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Friday, April 15, 2011

mano ya na mano(xxx) part (STORY)



गतांक से आगे .......
तनु ने सारा दिन आँचल के साथ ही बिताया ,तनु ने आँचल से पूछा की तुम्हारे हाथ में जो मार्क है तुम उसके बारे में जानती हो की इस sign का क्या मतलब होता है |आँचल ने कहा की नहीं, तनु फिर बोली की तुम मुझे कैसे जानती हो |आँचल ने कहा की वो जब सोती थी तो वो सपने में तनु को देखती थी ऐसा उसके साथ बचपन से होता आया है और उस दिन जब तनु मिली तो आँचल को कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्युकी उसको लगता था की सपने में देखि हुई बात जरुर सच्ची होगी ,और एक न एक दिन तुम मुझे अवश्य मिलोगी आँचल के हाथ में प्रज्वलित अग्नि का मार्क था ,व तनु के हाथ में प्रथिवी और प्रक्रति का सम्मलित निशान था |

तनु ने आँचल से पूछा की तुम्हारे साथ कोई आश्चर्यजनक घटना हुई है |तो तनु ने कहा की हाँ एक बार में अपने स्कूल ट्रिप पर गयी थी ,वहां हम रास्ता भटक गए थे ,चारो तरफ अँधेरा हो रहा था मैने सोचा की काश यहाँ पर मशाल होती तो वहा जंगल में जंगल वासियों ने जो मशाले लगा रखी थी ,वो अपने आप अचानक जल उठी |

तभी आँचल की आंटी का लैटर आया उन्होने उसे ले लिया आँचल वहां से उठ कर चली गयी तनु भी उसके साथ जाने लगी आँचल कही अंदर चली गयी तनु वाही कड़ी हो गयी वो कुछ इस तरह खड़ी थी की आंटी उसे नहीं देख पा रहीं थी |तब तनु ने देखा की आंटी का लैटर खुद अपने आप निकल रहा है |  


scrap orkut रही हैं 


तनु अब मनीषा आंटी के बारे में सोचने लगी की आखिर वो हैं कौन ?क्या वो कोई ज्ञानी कोई महत्मा हैं जो अपनी विद्या के द्वारा ये सब कर रही हैं और उनका मकसद क्या है |आँचल ने बताया था की उसके मम्मी पापा ने उसको संभालने के लिए किसी की जरुरत है ऐसा एक इश्तिहार दिया था |तभी ये मनीषा आंटी मिली हैं |आँचल उनके बीते कल के बारे में कुछ नहीं जानती वो सिर्फ इतना जानती है की मनीषा आंटी बहुत सालो से उसकी देख -भाल कर रही हैं |(आँचल का घर )  क्रमश:
good night orkut scraps

Wednesday, April 13, 2011

mano ya na mano(xxix) part (STORY)

        
      
गतांक से आगे......
तनु मौसीजी को विभिन्न स्थानों के दर्शन करा रही है |तनु ने कभी- कभी ये महसूस किया की मौसीजी में संवेदनाओ का थोडा आभाव है |पर वो इस पर ज्यादा ध्यान न देकर पूरे मन से उनको भ्रमण करा रही थी|   
                                   ''एक लम्हा ही काफी होता है किसी को पहचानने के लिए
                                   और कभी -कभी जिंदगी गुज़र जाती है ,पर वो एक
                                                              लम्हा नहीं मिलता''
तनु तुम यही रुको में अभी आती हूँ ऐसा कहकर मौसीजी चली गयी और एक पैड के पीछे जाकर मौसीजी ने अपने बैग में से एक diaryनिकाली और उसमे एक पंख अपने आप ही कुछ लिखने लगा |







