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Friday, April 29, 2011

mano ya na mano(xxxiv) part (STORY)


Hello Cards        

                          '' किला ''                                                     
तनु ने रिंकी के मुह से सुना की वो दुसरे गृह पर जाने की बात कर रही है |अब आगे .........

रिंकी तनु के पास आई और बोली की उसे अब जाना  होगा फिर वो तनु को अपने साथ एक किले में ले गयी तनु एक बात जानती थी, की वो सिर्फ एक परछाई है उसको कुछ नहीं हो सकता ,पर ये भी जानती थी की अगर उसको कुछ होगा तो उसकी परछाई लुप्त हो जायेगी |तनु उस किले में आगे बढ़ी तो उसको कुछ भी दिखाई नहीं दिया देखाई दिया तो एक विराना सा किला तभी तनु  के सामने से किले की दीवार हट गयी और एक मार्ग बन गया तनु उसी में प्रवेश कर गयी ,तनु ने आगे जाकर देखा तो चारो तरफ हरियाली फैली थी |और झरने बह रहे थे बड़ी ही सुंदर जगह थी |तभी तनु ने देखा की सामने रिंकी किसी खजाने के पास खड़ी है|
Fantasy Glitters

तनु ने सोचा की अगर रिंकी को यहाँ पर आना था तो उसे क्यों बुलाया तनु वापस जाने के लिए मुड़ी तो रिंकी उसके सामने आ गयी और कहने लगी की आज तो तुम्हे मैने इसीलिए यहाँ भेजा था |क्युकी ये खज़ाना सिर्फ पवित्र व्यक्ति के इस किले में आने पर ही मिलता ,इसीलिए तुम्हे यहाँ भेजा था |तनु ने पूछा की तुम इसका क्या करोगे तो रिंकी ने कहा की ये हमारे साम्राज्य को हासिल करने के कार्य में लगेगा | क्रमश:
                                            चलते -चलते =फूल बनकर मुस्कराना जिंदगी 
                                                                   मुस्करा के गम भुलाना जिंदगी 
                                                                  जीत कर कोई खुश हो तो क्या हुआ 
                                                                 हार कर खुशिया मानना भी जिंदगी ||

Thursday, April 28, 2011

mano ya na mano(xxxiii) part (STORY)

Take Care Scraps and Graphics


                       
 अन्धकार की शक्तिया दुसरो का अहित करने के लिए होती हैं ...गतांक से आगे .......................................
तनु और आँचल terrace पर थी, तभी आँचल ने कहा की देखो टूटता हुआ तारा तो तनु ने कहा की ये टूटता तारा नहीं है ,आँचल ने तनु को प्रशंवाचक नजरो से देखा तो तनु ने कहा की ये ऋषिजी हैं जो ,आकाश मार्ग से विचरण कर रहे है|
                                MySpace Nature Comment: 1

तनु ने आँचल से  कहा की मैं अभी आती हूँ ,और ये कह कर तनु घर से बहार चली गयी और फिर वो एक पेड के नीचे बैठ गयी और ऋषिजी से मानसिक तरंगो के द्वारा बात करने लगी

और उसके बाद ऋषिजी ने महाप्रलय का दर्शन का वर्णन kiya  |तनु इस द्रश्य  का वर्णन सुन कर अश्रु प्रवाह करने लगी |और उसके मन में पहली बार कोई सवाल नहीं tha | |

               चलते -चलते = फूल की शुरुआत कलि से होती है 
                                        जिंदगी की शुरुआत दोस्ती से होती है 
                                        दोस्त की शुरुआत अपनों से होती है 
                                       और अपनों की शुरुआत आपसे होती है ||  क्रमश:           


                         

Tuesday, April 26, 2011

mano ya na mano(xxxii) part (STORY)


              "ना जाने हम क्यूँ इतने बडे हो गए'' 

