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Thursday, August 16, 2018



I Miss You image 3

आज तो नायरा की हद ही हो गयी , पीहू ने बुलाया तो भी नहीं आयी आती भी क्यों !! उसको अब्रॉड जो जाना था पियाली ने तो पहले ही कह दिया था ''i m  busy '' तो उसको कुछ ना सुझा और वो बहार झूले पे जाकर सो गयी
तभी उसकी गहरी झपकी लग गयी |

उसने देखा वो तीनो सहेलिया ब्यूटी पार्लर में बैठी हैं , और अपना मैनीक्योर पैडीक्योर करवा रही हैं तभी मॉम की आवाज़ आयी और वो जाग गयी | मुस्कराहट में उसकी पलकों पे ओस की तरह दो बूँद जम गयी | वह उठी कोल्ड वाटर की बॉटल लायी और एक सांस में पी गयी |

फिर अपनी पसंद का म्यूजिक सुना और स्नैक्स का पैकेट ओपन किया मिक्रोवेव में डाला और फिर टाइमर सेट कर दिया | तभी मोबाइल की रिंग बजी और उसकी फेवरेट सखी आ रही हैं यह सुनकर वह गार्डन गार्डन हो गयी। ...

चलते - चलते =
                        मंजिले और भी बहुत हैं मिलेंगे फिर उस जहाँ
                                   में जहाँ पर हर  मोड़ पर वही है ||
                                        परियों की तरह हस्ते हस्ते फिर मिलेंगे ||

Thursday, April 12, 2018

MYSTERY

Love Orkut Scraps, love quotes graphics and comments


यह एक काल्पनिक कहानी है। ...... 

ऊंची - ऊंची चाहरदीवारी ने उस मनमोहक खूबसूरत महल को चरों तरफ से घेर रखा था , यद्यपि वो खूबसूरत महल ही आकर्षण का केंद्र नहीं था ! तथपि वहां की खूबसूरत वारिस ''अद्वितीया '' सबके मन को मोह रही थी | 
''यथा नाम तथा गुण '' वाली कहावत को चरितार्थ करती वह अद्वितीय सुंदरी, जितनी भी उसके बारें में कसीदे पढ़ लो कम ही लगते थे !!

एक बार मैं किसी काम से जा रहा था और मुझको उस महल के सामने से जाना था , तभी एक उड़ती नज़र से मैंने ''उसको '' देखा था , उसके बारें में ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी , की ''दिल में अनाहत नाद नृत्य करने लगा घंटिया सी बजने लगी '' अब तक मैंने उसके बारें में सिर्फ सुना ही था , देखा आज था और अफ़सोस इस बात का हो रहा था की में उसको अपलक दृष्टि से नयन भर देख ना सका | अब तक जो अनाहत नृत्य कर रहा था अब वहां से अचानक ठंडी आह निकल रही थी , क्योंकि मैं ''उसको '' पा नहीं सकता था | हां दोस्तों ! ये मानव जीवन की विडम्बना है , की हम उसी चीज़ को पाना चाहते है , जिसका हमको पता है की ये हमारे नसीब में नहीं है '' !!!

'' उसको '' देखने के बाद कदाचित मैं अपने लक्षय से भटक गया था , मगर कुछ देर के लिए , ज्यूँ ही मेरे पाँव में एक छोटा सा नुकीला रास्ते का पत्थर टकराया , मैं यथार्थ की  भूमि पर वापस लौट आया  | मैंने अपने ऑफिस का काम जल्दी से निपटाया और , '' उसकी '' छवि को मन में बसाये पथ पर निकल पड़ा | शाम का धुधंलका बढ़ता जा रहा था, '' सूरज ने करवट बदल ली थी , चाँद ने तारों की चादर ओढ़ ली थी '' और हम पथ पर थे , तभी मैंने किसी को झुरमुट में  जाते देखा , मुझको क्षण भर भी नहीं लगा ये पहचानने में की यह कोई तरुणी है | 

तनिक जिज्ञासा सी उत्पन्न हुई , '' कौन है " ??  यह देखने के लिए  मैं वहां उस ओर , झुरमुट की तरफ बढ़ गया , ज्यू - ज्यूँ मैं बढ़ता जा रहा था , त्यू - त्यू  आश्चर्य से मेरी दृष्टि फैलती जा रही थी  | कारण , जब मैंने झुरमुट की तरफ रुख किया था , तब वहां गहन अन्धकार सा होता देखा था , परुनु अब पूनम के चाँद सी पीली रौशनी बड़ी भली और मन को मोह लेने वाली प्रतीत हो रही थी ! तनिक दृष्टि उठा के देखी तो , मैं मंत्रमुग्ध सा देखता रह गया , उस गहराते नीले आकाश में  , पूरा चाँद खिला था | 