उसके बाद वो वापस वहां आई तो तनु उन्हे कही दिखाई नहीं दी |उन्होने अपना आकर बढ़ाना शुरू किया और सब जगह देखने लगी उनको तनु आती हुई दिखाई दी वो फिर से नोर्मल हो गयी |उन्होने तनु को कहा की वो बचपन में परियो की कहानिया सुनती थी क्या वो सच होती हैं ,तनु ने कहा की नहीं ये कहानिया तो कवेल मनोरंजन के लिए होती हैं |जिंदगी बिताने के लिए बहुत सी बातो का सहारा लेना पड़ता है ये कहानिया भी उन्ही बातो का एक हिस्सा होती हैं |


Orkut Fairy Scrap: 1 फिर उन्होने कहा की तनु अगर ये बाते सच हो जाये तो?तनु उनको देखती रह गयी फिर तनु बोली की हाँ मौसीजी ये कार्य भी मानव ही कर सकते हैं रोबोट परी बनाकर फिर तनु बोली की मानव कितना भी उस तीसरी शक्ति के समक्ष हनी का दावा कर ले ,और चाहे कितना भी एक हद तक इसमे सफल क्यों न हो जाये पर वो सुपर natural पावर तक नहीं पहुच सकता |तो मौसीजी बोली की एक दिन पहुच जायेगा |तनु बोली मौसीजी मै क्षमा चाहती हूँ मै आपकी इस बात से सहमत नहीं हूँ |मौसीजी ने कहा क्यों ?तनु बोली आज इंसान चन्द्र ग्रह तक पहुच गया है क्या वहां उसे भगवान् के दर्शन हुएय |

इंसान जितना उस सुपर पावर को छुने की कोशिश करता है और एक कदम पीछे हो जाता है |इश्वर तो अनंत हैं 
''हरी अनंत हरी कथा अनंता '' हाँ हम उस पराशक्ति को प्राप्त कर सकते हैं ,अपनी भक्ति के द्वारा फिर तनु बोली की मैने सुना है की हर किसी प्राणी को इश्वर एक बार दर्शन अवश्य देते हैं बशक हम उनको पहचानने के काबिल हो |किसी न किसी रूप मै इश्वर हमे अपनी उपस्तिथि का अहसास करते रहते हैं | क्रमश:
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Monday, April 11, 2011

mano ya na mano(xxviii) part (STORY)

गतांक से आगे .....

राजन के सो जाने के बाद मौसीजी एक आदमकद अलमारी में जाकर खड़ी हो गयी और एक पुतले में तब्दील हो गयी |तनु राजन को बुलाने कमरे में आई पर राजन सो रहे थे |तनु ने मौसीजी को आवाज़ लगायी परन्तु कोई आवाज़ नहीं आई और न ही मौसीजी स्वयं दीखाई दी |तनु ने उनको इधर -उधर जाकर भी देखा पर वो दीखाई ही नहीं दी |

तनु ने राजन को बहुत उठया परन्तु जब वो नहीं उठे तो तनु जाने लगी तो एकदम राजन उठ बैठे और तनु से बोले की तुमने मुझे उठाया क्यो नहीं तनु कुछ नहीं बोली उसने सिर्फ इतना कहा की आओ चलते हैं |तो राजन बोले मौसीजी कहाँ हैं?तनु ने कहा की मैने बहुत ढूंडा है परन्तु वो दिखाई नहीं दे रही हैं |

दोनों रूम से बहार आगये |सुबह कोउनकी नींद आरती की आवाज़ से टूटी दोनों बहार आये और फिर उनका आशीर्वाद लिया |मौसीजी तनु से बोली तनु क्या तुम मुझे अपना शहर घुमोगी तनु ने कहा की आप न भी कहती तब भी में आपको अपना शहर घुमा कर लाती |तनु ने मौसीजी को बहुत जगहे दीखाई और उनको   शहर का  मेला भी दीखाया ,|     क्रमश:                                 

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Thursday, April 7, 2011

mano ya na mano(xxvii) part(STORY)

