तनु भुल्भुलेया रास्ते पर चली गयी शायद नियति की यही मर्जी थी|तनु के भुलभुलिया रास्ते पर जाते ही वक्त थम गया हवाए बहनी बंद हो गयी सूरज निकलना भूल गया नदियों ने बहना बंद कर दिया जो सो रहे थे वो जागना भूल गए जो जाग रहे थे वो सोना भूल गए सब ऋषि मुनियो की समाधी भंग हो गयी प्रथिवी से लेकर स्वर्ग तक हलचल मच गयी प्रभु के आगे हाथ जोड़ लिए हे प्रभु ये कैसी लीला है आपकी|प्रभु भी नियति और नियम से बंधे है |अब तो देखना ये है की तनु अपनी सीखी हुई विद्या का कैसे उपयोग करती है|
तनु जैसे ही जरा सी और आगे बढ़ी तभी एक तलवार की नौक उसकी पीठ पर लगी उसने पीछे मुड़ना चाह पर उसे पीछे मुड कर न देखने की चेतावनी मिली|तभी तनु के हाथ मे न जाने कहाँ से एक तलवार प्रकट हो गयी तनु ने लड़ना शुरू कर दिया जो व्यक्ति तनु की पीठ पर तलवार लगाये था उसने अपना सारा मुह कवर कर रखा था |तनु की तलवार बाज़ी के सामने वो व्यक्ति हार गया तनु ने उसके मुह पर से नकाब हटाया ये क्या उसके तो मुह की जगह से भयंकर काली रौशनी निकल रही थी |तनु वहां से भागखड़ीहुई | 
तनु को जैसे इस राह मे सिवाय मुसीबत के और कुछ मिलने वाला नहीं था |या यूँ कह लीजिये की तनु की परीक्षा हो रही थी |अभी तनु कुछ ही आगे बढ़ी थी की वो एक एसी जगह पहुच गयी जहाँ कोई किसी से बोल ही नहीं रहा था तनु ने एक व्यक्ति से पुचा की ये कोन सी जगह है वो कुछ बोला ही नहीं तनु ने और भी लोगो से पूछा किसी ने उसकी बात का जवाब ही नहीं दिया तनु ने सोचा की या तो ये लोग गूंगे हैं या ये मेरी भाषा ही नहीं समझ पा रहे पर तनु की ये दोनों ही बाते गलत थी दरअसल वो तो तनु को देख ही नहीं पा रहे थे |
तभी एक विशालकाय पक्षी आया और तनु को अपने पंजो मे दबा कर ले गया |तनु ने बहुत निकालने की कोशिश की परन्तु उसके हाथ बंधे थे वह पक्षी ऊसको एक घाटी मे ले गया और वहां ले जाकर उसको छोड़ दिया तनु एक गहरी घाटी मे थी उसने चारो तरफ देखा वहां हीरे ही हीरे थे ये हीरे उसके किस काम के उसका तो मकसद तो अब उसे मिल चूका था उसने वहां से निकलने की बहुत कोशिस की पर घाटी की दीवारें बहुत चिकनी ,सीधी,और सपाट थी उसने महिमा को याद किया तो महिमा उसके सामने प्रकट हो गयी परन्तु उसने तनु से कहा की यहाँ वो उसकी कोई मदद नहीं कर सकती यहाँ तनु को अपनी मदद खुद करनी पडेगी क्युकी इस घाटी मे जो भी आता है उसे बिना किसी की मदद के निकलना पड़ता है अगर उसने यहाँ से तनु को निकलने मे उसकी मदद की तो तनु वापस यही इसी घाटी मे दोबारा आ जाएगी अब फैसला तनु को करना था तनु ने कहा की वो यहाँ से खुद निकलेगी तनु घाटी मे निर्जीव बन कर लेट गयी तनु को मरा समझ कर वहा पक्षी उसके पास आया जब वो जाने लगा तो तनु ने उसके पैर पकड़ लिए और घाटी से बहार आकर छोड़ दिए तनु वहां से लुढ़कती हुई पाताल मे पहुच गयी|
वहां चारो तरफ फूल ही फूल थे |तनु ने एसी जगह कभी सपने मे भी नहीं देखि थी मधुर मधुर संगीत बज रह था हवाओं मे भीनी भीनी खुशबु फैली थी |निर्मल झरने बह रहे थे ,तनु की मनो ये सब देख कर सारी थकन ही मिट गयी थी|तनु गलीचे जैसी फूलो पर सो गयी |जब उसकी आंखे खुली तो उसने अपने आपको किसी कमरे मे पाया |क्रमश:
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