COPY CODE SNIPPET its tym to lyf moments (IMAGINARY STORY ): mano ya na mano (ix)part (STORY)

Wednesday, March 9, 2011

mano ya na mano (ix)part (STORY)







तनु समाधी मे लीन यही और अपनी अंतरातमा से श्री कृष्ण जी की बाल लिलाओ का प्रत्यश दर्शन कर रही थी |कहीं कृष्ण ओखली से बंधे हैं कही अपने सखाओ को सुर्प मुख से बहार ला रहे हैं |और कहीं तो  माखन लीला  |तनु समाधी मे इतनी लीन थी की उसे तन मन की कोई सुध नहीं थी वह तो अपना सर्वस्व परमात्मा मे लीन कर चुकी थी |और ये भी भूल चुकी थी की उसका मकसद क्या है |तनु अभी इन बाल लिलाओ का दर्शन कर ही रही थी की उसका मन फिर डोलने लगा  वो थोडा और अपनी आत्मा को पवित्र करना चाहती थी |कहते है न की इंसान की इछाओ का अंत नहीं होता तनु के साथ भी यही हो रहा था मनो वहा अपने आपको सिद्ध करना चाहती थी मानो सोच रही हो की बस अब तो एस churasi लाख से पार उतरना है ऋषिजी तनु के मन की बात समझ गए मगर वो ये बात तनु के मुख से सुनना चाहते थे| तनु ने अपने चक्षु खोले और सजल नेत्रों से ऋषिजी को अपनी बात बताई साथ ही उसने ये भी कहा की क्या वो इस लायक है |तब ऋषिजी बोले  की तनु मे इसी बात की प्रतीक्षा कर रहा था की कब तुम मुझसे ये बात कहोगी |तनु ने कहा की क्या मेरी ये बात पूरी हो पायेगी तब ऋषिजी ने कहा की तनु तुम इन दुर्लभ षडो का अवलोकन यहीं कर लो और                                                                                                                              
ऋषि ने तनु को उन षडो का उस दुर्लभ द्रश्यो का अवलोकन  कराया .........to be continued .......                        
Krishna_Arjuna.gif
                                                                                     
                                                                               

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