COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): mano ya na mano (aapkey anmol pal)A 1939 love story (2)

Friday, May 20, 2011

mano ya na mano (aapkey anmol pal)A 1939 love story (2)


                               
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                                                      ''A 1939 love story''
अभी तक आपने पढ़ा ,की दिलीप जी और मीना जी एक ही क्लास में पढने लगे ,अब उससे आगे ............
दिलीप जी मीना जी से बात, करने का मौका ढूंडने लगे ,और उन्हे एक दिन मौका मिल ही गया |एक दिन मीना स्कूल नहीं आई थी , तो वो ''स्कूल का कार्य'' पूछने के लिए ,दिलीप के घर आई |

दिलीप सोच रहे थे की ,''आज मै भगवान'' से कुछ और भी मांगता तो ,शायद आज मुझे वो भी मिल जाता |उस दिन उन्होने पहली बार मीना से ''बात'' की ,मीना की आवाज़ उन्हे, ऐसी लगी जैसे दूर कही ''घन्टिया'' बजी हो कानो में मानो ''शहद'' घुल गया हो | 
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दिलीप की मम्मी और मीना की मम्मी मै अच्छी दोस्ती हो गयी,और एक दिन तो मीना की मम्मी ने दिलीप से ये ही ,कह दिया की अपने साथ मीना को भी स्कूल ले जाया करो !!!उन्हे तो जैसे मुहमांगी मुराद ही मिल गयी मानो आज तो सारी ''कायनात'' ही उनकी झोली मै आ गिरी हो |
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सब कुछ ठीक चल रहा था ,अब तक दोनों मै अच्छी ''फ्रेंडशिप'' हो गयी थी |मगर कहते है ना की ,ज्यादा ''ख़ुशी रास नहीं आती'' उनके साथ भी ऐसा ही हुआ |हुआ यूँ की ''रक्षा बंधन'' के दिन मीना उनके घर ,''राखी बांधने'' के लिए आ गयी |जैसे ही दिलीप की मम्मी ने उन्हे आवाज लगायी ,की आकर राखी बंध वालो |वो ''SHOCKED''हो गए |

और इतने जबरदस्त घबरा गए ,की छत्त से नीचे कूद गए|हाथ ,पैर मै पलस्टर लग गया,वो कहते है की हाथ पैरो का तो कुछ नहीं ,ठीक हो जायेंगे मगर राखी नहीं बंधवाने दी |और उस दिन के बाद तो राखी आने के पहले ही ,वो घर से ऐसे जाते की ,राखी के अगले दिन ही आते |

 मीना का तो पता नहीं ,मगर शायद वो मन ही मन .......|हाई स्कूल का रिजल्ट निकला ,उनका नाम ''मेरिट'' लिस्ट मै था |और मीना केवल फर्स्ट आई थी ,और एक दिन जब वो अपने दोस्तों के साथ खेलकर घर लौटे ,तो उनकी मम्मी ने बताया की ,मीना की शादी हो रही है |

अभी से अभी तो उन्होने ख्वाब भी पूरे नहीं देखे ,और उस दिन वो अपनी जिंदगी मे ''पहली और आखरी'' बार रोये थे |पहली और आखरी बार इसलिए की ,सारे आंसू उसी दिन बहा दिए,और जिंदगी मे अपनों का गम देखने के बाद भी, उस दिन के बाद कभी नहीं रोये |''रोने के बारे मे उनकी philosophy थी,की 1% water &99%feelings''

मीना की डोली को उन्होने अपने कंधे ,पर उठा कर विदा किया | और उस दिन के बाद उन्होने ,P .H .D करने की ठान ली और दिन रात किताबो मे डूबे रहने लगे |B.S.C पास करने के साथ ही ,उन्हे खबर मिली की मीना के घर एक ''छोटी से गुडिया'' आई है|

दिलीप जी मीना और उनकी  बेटी जब भी आते, तो वो घर के बहार ही रहते,इस डर से की कहीं मीना की बेटी उनको ''मामा'' ना कह दे |उसके बाद दिलीप जी ने M.S.C की फिर P.H.D की तयारी मे लग गए|उधर मीना की लड़की भी बड़ी होती जा रही थी |