गतांक से आगे............
तनु का haath  का मार्क चमकने लगा तनु जैसे -जैसे आगे बढती जा रही थी उसका मार्क और गहरा होता जा रहा था |पर तनु अब भी उस दुसरे व्यक्ति के पास नहीं पहुच प् रही थी | तभी तनु ने देखा की वहां कुछ बच्चे खेल रहे हैं |
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तनु ने उनके पास जाकर पूछा की उनका क्या है पर बच्चे तनु से कुछ बोलहि नहीं रहे थे |तभी उनमी से एक बच्चा बोला की किसी की आवाज़ तो आ रही पर कोई दीखाई नहीं दे रहा |तनु बहुत निराश हो गयी वह वापस जाने लगी फिर उसने देखा की उसके जैसी एक लड़की उसके हाथ में भी कुछ चमक रहा है |तनु उसके पास गयी तो उसे अपने अंदर कुछ शक्ति का अहसास हुआ उसने देखा की बिलकुल उसकी शकल उसकी collage वाली फ्रेंड से मिल रही थी |वो लड़की भी तनु से ऐसे मिली जैसे बहुत दिनों से जानती हो उसने तनु को अपना नाम आँचल   
बताया |वो तनु को अपने साथ अपने घर ले गयी |आँचल ने बताया की उसकी मम्मी पापा विदेश में रहते हैं |यंहा
अपनी दादी और आंटी के साथ रहती है |

तनु को आँचल के घर में बहुत प्यार मिला तनु और आँचल एक ही कमरे में रुके थे |आँचल सो गयी थी तनु को नींद नहीं आ रही थी तनु ने देखा की उनके कमरे का दरवाज़ा खुला तनु ने झट से अपनी आंखे बंद कर ली जब दरवाज़ा बंद हनी लगा तो तनु ने देखा की आँचल की आंटी हैं |तनु थोड़ी देर में धीरे से उठी और बहार गयी उसने देखा की आँचल की आंटी ने काले रंग का लबादा पहन रखा है और फिर एक दीवार के पास आकर उन्होने अपना मुह भी ढ्क लिया |और तनु के देखते -देखते वो दीवार के अंदर चली गयी |तनु हतप्रभ सी दिखाती रह गयी फिर                                                                                                                                                                                     वो वापस अपने कमरे में आगई आँचल अब भी गहरी नींद में थी |
                 
 फिर तनु को नींद नहीं आई बार -बार उसे आंटी की घटना याद आती थी |फिर न जाने कब वो निद्रा के आगोश में चली गयी उसे स्वयं भी ये पता नहीं चला सुबह को उसकी नींद आंटी के आवाज़ लगाने से हुई चाय पीते -पीते आँचल ने तनु को बताया की उसकी आंटी का नाम मनीषा है और उसकी दादी कुछ बोल नहीं सकती |तनु ने आँचल को रात के बारे में कुछ नहीं बताया क्युकी उसने देखा की आँचल अपनी मनीषा आंटी का बहुत मान करती है ,और उन्हे प्यार भी बहुत करती है |और वैसे भी तनु कल ही तो आई है तो वो उसकी बात का विश्वास क्यों करेगी |क्रमश:                        
Good Morning Orkut Scraps Graphics and Comments

  

Wednesday, April 6, 2011

mano ya na mano(xxvi) part (STORY)

 
गतांक से आगे .............
मोर ने कहा की तनु हम सब तुम्हारी मदद करेंगे |तनु अपनी सारी बात बताने ही जा रही थी |की उसे अपने गुरूजी ऋषिजी की बात धयान आई की तनु जब अच्छे कार्य के लिए अच्छे व्यक्ति निकलते हैं तो ,अन्धकार उनकी राह रोकने के लिए विभिन रूपों में आते हैं |और उनकी गुप्त बातो को जान कर उनकी राह कठिन कर देते हैं |तनु ने कुछ नहीं कहा |धीरे -dheerey सब पशु पक्षी अपने -अपने गंतव्य की ओर चले गए |