सामने पत्थरों के बीच एक , काला सा विशालकाय दरवाज़ा था , जैसे पुराने ज़माने में हुआ करता था , वह तरुणी उसी में प्रवेश कर गयी | और मैं भी छिपते - छिपाते उस विशालकाय दरवाज़े के अंदर  चला गया | वहां जीरो वाट का बल्ब जल रहा था , कदाचित ज़रा अजीब लगा क्यूंकि आज तो  '' LED '' का ज़माना है | वो आगे बढ़ती जा रही थी, और मैं  उसको फॉलो कर रहा था | 


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हम करीब पचास कदम चले होंगे की , सामने एक आलौकिक  प्रतिमा रखी थी , जिसकी ऊंचाई तक़रीबन दस - बारह फ़ीट होगी , उसमे से दप - दप ऊर्जा निकल रही थी , साथ ही उस जगह बड़ी शांति का अनुभव हुआ | वो तरुणी वहां , प्रतिमा के पास न खड़ी होकर अंदर गुफानुमा मुहाने के अंदर चली गयी | मैंने दो मिनट आँखे बंद करके एक गहरी सांस ली और मुझको लगा मानो सम्पूर्ण ऊर्जा मेरी देह में समा गयी हो जैसे ,  हालाँकि , मैं वहां से वापस लौट सकता था , परन्तु उत्सुकता ने मुझे उस तरुणी के पीछे जाने पर मजबूर सा कर दिया | मैंने उस गुफानुमा मुहाने में जो देखा वो में देखता ही रह गया !! वहां एक एक युवती बैठी थी , जो मेरे से पहले आयी उस तरुणी की किसी बात पर हस  और उसके मुँह से आश्चर्यजनक रूप से बेहद ख़ूबसूरत फूल झड़ रहे थे , और अचानक उस तरुणी से कुछ कहा परन्तु क्या कहा वो में सुनने में असमर्थ  रहा क्यूंकि हमारे बीच काफी फैसला था , और  मैं उसको छिप कर फॉलो कर रहा था | हाँ , तो में आपके साथ शेयर कर रहा था की जैसे ही उस तरुणी ने उस मुँह से फूल झड़ने वाली युवती से कुछ कहा , तो  युवती  की आँखों से मोती झड़ने लगे | जिसे उस तरुणी ने अपने बैग में भर लिए साथ ही वह बड़बड़ाती जा रही थी की इस मोती के तो करोडो मिलेंगे | 
                                                                                                                                                   क्रमशः चलते - चलते = 

जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती जा रही है 
यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सरकती जा रही  है 
पनपने नहीं देता कभी, बेदर्द सी उस ख़्वाहिश को
महसूस तुम्हें जो करने की, एक कोशिश होती जा रही है 

दावे करती हैं ज़िन्दगी, जो हर दिन तुझे भुलाने की ,
 एक नाकाम सी कोशिश होती जा रही है 
आहट से भी चौंक जाए, , 
मालूम नहीं क्यों ज़िन्दगी, 

मुस्कराने से भी डरती है 
मगर एक न एक दिन पाउँगा जरूर तुझको 
इस खवाहिश की कोशिश होती जा रही है 

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Wednesday, March 21, 2018

Sindoor



A single pink rose next to jewels Images


निदा ने ड्रेसिंग टेबल  रखे हुए स्टूल पे  बैठ कर ओवी के नाम का का सिन्दूर अपनी बीच की निकली हुई लम्बी सी मांग में भर लिया दप - दप करता हुआ सिन्दूर उसके दूध जैसे गोरे मुखड़े पे क़यामत ढा रहा था   तभी बहार सड़क पर किसी वेहिकल में ज़ोर का गाना बजता हुआ निकला , '' अब तेरे बिन हम जी नहीं सकते, तुम नहीं आते तो हम ... '' अपने ज़माने का काफी मशहूर गाना हुआ करता था |

मौसम बदले , दिन बदले , कई शताब्दियों ने करवट बदली , नहीं बदले तो आप और हम यह बुदबुदाते हुए निदा ने अपनी लम्बी - लम्बी भरी हुई घनी पलकों को सोनी - जागनी गुड़िया की तरह झपकाया और पास पड़े स्टफ टॉय  को अपने से  चिपका कर  उस पर अपनी साड़ी किचकिची निकल दी \

फेस बुक , का होम टटोलते हुए शायद वो किसी खास पोस्ट का इंतज़ार कर रही थी , और फिर अपनी मनमुताबिक पोस्ट के न मिल पाने की वजह से वो fed  up  हो गयी , और कुर्सी की पुश्त से सर लगा कर दोनों हाथो को अपने सिर पर बांध लिया और आँखे बंद करके वो , अपनी प्रीवियस लाइफ में चली गयी। ......

