न जाने कब तक राजन तनु को अपने से चिपकाये रहा उन दोनों की तन्द्रा तब भंग हुई जब उन्होने ताली बजने की आवाज़ सुनी वो दोनों छिटक कर अलग हो गए देखा तो रिंकी ताली बजा रही थी|तनु शर्मा कर अंदरचली गयी
रात को राजन आज घर के बहार बास्केट ले कर खड़ा हो गया वो आज ही इंसान बन जाने वाला सांप पकड़ना चाहता था|क्युकी वो आज ही एक सपेरे के पास गया था और उस सपेरे ने राजन को सांप के बारे में बहुत सारी बाते बताई थी|उस सपेरे ने राजन को ये भी बताया की बहुत से इच्छाधारी सांप होते हैं जो जब चाहे इंसान बन जाते हैं |और इनके पास एक नागमणि भी होती है जिससे जो मांगो वो मिल जाता है |
राजन पहले तो लालची नहीं था परन्तु जबसे वो शहर में आया है तबसे वो पैसे के पीछे थोडा पागल हो गया है |और उसे अब हर कीमत पर नागमणि चाहिए थी |अचानक राजन ने देखा की एक सांप रेंगता हुआ आ रहा है राजन ने झट से उस सांप को बास्केट में पकड़ लिया और उसे अलमारी वाले रास्ते
से अंदर कमरे में छुपा दिया और आकर ऐसे सो गया मानो जैसे कुछ हुआ ही न हो
अगले दिन राजन कुछ जल्दी उठ गया और जल्दी से उस कमरे में पंहुचा जहा सांप रखा हुआ था |राजन ने बास्केट खोली तो सांप फन फैला कर खड़ा हो गया राजन डर कर पीछे चला गया तो वह सांप अलमारी वाले रास्ते से बहार चला गया राजन उसे पकडने उसके पीछे भागा मगर तब तक सांप उसकी आँखों से ओझल हो चूका था और किसी सुरक्षित स्थान पर जा चूका था |राजन को निराशा हात लगी मगर उसने सोचा कोई बात नहीं आज रात को तो जरुर आयेगा तब वह उसे पकड़ कर रहेगा |
मगर आज जब राजन ऑफिस गया तो वहां जाकर उसे पता चला की उसे एकअर्जेंट मीटिंग में शहर से बहार जाना पडेगा राजन को जब ये पता चला तो वह मन ही मन बहुत दु:खी हुआ साथ ही वो तनु को भी अकेला नहीं रहने देना चाहता था |वो जल्दी से घर गया और तनु से बोला की तुम भी मेरे साथ चलो तनु ने कहा की वो क्या करेगी आप तो अपनी मीटिंग में busy हो जायेंगे और में बोर होउंगी राजन ने कहा की तुम अकेले यहाँ रहकर क्या करोगी तो तनु बोली मैं कहाँ अकेली हूँ रिंकी है न मेरे पास राजन ये कैसे कहता की उसके डर से ही तो तुम्हे ले जा रहा हूँ |राजन ने तनु को साथ चलने को बहुत कहा पर तनु उसके साथ नहीं गयी आखिरकार राजन को अकेला ही जाना पड़ा |राजन बहुत निराश होकर गया |
आजकल रिंकी तनु का बहुत हाथ बताने लगी थी साथ ही वो उसको अपनी बातो से हसाती भी रहती थी रात को दोनों डिनर लेकर अपने अपने कमरे में चली गयी |न जाने क्यों आज तनु को नींद नहीं आरही थी नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी वह ये सोच रही थी की काश वह राजंकी बात मानकर उनके साथ ही चली जाती |उसे अचानक प्यास लगने लगी उसने जग में देखा तो पानी नहीं था आज वो पानी रखना भूल गयी थी वो पानी लेने के लिए kitchen की तरफ जाने के लिए उठी तो जैसे ही उसने कमरे का दरवाज़ा खोला तो वो हतप्रभ रह गयी क्युकी वो तो उसका घर लगही नहीं रहा था |
तनु का सारा घर जगमग करती हुई रौशनी से भरा था और इतनी शांति थी की तनु को एक अतभुत अनुभूति हो रही थी तनु को इतनी विचित्र अनुभूति हुई की तनु उसका वर्णन भी ठीक से नहीं कर सकती |तनु ने देखा की उसके
घर के आँगन में सोने चांदी के वृक्ष लगे हैं |प्रथिवी की जगह मानो अम्बर