तनु वाही बैठी रही और ऐसे ही बैठे -बैठे वो प्रथिवी को खुरचने लगी वो बहुत देर तक ऐसा करती रही और वहां एक बड़ा होल हो गया तनु ने देखा की वहां सीढियाँ  बनी हुई हैं,तनु उन सीढियाँ के सहारे नीचे उतर आई और तनु ने देखा की ये तो ek आराध्य स्थान है ।

तनु ने देखा की वहां पर सब व्यवस्था है तनु स्वछ हो गयी तनु ने देखा की वहां मोतियों के ढेर लगे हैं |और पूजा की अन्य सामग्री भी हैं |तनु ने एक मुट्ठी में मोती लिए और उनसे  की पूजा की तनु का मन बड़ा शांत था

   
तनु ने देखा की वहां सब प्रकार की खाद्य सामग्री भी राखी हैं |तनु वहां से वापस आ गयी और फिर गांव की ओर निकल पड़ी तनु ने देखा की उसका निशाँ चमकने लगा है तनु वहीँ जहाँ निशाँ चमक रहा था वहीँ ढूंडने लगी |
                                                                                                                                            kramash:                                                                                          

mano ya na mano(xxv) part (STORY)

            
गतांक से आगे ...........
तनु वहीँ खेतो में थक कर बैठ गयी और तनु का ध्यान लग गया वह भगवन की भक्ति में खो गयी |और
विलग -विलग रूपों में देखने लगी
(यह omजो आप mountain पर  देख रहे हैं यह मानसरोवर की फोटो है किन्ही भक्त ने ये यात्रा के दौरान ली है )
तनु ध्यान में बैठी थी उसकी मानसिक तरंगे मुनिवरो से जुड़ गयी थी वह कभी -कभी तो ऐसा महसूस करती थी की जो ज्ञानीजन गुरुजन अपने मन में गयानाअध्यन करते हैं वह जब ध्यान मुद्रा में होती है तो सुन पाती है |   

तभी किसी की आवाज़ तनु के कानो में पड़ी तनु ने अपने नेत्र खोल कर देखा तो एक मोर को देखा वो अपने पंख फैओलाये खड़ा था और तनु से बात कर रहा था तनु ने पूछा की तुम बोल भी सकते हो तो मोर ने उत्तर दिया यहाँ तो सजीय व् नीर्जिव दोनों बोलते हैं |तनु ने सोचा की कहीं ये उन चारो में से तो नहीं है जिनको मुझे dhundna

है |तनु ने अपना nishan  देखा की कहीं वो चमक तो नहीं रहा पर वो नहीं चमक रहा था |तनु हताश हो गयी तनु ने देखा की उसके पास जो पैड थे, वो स्वयम ही उसके लिए फल गिरने लगे पर तनु का उन्हे लेने का मन नहीं हुआ |तो वो पैड जिन्होने फल दिए थे बोले की तनु ले लो तुम्हे अच्छा लगेगा और तुम हम सब की भाषा भी समझने लगोगी |तनु अब सब की आवाज और भाषा समझ और सुन प् रही थी |सब तनु से बात करने को व्याकुल थे पर तनु का ध्यान तो अपने जैसे व्यक्तियों को ढूंडने में था |तनु को चिंतित देख वो मोर बोला की तनु तुम क्या ढूंड रही हो |हम सब तुम्हारी हेल्प करेंगे |     क्रमश:

mano ya na mano(xxiv) part (STORY)



गतांक से आगे ..........
तनु ने सोचा की वो परछाई को कैसे दोस्ती करेगी |तनु ये सोचते सोचते बहार अपने lawn में आ गयी|उसके पास रिंकी भी आगई तनु ने देखा की रिंकी की परछाई नहीं बन रही है |रिंकी ने तनु से पूछा की तुम क्या देख रही हो तनु ने कोई जवाब नहीं दिया |फिर रिंकी ने कहा की तनु तुम कहीं मत जाना में अभी आरही हूँ |