तनु ने कहा की इश्वर हमे किसी ना किसी रूप में अपना अहसास करते रहते हैं ...अब इससे आगे 
तनु राजन ने तनु को पुकारा तनु ने राजन की तरफ देखा आज वो कुछ अलग से ही लग रहे थे |तनु ने राजन से पूछा की क्या बात है |तो राजन थोडा भावुक होते ही बोले की तनु हम क्यू इतने बडे हो गए |तनु पहले तो राजन की तरफ देखती रही फिर उसने राजन के शब्दों को एक माला में पिरो दिया |

                         '' वो बचपन के दिन भी क्या दिन थे 
                           वो मम्मी की गोद,वो पापा के कंधे  
                          ना पैसो की चिंता ,ना लाइफ के फंडे  
 ना कल का गम ,ना future की सोच ,अब कल की है सोच ,और 
अधूरे से हैं सपने ,मुड कर देखा जो ज़रा हमने ,तो बहुत दूर हैं अपने   
ये मंजिलो को ढूंडते कहा आ गए हम ,जाने हम क्यूँ इतने बडे हो गए 
                         ना जाने हम क्यूँ इतने बडे हो गए ''
scraps orkut


तनु रिंकी और मयंक के बारे में अभी सोच ही रही थी की रिंकी उसके सामने आकर खड़ी हो गयी और तनु से बोली की तनु तुम आज रात को हमारे साम्राज्य में वेश बदल कर जाओगी|तनु ने कहा की वो ऐसा नहीं कर सकती क्युकी उसको एक बहुत जरुरी कार्य से बहार जाना है |तो रिंकी ने उससे कहा की नहीं तुम्हे जाना ही होगा नहीं तो हम राजन को भेज देंगे तनु राजन को किसी भी मुश्किल में नहीं देख सकती थी तो वह सहर्ष ही तैयार हो गयी |तनु ने पूछा की उससे क्या करना होगा तब रिंकी ने उत्तर दिया की तुम्हे सर्पलोक के साम्राज्य में जाकर वहा कितनी सेना है इसका पता लगाना होगा |

असली तनु तो पहले ही मुश्किलों के समंदर में थी अब उसकी परछाई को भी मुश्किलों का सामना करना होगा |
तनु ने रिंकी को मयंक से ये कहते सुना की आधा अर्थ तो पानी में डूब ही चूका है अब बाकी बची दुनिया भी प्रलय के गर्त में समां जाए उससे पहले ही हमे एक दूसरा गृह ढूंड लेना चाहिए |क्रमश:

Fantasy Pictures

Sunday, April 24, 2011

mano ya na mano(xxxi) part (STORY)

                                                  ''तनु और मनीषा आंटी'' 
आँचल ने तनु को बताया था की मनीषा आंटी उसकी बचपन से ही देखभाल कर रही हैं |......अब इससे आगे 
तनु ने रात को आँचल से कहा की वो सुबह जल्दी उठकर मोर्निंग walk के लिए जाएगी पर वो जल्दी न उठ सकी सुबह को उसकी नींद एक छोटे से पपी ने खोली छोटा सा पपी उसकी रजाई खीच कर उसे उठा रहा था |  
 scraps orkut

तनु ने देखा की बहुत दिन निकल आया है सूर्यदेव भी अपने पूरे वेग के साथ निकल रहे हैं |तनु ने आज से पहले उस छोटे से पपी को नहीं देखा था |तभी आँचल आ गयी उसने कहा जिमी छोटा पपी आँचल के पास आ गया आँचल ने तनु को बताया की जिमी बहुत टाइम से मिल नहीं रहा था न जाने कहाँ चला गया था |आज न जाने कहाँ से आया है |फिर आँचल तनु से  बोली की आंटी तुम्हे याद कर रही थी |वो बहुत बार रूम में आई पर तुम सो रही थी |

