'' sharangi ''
श्रांगी आज स्कूल से घर बहुत उदासवापस आयी है। वापस आते वक़्त बस वो यही सोचे जा रही थी की ऐसा कैसे हो गया, वो तो पूरा धयान लगाकर और मन लगा कर खेलती है! फिर कहाँ उससे चूक हो गयी कि वो मृदा की गेंद को पहचान नहीं सकी? यहाँ मेरा आपको अपनी कहानी की नायिका से एक परिचय करना बेहद जरूरी है- मेरी नायिका एक बाहरवी क्लास की स्टूडेंट है जिसका सपना सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट है। उसकी ग्रैंड माँ हमेशा उसको बताती रहती हैं कि जिस उम्र में लड़कियाँ गुड़ियों और किचन के खिलोनो से खेला करती है, उस उम्र से तो उसने बैट पकड़ना शुरू कर दिया था। उसको याद है, उसके पापा जहाँ भी, जिस भी कंट्री और अपने देश की किसी भी सिटी में जाते हैं तो उसके लिए ''क्रिकेट किट'' लाना कभी नहीं भूलते, और वो कहती '' I'm the most lucky person in this world ' ... तो ऐसी ग्रोइंग गर्ल की कहानी है ये ।
श्रांगी ने जैसे ही बैल बजायी दादी ने दरवाज़ा खोल दिया। दादी हमेशा उसके लिए डोर खोलती हैं, कितनी बार उसने दादी से कहा भी है की प्लीज दादी आप मेरे लिए परेशान मत हुआ करो रामु काका को बोल दिया करो वही खोल दिया करेंगे, मगर दादी हमेशा एक ही बात बोलती हैं की तूने ही तो मुझे ज़िंदा रखा हुआ है वार्ना में तो कबकी....... और इससे आगे दादी कुछ बोले कि वो दादी के मुँह पर अपना हाथ रख देती है। श्रांगी ने बैग को सोफे पर लगभग फेंकने वाले अंदाज़ में डाला, तभी दादी को लग गया की आज उनकी श्रांगी का मूड ख़राब है। वो स्वयं ही जाकर रसोई में से उसकी पसंद की थाली लगा लायी और उसके कमरे में ही ले गयी। जैसा की दादी ने सोचा था वैसा ही पाया, श्रांगी अपने दोनों घुटनो में मुँह छिपाये बैठी थी। दादी ने थाली को टेबल पर रख दिया और अपने झुर्रियों भरे कपकपाते वात्सल्य से भरे हाथ श्रांगी के सिर पे रखा। 'दादी ' ये कहती हुई श्रांगी दादी से लिपट गयी। कुछ देर बाद जब वो थोड़ी सी नार्मल हुई तो बोली कि आज मैं खेल में आती हुई बॉल को नहीं पहचान पायी और आउट हो गयी। दादी बोली ''बेटा हम हाड - मांस के बने इंसान है, थोड़ी चूक, थोड़ी गलती होनी तो स्वाभाविक ही है। बेटा हम गलतियां करते हैं तभी तो हम इंसान हैं नहीं तो भगवान् न होते''। हाँ दादी यू आर राईट...। और ये कहते कहते उसने टेबल से खाने की प्लेट उठा ली और अपनी पसंद का खाना देखते ही पाँच मिनट में चट कर गयी। अब उसको काफी हल्का लग रहा था और साथ ही उसका इरादा भी बहुत पक्का हो गया था। वो खाना खाकर थोड़ी देर के लिए बिस्तर पे लेटी तो कब उसकी आँख लग गयी पता हि नहीं चला ।
ममा की चहकती आवाज़ से ही उसकी निंद्रा भंग हुई, अरे ! मॉम ऑफिस से आ गयी और फिर माँ की आवाज़ सुनते ही बाहर लॉबी की ओर भागी मोमा ये कहती हुई अपनी माँ के कंधे पे झूल गयी, '' मेरा बच्चा '' माँ ने उसे प्यार से अपने कलेजे से लगा लिया एक वही इकलौता बच्चा जो है उनका । मोम ने उससे पूछा तुम्हारी क्रिकेट प्रैक्टिस कैसी चल रही है ? ठीक ममा .. उसने बेहद संतुलित उत्तर दिया , और फिर थोड़ा रुक कर बोली मॉम में आपको नेशनल लेवल पर खेल कर दिखाउंगी । हाँ , मेरा बेटा मुझको तुमपे पूरा यकीन है ।
चलते - चलते = इरादे आज भी मेरे इतने पक्के हैं
चांहू तो उछल के अंबर को छू लूँ !!


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