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Thursday, May 11, 2017

Mahula



Have a great Autumn  Images


महुला ने थर्मामीटर से अपना ट्रम्प्रेचरे चेक किया फिर बोली hmmmm नार्मल है, और फिर वो अपने में मस्त हो गयी | उसका थोड़ा मन सुबह से ही उदास था जिस वजह से उसको थोड़ी हरारत सी फील हो रही थी उसने अपने मन में  तरह घुमड़ते विचारों और भावो को दर किनार कर दिया और किचन में जाकर ठंडा मैंगो  शेक बना लायी |
(मैंगो शेक बनाने की इजी रेसिपी के लिए यहाँ क्लिक करें
https://www.youtube.com/watch?v=XM9pOGNtXHo)

उसने  मैंगो शेक का सिप भरते हुए अपनी डायरी खोली फर्स्ट पेज ही उसकी और सिद्धर्थ की फोटो  लगी थी हस्ती मुस्कराती सिद्द कैसे उसको प्यार भरी नज़रों से तक रहे थे | एक वही है उसने खुद को ही दोष दिया  जो उनको भुलाये बैठी है | ना चाहते हुए भी उसकी उँगलियाँ मोबाइल पे अटखेलियां  लगी और फिर उसने सिद्धार्थ का नंबर मिला दिया उधर से सिद्द की आवाज़ आयी हाँ महुला मैं आज की फ्लाइट से आ रहा हु तुम्हारे पास मेरी फेवरेट कलर की साड़ी पहन कर तैयार रहना हम आज अपने फेवरेट रेस्टॉरेंट  चलेंगे |

महुला का दिल बल्लियों उछलने लगा एक  तो उसे लगा बहार ही आ जायेगा और फिर नाचते मयूर की तरह वो ड्रेसअप  होने चली गयी |

चलते - चलते =नीलम से ज़िंदगी हो गयी है मेरी
                       जो किसी को सूट ही नहीं करता | |
                     
                        दो अल्फ़ाज़ क्या कह दिए मैंने
                        वो बेगाने हो गए ||

                        हम दोनों ही अनजाने थे
                        मगर एक नज़र देखते ही
                         सदियों की  पहचान निकल आयी ||
                   
                         उनका आना ना हुआ
                         हमारा बुलाना  ना हुआ
                         फासला इतना की
                         दोनों से मिटाना ना हुआ ||

                        कभी धड़कते दिल से पूछो
                       क्या कभी हम मिले थे
                       वो  कहेगा की तुम जुदा ही कब हुए थे ||
Happy Autumn  Images

Monday, May 1, 2017

AALAAP


Sweet Dreams Images

आलाप ने घडी की तरफ नज़र डाली, रात के दो बजे थे उसने अपने मोबाइल को थोड़ा थपथपाया इस उमीद्द से की शायद उसमे थोड़ी बैटरी  बची हो और वो थपथपाने से चल जाये शायद, पर अफसोस हुआ उसको, मोबाइल तो पहले की ही भांति बड़ी ख़ामोशी से सब देख रहा था |

अलास्का तो अब तक सो गयी होगी ''पापा '' का यानि उसका इंतज़ार करते - करते वो हमेशा अपनी मम्मी से अपना फेवरेट भजन सुन कर सोती है उसने प्रज्ञा अपनी पत्नी की आवाज़ रिकॉर्ड कर रखी है , ( अलास्का का फेवरेट भजन सुनने के  लिए यहाँ क्लिक करें ) | 
https://youtu.be/Ay4bmy0wApQ

आलाप अपने फ्रेंड की पार्टी में गया था वहीँ उसको इतनी देर हो गयी थी और वो कार की चाबी अपने उसी फ्रेंड  यहाँ कही भूल आया शायद उसको यद् ही नहीं आ रही वो घर पे फ़ोन भी नहीं कर सकता  बैटरी ख़तम हो गयी थी वो  अपने फ्रेंड के घर गया भी था मगर तब तक वो लोग घोड़े बेच कर सो चुके थे | 

उसने मन ही मन कहा " माता रानी कुछ तो मेहर कर '' माता रानी ने अपनी कृपा का हाथ उसके सर  दिया तभी वहां से एक व्हीकल गुज़रा उसने रुक कर उससे पूछा '' बाबू जी कहीं जाना है क्या ? '' हाँ भैया जाना है न ज़रा चौक तक ले चलो !! 'जी बाबू जी ' और आज आलाप ऑटो में बैठ कर खुद को राजा महसूस कर रहा था जैसे ही वो कुछ दूर गया तो बदल गरजने लगे वो परेशान हो गया प्रज्ञा उसका इंतज़ार कर रही होगी | 