हौले - हौले से नींद ने निदा को अपने आगोश में ले लिया , उसने सपने में अपनी माँ को देखा जो उसको मनुहार करके कह रही हैं , की '' निदू ''     मेरी  प्यारी बिटिया गुनगुन गुंझिया खायेगी न ? और निदा चेतन अवस्था में लौट आयी और बोली हाँ माँ ! और ये कहते हुए उसने अपना बड़ा सा मुँह खोल दिया , और फिर जैसे ही उसको स्तिथि का भान हुआ , वो स्वयं पर ही  शर्माकर हसने लगी |

तभी जीवा का फोन आ गया , जीवा उसकी कजिन , दोनों में किसी फेमस पॉपुलर टॉपिक को लेकर थोड़ा डिस्कशन हुआ , और फिर होते - होते पति , और फिर रोज़ के खाने में क्या बने , नाश्ते में क्या बने as वेल
टिपिकल   गृहणियों  वाली बातें होते हुए , कब मिलना है ये फिक्स करते हुए दोनों ने अपनी बातों को पूर्णविराम दिया | 

तभी ओवी ने वीडियो कॉल किया और दोनों पति - पत्नी में प्रेमी जोड़े की तरह कन्वर्सेशन  हुआ , और जल्द ही वो देश लौट रहा है इस खुशखबरी के साथ दोनों ने फ्लाइंग किस देते हुए कॉल एन्ड की | और  निदा को भूक का अहसास हुआ और वो किचन में जाकर अपना मनपसंद फ़ूड प्लेट में डालने लगी | 

कहानी का अभी अंत नहीं हुआ है , ना जाने ऐसी ही कितनी निदाऔ  की कहानी अभी बाकि है , एक नयी कहानी लेकर में जल्द ही आप सब से फिर मिलती हु , ....... 


 चलते चलते = पल दो पल की ज़िंदगी कुछ यूँ
                      रहगुज़र हुई , की दोनों  हाथों से वक़्त
                      रेत की भांति निकल गया ||
                     
                        किसी का दोष नहीं किसी की खता नहीं
                        जुर्म भी अपना और सितमगर भी खुद ही ||        
                     
                        सागर से मोती मुट्ठी में भर कर
                         यूँ बिखराये मानो  बहार आ गयी हो || 



Photo of a large pink rose Images
    

Wednesday, June 21, 2017

udhar ki zindgi

Red roses in the rain Images

चेतना ने मैगजीन के पन्नो को उलट कर एक तरफ रख दिया फिर रिमोट उठाकर न्यूज़ चैनल लगा दिया और फिर बुदबुदाई की कोई भी खास खबर नहीं है | फिर उठकर बालकनी में चली गयी जस्ट अभी बरखा हो कर चुकी थी मौसम का मिजाज बड़ा खुशनुमा था उसने अपने दोनों हाथों को फैला दिया और आंखे बंद करके ज़ोर की सांस ली मानो  वो इस मौसम की खूबसूरती और खुशनुमा मिज़ाज़ को अपने अंदर समा लेना चाहती हो |

बरखा के कारन गुलमोहर के पुष्प पृथिवी का चुम्बन कर रहे थे फ़िज़ा में गीली मिटटी और फूलों की सुगंध बिखरी पड़ी थी ज्यू - ज्यूँ  रात  स्वीट सिक्सटीन की हो रही थी त्यू - त्यु  ''रात की रानी'' अपनी खुशबू को महका रही थी | 

चेतना तो संसार को त्याग ही रही थी , पर तनय ने उसको ऐसा करने ही नहीं दिया वो फ्लैशबैक में चली गयी विनय के द्वारा उसका प्रेम ठुकरा देने पर उसने ऐसा निर्णय लिया था | और आज वो तनय के साथ उधार  की ज़िंदगी जी रही है क्युकी तनय ने उसको बहुत सपोर्ट किया था इसलिए उसने ये ज़िंदगी उसके नाम कर दी और वो यही समझती है की तनय की दी हुई उधार  की ज़िंदगी को वो जी रही है | और यही सब सोचते हुए वो किचन की तरफ चल दी अपने लिए कुछ टेस्टी बनाने हाँ वो बना रही चिल्ली पोटैटो (इसकी रेसिपी जानने के लिए यहाँ क्लिक करें https://www.youtube.com/watch?v=bCSMZ6QzGrA )

