
''गौरी+रजत''
1958u.p का एक छोटा से गाओ(village) गौरी और रजत घर से अकेले ही स्कूल के लिए निकले थे,अभी वो दोनों पहली कक्षा में ही थे,घर की गली से बहार निकलते ही,दोनों ने एक दुसरे का हाथ पकड़ लिया|आजकल गौरी की अम्मा और रजत की माँ दोनों में बोलचाल बंद है,इस कारण गौरी और रजत को भी अलग रहना पड़ रहा है |
दोनों एक ही क्लास में पढते हैं और एक साथ ही बैठते हैं|आधी- छुट्टी (lunch time)में दोनों स्कूल के विशाल बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गए,गौरी ने रजत से कहा की हम घर में एक साथ कब खेलेंगे,रजत ने कहा पता नहीं पर हम यहाँ तो एक साथ खेलते हैं ना,गौरी ने अपनी नीली- नीली आँखों से रजत को देखा और अपनी काली-काली बड़ी -बड़ी पलके झपका दी |फिर रजत ने गौरी से कहा की माँ आज पंजीरी(मिठाई)बनायगी मै तेरे लिए छत्त पर लेकर आऊंगा,तू आएगी ना ??गौरी ने हाँ मै सर हिला दिया,इतने मे घंटी बज गयी,दोनों क्लास की तरफ चले गए|स्कूल की छुट्टी होने पर दोनों साथ -साथ हाथ पकडे आये घर की गली आते ही दोनों अलग हो गए| 

घर पहुचते ही रजत ने अपना स्कूल बैग खूंटी पर टांगा और झट से डिब्बा खोल के, अपने पसीने से भीगे हाथो मे दो पंजीरी निकाली और छत्त पर लेकर भाग गया|उसे ज्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा,उसे जीने में आती गौरी के पायल की रुनझुन सुनाई दी,आसमानी रंग की लहंगा-चोली में गौरी जैसे मक्खन में चुटकी भर सिन्दूर मिला दिया हो किसी सोनी -जागनी गुडिया से कम नहीं लग रही थी|

रजत ने हाथ बढ़ा कर पसीने से भीगी गीली पंजीरी गौरी के सामने कर दी,गौरी ने कहा देख में भी तेरे लिए कुछ लायी हूँ,और उसने अपनी आसमानी रंग की सितारों जड़ी चुनरी खोली उसमे ढेर सारे छोटे-छोटे बेर और कच्ची इमली थी,रजत ने कहा की मुझे ये अच्छी नहीं लगती तू ही खा,इतना सुनते ही गौरी ने कहा ले वापस अपनी पंजीरी मुझे नहीं खानी,और अपनी बेर और इमली से भरी चुनरी छत्त पर ही फैक कर सीढियों से दौड़ती हुई नीचे चली गयी |रजत ने सारे बेर और इमली समेट कर वापस उसकी चुनरी में इक्कठा करके बाँध कर वही रख दीये
अपने कमरे में आकर रजत लेट गया और सो गया,माँ ने आकर देखा तो रजत तेज़ बुखार में तप रहा था|रजत की माँ ने सोचा की जिज्जी(गौरी की अम्मा)कितना अच्छा ''श्याम तुलसी का काढ़ा'' बनाती हैं,बुखार चट से उतर जाता है,पर मै उनके यहाँ जाऊ कैसे ??तभी याद आया की डाकिया जिज्जी की चिट्ठी उनके यहाँ दे गया है रजत की माँ ने जल्दी से चिट्ठी उठाई और जिज्जी के घर चल दी|बहार से ही जिज्जी-जिज्जी की आवाज़ लगा दी गौरी की अम्मा ने बहार आते हुएय कहा,की छोटी क्या बात है??कुछ नहीं जिज्जी तुम्हारी चिट्ठी हमारे यहाँ आ गयी थी,लो चिट्ठी गौरी की अम्मा के सामने चिट्ठी बढ़ाते हुएय कहा,गौरी की अम्मा ने सोचा की पढ़ना तो इस पूरे गाव मे सिर्फ छोटी को ही आता है,स्कूल के मास्टरजी भी पास के गाव से पढ़ाने आते हैं,पर मे छोटी से चिठी पढने को कहू कैसे,फिर बात बदलते हुएय बोली की छोटी जरा पढ़ कर तो देख अम्मा की तबियत तो ठीक तो है ना??हाँ जिज्जी लाओ अभी पढ़ देती हूँ,पूरी चिट्ठी पढ़ कर सुना दी|फिर गौरी की अम्मा ने कहा की इतनी दिनों बाद आई हो कुछ देर बैठ कर जाना,नहीं जिज्जी रजत बुखार मे तप रहा है मुझे जाना है,अरे ऐसे कैसे मे भी काढ़ा बनाकर तुम्हारे साथ चलती हूँ |
काढ़ा पीने के दो घंटे बाद ही रजत का बुखार उतर गया|तभी बहार से बच्चो की टोली ने आवाज़ लगायी रजत चल गुल्ली-डंडा खेलने रजत ने बेमन से अपना गुल्ली- डंडा(indian game ) उठाया और बहार की तरफ चल दिया|पहली बारी(chance)रजत की थी और ये क्या!गिल्ली पांच कदम की दुरी पर ही गिर गयी,रजत ने डंडा वही फैक दिया और अपने पैरो में सर रख कर रोने लगा|सबने समझा रोज़ तीनसो डंडो की नपाई करता है आज पांच कदम की दुरी पर गिल्ली गयी है तो रो रहा है,विकी ने कहा रजत कोई बात नहीं तू मेरी बारी ले ले |रजत वापस अपने घर आ गया | क्रमश:
@चलते- चलते में मशहूर पंक्तिया
अरबो की गिनती तो मुझे आती नहीं
पर एक दिल का ख्याल आपसे कह दूं
पानी की हर एक बूँद ख़ुशी बन जाए जो
आपके नाम सारा समुन्दर कर दूं ||
काश दिल की आवाज़ का इतना असर हो जाए
हम उन्हे याद करे और उन्हे खबर हो जाए ||