हलकी फुलकी छींटो के साथ बादलों का गर्जना रुक गया पता नहीं कैसे - कैसे ख़याल उसके मन में आने लगे जैसे - तैसे वो घर पंहुचा उसने अपना कोट जैसे ही हाथ से उत्तार के कंधे पे टांगा कार की चाबी नीचे गिर गयी 

तभी उसको याद आया की शोफ़र ने कार की चाबी उसको देते वक़्त कहा था की साहब पेट्रोल डलवाना है पर उसने उसकी एक ना सुनी और कार लेकर ऐसे ही चल दिया था , वो भला हो ऑटो वाले भैया का जिन्होंने उसको घर तक पंहुचा दिया | 

चलते - चलते = रात को नींद बुलाने से आती है 
                        दिन में ना जाने कहाँ से आती है 
                        उस आसमान से पूछो जो हर पल 
                        जाग कर हमको बेफिक्रे सुलाता है || 

Sweet Dreams Images

Wednesday, April 26, 2017

Dakshina


Have a great day!! Images

'' शनिदान महादान '' बहार से आवाज़ आयी दक्षिणा का मुँह बन गया ''अच्छा बिज़नेस चल रहा है ये '' एक दिन मुझे ही ले जायेगा बाल्टी में डाल के अंगारे की तरह तप गयी वो कदाचित भावावेश में उसके कपोल फूलने और पिचकने लगे, अगर एक बार ये और बोलै ना तो...  तो...  तो.. मैं इसके ऊपर.... तभी उसने खुद को रोका RELAX BABY और फिर वो आँखों को बंद करके बैठ गयी तनिक उसके मन में ये भाव उत्पन्न हुआ की आँखों को झालरो में छिपा लिया है, और उसने अपनी श्वेत मोती नुमा दन्त पंक्ति को अपने लालिमा युक्त ओठ में से बहार चमका दिया |

''डार्लिंग '' ये सुनकर उसने अपनी सीपनुमा आँखों को पलकों रूपी झालर से बहार निकला L.E.D पर एक चैनल पे एक बहुचर्चित सीरियल चल रहा था उसी के ये शब्द थे | वो उठकर बहार आ गयी अपने लॉन में उसका वो सिर्फ और सिर्फ उसका लॉन है यहाँ लुक आफ्टर करने वाले माली के सिवा यहाँ कोई नहीं आता वहां सारे के सारे काले गुलाब लगे हैं !! रंगहीन या यूँ कह लीजिये की वो काले गुलाब सृष्टि के समस्त रंगो को अपने अंदर समेटे हे हैं | ( ब्लैक कलर में समस्त रंगो को अपने अंदर समा लेने का स्टैमिना होता है ) |

Eyes image 6 Images


वो उठी फ्रेषरूम में जाकर उसने अपने फेस पे हैंड शावर से अपने फेस को गीला किया तब तक, जब तक की उसकी बैक बोन में ठण्ड के मारे सिरहन नहीं दौड़ गयी !  उसने  किचन में जाकर इलेक्ट्रिक केतली में ब्लैक कॉफ़ी के लिए पानी बॉयल्ड करने के लिए रख दिया, जब केतली की विसिल बजने लगी तो उसने एक बड़ा कप उठा लिया जिसके हैंडल पे एक नाचती हुई लड़की बनी थी उसमे उसने एक बड़ा चम्मच काफी डाली और फिर बॉयल्ड पानी डालकर चुस्कियां भरते हुए लॉन की चेयर पे बैठ गयी |

यकायक मेघ घुमड़ - घुमड़ कर आकर विशाल गगन में छाने लगे और बरखा की मोती जैसी मोटी - मोटी बूंदे गिरने लगी ''हे राम जी '' उसके मुँह से निकला मैं तो पूरी भीग जाउंगी | और वो कॉफी  की ट्रे को छाते की तरह ढक कर अंदर आयी अपने रूम में | सामने की कोठी में में  नयन जो हर वक़्त टेलिस्कोप से आकाश में देखता रहता था और कभी कभार मूड फ्रेश करने के लिए पड़ोसियों के आँगन और यदा -कदा उनके लिविंग रूम और बेड रूम में भी झांक लेता था, वो दक्षिणा को सर पे कॉफ़ी की ट्रे ढक कर ले जाते देख अपना पेट पकड़ कर हसने लगा और हँसते - हँसते चारों तरफ को गोल - गोल घूम गया हाँ ! यक़ीनन आप सही समझे वो सुबह से दक्षिणा को वाच कर रहा था |