तनु वही रही तभी तनु के चारो तरफ धुँआ ही धुँआ हो गया तनु को कुछ भी दीखाई नहीं दे रहा था |तनु ने आगे बढ़ाना चाह परन्तु तनु के कदम ही नहीं उठ रहे थे|तनु न जाने कब तक kartvyavimodha सी खड़ी रही |

राजन ने देखा की तनु किसी statue की भांति खड़ी है |राजन घबरा गए उन्होने तनु को झिन्झोड़ो तनु -तनु पर जब वो कुछ नहीं बोली तो राजन उसको अंदर ले आये |फिर राजन ने उसके ऊपर पानी डाला तनु सुबक  उठी राजन ने पुछा की तनु तुही क्या हो गया था |तनु कुछ नहीं बोली |राजन बोले तनु तुम्हे अब एक मिनट भी अकेला रहने देने का मन नहीं करता |


राजन और तनु ने देखा की सारा घर पीले रंग की रौशनी से भरा है | उन्होने बहार आकर देखा तो फूलो में से 

flower Orkut scraps


पीले रंग की रौशनी निकल रही है |रिंकी उनको इस तरह आश्चर्यजनक मुद्रा में देख कर हसने लगी |उसने तनु और राजन से कहा की अगर तुम दोनों हमारी सेना में आजाओ तो तुम्हे और भी जादू देखने मिलेंगे |राजन ने तनु की तरफ देखा फिर बोले में तुम्हारे साथ हूँ |पर तनु ने कुछ नहीं कहा क्युकी वो उसके साथ नहीं थी |

रिंकी उनको उस चमकदार फूल के पीछे ले गयी राजन और रिंकी को लगा की वो किसी और दुनिया में आ गए हैं |,तभी उन्होने बहार से किसी की आवाज़ सुनी उन्होने बहार जाकर देखा तो वहां कोई है उन्होने पास जाकर देखा तो उन lady ने राजन को अपने गले से लगा कर कहा अरे तू तो कितना बड़ा हो गया है मैने तो तुझे बहुत छोटा सा देखा था |राजन उनको नहीं पहचान पाए की वो कौन हैं |तो वो बोली की में तुम्हारी मौसी हूँ तुमने मुझे पहचाना नहीं |रिंकी उनको को घर में ले आई |

राजन ने जब थोडा सा समय मिला तो अपनी मम्मी को फ़ोन लगाया परन्तु फ़ोन busy आ रहा था |राजन ने बहुत try किया पर फ़ोन नहीं मिला |तभी मौसीजी ने राजन को पुकारा राजन बहार गए तो मौसीजी कहने लगी की राजन तुम बचपन में बहुत शरारती थे |और जब हमारे village में आते थे तो बस आम के पैड पर ही बाते रहते थे |और एक बार तो तुमने उस पर ही अपना एक छोटा सा घर बना लिया था |और भी न जाने कितनी बाते बताती रही राजन को ये सब सुनकर बहुत अच्छा लग रहा था |अब वो मौसीजी राजन को अपनी से लगने लगी थी | राजन को ये सब बाते सुनते -सुनते न जाने कब नींद ने आ घेरा पता ही नहीं चला जब राजन सो गए तो वो मौसीजी एक ............क्रमश:     

Monday, April 4, 2011

mano ya na mano(xxiii) part (STORY)


गतांक से आगे ........
तनु ने कहा की वो तो ये देखने आई थी की ये गुफा कहाँ तक जाती है |तनु ने अभी इतना ही बोला था की उसने बहार से शेर की आवाज़ सुनी तनु डर गयी |तभी तनु ने सुना की राजन उसे पुकार रहे हैं |और तनु ने देखा की वो अपने कमरे में अपने बेड पर है |तनु ये तय नहीं कर पाई की वो सपना था या हकीक़त |तनु उठ कर बहार आ गयी तनु ने देखा की ,रिंकी ने अपने कमरे में ढेर सारी कैंडल जला रखी हैं| 
candles

