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ऐसी ही एक घटना अम्बर के साथ भी हुई ,बात सन 1996अक्टूबर की है |उस समय अम्बर सोलह साल के थे ,और मसूरी के एक बोर्डिंग स्कूल में पढते थे |उनके बाबाजी पंचतत्व में विलीन ह गए थे ,परन्तु ये बात अम्बर को नहीं बताई गयी, क्युकी वो अपने बाबाजी के बहुत करीब थे ,और उनके पेपर चल रहे थे |
एक दिन ना जाने कहाँ से उनके हाथ एक न्यूज़ पेपर लग गया, उसमे उनके बाबाजी की न्यूज़ थी |अम्बर ने जैसे ही पढ़ा, तो वो बोर्डिंग से भाग निकले |और उन्हे सिर्फ अपने बाबाजी के सिवा कुछ भी दीखाई नहीं दे रहा था |वो तब थोडा present में तब आये जब उन्होने अपने बाबाजी जैसे किसी व्यक्ति को अपने सामने देखा, तो उन्होने अपने आपको एक ट्रेन में पाया|
अम्बर के पास तो टिकेट भी नहीं था ,तो उन बाबाजी ने ,अम्बर को एक टिकेट दिया जो उनके वापस बोर्डिंग जाने का था |अम्बर ने कहा की आपको कैसे पता की ,मैं बोर्डिंग में पढता हूँ |
बाबाजी ने कुछ नहीं कहा, बस अम्बर के सिर पर हाथ रख दिया |
अचानक उनकी झपकी लग गयी ,जागे तो देखा वहा कोई नहीं है |
और वो जिस ट्रेन में बैठे थे ,वो लेट हो जाने के कारण चली ही नहीं थी |
इतने बरस बीत जाने के बाद भी ,वो आज भी उस हाथ को अपने सिर पर महसूस करते हैं |और आज भी ,उनकी आंखे डबडबा जाती हैं |
चलते -चलते = संजो कर रख सको तो मेरा ''नाम'' एक निशानी
लम्हों की तरह खो दो तो सिर्फ एक कहानी||
सीप जैसे मोती आँखों में झलकते :'(:'(
ऊँगली के पोरों पर रखो तो ओस के एक बूँद की कहानी||
बड़ी मेहनत से भीड़ में अपनी जगह बनायीं है मेरे ''नाम'' ने||
तो सवालो की बौछार भी पाई है इनाम में||
जितना भी गहरा कोई हमे अपनी बातो से दर्द दे
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमारी ||
हजारो ''सीक्रेट'' समेटे हैं हम, अपनी जिंदगी की किताब में
और उनको संजो कर रखा है ,जिंदगी की हर सांस में||
मेरा नाम एक निशानी ,खो दो तो कहानी ||
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमारी ||
हजारो ''सीक्रेट'' समेटे हैं हम, अपनी जिंदगी की किताब में
और उनको संजो कर रखा है ,जिंदगी की हर सांस में||
मेरा नाम एक निशानी ,खो दो तो कहानी ||


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