''नयन '' तभी माँ ने उसको आवाज़ लगायी नयन भागा  - भागा नीचे आया सामने तमन्ना खड़ी  थी नयन ने तमन्ना से कहा तुम यहाँ ? हाँ मैं वो बोली तुम collage क्यों नहीं आ रहे ? और सवाल दागते - दागते वो सोफे पे बेलीज़ उतर कर आलथी -पालथी मार के बैठ गयी | नयन बोला माँ से को कुछ मत बताना प्लीज - प्लीज , '' ठीक है कुछ नहीं बताउंगी पर इसकी पेनल्टी लगेगी '' वो बोलै जो तुम चाहो तमन्ना बोली कोल्ड कॉफ़ी विथ आइसक्रीम ( कोल्ड कॉफ़ी बनाने की रेसिपी  कृपया यहाँ क्लिक करे https://youtu.be/VvmnVE1LzcE ) पक्का done अब तुम जाओ यहाँ से | और उसके भेज कर वो सोने चला गया  क्रमश: 

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चलते - चलते = मुझमे तुम्हारी चाहत के सिवा कुछ भी नहीं
                       चाहों तो मेरी धड़कनो की तलाशी ले लो ||

                       तुझसे दूर रहकर कुछ यूँ पल बिताये मैंने
                       ना लब हिले फिर भी हर पल तुझको पुकारा मैंने ||

Have a great day Images

Wednesday, April 19, 2017

pankhuri

A rose to say I'm thinking of you  Images

पंखुरी जैसे ही टेरस  पे आयी उसने दो पक्षियों  को आपस में  बतियाते देखा वो अपनी भाषा में बातें कर रहे थे शायद वो कुछ एक दूसरे को अपने भाव व्यक्त कर रहे थे | उसको अपना बचपन याद आ गया जब वो अपनी सखी अपनी क्लासमेट जो प्री क्लास्सेस में से ही उसके  साथ थी उसकी याद हो आयी वो तनिक भावुक हो गयी वो या कदाचित  विह्वल  हो गयी थी   |

तभी जब वो अपनी यादों  के बबल्स को उड़ा रही थी शनैः ही उसकी तन्द्रा भांग हुई तब जबकि पक्षियो ने अपनी नन्ही बाँहों को फैला कर उड़ना शुरू किया | गगन कुछ मटमैला हो रहा था निश्चय ही धूल का गुबार उड़ने वाला है | यह सोचकर वो, तनिक उसके माथे पे लकीरे खींच आयी थी उसने झट - पट  सारे सूखे हुए कपड़ों को एकत्रित करके उनको अपने रूम में ले आयी |

''दीदी '' तभी बहार से आवाज़ आयी  'हाँ ' ये बोलते हुए वो बाहर आयी '' काका '' बोले बिटिया खाने में क्या बनेगा ? वो बोली कुछ भी बना लो  काका आप तो हमारी पसंद जानते हो ! वो तो ठीक है बिटिया काका बोले पर आज तुम्हारा क्या खाने का मन  है ये मुझको कैसे पता चलेगा ?

पंखुरी एक ठहरी हुई मुस्कान के साथ बोली, ठीक है आप आलू के पराठे और कड़ाही पनीर बना लीजिये साथ में स्वीटडिश के लिए रसमलाई रखी ही है हमारे लिए काफी है , ''और हाँ '' आपका जो मन हो वो बनाइये और खाइये'' हाँ दीदी ये भी कोई कहने की बात है'' काका  बोले |

लंच पंखुरी ने अकेले ही किया , अभिलाष  लंच टाइम में  अपने ऑफिस में होते हैं | पंखुरी अपने मोबाइल फ़ोन  बिजी हो गयी , तभी उसको एक साया दिखाई दिया वो विंडो के पास आयी उसने बाहर देखा तो उसको एक सेल्समैन दिखाई दिया ! वो बेहद आशचर्य चकित रह गयी की सोसायटी की सिक्योरिटी को पार करके ये यहाँ पंद्रहवी मंजिल तक कैसे आ गया ? उसके लिए ये बात बहुत चौकाने वाली थी !!

पंखुरी ने उसके लिए ना तो डोर खोला और ना ही उससे कुछ  बात की | उसने अपना ध्यान सेल्समेन से हटा कर मोबाइल गेम  दिया | तभी उसकी सहेली ''मुरलिका '' का फ़ोन आया उससे पहले तो दोनों हाय -हेलो हुई फिर दोनों अपनी अतरंग बातों  में मशगूल हो गयी |

पंखुरी ने मुरलिका से बहुत बाते की पर उसका केंद्रबिंदु तो अभिलाष थे,  बहार से आवाज़ आयी दीदी साहब आ गए हैं वो लगभग भागती  हुई सी आयी उसको आता देखकर अभिलाष बोले देखो पंखुरी अपना सरप्राइज वो ''धक् ''  गयी पापा !!! आप और वो अपने पापा की बाहों में झूल गयी कदाचित किसी अल्हड की तरह :}

चलते चलते = करीब आना भी चाहुँ तो
                     आना नहीं होगा
                     दूर जाना भी चाहुँ तो
                     जाना नहीं होगा
                      ये वो रिश्ता है
                      जिसे आज़माना भी चाहुँ  तो
                      आज़माना नहीं होगा
                      यह तो सिलसिला है
                      तेरे मेरे प्यार का
                       जिसे ठुकराना भी चाहुँ
                       तो ठुकराना नहीं होगा || 

