COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): pankhuri

Wednesday, April 19, 2017

pankhuri

A rose to say I'm thinking of you  Images

पंखुरी जैसे ही टेरस  पे आयी उसने दो पक्षियों  को आपस में  बतियाते देखा वो अपनी भाषा में बातें कर रहे थे शायद वो कुछ एक दूसरे को अपने भाव व्यक्त कर रहे थे | उसको अपना बचपन याद आ गया जब वो अपनी सखी अपनी क्लासमेट जो प्री क्लास्सेस में से ही उसके  साथ थी उसकी याद हो आयी वो तनिक भावुक हो गयी वो या कदाचित  विह्वल  हो गयी थी   |

तभी जब वो अपनी यादों  के बबल्स को उड़ा रही थी शनैः ही उसकी तन्द्रा भांग हुई तब जबकि पक्षियो ने अपनी नन्ही बाँहों को फैला कर उड़ना शुरू किया | गगन कुछ मटमैला हो रहा था निश्चय ही धूल का गुबार उड़ने वाला है | यह सोचकर वो, तनिक उसके माथे पे लकीरे खींच आयी थी उसने झट - पट  सारे सूखे हुए कपड़ों को एकत्रित करके उनको अपने रूम में ले आयी |

''दीदी '' तभी बहार से आवाज़ आयी  'हाँ ' ये बोलते हुए वो बाहर आयी '' काका '' बोले बिटिया खाने में क्या बनेगा ? वो बोली कुछ भी बना लो  काका आप तो हमारी पसंद जानते हो ! वो तो ठीक है बिटिया काका बोले पर आज तुम्हारा क्या खाने का मन  है ये मुझको कैसे पता चलेगा ?

पंखुरी एक ठहरी हुई मुस्कान के साथ बोली, ठीक है आप आलू के पराठे और कड़ाही पनीर बना लीजिये साथ में स्वीटडिश के लिए रसमलाई रखी ही है हमारे लिए काफी है , ''और हाँ '' आपका जो मन हो वो बनाइये और खाइये'' हाँ दीदी ये भी कोई कहने की बात है'' काका  बोले |

लंच पंखुरी ने अकेले ही किया , अभिलाष  लंच टाइम में  अपने ऑफिस में होते हैं | पंखुरी अपने मोबाइल फ़ोन  बिजी हो गयी , तभी उसको एक साया दिखाई दिया वो विंडो के पास आयी उसने बाहर देखा तो उसको एक सेल्समैन दिखाई दिया ! वो बेहद आशचर्य चकित रह गयी की सोसायटी की सिक्योरिटी को पार करके ये यहाँ पंद्रहवी मंजिल तक कैसे आ गया ? उसके लिए ये बात बहुत चौकाने वाली थी !!

पंखुरी ने उसके लिए ना तो डोर खोला और ना ही उससे कुछ  बात की | उसने अपना ध्यान सेल्समेन से हटा कर मोबाइल गेम  दिया | तभी उसकी सहेली ''मुरलिका '' का फ़ोन आया उससे पहले तो दोनों हाय -हेलो हुई फिर दोनों अपनी अतरंग बातों  में मशगूल हो गयी |

पंखुरी ने मुरलिका से बहुत बाते की पर उसका केंद्रबिंदु तो अभिलाष थे,  बहार से आवाज़ आयी दीदी साहब आ गए हैं वो लगभग भागती  हुई सी आयी उसको आता देखकर अभिलाष बोले देखो पंखुरी अपना सरप्राइज वो ''धक् ''  गयी पापा !!! आप और वो अपने पापा की बाहों में झूल गयी कदाचित किसी अल्हड की तरह :}

चलते चलते = करीब आना भी चाहुँ तो
                     आना नहीं होगा
                     दूर जाना भी चाहुँ तो
                     जाना नहीं होगा
                      ये वो रिश्ता है
                      जिसे आज़माना भी चाहुँ  तो
                      आज़माना नहीं होगा
                      यह तो सिलसिला है
                      तेरे मेरे प्यार का
                       जिसे ठुकराना भी चाहुँ
                       तो ठुकराना नहीं होगा || 

With friendship this rose is sent your way, I'm hope you have a wonderful day!  Images








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