तनु आंटी से मिलने उनके रूम में गयी दरवाज़ा थोडा सा खुला हुआ था तनु ने देखा की एक केतली अपने आप गिलास में coffee ड़ाल रही हैं |तनु ये देख कर वापस अपने रूम में आ गयी | थोड़ी देर में मनीषा आंटी आई और   
      
scraps orkut


तनु से बोली की तुम मेरे रूम में आई थी तनु कुछ कहती मगर तभी आँचल वहा आ गयी और उसने कहा नहीं आंटी जिमी होगा क्या वो वापस आ गया मनीषा आंटी ने कहा फिर आँचल से ये भी कहा की जिमी को मुझसे थोडा दूर ही रखना |बाद में मनीषा आंटी के जाने के बाद आँचल ने बताया की आंटी को जिमी बिलकुल पसंद नहीं है |और जिमी भी आंटी से बहुत डरता है वो उनको देख कर छुप जाता है|

तनु न जाने आज कुछ उदास सी है उसके मन में कुछ पंक्तिया सी उठ रही हैं |                                     
''ना जाने आज दिल उदास सा क्यूँ है ,आज किसी के पास सा क्यूँ है                      
जीते हैं ख़ामोशी के साए में ,ना जाने आज किसी का अनकहा पैगाम 
                                      सा क्यूँ है ''                                                                                                                
                                                                                                                                                     

Friday, April 15, 2011

mano ya na mano(xxx) part (STORY)



गतांक से आगे .......
तनु ने सारा दिन आँचल के साथ ही बिताया ,तनु ने आँचल से पूछा की तुम्हारे हाथ में जो मार्क है तुम उसके बारे में जानती हो की इस sign का क्या मतलब होता है |आँचल ने कहा की नहीं, तनु फिर बोली की तुम मुझे कैसे जानती हो |आँचल ने कहा की वो जब सोती थी तो वो सपने में तनु को देखती थी ऐसा उसके साथ बचपन से होता आया है और उस दिन जब तनु मिली तो आँचल को कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्युकी उसको लगता था की सपने में देखि हुई बात जरुर सच्ची होगी ,और एक न एक दिन तुम मुझे अवश्य मिलोगी आँचल के हाथ में प्रज्वलित अग्नि का मार्क था ,व तनु के हाथ में प्रथिवी और प्रक्रति का सम्मलित निशान था |

तनु ने आँचल से पूछा की तुम्हारे साथ कोई आश्चर्यजनक घटना हुई है |तो तनु ने कहा की हाँ एक बार में अपने स्कूल ट्रिप पर गयी थी ,वहां हम रास्ता भटक गए थे ,चारो तरफ अँधेरा हो रहा था मैने सोचा की काश यहाँ पर मशाल होती तो वहा जंगल में जंगल वासियों ने जो मशाले लगा रखी थी ,वो अपने आप अचानक जल उठी |

तभी आँचल की आंटी का लैटर आया उन्होने उसे ले लिया आँचल वहां से उठ कर चली गयी तनु भी उसके साथ जाने लगी आँचल कही अंदर चली गयी तनु वाही कड़ी हो गयी वो कुछ इस तरह खड़ी थी की आंटी उसे नहीं देख पा रहीं थी |तब तनु ने देखा की आंटी का लैटर खुद अपने आप निकल रहा है |  


scrap orkut रही हैं 


तनु अब मनीषा आंटी के बारे में सोचने लगी की आखिर वो हैं कौन ?क्या वो कोई ज्ञानी कोई महत्मा हैं जो अपनी विद्या के द्वारा ये सब कर रही हैं और उनका मकसद क्या है |आँचल ने बताया था की उसके मम्मी पापा ने उसको संभालने के लिए किसी की जरुरत है ऐसा एक इश्तिहार दिया था |तभी ये मनीषा आंटी मिली हैं |आँचल उनके बीते कल के बारे में कुछ नहीं जानती वो सिर्फ इतना जानती है की मनीषा आंटी बहुत सालो से उसकी देख -भाल कर रही हैं |(आँचल का घर )  क्रमश:
good night orkut scraps

Wednesday, April 13, 2011

mano ya na mano(xxix) part (STORY)

        
      