With friendship this rose is sent your way, I'm hope you have a wonderful day!  Images








Tuesday, February 7, 2017

Aur wo chala gaya


A fairy walking across flowers Images

                                                            ''  Aur wo chala gaya ''

''वो'' रेल की पटरियों पे धड़ाधड़ भागा जा रहा था, ज़माने से परेशान, अपनी ही धुन में भागा जा रहा था। रात के दो बजे थे, उसे कोई सुध ही नहीं थी... और हो भी तो कैसे? उसने ''ब्रेकअप'' जो कर लिया था ! ऐ मेरे मालिक ''ये तूने क्या किया, क्या तुझे में ही मिला था इस पूरी दुनिया में ?   नहीईईई ..... एक आवाज़ आयी और किसी रुई के फाहे जैसे हाथों ने उसको पटरी से खींच लिया और ''वो '' उसकी दोनों हाथों की बाहों में बंध  गया, और ट्रेन धड़धड़धड़ करती निकल गयी।

तुमने मुझे क्यों बचाया ? मै कोई बचाने वाली नहीं हूँ, उसने (युवती ने ) ऊपर की ओर देखते हुए कहाँ, ''तुमको उस ''अनदेखी सुपर शक्ति '' ने बचाया है''। फिर वह युवती ''वो'' को अपने साथ ले चली, और ''वो'' भी मंत्रमुग्ध सा बंधा - खींचा सा उसके साथ चला जा रहा था । वह युवती पहाड़ी से ''वो '' का हाथ पकडे नीचे उतरती जा रही थी । तुम इतनी रात में यहाँ क्या कर  रही थी 'वो ' ने युवती से पूछा ? उस युवती ने कहा की आसमान में से एक तारा टूट रहा था,  जिसको देखकर में उस टूटते तारे का पीछा करते - करते यहाँ तक आ गयी, और फिर मैंने तुमको देखा । ''वो ' ने एक लंबी सी हुंकार भरी। उसकी दृष्टि में एक अज़ीब सी खामोशी थी, जिसे देखकर एक बार को तो उस युवती के होश ही उड़ गए ।

चलते - चलते घंटो हो गए थे , न तो कोई मुकाम ही आया , और न ही वो दोनों थके। और वो दोनों इस बात से भी अनजान थे कि कोई अनजाना शख्स भी उनको फॉलो कर रहा है !  चलते - चलते चाँद की चटकीली चांदनी भी अपनी पूर्णता बिखेर रही थी, ''वो '' और वह युवती एक वृक्ष के नीचे खड़े हो गए और अचानक ही वो दोनों एक दूसरे में विलीन हो गए। अब वहां सिर्फ युवती खड़ी थी । अनजाना शख्स ये देखकर वही स्तब्ध हो गया और वह युवती झील में नाव में बैठकर लोप हो गयी और तभी, आव्या चिहुक कर जाग गयी , ''अरे ये मैंने सपने में क्या देखा ?!'' तभी मोबाइल बज उठा। दूसरी तरफ से निकेतन था , आव्या रो पड़ी और बोली जल्दी घर आ जाओ। तभी फ़ोन में से बीप - बीप की सी आवाज़ आने लगी । आव्या घर में अकेली थी , सर्वेंट भी अपने सर्वेंट क्वार्टर में रहते हैं , वह स्लिपर्स पहन कर सर्वेंट क्वार्टर की तरफ बढ़ चली , उसने अपने आगे रेनबो देखा। ये उसका वहम था या सत्य, नही जान पायी, और उस इंद्रधनुष में बढ़ती चली गयी । मनमोहक संगीत उसके कानो में पड़ा, नूपुर की झंकार आव्या खुद को रोक नहीं पायी और थिरकने लगी। और फिर बेला की सुगंध उसकी नाक में आयी और...और  जब उसकी आँख खुली निकेतन चेयर पर बैठे पेपर पढ़ रहे थे ।

चलते -चलते =
छू  लू जो तेरा हाथ तो फूलों की सुगंध आती है 
तेरे आँचल से मुझे मिटटी की सुगंध आती है
कुछ न कहना मुझे, तुझे मेरे प्यार की कसम 
मुझे तेरी साँसों में जन्नत  झलक आती है 
कसम ले ले मुझसे , तू उस कायनात की, फना हो जाऊ मै अगर 
जो तुझसे रूबरू न होऊँ, खुद को  छूकर मुझे तेरे  साथ की महक आती  है  ॥ 

A butterfly with purple flowers Images

Saturday, February 4, 2017

sharangi

                                                        
I remember you and I miss you Images

                                         ''  sharangi  '' 