चेतना ने कुकिंग करते वक़्त सोचा भले ही वो किसी की दी हुई ज़िंदगी जी रही है पर जीवन में उसके बहार तो है और वह एक तृप्त मुस्कान के साथ अपने काम मशगूल हो गयी | आपको मेरी कहानी लगी ? अगर अछि लगी हो तो प्लीज कम्मेंट ज़रूर करियेगा धन्यवाद् |

चलते - चलते = 

राज़ खोल देते हैं अक्सर  ये इशारे 
कितनी मासूम होती है ये , प्यार भरे लफ्ज़ो की मुस्कान || 

हमसे यूँ ऐसे  किनारा न करो,
अपनी सूरत को रोज निहारा न करो,
आओ देखो मेरी नजरों से खुद को,
आइना हूँ मैं तेरा मुझसे यूँ किनारा न करो ।


A photo of two brilliant pink roses Images

Monday, May 15, 2017

Pallav- Adhraa

A basket of flowers Images
पल्लव ने अधरा की कमर में  चिकोटी काट दी। अधरा चिहुँक पड़ी, ''उई माँ! क्या करते हो?!'' और फिर उसको प्यार  भरी मार मारने  के लिए  उसने अपना हाथ उठाया ही था की पल्लव  भाग निकला और अधरा उसके पीछे -पीछे दौड़ने लगी |

पल्लव भागते - भागते छत्त पे निकल गया। वहां देखा तो एक चिड़िया प्यास से तड़प रही थी। वो बहुत चीं - चीं कर रही थी और नल में अपनी बीक को मार रही थी | पल्लव बैचेन हो गया और जल्दी से उसको पानी पिलाया जो उसने अपनी दोनों हथेलियों की ओक में रख रखा था। चिड़िया पहले तो उसके कंधे पे आयी फिर उसकी कलाई पर बैठकर पानी को धीरे - धीरे पीने लगी। कदाचित उसके मन से भय निकल गया था , वह चिड़िया पल्लव के साथ  फ्रेंडली हो गयी थी | पल्लव ने उसका  रख दिया  ''चुनचुन '' उस चिड़िया चुनचुन ने अपना घर ( घोसला ) अधरा - पल्लव के घर में बना लिया था अब वो पुरे घर में चहचाती हुई घूमती रहती थी | 

एक दिन अधरा का बेटा जो कुछ ही महीने  का था उसको वह बेड पे अकेला छोड़ कर फोन पे बात करने में बिजी हो गयी बच्चा गिरने ही वाला था की  चुनचुन ने देख लिया वो अधरा पे अपनी बीक मरने लगी ज़ोर -ज़ोर से अधरा समझ गयी की कुछ तो गड़बड़ है, उसे अपना बच्चा याद आ गया वो बैडरूम में भागी और अपने बेटे को उसने गिरने से बचा लिया | उसने फिर चुनचुन को ढेर सा प्यार किया | 

चलते - चलते = दर्पण बोलै हे चकोरी
                       मुख अपना दिखला जा
                       मुझमे भांति - भांति के
                       मूंगे जड़े हैं अब तो गले लगा जा || 


Tulips and roses Images

Thursday, May 11, 2017

Mahula



Have a great Autumn  Images


महुला ने थर्मामीटर से अपना ट्रम्प्रेचरे चेक किया फिर बोली hmmmm नार्मल है, और फिर वो अपने में मस्त हो गयी | उसका थोड़ा मन सुबह से ही उदास था जिस वजह से उसको थोड़ी हरारत सी फील हो रही थी उसने अपने मन में  तरह घुमड़ते विचारों और भावो को दर किनार कर दिया और किचन में जाकर ठंडा मैंगो  शेक बना लायी |
(मैंगो शेक बनाने की इजी रेसिपी के लिए यहाँ क्लिक करें
https://www.youtube.com/watch?v=XM9pOGNtXHo)

