COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): udhar ki zindgi

Wednesday, June 21, 2017

udhar ki zindgi

Red roses in the rain Images

चेतना ने मैगजीन के पन्नो को उलट कर एक तरफ रख दिया फिर रिमोट उठाकर न्यूज़ चैनल लगा दिया और फिर बुदबुदाई की कोई भी खास खबर नहीं है | फिर उठकर बालकनी में चली गयी जस्ट अभी बरखा हो कर चुकी थी मौसम का मिजाज बड़ा खुशनुमा था उसने अपने दोनों हाथों को फैला दिया और आंखे बंद करके ज़ोर की सांस ली मानो  वो इस मौसम की खूबसूरती और खुशनुमा मिज़ाज़ को अपने अंदर समा लेना चाहती हो |

बरखा के कारन गुलमोहर के पुष्प पृथिवी का चुम्बन कर रहे थे फ़िज़ा में गीली मिटटी और फूलों की सुगंध बिखरी पड़ी थी ज्यू - ज्यूँ  रात  स्वीट सिक्सटीन की हो रही थी त्यू - त्यु  ''रात की रानी'' अपनी खुशबू को महका रही थी | 

चेतना तो संसार को त्याग ही रही थी , पर तनय ने उसको ऐसा करने ही नहीं दिया वो फ्लैशबैक में चली गयी विनय के द्वारा उसका प्रेम ठुकरा देने पर उसने ऐसा निर्णय लिया था | और आज वो तनय के साथ उधार  की ज़िंदगी जी रही है क्युकी तनय ने उसको बहुत सपोर्ट किया था इसलिए उसने ये ज़िंदगी उसके नाम कर दी और वो यही समझती है की तनय की दी हुई उधार  की ज़िंदगी को वो जी रही है | और यही सब सोचते हुए वो किचन की तरफ चल दी अपने लिए कुछ टेस्टी बनाने हाँ वो बना रही चिल्ली पोटैटो (इसकी रेसिपी जानने के लिए यहाँ क्लिक करें https://www.youtube.com/watch?v=bCSMZ6QzGrA )

चेतना ने कुकिंग करते वक़्त सोचा भले ही वो किसी की दी हुई ज़िंदगी जी रही है पर जीवन में उसके बहार तो है और वह एक तृप्त मुस्कान के साथ अपने काम मशगूल हो गयी | आपको मेरी कहानी लगी ? अगर अछि लगी हो तो प्लीज कम्मेंट ज़रूर करियेगा धन्यवाद् |

चलते - चलते = 

राज़ खोल देते हैं अक्सर  ये इशारे 
कितनी मासूम होती है ये , प्यार भरे लफ्ज़ो की मुस्कान || 

हमसे यूँ ऐसे  किनारा न करो,
अपनी सूरत को रोज निहारा न करो,
आओ देखो मेरी नजरों से खुद को,
आइना हूँ मैं तेरा मुझसे यूँ किनारा न करो ।


A photo of two brilliant pink roses Images

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