श्रांगी आज स्कूल से घर  बहुत उदासवापस आयी है। वापस आते वक़्त बस वो यही सोचे जा रही थी की ऐसा कैसे हो गया, वो तो पूरा धयान लगाकर और मन लगा कर खेलती है! फिर कहाँ उससे चूक हो गयी कि वो मृदा की गेंद को पहचान नहीं सकी? यहाँ मेरा आपको अपनी कहानी की नायिका से एक परिचय करना बेहद जरूरी है- मेरी नायिका एक बाहरवी क्लास की स्टूडेंट है जिसका सपना सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट है। उसकी ग्रैंड माँ हमेशा उसको बताती रहती हैं कि जिस उम्र में लड़कियाँ गुड़ियों और किचन के खिलोनो से खेला करती है, उस उम्र से तो उसने बैट पकड़ना शुरू कर दिया था। उसको याद है, उसके पापा जहाँ भी, जिस भी कंट्री और अपने देश की किसी भी सिटी में जाते हैं तो उसके लिए ''क्रिकेट किट'' लाना कभी नहीं भूलते, और वो कहती '' I'm the most lucky person in this world ' ...  तो ऐसी ग्रोइंग गर्ल की कहानी है ये । 


श्रांगी ने जैसे ही बैल बजायी दादी ने दरवाज़ा खोल दिया। दादी हमेशा उसके लिए डोर खोलती हैं, कितनी बार उसने दादी से कहा भी है की प्लीज दादी आप मेरे लिए परेशान मत हुआ करो रामु काका को बोल दिया करो वही खोल दिया करेंगे, मगर दादी हमेशा एक ही बात बोलती हैं की तूने ही तो मुझे ज़िंदा रखा हुआ है वार्ना में तो कबकी....... और इससे आगे दादी कुछ बोले कि वो दादी के मुँह पर अपना हाथ रख देती है। श्रांगी ने बैग को सोफे पर लगभग फेंकने वाले अंदाज़ में डाला, तभी दादी को लग गया की आज उनकी श्रांगी का मूड ख़राब है। वो स्वयं ही जाकर रसोई में से उसकी पसंद की थाली लगा लायी और उसके कमरे में ही ले गयी। जैसा की दादी ने सोचा था वैसा ही पाया, श्रांगी अपने दोनों घुटनो में मुँह छिपाये बैठी थी। दादी ने थाली को टेबल पर रख दिया और अपने झुर्रियों भरे कपकपाते वात्सल्य से भरे हाथ श्रांगी के सिर पे रखा। 'दादी ' ये कहती हुई श्रांगी दादी से लिपट गयी। कुछ देर बाद जब वो थोड़ी सी नार्मल हुई तो बोली कि आज मैं खेल में आती हुई बॉल को नहीं पहचान पायी और आउट हो गयी। दादी बोली ''बेटा हम हाड - मांस के बने इंसान है, थोड़ी चूक, थोड़ी गलती होनी तो स्वाभाविक ही है। बेटा हम गलतियां करते हैं तभी तो हम इंसान हैं नहीं तो भगवान् न होते''। हाँ दादी यू आर राईट...। और ये कहते कहते उसने टेबल से खाने की प्लेट उठा ली और अपनी पसंद का खाना देखते ही पाँच मिनट में चट कर गयी।  अब उसको काफी हल्का लग रहा था और साथ ही उसका इरादा भी बहुत पक्का हो गया था। वो खाना खाकर थोड़ी देर के लिए बिस्तर पे लेटी तो कब उसकी आँख लग गयी पता हि नहीं चला । 

ममा की चहकती आवाज़ से ही उसकी निंद्रा भंग हुई, अरे ! मॉम ऑफिस से आ गयी और  फिर  माँ की आवाज़ सुनते ही बाहर लॉबी की ओर भागी मोमा ये कहती हुई अपनी माँ के कंधे पे झूल गयी, '' मेरा बच्चा '' माँ ने उसे प्यार से अपने कलेजे से लगा लिया एक वही इकलौता बच्चा जो है उनका । मोम ने उससे पूछा तुम्हारी क्रिकेट प्रैक्टिस कैसी चल रही है ? ठीक ममा .. उसने बेहद संतुलित उत्तर दिया , और फिर थोड़ा रुक कर बोली मॉम में आपको नेशनल लेवल पर खेल कर दिखाउंगी । हाँ , मेरा बेटा मुझको तुमपे पूरा यकीन है । 

चलते - चलते = इरादे आज भी मेरे इतने पक्के हैं 
                       चांहू तो उछल के अंबर को  छू लूँ !!