घर मे दिलीप की शादी की बाते होती ,तो वो मना कर देते और एक दिन उन्होने साफ़ मना कर दिया की ,उनको कभी शादी करनी ही नहीं | P.H.D करने के बाद वो अपनी जॉब करने के लिए चले गए ,वो कहते हैं की मीना पहली और आखरी लड़की है ,जिसके लिए उनके दिल मे सोफ्ट कॉर्नर के अलावा भी कुछ ......है | 

और एक दिन वो भी आया जब उनको ये खबर मिली, की मीना की बेटी भी पढ़ लिख कर अपनी ससुराल चली गयी है |उनके दिल का कोना कही चटक कर टूट गया,उनके साथ के सभी दोस्तों की शादी हो चुकी थी ,बच्चे भी बडे -बडे हो गए थे |और एक दिन वो भी आया की ,अब किसी के घर जाने मे भी दिलीप को झिझक  लगने लगी |और वो बिलकुल अकेले हो गए |

वो कहते हैं की इस उम्र मे भी ,वो बिलकुल ठीक हैं |और इसका श्रेय वो मीना को देते है ,जिसकी वजह से उन्होने घर नहीं बसाया,नहीं तो घर गृहस्थी मे पड़कर वो कब के .........हो जाते |अब उन्होने अपनी जिंदगी इश्वर को समर्पित कर दी है |उन्हे मीना से सिर्फ एक सवाल के जवाब का इंतज़ार है ,वो जानते हैं की इस सवाल का जवाब उन्हे इस जनम मे तो क्या किसी भी जनम मे नहीं मिलेगा |फिर भी क्या उनके दिल मे भी कभी कुछ था या सिर्फ वो ही उसको इतना ....करते थे |

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एक दिन उनके दरवाजे की बेल बजी देखा तो ,मीना की बेटी खड़ी थी उसने एक लैटर दिया |और बिना कुछ भी बोले वो वहां से चली गयी |जब उन्होने लैटर देखा तो उसमे जो डेट लिखी थी ,वो उन्हे वापस २२ सितम्बर उनकी बर्थडे वाले दिन जब मीना उनके घर के पास रहने आई थी ,9th class मे ले गयी |
अब कहने को उनके पास कुछ नहीं था ,और ना ही सोचने को लैटर हाथ से छूट गया |साथ ही envelope मे से एक और चिट्ठी भी गिर गयी ,कांपते हाथो से देखा तो ,वो लैटर मीना की बेटी का था ,लिखा था मम्मी अब नहीं रही उनके जाने के बाद ,ये लैटर ज्वेलरी बॉक्स मे से मिला था |

दिलीप आगे लिखते हैं की ,इतनी बड़ी खबर मिलने के बाद भी वो जिंदा है ,तो सिर्फ उस लैटर की वजह से |अब तो उनके जीने का मकसद भी नहीं रहा ,वैसे भी इतने ''बसंत'' देख लिए हैं की ,अब जीना भी नहीं चाहते ऐसा उन्होने लिखा है |''क्या भरोसा है इस जिंदगी का ,साथ देती नहीं ये किसी का ''@ ''और चलते -चलते मशहूर पंक्तिया''  @आप मेरे गूगल approved '' ऋतू मोहन sms'' भी सर्च करके पढ़ सकते हैं,और GOOgle Images में जाकर ''ritu mohan mano ya na mano''search करके आप scrap,photos,aur pictures download 
kar सकते हैं |
  
                                                                                     
चलते-चलते = जिनकी आंखे आंसुओ से नम नहीं 
                      क्या समझते हो ,उन्हे कोई गम नहीं 
                      आप तड़प के रो दिए ,तो क्या हुआ 
                      गम छुपा के हसने वाले, भी कोई कम नहीं ||

                      आँखों मे आंसुओ को उभरने ना दिया 
                      मिटटी के मोतियों को बिखरने ना दिया 
                      जिस राह पर पडे थे ,तुम्हारे कदमो के निशा 
                      उस राह से हमने किसी को गुज़रने ना दिया ||

                      इस दो पल की जिंदगी मे तन्हाई क्यों है 
                      लोगो को हमसे रुसवाई क्यों है 
                      इस दुनिया मे इंसान कुछ कम तो नहीं 
                      फिर भी मेरे साथ ,सिर्फ मेरी परछाई क्यों है ||     

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4 comments:

hello