गतांक से आगे......
तनु मौसीजी को विभिन्न स्थानों के दर्शन करा रही है |तनु ने कभी- कभी ये महसूस किया की मौसीजी में संवेदनाओ का थोडा आभाव है |पर वो इस पर ज्यादा ध्यान न देकर पूरे मन से उनको भ्रमण करा रही थी|   
                                   ''एक लम्हा ही काफी होता है किसी को पहचानने के लिए
                                   और कभी -कभी जिंदगी गुज़र जाती है ,पर वो एक
                                                              लम्हा नहीं मिलता''
तनु तुम यही रुको में अभी आती हूँ ऐसा कहकर मौसीजी चली गयी और एक पैड के पीछे जाकर मौसीजी ने अपने बैग में से एक diaryनिकाली और उसमे एक पंख अपने आप ही कुछ लिखने लगा |







उसके बाद वो वापस वहां आई तो तनु उन्हे कही दिखाई नहीं दी |उन्होने अपना आकर बढ़ाना शुरू किया और सब जगह देखने लगी उनको तनु आती हुई दिखाई दी वो फिर से नोर्मल हो गयी |उन्होने तनु को कहा की वो बचपन में परियो की कहानिया सुनती थी क्या वो सच होती हैं ,तनु ने कहा की नहीं ये कहानिया तो कवेल मनोरंजन के लिए होती हैं |जिंदगी बिताने के लिए बहुत सी बातो का सहारा लेना पड़ता है ये कहानिया भी उन्ही बातो का एक हिस्सा होती हैं |


Orkut Fairy Scrap: 1 फिर उन्होने कहा की तनु अगर ये बाते सच हो जाये तो?तनु उनको देखती रह गयी फिर तनु बोली की हाँ मौसीजी ये कार्य भी मानव ही कर सकते हैं रोबोट परी बनाकर फिर तनु बोली की मानव कितना भी उस तीसरी शक्ति के समक्ष हनी का दावा कर ले ,और चाहे कितना भी एक हद तक इसमे सफल क्यों न हो जाये पर वो सुपर natural पावर तक नहीं पहुच सकता |तो मौसीजी बोली की एक दिन पहुच जायेगा |तनु बोली मौसीजी मै क्षमा चाहती हूँ मै आपकी इस बात से सहमत नहीं हूँ |मौसीजी ने कहा क्यों ?तनु बोली आज इंसान चन्द्र ग्रह तक पहुच गया है क्या वहां उसे भगवान् के दर्शन हुएय |

इंसान जितना उस सुपर पावर को छुने की कोशिश करता है और एक कदम पीछे हो जाता है |इश्वर तो अनंत हैं 
''हरी अनंत हरी कथा अनंता '' हाँ हम उस पराशक्ति को प्राप्त कर सकते हैं ,अपनी भक्ति के द्वारा फिर तनु बोली की मैने सुना है की हर किसी प्राणी को इश्वर एक बार दर्शन अवश्य देते हैं बशक हम उनको पहचानने के काबिल हो |किसी न किसी रूप मै इश्वर हमे अपनी उपस्तिथि का अहसास करते रहते हैं | क्रमश:
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Monday, April 11, 2011

mano ya na mano(xxviii) part (STORY)

गतांक से आगे .....

राजन के सो जाने के बाद मौसीजी एक आदमकद अलमारी में जाकर खड़ी हो गयी और एक पुतले में तब्दील हो गयी |तनु राजन को बुलाने कमरे में आई पर राजन सो रहे थे |तनु ने मौसीजी को आवाज़ लगायी परन्तु कोई आवाज़ नहीं आई और न ही मौसीजी स्वयं दीखाई दी |तनु ने उनको इधर -उधर जाकर भी देखा पर वो दीखाई ही नहीं दी |

तनु ने राजन को बहुत उठया परन्तु जब वो नहीं उठे तो तनु जाने लगी तो एकदम राजन उठ बैठे और तनु से बोले की तुमने मुझे उठाया क्यो नहीं तनु कुछ नहीं बोली उसने सिर्फ इतना कहा की आओ चलते हैं |तो राजन बोले मौसीजी कहाँ हैं?तनु ने कहा की मैने बहुत ढूंडा है परन्तु वो दिखाई नहीं दे रही हैं |