Dark red roses with glittering hearts Images
                                         

Thursday, January 26, 2017

''Kitty''



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                                                ''Kitty''

किटी ने जल्दी-जल्दी अपने पैर आगे बढ़ाये। माँ इंतज़ार कर रही होंगी, बहार गेट पे खड़ी ये सोच कर मानो उसके पंख ही लग गए। आज तो कोई 'ऑटो वाला भैया भी नहीं मिल रहे!' तभी पीछे से उसको हॉर्न की आवाज़ सुनाई दी। जब उसने पीछे पलट कर देखा तो ऑटो वाला भैया बोला, ''दीदी, आपकी वजह से मैंने चार सवारियों को इनकार कर दिया है!' किटी जल्दी से उसके ऑटो में बैठते हुए बोली '' थैंक यू भैया। '' रामु ने रिक्शा आगे बढ़ा दिया । 

किटी यादों के गलियारे में पंहुच गयी। आज से चार साल पहले राजू बेरोजगार था और अपनी माँ के साथ उसकी यहाँ घर का काम कराने आया करता था। ऐसा नहीं कि राजू पढ़ा -लिखा नहीं है, आठवी तक पढाई की है। न जाने क्यों किटी को उसमे अपना छोटा भाई दिखाई देता था। तभी उसने बॉस से अपनी तीन महीने की एडवांस तनख्वाह लेकर राजू के लिए इस ऑटो का प्रबन्ध कर दिया। राजू की माँ ने तो उसकी कितनी बलाए ले थी, राजू भी मुह छिपा कर कितना रोया था। और हर महीने ना - ना करते हुए भी उसके हाथ में 400-500 रुपये रख ही देता है । 

''दीदी घर आ गया , कहाँ खोयी हुई हो ? तबियत ठीक नहीं है क्या ? ऑफिस में कुछ हुआ क्या ? '' एक ही साथ उसने इतने सवालों की बौछार कर दी। किटी ने नकली मुस्कान ओढ़ कर कहा नहीं भैया कुछ भी तो नहीं हुआ है, तुम तो बेकार में इतना परेशान हो रहे हो । जबकि सच बात तो ये थी की उसको अपने छोटे भाई की बहुत याद आ रही थी। हाई स्कूल में पूरे स्टेट में टॉप किया था उसने, पता नहीं उसको पापा की एक बात क्या बुरी लगी की सब कुछ छोड़ कर अपने दोस्त के साथ कंट्री के बहार चला गया। उसके साथ के दोस्त से ही उसकी कुशलता की खबर मिल जाती है । किटी एक ठंडी सांस लेकर घर के अंदर दाखिल हुई जो पांचवे माले पे है । 

उसे घंटी बजाने की भी जरुरत नहीं पड़ी, माँ दरवाज़े पर ही खड़ी थी। ''बड़ी देर लगा दी तूने। तो चल हाथ मुह धो ले मैं तेरे लिए कॉफ़ी बनाती हूँ ।'' उसको कॉलेज टाइम से ही दिन में 5-6  बार कॉफ़ी पीने की आदत पड़ी हुई है। माँ उसके लिए बड़े प्यार से कॉफ़ी बना के ले आयी। तब तक उसने अपने 'लगजरी बाथरूम' में जाकर अपने मुँह पे ठंडे पानी के बेतहाशा छीटे मार लिए थे ताकि माँ को उसके आँसू दिखाई ना दे सके। फिर वो धीरे से चलकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी। माँ ने कॉफ़ी उसके आगे बढ़ा दी और फिर प्यार से उसके सर पे हाथ फेरा और बोली तेरे भाई का फ़ोन आया था आज। ''क्या ?!'' कॉफ़ी का मग उसके हाथ में ही रह गया। 'हाँ ' माँ फिर से बोली। उनके चेहरे पे 400 वोल्ट की चमक थी, मगर अगर भाई सामने होता तो यही  440 वोल्ट की चमक होती उनकी  आँखों में सितारों की तरह आंसू जगमगा रहे थे। उन्होंने बताया की अगले सप्ताह  तेरा भाई एक मेम ले कर आ रहा है और कह रहा है कि पहले ''दी '' की शादी अतुल जीजू से कर दो उसके बाद ही मैं शादी करूँगा। फिर थोड़ा रुक कर बोली, ''देख, अतुल भी तेरा कब से इंतज़ार कर रहा है। तेरी ही ज़िद थी ना कि जब तक भाई नहीं आएगा तब तक मैं विदा नहीं होऊँगी, देख तेरा भाई भी आ रहा है। अब तो अतुल को हाँ बोल दे। ''अरे सुन! तू उसे अभी डिनर पे ही क्यों नहीं बुला लेती?'' ये कहते हुए माँ ने अतुल का नंबर मिला कर उसको दे दिया तो उसने हाथ में लेते हुए पुछा, ''और पापा ''? -''तेरे पापा भी यही चाहते हैं.....'' -''माँ !'' माँ को उसने एक हाथ से बाँहों में भर लिया और दूसरे हाथ से उसने मोबाइल कान पर लगा दिया। .... 

