COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): ''Kitty''

Thursday, January 26, 2017

''Kitty''



Peace image 2 Images



                                                ''Kitty''

किटी ने जल्दी-जल्दी अपने पैर आगे बढ़ाये। माँ इंतज़ार कर रही होंगी, बहार गेट पे खड़ी ये सोच कर मानो उसके पंख ही लग गए। आज तो कोई 'ऑटो वाला भैया भी नहीं मिल रहे!' तभी पीछे से उसको हॉर्न की आवाज़ सुनाई दी। जब उसने पीछे पलट कर देखा तो ऑटो वाला भैया बोला, ''दीदी, आपकी वजह से मैंने चार सवारियों को इनकार कर दिया है!' किटी जल्दी से उसके ऑटो में बैठते हुए बोली '' थैंक यू भैया। '' रामु ने रिक्शा आगे बढ़ा दिया । 

किटी यादों के गलियारे में पंहुच गयी। आज से चार साल पहले राजू बेरोजगार था और अपनी माँ के साथ उसकी यहाँ घर का काम कराने आया करता था। ऐसा नहीं कि राजू पढ़ा -लिखा नहीं है, आठवी तक पढाई की है। न जाने क्यों किटी को उसमे अपना छोटा भाई दिखाई देता था। तभी उसने बॉस से अपनी तीन महीने की एडवांस तनख्वाह लेकर राजू के लिए इस ऑटो का प्रबन्ध कर दिया। राजू की माँ ने तो उसकी कितनी बलाए ले थी, राजू भी मुह छिपा कर कितना रोया था। और हर महीने ना - ना करते हुए भी उसके हाथ में 400-500 रुपये रख ही देता है । 

''दीदी घर आ गया , कहाँ खोयी हुई हो ? तबियत ठीक नहीं है क्या ? ऑफिस में कुछ हुआ क्या ? '' एक ही साथ उसने इतने सवालों की बौछार कर दी। किटी ने नकली मुस्कान ओढ़ कर कहा नहीं भैया कुछ भी तो नहीं हुआ है, तुम तो बेकार में इतना परेशान हो रहे हो । जबकि सच बात तो ये थी की उसको अपने छोटे भाई की बहुत याद आ रही थी। हाई स्कूल में पूरे स्टेट में टॉप किया था उसने, पता नहीं उसको पापा की एक बात क्या बुरी लगी की सब कुछ छोड़ कर अपने दोस्त के साथ कंट्री के बहार चला गया। उसके साथ के दोस्त से ही उसकी कुशलता की खबर मिल जाती है । किटी एक ठंडी सांस लेकर घर के अंदर दाखिल हुई जो पांचवे माले पे है । 

उसे घंटी बजाने की भी जरुरत नहीं पड़ी, माँ दरवाज़े पर ही खड़ी थी। ''बड़ी देर लगा दी तूने। तो चल हाथ मुह धो ले मैं तेरे लिए कॉफ़ी बनाती हूँ ।'' उसको कॉलेज टाइम से ही दिन में 5-6  बार कॉफ़ी पीने की आदत पड़ी हुई है। माँ उसके लिए बड़े प्यार से कॉफ़ी बना के ले आयी। तब तक उसने अपने 'लगजरी बाथरूम' में जाकर अपने मुँह पे ठंडे पानी के बेतहाशा छीटे मार लिए थे ताकि माँ को उसके आँसू दिखाई ना दे सके। फिर वो धीरे से चलकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी। माँ ने कॉफ़ी उसके आगे बढ़ा दी और फिर प्यार से उसके सर पे हाथ फेरा और बोली तेरे भाई का फ़ोन आया था आज। ''क्या ?!'' कॉफ़ी का मग उसके हाथ में ही रह गया। 'हाँ ' माँ फिर से बोली। उनके चेहरे पे 400 वोल्ट की चमक थी, मगर अगर भाई सामने होता तो यही  440 वोल्ट की चमक होती उनकी  आँखों में सितारों की तरह आंसू जगमगा रहे थे। उन्होंने बताया की अगले सप्ताह  तेरा भाई एक मेम ले कर आ रहा है और कह रहा है कि पहले ''दी '' की शादी अतुल जीजू से कर दो उसके बाद ही मैं शादी करूँगा। फिर थोड़ा रुक कर बोली, ''देख, अतुल भी तेरा कब से इंतज़ार कर रहा है। तेरी ही ज़िद थी ना कि जब तक भाई नहीं आएगा तब तक मैं विदा नहीं होऊँगी, देख तेरा भाई भी आ रहा है। अब तो अतुल को हाँ बोल दे। ''अरे सुन! तू उसे अभी डिनर पे ही क्यों नहीं बुला लेती?'' ये कहते हुए माँ ने अतुल का नंबर मिला कर उसको दे दिया तो उसने हाथ में लेते हुए पुछा, ''और पापा ''? -''तेरे पापा भी यही चाहते हैं.....'' -''माँ !'' माँ को उसने एक हाथ से बाँहों में भर लिया और दूसरे हाथ से उसने मोबाइल कान पर लगा दिया। .... 

चलते - चलते = छू लो तुम यूं मुझको ज़रा सा,, 
                         कि मैं मर भी जाऊं तो मुझसे तेरे प्यार की सुगंध आये…! .

No comments:

Post a Comment

hello