दोनों रूम से बहार आगये |सुबह कोउनकी नींद आरती की आवाज़ से टूटी दोनों बहार आये और फिर उनका आशीर्वाद लिया |मौसीजी तनु से बोली तनु क्या तुम मुझे अपना शहर घुमोगी तनु ने कहा की आप न भी कहती तब भी में आपको अपना शहर घुमा कर लाती |तनु ने मौसीजी को बहुत जगहे दीखाई और उनको   शहर का  मेला भी दीखाया ,|     क्रमश:                                 

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Thursday, April 7, 2011

mano ya na mano(xxvii) part(STORY)

गतांक से आगे............
तनु का haath  का मार्क चमकने लगा तनु जैसे -जैसे आगे बढती जा रही थी उसका मार्क और गहरा होता जा रहा था |पर तनु अब भी उस दुसरे व्यक्ति के पास नहीं पहुच प् रही थी | तभी तनु ने देखा की वहां कुछ बच्चे खेल रहे हैं |
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तनु ने उनके पास जाकर पूछा की उनका क्या है पर बच्चे तनु से कुछ बोलहि नहीं रहे थे |तभी उनमी से एक बच्चा बोला की किसी की आवाज़ तो आ रही पर कोई दीखाई नहीं दे रहा |तनु बहुत निराश हो गयी वह वापस जाने लगी फिर उसने देखा की उसके जैसी एक लड़की उसके हाथ में भी कुछ चमक रहा है |तनु उसके पास गयी तो उसे अपने अंदर कुछ शक्ति का अहसास हुआ उसने देखा की बिलकुल उसकी शकल उसकी collage वाली फ्रेंड से मिल रही थी |वो लड़की भी तनु से ऐसे मिली जैसे बहुत दिनों से जानती हो उसने तनु को अपना नाम आँचल   
बताया |वो तनु को अपने साथ अपने घर ले गयी |आँचल ने बताया की उसकी मम्मी पापा विदेश में रहते हैं |यंहा
अपनी दादी और आंटी के साथ रहती है |

तनु को आँचल के घर में बहुत प्यार मिला तनु और आँचल एक ही कमरे में रुके थे |आँचल सो गयी थी तनु को नींद नहीं आ रही थी तनु ने देखा की उनके कमरे का दरवाज़ा खुला तनु ने झट से अपनी आंखे बंद कर ली जब दरवाज़ा बंद हनी लगा तो तनु ने देखा की आँचल की आंटी हैं |तनु थोड़ी देर में धीरे से उठी और बहार गयी उसने देखा की आँचल की आंटी ने काले रंग का लबादा पहन रखा है और फिर एक दीवार के पास आकर उन्होने अपना मुह भी ढ्क लिया |और तनु के देखते -देखते वो दीवार के अंदर चली गयी |तनु हतप्रभ सी दिखाती रह गयी फिर                                                                                                                                                                                     वो वापस अपने कमरे में आगई आँचल अब भी गहरी नींद में थी |
                 
 फिर तनु को नींद नहीं आई बार -बार उसे आंटी की घटना याद आती थी |फिर न जाने कब वो निद्रा के आगोश में चली गयी उसे स्वयं भी ये पता नहीं चला सुबह को उसकी नींद आंटी के आवाज़ लगाने से हुई चाय पीते -पीते आँचल ने तनु को बताया की उसकी आंटी का नाम मनीषा है और उसकी दादी कुछ बोल नहीं सकती |तनु ने आँचल को रात के बारे में कुछ नहीं बताया क्युकी उसने देखा की आँचल अपनी मनीषा आंटी का बहुत मान करती है ,और उन्हे प्यार भी बहुत करती है |और वैसे भी तनु कल ही तो आई है तो वो उसकी बात का विश्वास क्यों करेगी |क्रमश:                        
Good Morning Orkut Scraps Graphics and Comments

  

Wednesday, April 6, 2011

mano ya na mano(xxvi) part (STORY)