रजत ने हाथ बढ़ा कर पसीने से भीगी गीली पंजीरी गौरी के सामने कर दी,गौरी ने कहा देख में भी तेरे लिए कुछ लायी हूँ,और उसने अपनी आसमानी रंग की सितारों जड़ी चुनरी खोली उसमे ढेर सारे छोटे-छोटे बेर और कच्ची इमली थी,रजत ने कहा की मुझे ये अच्छी नहीं लगती तू ही खा,इतना सुनते ही गौरी ने कहा ले वापस अपनी पंजीरी मुझे नहीं खानी,और अपनी बेर और इमली से भरी चुनरी छत्त पर ही फैक कर सीढियों से दौड़ती हुई नीचे चली गयी |रजत ने सारे बेर और इमली समेट कर वापस उसकी चुनरी में इक्कठा करके बाँध कर वही रख दीये
अपने कमरे में आकर रजत लेट गया और सो गया,माँ ने आकर देखा तो रजत तेज़ बुखार में तप रहा था|रजत की माँ ने सोचा की जिज्जी(गौरी की अम्मा)कितना अच्छा ''श्याम तुलसी का काढ़ा'' बनाती हैं,बुखार चट से उतर जाता है,पर मै उनके यहाँ जाऊ कैसे ??तभी याद आया की डाकिया जिज्जी की चिट्ठी उनके यहाँ दे गया है रजत की माँ ने जल्दी से चिट्ठी उठाई और जिज्जी के घर चल दी|बहार से ही जिज्जी-जिज्जी की आवाज़ लगा दी गौरी की अम्मा ने बहार आते हुएय कहा,की छोटी क्या बात है??कुछ नहीं जिज्जी तुम्हारी चिट्ठी हमारे यहाँ आ गयी थी,लो चिट्ठी गौरी की अम्मा के सामने चिट्ठी बढ़ाते हुएय कहा,गौरी की अम्मा ने सोचा की पढ़ना तो इस पूरे गाव मे सिर्फ छोटी को ही आता है,स्कूल के मास्टरजी भी पास के गाव से पढ़ाने आते हैं,पर मे छोटी से चिठी पढने को कहू कैसे,फिर बात बदलते हुएय बोली की छोटी जरा पढ़ कर तो देख अम्मा की तबियत तो ठीक तो है ना??हाँ जिज्जी लाओ अभी पढ़ देती हूँ,पूरी चिट्ठी पढ़ कर सुना दी|फिर गौरी की अम्मा ने कहा की इतनी दिनों बाद आई हो कुछ देर बैठ कर जाना,नहीं जिज्जी रजत बुखार मे तप रहा है मुझे जाना है,अरे ऐसे कैसे मे भी काढ़ा बनाकर तुम्हारे साथ चलती हूँ |
काढ़ा पीने के दो घंटे बाद ही रजत का बुखार उतर गया|तभी बहार से बच्चो की टोली ने आवाज़ लगायी रजत चल गुल्ली-डंडा खेलने रजत ने बेमन से अपना गुल्ली- डंडा(indian game ) उठाया और बहार की तरफ चल दिया|पहली बारी(chance)रजत की थी और ये क्या!गिल्ली पांच कदम की दुरी पर ही गिर गयी,रजत ने डंडा वही फैक दिया और अपने पैरो में सर रख कर रोने लगा|सबने समझा रोज़ तीनसो डंडो की नपाई करता है आज पांच कदम की दुरी पर गिल्ली गयी है तो रो रहा है,विकी ने कहा रजत कोई बात नहीं तू मेरी बारी ले ले |रजत वापस अपने घर आ गया | क्रमश:
@चलते- चलते में मशहूर पंक्तिया
अरबो की गिनती तो मुझे आती नहीं
पर एक दिल का ख्याल आपसे कह दूं
पानी की हर एक बूँद ख़ुशी बन जाए जो
आपके नाम सारा समुन्दर कर दूं ||
काश दिल की आवाज़ का इतना असर हो जाए
हम उन्हे याद करे और उन्हे खबर हो जाए ||
aapkey blog me bharpoor manoranjan hai..!!
ReplyDeleteAnand bharti