'' अनजाना ''
ये घटना मुझे जिन्होने बताई है ,यह ''घटना'' उनके साथ ''सन 1981''मे हुआ था |में ये बात उन्ही के बताये ''शब्दों'' में लिख रही हूँ |
''सन 1981june '' ..........सीमा के परिवार के सभी सदस्य ,गर्मियों की छुट्टी बिताने के लिए कहीं पर जाना चाहते थे |सभी ने हिमाचल में ''छुट्टिया'' बिताने का निर्णय लिया|उनको सवेरे चार बजे घर से निकलना था ''प्रभु'' का नाम लेकर वे लोग निकल पडे,रास्ते में बच्चे'' कॉमिक'' पढते हुए जा रहे थे,और उनकी मम्मी सो रही थी ,पापा साईट scene देखते हुए जा रहे थे |(मैं उनके शहर का नाम यहाँ नहीं लिख रही क्युकी वो बताना नहीं चाहते ) काफी सारा रास्ता उन्होने, बडे आराम से पार कर लिया था |
अचानक उनकी गाड़ी में से ''धुआ'' निकालने लगा ,उन दिनों दो तरह की कारे ही, ज्यादा चलती थी|एक तो 'fiat'
और एक'' ambassador '' |वो लोग'' fiat ''में थे ,सब बहार निकल गए, ड्राईवर ने बोनेट देखा तो अंदर सिवा धुए के कुछ दिखाई नहीं दिया गाड़ी भी बहुत गरम हो रही थी |
आस-पास भी कुछ नहीं था ,बस ये समझिये की वो लोग, ''जंगल'' में खडे थे |समय तो दिन का ही,था पर उन दिनों में घुमने बहुत ही कम लोग जाया करते थे |तब जब घुमने जाते थे तो कही भी ज्यादा भीड़ -भाड़,नहीं मिला करती थी |
न जाने कितने ''घंटे'' वो सब खडे रहे,कोई भी उम्मीद की ''किरण'' ,उन्हे नज़र नहीं आ रही थी|ड्राईवर ने भी बहुत दूर -दूर तक जा कर देख लिया था |पर कोई भी हल नहीं निकला ,सब मायूस से नज़र आ रहे थे |
तभी, न जाने कहा से एक आदमी आया और बिना बोले ,गाड़ी के खुले ''बोनेट'' में ''तारो '' छुने लगा ड्राईवर ने गाड़ी स्टार्ट की तो गाड़ी स्टार्ट हो गयी |
जब उस व्यक्ति को ,''धन्यवाद'' देने के लिए देखा ,तो कोई भी ''दिखाई'' नहीं दिया|बच्चो ने थोडा दूर उन रास्तो पर भी जाकर देखा जो ''पहाड़ी लोगो की पगडण्डी'' होती है पर कही भी दूर -दूर तक कोई नहीं था |
अब इसे इश्वर का चमत्कार, नहीं तो और क्या कहेंगे|आप के पास भी कोई ऐसे ही ''अनमोल पल'' हो और आप मुझसे शेयर कर सकते हैं ,आप मुझे मेसेज में लिख कर सेंड कर सकते हैं |
चलते -चलते= तुम जो चाहते हो मुझे ,तो एक गीत मुझे नज़र कर दो
गूथ लो अपने छंदों में मुझको, महकते हुए सुमन की तरह
हो जो शायर तो अपने, गीत माला में मुझे अमर कर दो ||


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