तनु को रिंकी से पूछने का साहस नहीं हुआ के ये कैंडिल क्यों जला रखी हैं |तनु को कमरे के बहार देख कर रिंकी ने तनु के पास आकर कहा की ये लाइट माने इसलिए जलाई हैं क्युकी मुझ्हे प्राकृतिक लाइट चाहिए थी क्युकी आज की रात मैं और मयंक कुछ ऐसा करने जा रहे हैं जो हम तुम्हे नहीं बता सकते तनु ने पूछा की तुम चाहते क्या हो रिंकी ने कहा की सारे साम्राज्य पर राज्य करना चाहते हैं |तनु ने कहा की  क्या तुम आक्रमण करोगे तो रिंकी हसी उसने कहा की हम अपने नाग साम्राज्य पर राज्य करना चाहते हैं मुर्ख प्राणी और इसके लिए हमे कुछ तुम्हारे जैसे प्राणियों की जरुरत पड़ेगी |हमने बहुत से लोगो की एक सेना भी बना ली है क्युकी इसमे बहुत से प्राणी चाहिए |और ये कह कर रिंकी ने तनु से कहा की अब तुम जाओ और भूल कर भी इधर मत आना |
      
तनु वहां से तो आगई मगर वो बहुत उत्सुक थी की क्या होने वाला है |उसने राजन को बताया तो राजन ने कहा की हम जरुर देखेंगे और वो तनु को अलमारी के पीछे वाले कमरे में ले गया| तनु और राजन वहां से सब देखने लगे अभी तक तो उनको कुछ दीखाई नहीं दिया बहुत देर हो जाने के बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो उन्हे नींद आने लगी तभी राजन ने देखा की आज बहुत सारे सर्प आये हैं और सब कमरे के अंदर आने पर इंसान बन गए 
राजन ने तनु को बहुत उठाया पर तनु बहुत गहरी नींद में थी |राजन अकेला ही ये सब देखने लगा |वो सब न जाने कौन सी भाषा में बाते कर रहे थे ,राजन की समझ में नहीं आया |

आज भी रिंकी के हाथ में वही चीज़ चमक रही थी |सबने अपनी नागमणि ले ली और रिंकी ने पारसमणि ले ली सारा कमरा अतभुत रौशनी से चकाचुओंध हो रहा था |फिर राजन के देखते ही देखते वहां शास्त्र इकट्ठे हो गए सबने वो शास्त्र ले लिए फिर मयंक ने कहा की इनको प्राणियों में दे दो |सब लोग वहां से चले गए मगर सर्प रूप में नहीं इंसानों के रूप में नहीं इंसान रूप में|
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राजन तनु को लेकर वापस कमरे में आ गया |सुबह को तनु ने पूछा की कल क्या हुआ था राजन ने सब बता दिया |तनु ने कहा की अब हमे क्या करना चाहिए |राजन ने कहा की कुछ नहीं हम जो भी करेंगे वो सब इनको पता चल जायेगा और फिर ये कोई मायाजाल फैला देंगे |तनुं ने सोचा की वो चुप नहीं रहेगी मगर क्या करे उसकी समझ में नहीं आ रहा था |उसने फिर से फल हाथ में लिया गुरूजी प्रकट हो गएँ |तनु ने उनसे पूछा की वो क्या करे उन्होने कहा की वो उनकी shadow को अपना बना ले तनु ने कहा कैसे तो ,गुरूजी बोले की ये तुम्हे ही करना होगा में सिर्फ तुम्हे एक सलहा ही दे सकता हूँ |और इसके बाद वो अन्तेर्ध्याँ हो गए | तनु ने सोचा की अब वो इंसानों के बजाय shadow से दोस्ती करेगी मगर कैसे रिंकी और अन्य लोग तो रात्रि में आते हैं |kramash:   

mano ya na mano(xxii) part (STORY)

