
तारो भरी रात थी ,चंद्रमा अपनी सोलह कलाओ के साथ अपनी ''शीतल'' चांदनी बरसा रहा था | सिदधा ''नोवेल'' पढ़ रही थी,बहुत ही emotional नोवेल था |सिदधा रोती जा रही थी ,और पढ़ती जा रही थी ,आज अरमान अपने घर गए थे ,सिदधा ,स्निग्धा के साथ अकेली थी |
आज की पूरी रात वो नोवेल ही पढने वाली थी ,(1990august )सिदधा जब भी नावेल ले कर बैठती थी ,पूरा किये बिना नहीं उठती थी |इसके लिए वो रात का वक़्त ही चुनती थी ,इसलिए कभी -कभी अरमान से उसकी ''cold war''भी हो जाती थी ,जो पूरे हफ्ते ,दस दिन तक तो चलती ही थी |(ऐसा उसने लिखा है ) स्निगधा जानती थी की मम्मी आज नोवेल ले कर बैठगी,इसलिए वो अपने कमरे में ही सोयी थी अभीpaanchसाल की ही थी ,पर सब समझती थी |

स्निधा सोयी थी ,की एक आवाज़ से उसकी नींद टूट गयी ,उसने विंडो में से देखा तो सामने के घर से आवाज़ आ रही थी |उसनी सिदधा से कुछ नहीं कहा ,जानती थी की वो नोवेल में इतना डूब जाती है ,की सारे रिश्ते नाते भूल जाती है |
सामने वाले घर में curtain पड़ा हुआ था, अंदर की लाइट जली थी |बहार अँधेरा था ,अंदर का सुब कुछ साफ़ दिखाई दे रहा था | उसने देखा की अंदर जो भी है ,उसके हाथ में कुछ है ,और जो उसके सामने खड़ा है उस पर वार कर रहा है |
स्निगधा के पापा उसके लिए, एक सायरन की आवाज़ वाला टॉय लाये थे |उसको और कुछ नहीं सुझा तो उसने वो टॉय चला दिया |उसकी आवाज़ बहुत तेज थी ,वो व्यक्ति उसे भागता हुआ नज़र आया |उस घर के लोगो ने सबको इकठ्ठा कर लिया |
सबको मालूम था ,की ये टॉय स्निगधा का है क्युकी वो हर वक़्त उसे साथ ले कर घुमती थी |सबने स्निगधा को बहुत प्यार दिया |इतना सब होने के बाद भी,सिद्धा को कोई होश नहीं था |''सच है,की बच्चे भगवान् का रूप होते हैं " |
चलते -चलते =कुछ लोग जिंदगी में ,इस कदर शामिल हो जाते है,
भुलाना चाहो तो और याद आते हैं ,

बस जाते हैं ,वो दिल में इस कदर
की आंखे बंद करो, तो सामने नज़र आते हैं ||
सामने वाले घर में curtain पड़ा हुआ था, अंदर की लाइट जली थी |बहार अँधेरा था ,अंदर का सुब कुछ साफ़ दिखाई दे रहा था | उसने देखा की अंदर जो भी है ,उसके हाथ में कुछ है ,और जो उसके सामने खड़ा है उस पर वार कर रहा है |
स्निगधा के पापा उसके लिए, एक सायरन की आवाज़ वाला टॉय लाये थे |उसको और कुछ नहीं सुझा तो उसने वो टॉय चला दिया |उसकी आवाज़ बहुत तेज थी ,वो व्यक्ति उसे भागता हुआ नज़र आया |उस घर के लोगो ने सबको इकठ्ठा कर लिया |
सबको मालूम था ,की ये टॉय स्निगधा का है क्युकी वो हर वक़्त उसे साथ ले कर घुमती थी |सबने स्निगधा को बहुत प्यार दिया |इतना सब होने के बाद भी,सिद्धा को कोई होश नहीं था |''सच है,की बच्चे भगवान् का रूप होते हैं " |
चलते -चलते =कुछ लोग जिंदगी में ,इस कदर शामिल हो जाते है,
भुलाना चाहो तो और याद आते हैं ,

बस जाते हैं ,वो दिल में इस कदर
की आंखे बंद करो, तो सामने नज़र आते हैं ||
wowiii!!!!!....
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