
गतांक से आगे ......
तनु को लगा जैसे वो किसी परीलोक मे आ गई है|वह कमरे से निकल लगी मगर उसे मार्ग ही नहीं मिल रहा था जो वो सोयी थी तो ऐसा कुछ नहीं था |अब कहाँ जाए वो कोई दीखाई भी तो नहीं दे रहा |उसने चारो तरफ देखा और एक राह पकड़ ली|वह आगे बढती जा रही थी अभी वो कुछ ही आगे गयी थी की आगे तो प्रथ्वी ही नहीं थी चारो तरफ पानी ही पानी था और उसमे पत्थर तैर रहे थे |तनु वापस जाने लगी तो पीछे अथाह समंदर था |
तनु को लगा जैसे वो किसी परीलोक मे आ गई है|वह कमरे से निकल लगी मगर उसे मार्ग ही नहीं मिल रहा था जो वो सोयी थी तो ऐसा कुछ नहीं था |अब कहाँ जाए वो कोई दीखाई भी तो नहीं दे रहा |उसने चारो तरफ देखा और एक राह पकड़ ली|वह आगे बढती जा रही थी अभी वो कुछ ही आगे गयी थी की आगे तो प्रथ्वी ही नहीं थी चारो तरफ पानी ही पानी था और उसमे पत्थर तैर रहे थे |तनु वापस जाने लगी तो पीछे अथाह समंदर था |

तनु आगे बढने लगी एक पत्थर पर पैर रखा तो वो नीचे डूबने लगा तनु और नीचे की तरफ जाने लगी तनु ने रिषीजी को याद किया और किसी तरह से वो फिर से उपर आने लगी अब वो समझ गयी की कुछ पत्थर तो पानी मे फिक्स हैं और कुछ पत्थर पानी मे डूब जायेंगे|अब उसको संभल कर चलना था|उसने फिर से कोशिश की उसने third पत्थर पर पैर रखा फिर रुकी फिर फिफ्थ पत्थर पर पैर रखा इसी तरह सातवे ग्याहरवे पर रखा कर रूकती फिर पत्थर चोइस करती और कूद जाती तनु ने आधा रास्ता पर कर लिया था वो जैसे जैसे आगे बढती जा रही थी |मुश्कीले बढती ही जा रही थी तनु ने जैसे ही आगे कदम बढ़ाये तो आगे आग ही आग फ़ैल गयी |
तनु एक पत्थर पर ही खड़ी थी वो पीछे भी नहीं जा सकती थी |आग थी की बढती ही जा रही थी |तनु को वापस पत्थरो गा गेम खेलना पड़ा पर ये भी ज्यादा देर नहीं चल पाया तनु ने मुश्किल से दो पत्थर ही लांघे थे के अब वहां पर नुकीली सलाखे निकल आंई वो अब तनु को समय का हिस्साब रखना पद रहा था |जब लेफ्ट और राईट की सलाखे आपस मे टकराती उसके बाद जब वो वापस जाती उनके दोबारा आने मे जितनी देर लगती उतनी देर मे ही तनु को वहां से पार करना था और सलाखे हजारो की संख्या मे थी|तनु ने देखा की जितनी देर मे उसकी पलक झपकती है उतनी देर मे ही वो सलाखे वापस आ जाती हैं |तनु बिजली की तेजी से उस चक्रव्यू को तोडने मे लग गयी मगर ये क्या जैसे ही वो तोडने मे सफल होती सारा गेम ही बदल जाता | अब सलाखों की जगह एक स्लो म्यूजिक ने ले ली थी |तनु को संगीत की लय पर वहां से निकलना था |यह एक बड़ा ही मुश्किल काम था पर तनु को ये करना था तनु ने कभी डांस नहीं किया था न ही उसको आता था |
तनु ने डांस शुरू किया ये क्या तनु के पाऊ तो किसी प्रोफेशनल की तरह थिरक रहे हैं |तनु का अब एक ही मकसद था उस डांसिंग चक्रव्यू को तोडना