उसने  मैंगो शेक का सिप भरते हुए अपनी डायरी खोली फर्स्ट पेज ही उसकी और सिद्धर्थ की फोटो  लगी थी हस्ती मुस्कराती सिद्द कैसे उसको प्यार भरी नज़रों से तक रहे थे | एक वही है उसने खुद को ही दोष दिया  जो उनको भुलाये बैठी है | ना चाहते हुए भी उसकी उँगलियाँ मोबाइल पे अटखेलियां  लगी और फिर उसने सिद्धार्थ का नंबर मिला दिया उधर से सिद्द की आवाज़ आयी हाँ महुला मैं आज की फ्लाइट से आ रहा हु तुम्हारे पास मेरी फेवरेट कलर की साड़ी पहन कर तैयार रहना हम आज अपने फेवरेट रेस्टॉरेंट  चलेंगे |

महुला का दिल बल्लियों उछलने लगा एक  तो उसे लगा बहार ही आ जायेगा और फिर नाचते मयूर की तरह वो ड्रेसअप  होने चली गयी |

चलते - चलते =नीलम से ज़िंदगी हो गयी है मेरी
                       जो किसी को सूट ही नहीं करता | |
                     
                        दो अल्फ़ाज़ क्या कह दिए मैंने
                        वो बेगाने हो गए ||

                        हम दोनों ही अनजाने थे
                        मगर एक नज़र देखते ही
                         सदियों की  पहचान निकल आयी ||
                   
                         उनका आना ना हुआ
                         हमारा बुलाना  ना हुआ
                         फासला इतना की
                         दोनों से मिटाना ना हुआ ||

                        कभी धड़कते दिल से पूछो
                       क्या कभी हम मिले थे
                       वो  कहेगा की तुम जुदा ही कब हुए थे ||
Happy Autumn  Images

Monday, May 1, 2017

AALAAP


Sweet Dreams Images

आलाप ने घडी की तरफ नज़र डाली, रात के दो बजे थे उसने अपने मोबाइल को थोड़ा थपथपाया इस उमीद्द से की शायद उसमे थोड़ी बैटरी  बची हो और वो थपथपाने से चल जाये शायद, पर अफसोस हुआ उसको, मोबाइल तो पहले की ही भांति बड़ी ख़ामोशी से सब देख रहा था |

अलास्का तो अब तक सो गयी होगी ''पापा '' का यानि उसका इंतज़ार करते - करते वो हमेशा अपनी मम्मी से अपना फेवरेट भजन सुन कर सोती है उसने प्रज्ञा अपनी पत्नी की आवाज़ रिकॉर्ड कर रखी है , ( अलास्का का फेवरेट भजन सुनने के  लिए यहाँ क्लिक करें ) | 
https://youtu.be/Ay4bmy0wApQ

आलाप अपने फ्रेंड की पार्टी में गया था वहीँ उसको इतनी देर हो गयी थी और वो कार की चाबी अपने उसी फ्रेंड  यहाँ कही भूल आया शायद उसको यद् ही नहीं आ रही वो घर पे फ़ोन भी नहीं कर सकता  बैटरी ख़तम हो गयी थी वो  अपने फ्रेंड के घर गया भी था मगर तब तक वो लोग घोड़े बेच कर सो चुके थे | 

उसने मन ही मन कहा " माता रानी कुछ तो मेहर कर '' माता रानी ने अपनी कृपा का हाथ उसके सर  दिया तभी वहां से एक व्हीकल गुज़रा उसने रुक कर उससे पूछा '' बाबू जी कहीं जाना है क्या ? '' हाँ भैया जाना है न ज़रा चौक तक ले चलो !! 'जी बाबू जी ' और आज आलाप ऑटो में बैठ कर खुद को राजा महसूस कर रहा था जैसे ही वो कुछ दूर गया तो बदल गरजने लगे वो परेशान हो गया प्रज्ञा उसका इंतज़ार कर रही होगी | 

हलकी फुलकी छींटो के साथ बादलों का गर्जना रुक गया पता नहीं कैसे - कैसे ख़याल उसके मन में आने लगे जैसे - तैसे वो घर पंहुचा उसने अपना कोट जैसे ही हाथ से उत्तार के कंधे पे टांगा कार की चाबी नीचे गिर गयी 

तभी उसको याद आया की शोफ़र ने कार की चाबी उसको देते वक़्त कहा था की साहब पेट्रोल डलवाना है पर उसने उसकी एक ना सुनी और कार लेकर ऐसे ही चल दिया था , वो भला हो ऑटो वाले भैया का जिन्होंने उसको घर तक पंहुचा दिया | 

चलते - चलते = रात को नींद बुलाने से आती है 
                        दिन में ना जाने कहाँ से आती है 
                        उस आसमान से पूछो जो हर पल 
                        जाग कर हमको बेफिक्रे सुलाता है || 