चलते - चलते = छू लो तुम यूं मुझको ज़रा सा,, 
                         कि मैं मर भी जाऊं तो मुझसे तेरे प्यार की सुगंध आये…! .

Tuesday, January 24, 2017

Harshita


A huge bouquet of flowers Images





                                                                harshita 


हरतालिका तीज की ही बात तब, जब हर्षिता निधि के घर गयी थी और उसने वही उसके साथ अपना बायना निकाला  था । अभी तक तो वो अपनी सास के साथ ही सारे त्यौहार मानती आयी है , शादी के बारह साल बाद सास के जाने के बाद ही वो आज अपनी अतरंग सहेली के साथ अपना कोई  त्यौहार शेयर कर रही है । अपनी सास की याद आते ही उसके नेत्र सजल हो उठे हमेशा अपनी बेटी की तरह ही उसको प्यार किया कितना लाड लड़ा कर उसको अपने हाथों के बने पकवान बना - बना कर खिलाती थी , उसने अपने पलले से अपनी दोनों आँखों को पौछते  हुए सोचा उसके एक ही पुत्र है , एक बेटी को कितना तरस रही है काश उसकी सास ही उसकी पुत्री बन कर आ जाये । 

''मौसी'', तभी पायल ने उसको आवाज़ लगायी, '' निधि की बेटी पायल बिलकुल निधि की ही ज़ीरॉक्स लगती है'' बड़े दिनों बाद आज  उसके होठों पे आयी  स्माइल आयी है ।  हर्षिता उठ कर रूम से निकल कर बहार लॉबी में आ गयी और अपनी सवालिया दृष्टि पायल पे टिका दी , मौसी की नज़रों में सवाल देखकर  पायल बोली आपको अपनी ड्रेस दिखानी है , देखिये  न  मेरी ये ड्रेस 'हरे रंग का शनील का ईवनिंग गाउन बहुत प्यार लग रहा था '  उसने पायल का चेहरा अपने हाथों में ले कर कहा ' इसे पहन कर बड़ी प्यारी लगी मेरी गुड़िया ' । तभी अनुपम की पास आती आवाज़ सुनाई दी ' क्या बात हो रही है मौसी भांजी में ? दोनों मौसी भांजी ये बात सुन कर एक दूसरे को देख कर हंस पड़ी । तब तक टेबल पे महाराज ने कहना लगा दिया था , सभी लोग एक साथ डिनर के लिए डाइनिंग टेबल की और बढ़ चले । 

निधि ने हर्षिता के कान में आकर कहा सुन, तुझसे कुछ बात करनी है सुन के जाना , भोजन से निमट कर दोनों सहेलिया हाथ पकड़ कर लॉन के कोने में आ गयी वही निधि ने उसे बताया की पायल ने लड़का पसंद कर लिया है , और अब पायल के पापा अतुल को मनाने  का जिम्मा तेरा है , वो तेरी कितनी सुनते है प्लीज करेगी न मेरा ये काम , उसने कहा ऐसा क्यों कह रही है अतुल तो तुम्हारी भी सुनते है तुमको कितना चाहते है ॥ निधि बोली तू ऐसा समझती है , तो चल में ही बात करके देखती हूँ पर तो भी मुझसे कनेनेक्ट रहना हाँ मेरी प्यारी सखी मेरे साथ ही हूँ , और देखना सब ठीक होगा , लड़का अच्छा है और पायल को पसंद है , घर अच्छा है और सबसे बड़ी बात की वो लड़का भी पायल को लाइक करता है तो सब ठीक ही होगा और तुझको ' सास बनने की बधाई एडवांस में ' और दोनों सहेलिया सजल नयन लिए एक दूसरे से लिपट गयी । 


चलते - चलते = मौसम में मस्त अजब सी ख़ुमारी छा रही है..!! 
                         सुना है कि मोहब्बत की "फरवरी"आ रही है..

Thursday, December 8, 2016


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                                                              katyayani


कात्यायनी ने जल्दी से राहुल का टिफिन पैक किया और उसको बैग में डाल दिया। राहुल अभी नहाने में था तभी उसकी आवाज़ आयी ''मम्मी पानी बहुत ठंडा है कैसे नहाऊँ ?'' कात्यायनी को पता था कि ये ऐसे ही स्कूल के लिए लेट कर देगा और फिर जब स्कूल बस निकल जाएगी तो फिर उसको ही छोड़ कर आना पड़ेगा। वो बाथरूम में गयी, जल्दी से गीज़र में से गर्म पानी निकाला और फिर राहुल को खुद ही नहला दिया। उसने सोचा 'ये लड़का भी न दस के बराबर है!' राहुल को टॉवल से पौछते- पौछते उसे शैलेश की याद आ गयी। बिज़नेस के काम से लंदन गए हैं, पता नहीं कितना टाइम लग जायेगा। 