गतांक से आगे.......Tree in a Bubble
तनु ने सोचा जो होगा उसका सामना करना होगा,अभी वो ये सोच ही रही थी की उसका ध्यान अपने हाथ पर गया उसके हाथ में त्रेता युग का एक पत्थर था उसने उसे ही शिवलिंग समझ लिया |तनु शनैः - शनैः आगे बढ़  रही थी अभी वो थोडा ही आगे गयी थी की वो एक बुलबुले में कैद हो गयी,उसने देखा की एक ज्वालामुखी जैसा है पर उसमे से अग्नि नहीं निकल रही वरन बुलबुले निकल रहे हैं |तनु बुलबुले में कैद किसी पंछी की भांति उड़ रही थी हवा का झोंका कभी तनु को ऊपर ले जाता और कभी नीचे ले आता, तनु ने बचपन में जब वो छोटी थी तब कभी ऐसा खवाब देखा था परिंदों की तरह उडने का और आज वह सच में किसी परिंदे की तरह उड़ रही थी |बस फर्क सिर्फ इतना था ,परिंदे अपनी मर्ज़ी से उडते हैं और तनु को हवा के झोंको की प्रतीक्षा करनी पड़ रही थी 
     Its Freedom     Its FreedomIts Freedom

तनु बहुत देर तक तो उसमे ऐसे ही बैठी रही फिर वो सब कुछ भूल कर अपने चित्त को एकाग्र करने लगी अगग्र चित्त हो जाने पर वो ऋषिजी अपने द्वापर युग के गुरूजी का स्मरण करने लगी धीरे -धीरे जब वो बिलकुल एकाग्र हो गयी तो वह मानसिक तरंगो के द्वारा अपने गुरूजी से बात करने लगी |उसने गुरु जी को अपनी व्यथा सुनाई उन्होने तनु से कहा की तनु तुम्हारे साथ इतनी विचित्र -विचित्र बाते हो रही हैं और होती रहेंगी तुम घबराना मत षडिक रुक कर वो बोले तनु हम पांच तत्वों से बने हैं प्रथिवी ,अग्नि ,जल ,वायु ,और आकाश इन पांचो तत्वों में समता होनी बहुत जरुरी होती है संसार में बहुत कम ऐसे लोग होते हैं जिनमे ये सम मात्रा में होते हैं |तनु तुम्हे अपने जैसे चार और ढूँढने हैं वे व्यक्ति,वृक्ष ,या कोई पंची भी हो सकते हैं इनको इकठ्ठा करने पर ही तुम आगे की यात्रा कर पओगी इतना कहकर वो थोडा रुके ,इतनी में ही तनु ने पूछ लिया की वो उन्हे पहचानेगी कैसे और उसे क्या करना होगा |गुरूजी मानसिक तरंगो के माध्यम से बोले तनु जब भी तुम अपने जैसे किसी के भी संपर्क में जोगी तो तुम्हारे हाथ का निशान चमकने लगेगा फिर थोडा रुक कर बोले तनु दो तरह के लोग होते हैं एक वो जिनसे मिल कर हमारे भीतर शक्ति का संचार होता है जीने की ललक हो उठती है और एक तरह के वे होते हैं ,जिनसे मिल कर इनका विपरीत होता है |तनु जब तुम्हारा निशान चमकने लगेगा तो बाकी के साथ भी ऐसा ही होगा उसके बाद तुम सब आपस में एक दुसरे के हाथ पकड़ लेना तनु ने कहा की अगर वो पक्षी,या वृक्ष हुआ तो गुरूजी तनिक रुक कर बोले तनु ये तुम्हे तभी बताया जायेगा और इसके साथ ही तनु का सम्पर्क गुरूजी से टूट गया तनु ने देखा की वो खेतो के ऊपर से उड़ रही है इसका मतलब यहाँ कोई गांव है |तभी तनु ने देखा की और भी बुलबुले उड़ रहे हैं |
   तनु अभी कुछ सोच ही रही थी की अचानक उसे लगा की उसका निशान कुछ हल्का -हल्का सा चमक रहा है |तनु ने सोचा इसका मतलब कोई आस-पास है |तनु बुलबुले को रोकना चाह रही थी पर वो रुकेगा कैसे ये तनु नहीं जानती थी अभी तनु ने बुलबुले को रोकने का सोचा ही था की वह रुक गया |तनु उससे बहार आई अब वो निशान नहीं चमक रहा क्या वो पीछे रह गया है |तनु हरएक के पास जाकर देखने लगी की कहाँ निशान चमक रहा है तनु ने वृक्ष,खेतो में बैठे पंछियों के पास भी जाकर देखा परन्तु वो निशान नहीं चमका तनु थक कर वहीं बैठ गयी |
                                                                    क्रमश:
 