और तनु अपनी बेइंतहा कोशिशो मे आखिरकार कामयाब हो ही गयी |तनु अब भी आगे नहीं बढ़ सकती थी क्युकी उसके आगे कोई रास्ता था ही नहीं अब तनु को वापस जाना था और फिर किसी रास्ते पर निकलना था तनु घबरा कर रूनी लगी |अचानक उसे अपने बच्चे की याद आने लगी पर उसने अपना मकसद याद किया और फिर उसने महिमा को याद किया आज उसे अपने पहले वाले महात्मा जी की बहुत याद आ रही थी तनु को अचानक सामने की दीवार मे वो मह्त्माजी दीखाई देने लगे उन्होने कहा तनु तुम घबराओ मत ये तुम्हारी परीक्षा है जो तुम्हे हर हाल मे पूरी करनी है |और हम सब तुम्हारे साथ हैं|लेकिन सिर्फ तुम्हारी कामयाबी और सलामती की सिर्फ प्रार्थना ही कर सकते हैं यह पड़ाव तुम्हे खुद पार करना होगा क्युकी तुम रास्ते से गलत अन्धकार के रास्ते पर चली आई हो यहाँ ईश्वर की सत्ता भी नियम से बंधी है अगर तुम उजालो के संसार मे होती तो शायद विधि का विधान भी बदल जाता परन्तु यहाँ सब के हाथ बंधे हैं |तनु ने बाबाजी के आगे हाथ जोड़े (मह्त्माजी )और कहा की आप निराश न हो मे यहाँ से जरुर निकलूंगी और तनु रास्ता खोजने लगी |
तनु अपने को संभल नहीं पायीं और वो भी रोने लगी तनु ने जैसे ही रोना शुरू किया तो वो दर्दनाक रोने की आवाज़ बंद हो गयी पर तनु का रोना रुक ही नहीं रहा था |तनु ने बहुत चाह की उसका रोना रुक जाए पर रुक ही नहीं रहा तभी वहां एक आवाज़ आई की जब तक कोई और आकर तुम्हारी तरह नहीं रोता तब तक तुम हर वक़्त यु ही रोटी रहोगी मे भी यहाँ सदियों से किसी के आने का और उसके रोने का इंतजार कर रही थी |तनु घबरा गयी मगर फिर उसने समझदारी से काम लिया वो अपने बच्चे अपने पति और अपने घर को याद करने लगी अचानक वहां महिमा आ गयी और वो रोने लगी तनु ने कहा महिमा तुम यहाँ क्यों आई हो महिमा कुछ बोल ही नहीं प् रही थी वो सिर्फ रोये ही जा रही थी |तनु अब तुम आगे बढ़ो तभी बाबाजी की गंभीर और थारी हुई आवाज़ आई तनु महिमा को वहां छोड़ कर नहीं जाना चाहती थी पर उसे जाना पड़ा तनु महिमा को रोती हुई छोड़कर अपने अगले पड़ाव पर निकल पड़ी|
तनु को आगे जंगल ही जंगल मिले तनु चलती चली गयी |तनु को आगे एक पेड मिला जिसमे उसके जमाने की सारी वस्तुएये लग रही थी परन्तु तनु ने उसकी तरफ देखा भी नहीं तनु को अब यहं से निकलना था |तनु अकेलेपन से बहुत घबराती थी और यहाँ वो बिलकुल अकेली थी |तनु आगे बढ़ी तो उसे बचाओ बचाओ की महीन महीन से आवाज़ सुनाई दी तनु ने चारो तरफ देखा उसे कुछ दीखाई नहीं दिया|तब एक आवाज़ आई की नीचे देखो तनु ने नीचे देखा तो उसे छोटे छोटे गुड्डे गुडियों की की तरह दीखने वाले मनुष्य दीखाई दिए तनु नीचे बैठ गयी उसने अपनी हथली पे एक को उठाया तनु ने पुछा ये कोन सी जगह है|तब उसने कहा के ये अन्धकार अंधेरो की दुनिया है यहाँ पता नहीं चलता कब क्या हो जाए हमे अंधेरे का हुकुम मानना पड़ता है हम सब अंधेरे के गुलाम हैं |
फिर उसने तनु से कहा की क्या तुम्हे हमारे सम्राट अन्धकार ने भेजा है |तनु ने कहा नहीं वो गलती से यहाँ आ गयी और वो यहाँ से निकलना चाहती है मगर उसको रास्ता नहीं मिल रहा |उस क्रिश्तू नाम के छोटे से व्यक्ति ने जो तनु के अंगूठे के बराबर था कहा की रास्ता यहाँ नहीं मिलता क्युकी ये एक मायावी दुनिया है |मगर अगर तनु उनकी सहायता करेगी तो वो भी उसकी सहायता करेंगे तनु कहा ने कहा की मुझे क्या करना होगा |
क्रमश:
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