 
गतांक से आगे .............
मोर ने कहा की तनु हम सब तुम्हारी मदद करेंगे |तनु अपनी सारी बात बताने ही जा रही थी |की उसे अपने गुरूजी ऋषिजी की बात धयान आई की तनु जब अच्छे कार्य के लिए अच्छे व्यक्ति निकलते हैं तो ,अन्धकार उनकी राह रोकने के लिए विभिन रूपों में आते हैं |और उनकी गुप्त बातो को जान कर उनकी राह कठिन कर देते हैं |तनु ने कुछ नहीं कहा |धीरे -dheerey सब पशु पक्षी अपने -अपने गंतव्य की ओर चले गए |

तनु वाही बैठी रही और ऐसे ही बैठे -बैठे वो प्रथिवी को खुरचने लगी वो बहुत देर तक ऐसा करती रही और वहां एक बड़ा होल हो गया तनु ने देखा की वहां सीढियाँ  बनी हुई हैं,तनु उन सीढियाँ के सहारे नीचे उतर आई और तनु ने देखा की ये तो ek आराध्य स्थान है ।

तनु ने देखा की वहां पर सब व्यवस्था है तनु स्वछ हो गयी तनु ने देखा की वहां मोतियों के ढेर लगे हैं |और पूजा की अन्य सामग्री भी हैं |तनु ने एक मुट्ठी में मोती लिए और उनसे  की पूजा की तनु का मन बड़ा शांत था

   
तनु ने देखा की वहां सब प्रकार की खाद्य सामग्री भी राखी हैं |तनु वहां से वापस आ गयी और फिर गांव की ओर निकल पड़ी तनु ने देखा की उसका निशाँ चमकने लगा है तनु वहीँ जहाँ निशाँ चमक रहा था वहीँ ढूंडने लगी |
                                                                                                                                            kramash:                                                                                          

mano ya na mano(xxv) part (STORY)

            
गतांक से आगे ...........
तनु वहीँ खेतो में थक कर बैठ गयी और तनु का ध्यान लग गया वह भगवन की भक्ति में खो गयी |और
विलग -विलग रूपों में देखने लगी
(यह omजो आप mountain पर  देख रहे हैं यह मानसरोवर की फोटो है किन्ही भक्त ने ये यात्रा के दौरान ली है )
तनु ध्यान में बैठी थी उसकी मानसिक तरंगे मुनिवरो से जुड़ गयी थी वह कभी -कभी तो ऐसा महसूस करती थी की जो ज्ञानीजन गुरुजन अपने मन में गयानाअध्यन करते हैं वह जब ध्यान मुद्रा में होती है तो सुन पाती है |   

तभी किसी की आवाज़ तनु के कानो में पड़ी तनु ने अपने नेत्र खोल कर देखा तो एक मोर को देखा वो अपने पंख फैओलाये खड़ा था और तनु से बात कर रहा था तनु ने पूछा की तुम बोल भी सकते हो तो मोर ने उत्तर दिया यहाँ तो सजीय व् नीर्जिव दोनों बोलते हैं |तनु ने सोचा की कहीं ये उन चारो में से तो नहीं है जिनको मुझे dhundna

है |तनु ने अपना nishan  देखा की कहीं वो चमक तो नहीं रहा पर वो नहीं चमक रहा था |तनु हताश हो गयी तनु ने देखा की उसके पास जो पैड थे, वो स्वयम ही उसके लिए फल गिरने लगे पर तनु का उन्हे लेने का मन नहीं हुआ |तो वो पैड जिन्होने फल दिए थे बोले की तनु ले लो तुम्हे अच्छा लगेगा और तुम हम सब की भाषा भी समझने लगोगी |तनु अब सब की आवाज और भाषा समझ और सुन प् रही थी |सब तनु से बात करने को व्याकुल थे पर तनु का ध्यान तो अपने जैसे व्यक्तियों को ढूंडने में था |तनु को चिंतित देख वो मोर बोला की तनु तुम क्या ढूंड रही हो |हम सब तुम्हारी हेल्प करेंगे |     क्रमश:

hello