तनु ne
भगवान की लीलाओ की झाँकियो के दर्शन किये |
तनु ने यह सब देख कर अपनी आँखों को पवित्र कर लिया ,और फिर वो
वहां से जाने के लिए मुड़ी ही थी की फिर पलटी और उसने वहां की रज
उठा ली वो थोडा आगे तक गयी फिर के युगल दर्शन देखने
लिए लौट आई और उसने युगल सरकार की झांकी के दर्शन किये उसने
देखा की दोनों कदम के वृक्ष पर झुला झूल रहे हैं तनु ने वो छवि अपने मानस पटल पर अंकित कर ली |वह यह द्रश्य देखने के बाद मुड़ी तो सामने
एक ऋषिजी खडे थे तनु ने उनको प्रणाम किया उन्होने तनु को आशीर्वाद
देखा की दोनों कदम के वृक्ष पर झुला झूल रहे हैं तनु ने वो छवि अपने मानस पटल पर अंकित कर ली |वह यह द्रश्य देखने के बाद मुड़ी तो सामने
एक ऋषिजी खडे थे तनु ने उनको प्रणाम किया उन्होने तनु को आशीर्वाद
दिया'' विजयी भव'' फिर वो तनु को अपने साथ अपने आश्रम ले गए
वहां उन्होने तनु को गुप्त कलाओ से परिचित कराया तनु ने बहुत धयान से
सब रहस्य सीखे परन्तु वह एक कला नहीं सीख पायी वो परेशान हो गयी
तब ऋषि जी बोले तनु तुम्हे जितना सीखना चाहिए था तुमने सीख लिया
अब तुम्हे जब भी इस कला की जरुरत पडेगी तुम्हे मुझहे याद करना पडेगा
तनु के मन मे कृष्ण की बाल लिलालो के दर्शन करने का मन हुआ उस के मन की बात वो समझ गए उन्होने तनु से कहा की वो आंखे बंद कर ले तनु
ने आंखे बंद कर ली और उसकी समाधी लग गयी |
उधर तनु से राजन ने कहा की वह यहाँ नहीं रहना चाहता और शहर जाना चाहता है और वह तनु को लेकर शहर आ गया तनु का वहां मन नहीं लगा
पर राजन बहुत खुश था इसलिए तनु ने कुछ नहीं कहा और वह इसी जगह
पर मन लगाने की कोशिश करने लगी तनु ने देखा की राजन बहुत बदलता जा रहा है पहले तो उसने धयान नहीं दिया परन्तु धीरे धीरे उसने इस बात
पर ध्यान देना शुरू कर दिया उसने देखा की राजन पर शहर का रंग चढ़ता
जा रहा है और एक दिन.......!!!


aaj to bhagvaan k darshan hue........nyc blog...:D
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ReplyDeletethanx...mohita,divya,eshu...!!!!
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