Sweet Dreams Images

Wednesday, April 26, 2017

Dakshina


Have a great day!! Images

'' शनिदान महादान '' बहार से आवाज़ आयी दक्षिणा का मुँह बन गया ''अच्छा बिज़नेस चल रहा है ये '' एक दिन मुझे ही ले जायेगा बाल्टी में डाल के अंगारे की तरह तप गयी वो कदाचित भावावेश में उसके कपोल फूलने और पिचकने लगे, अगर एक बार ये और बोलै ना तो...  तो...  तो.. मैं इसके ऊपर.... तभी उसने खुद को रोका RELAX BABY और फिर वो आँखों को बंद करके बैठ गयी तनिक उसके मन में ये भाव उत्पन्न हुआ की आँखों को झालरो में छिपा लिया है, और उसने अपनी श्वेत मोती नुमा दन्त पंक्ति को अपने लालिमा युक्त ओठ में से बहार चमका दिया |

''डार्लिंग '' ये सुनकर उसने अपनी सीपनुमा आँखों को पलकों रूपी झालर से बहार निकला L.E.D पर एक चैनल पे एक बहुचर्चित सीरियल चल रहा था उसी के ये शब्द थे | वो उठकर बहार आ गयी अपने लॉन में उसका वो सिर्फ और सिर्फ उसका लॉन है यहाँ लुक आफ्टर करने वाले माली के सिवा यहाँ कोई नहीं आता वहां सारे के सारे काले गुलाब लगे हैं !! रंगहीन या यूँ कह लीजिये की वो काले गुलाब सृष्टि के समस्त रंगो को अपने अंदर समेटे हे हैं | ( ब्लैक कलर में समस्त रंगो को अपने अंदर समा लेने का स्टैमिना होता है ) |

Eyes image 6 Images


वो उठी फ्रेषरूम में जाकर उसने अपने फेस पे हैंड शावर से अपने फेस को गीला किया तब तक, जब तक की उसकी बैक बोन में ठण्ड के मारे सिरहन नहीं दौड़ गयी !  उसने  किचन में जाकर इलेक्ट्रिक केतली में ब्लैक कॉफ़ी के लिए पानी बॉयल्ड करने के लिए रख दिया, जब केतली की विसिल बजने लगी तो उसने एक बड़ा कप उठा लिया जिसके हैंडल पे एक नाचती हुई लड़की बनी थी उसमे उसने एक बड़ा चम्मच काफी डाली और फिर बॉयल्ड पानी डालकर चुस्कियां भरते हुए लॉन की चेयर पे बैठ गयी |

यकायक मेघ घुमड़ - घुमड़ कर आकर विशाल गगन में छाने लगे और बरखा की मोती जैसी मोटी - मोटी बूंदे गिरने लगी ''हे राम जी '' उसके मुँह से निकला मैं तो पूरी भीग जाउंगी | और वो कॉफी  की ट्रे को छाते की तरह ढक कर अंदर आयी अपने रूम में | सामने की कोठी में में  नयन जो हर वक़्त टेलिस्कोप से आकाश में देखता रहता था और कभी कभार मूड फ्रेश करने के लिए पड़ोसियों के आँगन और यदा -कदा उनके लिविंग रूम और बेड रूम में भी झांक लेता था, वो दक्षिणा को सर पे कॉफ़ी की ट्रे ढक कर ले जाते देख अपना पेट पकड़ कर हसने लगा और हँसते - हँसते चारों तरफ को गोल - गोल घूम गया हाँ ! यक़ीनन आप सही समझे वो सुबह से दक्षिणा को वाच कर रहा था |

''नयन '' तभी माँ ने उसको आवाज़ लगायी नयन भागा  - भागा नीचे आया सामने तमन्ना खड़ी  थी नयन ने तमन्ना से कहा तुम यहाँ ? हाँ मैं वो बोली तुम collage क्यों नहीं आ रहे ? और सवाल दागते - दागते वो सोफे पे बेलीज़ उतर कर आलथी -पालथी मार के बैठ गयी | नयन बोला माँ से को कुछ मत बताना प्लीज - प्लीज , '' ठीक है कुछ नहीं बताउंगी पर इसकी पेनल्टी लगेगी '' वो बोलै जो तुम चाहो तमन्ना बोली कोल्ड कॉफ़ी विथ आइसक्रीम ( कोल्ड कॉफ़ी बनाने की रेसिपी  कृपया यहाँ क्लिक करे https://youtu.be/VvmnVE1LzcE ) पक्का done अब तुम जाओ यहाँ से | और उसके भेज कर वो सोने चला गया  क्रमश: 

my other  blogs links :
http://ritumohanchatptacollection.blogspot.in/
http://isikanaam.blogspot.in/
http://ritumohan-lifemoments.blogspot.in/