हो रिंकी भी किसी अप्सरा ,देव सुन्दरी से कम नहीं लग रही थी और ये इसके साथ में देव तुल्य युवक कौन है |दोनों न जाने किस भाषा में बात कर रहे थे तनु की कुछ समझ नहीं आ रहा था |तनु वापस अपने कमरे में चली गयी तनु ने राजन को बहुत फ़ोन मिलाया परन्तु उसका फ़ोन नहीं मिला तनु को इतना डर लगा की तनु एक अलमारी में चुप कर बैठ गयी |अचानक तनु ने कमरा खुलने की आवाज़ सुनी फिर रिंकी की आवाज़ आई की तनु तो यहाँ नहीं है फिर युवक की आवाज़ आई की जाएगी कहाँ देखो यही छुपी होगी अगर उसने बाहर का नज़ारा देख लिया होगा तो और आगे के शब्द अलमारी खोलने बंद करने की आवाज़ में गुम हो गए तनु को अब पता चला की उसे अलमारियो में ढूंड रहे हैं वो कपनी लगी की पकड़ी गयी तो न जाने मेरे साथ क्या करेंगे और तनु डर कर और पीछे हो गयी और अचानक उसका हाथ किसी चीज पर पड़ा |तो तनु ने अपने आपको किसी कमरे में पाया रिंकी और वह युवक जिसे रिंकी मयंक कह रही थी जब तनु उन्हे नहीं मिली तो दोनों बाहर चले गए |रिंकी के हाथ में वही चमकती हुई चीज थी |
क्रमश:
मगर आज जब राजन ऑफिस गया तो वहां जाकर उसे पता चला की उसे एकअर्जेंट मीटिंग में शहर से बहार जाना पडेगा राजन को जब ये पता चला तो वह मन ही मन बहुत दु:खी हुआ साथ ही वो तनु को भी अकेला नहीं रहने देना चाहता था |वो जल्दी से घर गया और तनु से बोला की तुम भी मेरे साथ चलो तनु ने कहा की वो क्या करेगी आप तो अपनी मीटिंग में busy हो जायेंगे और में बोर होउंगी राजन ने कहा की तुम अकेले यहाँ रहकर क्या करोगी तो तनु बोली मैं कहाँ अकेली हूँ रिंकी है न मेरे पास राजन ये कैसे कहता की उसके डर से ही तो तुम्हे ले जा रहा हूँ |राजन ने तनु को साथ चलने को बहुत कहा पर तनु उसके साथ नहीं गयी आखिरकार राजन को अकेला ही जाना पड़ा |राजन बहुत निराश होकर गया |
आजकल रिंकी तनु का बहुत हाथ बताने लगी थी साथ ही वो उसको अपनी बातो से हसाती भी रहती थी रात को दोनों डिनर लेकर अपने अपने कमरे में चली गयी |न जाने क्यों आज तनु को नींद नहीं आरही थी नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी वह ये सोच रही थी की काश वह राजंकी बात मानकर उनके साथ ही चली जाती |उसे अचानक प्यास लगने लगी उसने जग में देखा तो पानी नहीं था आज वो पानी रखना भूल गयी थी वो पानी लेने के लिए kitchen की तरफ जाने के लिए उठी तो जैसे ही उसने कमरे का दरवाज़ा खोला तो वो हतप्रभ रह गयी क्युकी वो तो उसका घर लगही नहीं रहा था |
तनु का सारा घर जगमग करती हुई रौशनी से भरा था और इतनी शांति थी की तनु को एक अतभुत अनुभूति हो रही थी तनु को इतनी विचित्र अनुभूति हुई की तनु उसका वर्णन भी ठीक से नहीं कर सकती |तनु ने देखा की उसके
घर के आँगन में सोने चांदी के वृक्ष लगे हैं |प्रथिवी की जगह मानो अम्बर


हो रिंकी भी किसी अप्सरा ,देव सुन्दरी से कम नहीं लग रही थी और ये इसके साथ में देव तुल्य युवक कौन है |दोनों न जाने किस भाषा में बात कर रहे थे तनु की कुछ समझ नहीं आ रहा था |तनु वापस अपने कमरे में चली गयी तनु ने राजन को बहुत फ़ोन मिलाया परन्तु उसका फ़ोन नहीं मिला तनु को इतना डर लगा की तनु एक अलमारी में चुप कर बैठ गयी |अचानक तनु ने कमरा खुलने की आवाज़ सुनी फिर रिंकी की आवाज़ आई की तनु तो यहाँ नहीं है फिर युवक की आवाज़ आई की जाएगी कहाँ देखो यही छुपी होगी अगर उसने बाहर का नज़ारा देख लिया होगा तो और आगे के शब्द अलमारी खोलने बंद करने की आवाज़ में गुम हो गए तनु को अब पता चला की उसे अलमारियो में ढूंड रहे हैं वो कपनी लगी की पकड़ी गयी तो न जाने मेरे साथ क्या करेंगे और तनु डर कर और पीछे हो गयी और अचानक उसका हाथ किसी चीज पर पड़ा |तो तनु ने अपने आपको किसी कमरे में पाया रिंकी और वह युवक जिसे रिंकी मयंक कह रही थी जब तनु उन्हे नहीं मिली तो दोनों बाहर चले गए |रिंकी के हाथ में वही चमकती हुई चीज थी |
क्रमश:

No comments:
Post a Comment