी की रिंकी उसके सामने आकर खड़ी हो गयी और तनु से बोली की तनु तुम आज रात को हमारे साम्राज्य में वेश बदल कर जाओगी|तनु ने कहा की वो ऐसा नहीं कर सकती क्युकी उसको एक बहुत जरुरी कार्य से बहार जाना है |तो रिंकी ने उससे कहा की नहीं तुम्हे जाना ही होगा नहीं तो हम राजन को भेज देंगे तनु राजन को किसी भी मुश्किल में नहीं देख सकती थी तो वह सहर्ष ही तैयार हो गयी |तनु ने पूछा की उससे क्या करना होगा तब रिंकी ने उत्तर दिया की तुम्हे सर्पलोक के साम्राज्य में जाकर वहा कितनी सेना है इसका पता लगाना होगा |

असली तनु तो पहले ही मुश्किलों के समंदर में थी अब उसकी परछाई को भी मुश्किलों का सामना करना होगा |
तनु ने रिंकी को मयंक से ये कहते सुना की आधा अर्थ तो पानी में डूब ही चूका है अब बाकी बची दुनिया भी प्रलय के गर्त में समां जाए उससे पहले ही हमे एक दूसरा गृह ढूंड लेना चाहिए |क्रमश:

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