चलते - चलते = मुझमे तुम्हारी चाहत के सिवा कुछ भी नहीं
                       चाहों तो मेरी धड़कनो की तलाशी ले लो ||

                       तुझसे दूर रहकर कुछ यूँ पल बिताये मैंने
                       ना लब हिले फिर भी हर पल तुझको पुकारा मैंने ||

Have a great day Images

Wednesday, April 19, 2017

pankhuri

A rose to say I'm thinking of you  Images

पंखुरी जैसे ही टेरस  पे आयी उसने दो पक्षियों  को आपस में  बतियाते देखा वो अपनी भाषा में बातें कर रहे थे शायद वो कुछ एक दूसरे को अपने भाव व्यक्त कर रहे थे | उसको अपना बचपन याद आ गया जब वो अपनी सखी अपनी क्लासमेट जो प्री क्लास्सेस में से ही उसके  साथ थी उसकी याद हो आयी वो तनिक भावुक हो गयी वो या कदाचित  विह्वल  हो गयी थी   |

तभी जब वो अपनी यादों  के बबल्स को उड़ा रही थी शनैः ही उसकी तन्द्रा भांग हुई तब जबकि पक्षियो ने अपनी नन्ही बाँहों को फैला कर उड़ना शुरू किया | गगन कुछ मटमैला हो रहा था निश्चय ही धूल का गुबार उड़ने वाला है | यह सोचकर वो, तनिक उसके माथे पे लकीरे खींच आयी थी उसने झट - पट  सारे सूखे हुए कपड़ों को एकत्रित करके उनको अपने रूम में ले आयी |

''दीदी '' तभी बहार से आवाज़ आयी  'हाँ ' ये बोलते हुए वो बाहर आयी '' काका '' बोले बिटिया खाने में क्या बनेगा ? वो बोली कुछ भी बना लो  काका आप तो हमारी पसंद जानते हो ! वो तो ठीक है बिटिया काका बोले पर आज तुम्हारा क्या खाने का मन  है ये मुझको कैसे पता चलेगा ?

पंखुरी एक ठहरी हुई मुस्कान के साथ बोली, ठीक है आप आलू के पराठे और कड़ाही पनीर बना लीजिये साथ में स्वीटडिश के लिए रसमलाई रखी ही है हमारे लिए काफी है , ''और हाँ '' आपका जो मन हो वो बनाइये और खाइये'' हाँ दीदी ये भी कोई कहने की बात है'' काका  बोले |

लंच पंखुरी ने अकेले ही किया , अभिलाष  लंच टाइम में  अपने ऑफिस में होते हैं | पंखुरी अपने मोबाइल फ़ोन  बिजी हो गयी , तभी उसको एक साया दिखाई दिया वो विंडो के पास आयी उसने बाहर देखा तो उसको एक सेल्समैन दिखाई दिया ! वो बेहद आशचर्य चकित रह गयी की सोसायटी की सिक्योरिटी को पार करके ये यहाँ पंद्रहवी मंजिल तक कैसे आ गया ? उसके लिए ये बात बहुत चौकाने वाली थी !!

पंखुरी ने उसके लिए ना तो डोर खोला और ना ही उससे कुछ  बात की | उसने अपना ध्यान सेल्समेन से हटा कर मोबाइल गेम  दिया | तभी उसकी सहेली ''मुरलिका '' का फ़ोन आया उससे पहले तो दोनों हाय -हेलो हुई फिर दोनों अपनी अतरंग बातों  में मशगूल हो गयी |

पंखुरी ने मुरलिका से बहुत बाते की पर उसका केंद्रबिंदु तो अभिलाष थे,  बहार से आवाज़ आयी दीदी साहब आ गए हैं वो लगभग भागती  हुई सी आयी उसको आता देखकर अभिलाष बोले देखो पंखुरी अपना सरप्राइज वो ''धक् ''  गयी पापा !!! आप और वो अपने पापा की बाहों में झूल गयी कदाचित किसी अल्हड की तरह :}

चलते चलते = करीब आना भी चाहुँ तो
                     आना नहीं होगा
                     दूर जाना भी चाहुँ तो
                     जाना नहीं होगा
                      ये वो रिश्ता है
                      जिसे आज़माना भी चाहुँ  तो
                      आज़माना नहीं होगा
                      यह तो सिलसिला है
                      तेरे मेरे प्यार का
                       जिसे ठुकराना भी चाहुँ
                       तो ठुकराना नहीं होगा || 