इतने में घर के बाहर उसको बस का हॉर्न सुनाई दिया। लटपट वो राहुल को लेकर बाहर भागी, साथ ही स्कूल बैग व राहुल के हाथ में सैंडविच देना नहीं भूली। राहुल को स्कूल बस में बैठा कर वो अब काफी फ्री महसूस कर रही थी। वो अपने रूम में गयी और अपना एंगेजमेंट वाला एल्बम निकल कर अपनी पुरानी यादों के पन्ने उलटने लगी। शैलेश ने जब  उसको अंगूठी पहनाने  के लिए स्पर्श किया था तो उसका प्रथम स्पर्श वो आज तक नहीं भूल पायी।

और वो दिन जब वो जयमाला डालने के लिए स्टेज पर आयी और लड़खड़ा गयी थी। वो गिरने ही वाली थी कि मज़बूत इरादे और मज़बूत बाहों वाले 'शैल' ने उसको गिरने नहीं दिया और हाथ बढ़ा कर उसको थाम  लिया था। उसकी सेहली सुचेता तो शैल की कितनी बड़ी फैन है। तभी उसकी मोबाइल की घंटी बजी। शैल का फोन था। वो एक घंटे के बाद उसके पास होंगे, ये सुनकर उसके गुलाबी होठों पर हँसी और आँखों में नमी आ गयी.... अरे ! ख़ुशी की ....... । 

चलते -चलते =  Itni aasani se kaise bhul jata hai koi,
                        Dur rehkar bhi yaad ata hai koi,
                        Umar bhar yaad karte rahenge hum,
                        Dekhte hain kab tak hame bhulta hai koi…

Friday, December 2, 2016



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                                                  '' मृगनयनी '' (सिक्स्थ एपिसोड )
अभी तक आपने पढ़ा की मृगनयनी थकी होने के कारण सो जाती है।  अब इससे आगे ...... बालक के रोने से मृगनयनी की नींद खुल गयी। उसने बालक को गोद में उठाया और उसको चुप करने लगी । इतनी में वहां एक स्त्री आयी और कहने लगी मृगनयनी से, ''लाओ इसे मुझे दे दो। मेरे कोई औलाद नहीं है, में इसे पाल लूंगी।'' मृगनयनी ने उसको सवालिया दृष्टि से देखा मानो पूछ रही हो की क्यों दे दू। वह स्त्री उसकी सवालिया दृष्टि को समझ गयी और एक मीठी हंसी के साथ बोली ''मेरा नाम सुकन्या है, में आदि काल से यही रहती हूँ और सब बरसो से तुम्हारे यहाँ आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं'', और बोली कि, ''तुम जो यह बालक देख रही हो न,'' फिर क्षणिक रुक कर बोली, ''ये मायावी है''। ''मायावी?'' मृगनयनी अपनी आश्चर्यजनक आवाज़ में आँखों को चौड़ी करके बोली ! 'हाँ', वह स्त्री बोली। ''ये वही बाघ है जिसको तुम पाल रही थी, जब तुम अपने काबिले से यहाँ आ गयी तो वह बाघ तुमको बालक के रूप में मिल गया'', फिर थोड़ा रुक कर बोली कि ''तुम जब - जब मुसीबत में पड़ोगी यह बालक तुम्हारे पास किसी न किसी रूप में बचाने के लिए चला आएगा। बालक को उस स्त्री को देकर मृगनयनी ने उसको प्रणाम किया और आगे का रास्ता तय करने के लिए उससे इज़ाज़त मांगी। उस स्त्री ने मृगनयनी के सर पर आशीर्वाद भरा हाथ रखा और सजल नेत्रों से उसको विदाई दी । 
करीब तीन - चार घंटे की यात्रा करने के बाद उसको हम उम्र साथी खेलते हुए दिखाई दिए, हालाँकि वो उनको जानती नहीं थी तथापि वो उसको बहुत अपने लगे। बहुत दिनों के बाद उसको हमउम्र दिखाई दिए थे। वह भी उनके साथ पकड़म - पकड़ाई खलने लगी तभी उनमे से एक लड़का बोला ''आओ मृगनयनी मुझे पकड़ो'', मृगनयनी अब तक समझ चुकी थी की वह एक '' दिव्य काल '' में प्रवेश कर चुकी है, और जहां वह किसी बहुत बड़े उदेश्श्य को पूरा करने के लिए आयी है। मगर अब तक उसको अपना ही उद्देश्य पता नही चला है, न जाने उसको अभी और कितना चलना है और कहाँ और किसके पास जाना है?  । क्रमश: 

चलते - चलते = हाथ ऊपर वाले ने दिए हैं 
                        मगर लकीरें अपनी मेह्नत से खुद बनायीं हैं। ...... 

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