Sunday, April 3, 2011

mano ya na mano(xxi) part (STORY)

गतांक से आगे .......
तनु प्रचीन  युग में थी ||
तनु का हिर्दय बड़ा द्रवित हो गया वो बहुत भावविह्वल हो गयी थी |कहाँ तो वो ये  सोच रही थी की वह भगवन की लिलालो का दर्शन किया|तनु जब बहुत ही दु:खी हो रही थी तो उसे ऋषिजी की आवाज़ गूंजी ''तनु तुम इतनी व्यथित नहो हो सकता है की तुम्हे दोबारा इस युग में आने का मौका मिले'' तनु ने जब ये सुना तो तो उसे थोड़ी शांति मिली |फिर ऋषिजी ने कहा तनु भगवन आज भी यहाँ मौजूद है तनु चाहे कितना भी कलयुग क्यों न आजाये परन्तु सम्पूर्ण विश्व में अयोध्या ही एक ऐसी नगरी है जहाँ पर कलयुग प्रवेश नहीं करेगा यहाँ हमेशा सतयुग का ही वास रहेगा |और इसका प्रमाण रहेगा सरयू नदी का दुग्धावल हो जाना पत्थरो को अगर हाथ से बजाओ तो उसमे से संगीत बजना और |फिर उन्होने कहा की तनु तुम्हे जो भी देखना है देख लो और फिर आगे पदार्पण करो |

तनु ने  झांकी के दर्शन किये और जैसे ही आगे बढने के लिए कदम बढ़ाये तभी न जाने कहाँ से एक आदमकद शीशा सामने आ गया और तनु उस शीशे में फस गयी |                                                                 


                                          
                                          तनु ने शीशे में से बहार आने के लिए बहुत शीशे में हाथ मारे परन्तु वह बहार नहीं
flower Orkut scrapsपायी तनु शीशे में कैद ऐसी दीखाई दे रही थी जैसे वो कोई पेंटिंग हो तनु शीशे में
से सब को देख प् रही थी पर न तो उसे कोई सुन सकता था और देख भी सिर्फ पेंटिंग के रूप में सकता था |तनु ने देखा की कोई उस शीशे को अपने साथ अपने घर ले जा रहा है तनु को वो व्यक्ति अपने घर ले गए तनु को लगा की जैसे उसके आस -पास बडे अजीब से लोग हैं तनु ने पीछे मुड कर देखा तो सिर्फ उसे हसी सुनाई दी तनु बहार आने के लिए बहुत बेचैन थी तनु ने देखा की कुछ बच्चे खेल रहे हैं और उनके हाथ में बाल है ,और वो बाल अचानक शीशे में लगी और शीशा टूट गया तनु का अस्क बिखर गया |बच्चेओ ने डर कर सारे शीशे इकट्ठे कर लिए और उनको एक अलमारी में छुपा दिया |तनु ने रिश्जी को याद किया तो रिश्जी ने तनु को ठीक कर दिया और तनु को वहां से बहार निकल लिया |तनु ने ऋषिजी से पूछा की अब वो कहाँ जाएगी तो वो बोले की ये तो समय ,नियति,प्रकृति हीतय 
                                              करती है |तनु आने वाले अपने अगले समय के बारे में बहुत चिंतित थी परन्तु
फिर उसने सोचा की चिंतित हनी से क्या लाभ जो भी होगा उसे उसका सामना करना ही होगा |क्रमश:








 

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