With friendship this rose is sent your way, I'm hope you have a wonderful day!  Images








Tuesday, February 7, 2017

Aur wo chala gaya


A fairy walking across flowers Images

                                                            ''  Aur wo chala gaya ''

''वो'' रेल की पटरियों पे धड़ाधड़ भागा जा रहा था, ज़माने से परेशान, अपनी ही धुन में भागा जा रहा था। रात के दो बजे थे, उसे कोई सुध ही नहीं थी... और हो भी तो कैसे? उसने ''ब्रेकअप'' जो कर लिया था ! ऐ मेरे मालिक ''ये तूने क्या किया, क्या तुझे में ही मिला था इस पूरी दुनिया में ?   नहीईईई ..... एक आवाज़ आयी और किसी रुई के फाहे जैसे हाथों ने उसको पटरी से खींच लिया और ''वो '' उसकी दोनों हाथों की बाहों में बंध  गया, और ट्रेन धड़धड़धड़ करती निकल गयी।

तुमने मुझे क्यों बचाया ? मै कोई बचाने वाली नहीं हूँ, उसने (युवती ने ) ऊपर की ओर देखते हुए कहाँ, ''तुमको उस ''अनदेखी सुपर शक्ति '' ने बचाया है''। फिर वह युवती ''वो'' को अपने साथ ले चली, और ''वो'' भी मंत्रमुग्ध सा बंधा - खींचा सा उसके साथ चला जा रहा था । वह युवती पहाड़ी से ''वो '' का हाथ पकडे नीचे उतरती जा रही थी । तुम इतनी रात में यहाँ क्या कर  रही थी 'वो ' ने युवती से पूछा ? उस युवती ने कहा की आसमान में से एक तारा टूट रहा था,  जिसको देखकर में उस टूटते तारे का पीछा करते - करते यहाँ तक आ गयी, और फिर मैंने तुमको देखा । ''वो ' ने एक लंबी सी हुंकार भरी। उसकी दृष्टि में एक अज़ीब सी खामोशी थी, जिसे देखकर एक बार को तो उस युवती के होश ही उड़ गए ।

चलते - चलते घंटो हो गए थे , न तो कोई मुकाम ही आया , और न ही वो दोनों थके। और वो दोनों इस बात से भी अनजान थे कि कोई अनजाना शख्स भी उनको फॉलो कर रहा है !  चलते - चलते चाँद की चटकीली चांदनी भी अपनी पूर्णता बिखेर रही थी, ''वो '' और वह युवती एक वृक्ष के नीचे खड़े हो गए और अचानक ही वो दोनों एक दूसरे में विलीन हो गए। अब वहां सिर्फ युवती खड़ी थी । अनजाना शख्स ये देखकर वही स्तब्ध हो गया और वह युवती झील में नाव में बैठकर लोप हो गयी और तभी, आव्या चिहुक कर जाग गयी , ''अरे ये मैंने सपने में क्या देखा ?!'' तभी मोबाइल बज उठा। दूसरी तरफ से निकेतन था , आव्या रो पड़ी और बोली जल्दी घर आ जाओ। तभी फ़ोन में से बीप - बीप की सी आवाज़ आने लगी । आव्या घर में अकेली थी , सर्वेंट भी अपने सर्वेंट क्वार्टर में रहते हैं , वह स्लिपर्स पहन कर सर्वेंट क्वार्टर की तरफ बढ़ चली , उसने अपने आगे रेनबो देखा। ये उसका वहम था या सत्य, नही जान पायी, और उस इंद्रधनुष में बढ़ती चली गयी । मनमोहक संगीत उसके कानो में पड़ा, नूपुर की झंकार आव्या खुद को रोक नहीं पायी और थिरकने लगी। और फिर बेला की सुगंध उसकी नाक में आयी और...और  जब उसकी आँख खुली निकेतन चेयर पर बैठे पेपर पढ़ रहे थे ।

चलते -चलते =
छू  लू जो तेरा हाथ तो फूलों की सुगंध आती है 
तेरे आँचल से मुझे मिटटी की सुगंध आती है
कुछ न कहना मुझे, तुझे मेरे प्यार की कसम 
मुझे तेरी साँसों में जन्नत  झलक आती है 
कसम ले ले मुझसे , तू उस कायनात की, फना हो जाऊ मै अगर 
जो तुझसे रूबरू न होऊँ, खुद को  छूकर मुझे तेरे  साथ की महक आती  है  ॥ 

A butterfly with purple flowers Images

hello