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Thursday, March 1, 2012

mano ya na mano ''mera sapna'' vishal

Nature Scraps, nature graphics, and nature images for Orkut, Myspace, Facebook, Hi5, Tagged

                                                            ''विशाल''
छत्त  पर  खड़ी  निर्मला  ने   सामने  फैले  हुएय  विशाल  जंगल  को  देखा, उनके  पति  फोरेस्ट  ऑफिसर  हैं । निर्मला  नागपुर  के  जंगलो  में  रहती  है , वहां  बारहों  महीने जीरों  डीग्री  तापमान  रहता  है , सूरज  कभी  दिखाई  नही  देता ,क्युकी  जंगल  बेहद  घना  है ।  निर्मला  यहाँ  अकेले  ही  रहते  है , उसके  दोनों  बच्चे  सौरभ  और  गौरव  दिल्ली  के एक हॉस्टल   में  रहते  हैं ,दोनों  अभी  छोटी  क्लास  में  पढते  हैं । आज  सुबह  से  ही  निर्मला  को  उन  दोनों  की  बहुत याद  आ  रही  थी  कारण  था  की , आज  सौरभ  का  बर्थडे  था ।

तभी  विशाल  की  म्रदु  आवाज़  आई ''निर्मला'' निर्मला  की तन्द्रा  भंग  हुई,  वह  यथार्थ  में  लौट  आई । धीरे -धीरे  थके  कदमो  से  निर्मला  नीचे  आई , देखा  आज  विशाल  अपने  नीले  सूट  में  बेहद  खुबसूरत  लग  रहे  थे , कुछ  पालो  के  लिए  तो  निर्मला  मानो   सब  कुछ  ही  भूल  गयी  थी । विशाल  निर्मला  के  मन  के  भावो  को  समझ  रहे  थे  , उन्होने  आगे  बढ़  कर  निर्मला  को  अपने  हिरदय  से  लगा  लिया । 

विशाल  शहर  से  एक  बेहद  खुबसूरत  ''गिटार  की शेप''  केक  बनवा  कर  लाये  थे , दोनों  ने  मिलकर  केक  काटा  दोनों  की  आंखे  ख़ुशी  के  आंसुओ  से  भरी  हुई  थी । तभी  बहार  से  विशाल  की  आवाज़  आई  मोम -डैड .......!! और  निर्मला  की  नींद  खुल  गयी ।  

चलते- चलते = भीगी- भीगी  सी  अलसाई  सुबह  ने  जैसे  कानो  में  कुछ  कहा
                       हवा  का  झोंका  आया  और  मेरे  केशो  को  उड़ाकर  मुख पर  डाला  
                       ऐसे  की  जैसे  लहराता  सा  आँचल हो उठकर  झरोखे  से  नज़र  डाली  जो 
                       उस पार  पारिजात के  पुष्पों  की  सुगंध  ने  आ  घेरा, होले  से  जो  दर्पण निहारा 
                       तो  स्तब्ध  रह  गयी ,उनका  चेहरा  जो  नज़र  आ गया वही भोला सा मासूम.....
                       कई  सवालों  को लिए अपनी  निसंदेह  पवित्र  मुस्कान  के  साथ  जो  मेरी औरा  को 
                       तृप्त  कर  रहा  था .......और ये सपना  ही था .................! 
                        
            Fantasy Graphics

Wednesday, February 1, 2012

mano ya na mano ''mera sapna'' sonali



                                                            सोनाली 

सोनाली ,  नई  भाभी  ने  अपनी  रस  टपकती  वाणी  में  कहा, सोनाली  गहरी  नींद  में  सोयी  थी, पर  नयी  भाभी  की  एक  आवाज़  पर  ही  उठ  कर  खड़ी  हो  गयी । भाभी  बोली  सोनाली   तुम  मुझे  ''कच्ची इमली'' लाकर  दोगी ? हाँ  भाभी  मुझे  पेड़  पर  से  इमली  तोडनी  आती  है, भाभी  बोली  नहीं  तोडनी  नही  है ।तो !! सोनाली   बोली ?? सोनाली  को पैसे  देते  हुएय  भाभी  बोली,  वो जो  बच्चे  पेड़  के  नीचे  टोकरी  में  इमली  लिए  बैठे  रहते  हैं  न,  उनसे  ले  आओ । अच्छा  भाभी  कहती  हुई  गीतिका  उछलती  हुई  बहार  की  तरफ भाग गयी । 

मगर  आज  पेड़  के  नीचे  एक  भी  इमली  वाला  नहीं  था । सोनाली   ने  छोटे- छोटे पत्थर  उठाये  और  इमली  पर  साध- साध  कर  निशाना  लगाने  लगी, उसने  ढेर  सारी  इमली  जमीन  पर गिरा  दी, फिर अपनी  फ्राक  में  सारी  इमली  इकठी  कर  ली । भाभी  के  दिए  हुएय  पैसे  बच  गए  थे , वो  बहुत  दिन  से  ''सकोरे में लाल रसगुल्ला '' खाने  का  सोच  रही  थी, पर  अम्मा  के  दिए  सारे  पैसे  उसने  चाट-पकोड़ी  में  उड़ा दिए  थे । ''जय प्रकाश  हलवाई'' के  यहाँ  से  उसने  दो  रसगुल्ले  लिए  एक अपने  लिए  एक  अपनी  नयी  भाभी  के  लिए ।

एक  हाथ  से  उसने  अपनी  फ्राक  को  पकड़  रखा  और  दुसरे  हाथ  में  सकोरा  पकड़  रखा  था । घर  पर  लेकर  आई  तो  देखा  भाभी  भैया  के  साथ  बहार  जाने  के  लिए  सज- धज  कर  खड़ी  हैं ।भाभी  इतनी  सुंदर  लग  रही  थी  की , सोनाली   अपलक  दृष्टि  से  भाभी  को देखती  रही ।फिर  अचानक  उसे  जैसे  कुछ   ध्यान  आया  हो ,मानो  वो  किसी  सपने  को  देख  कर  जागी   हो । सोनाली   बोली  भाभी, इमली  और रसगुल्ले  भाभी  ने  अपने  दोनों  फूल  जैसे  हाथ  आगे  बढाये  और  बहार  गाड़ी  की चरमराती  आवाज़  सुनाई  दी  और  .............सोनाली   की  आँख  खुल  गयी ......!

चलते-चलते = वो  कागज़  की  कश्ती,वो जादू की नाव
                      वो आँगन का झरोखा,वो बहता सा गाव
                     वो  अम्मा की साडी,वो बापू की छाँव
                      '' कोई लौटा दे वो मेरा बीता सा कल'' ।।       


Sunday, January 15, 2012

mano ya na mano ''mera sapna'' BABLOO

                                                           ''बबलू''

बबलू  भाग  कर  अपनी  दादी  के  पल्लू  में  छुप  गया, माँ  उसके  पीछे  डंडा  लेकर  भाग  रही  थी | शैतानी  भी  तो  बबलू   खूब  करता  था |अपनी  मम्मी  की  सारी  'लिपस्टिक'  तोड़  आया  था, मम्मी  को  अभी  ही,क्लब  जाना  था , दूसरी लिपस्टिक  लाने का  टाइम  भी नही  था, वो  लिपस्टिक  साड़ी  के साथ  की  मचिंग  की  थी | मम्मी  दादी  से  बोली  आज  आप  बबलू  को  छोड़  दो, आज  ये  मेरे  हाथ  से  नही  बचने वाला | और  बबलू  को  मारते वक़्त  दादी  के  भी  दो- चार  डंडे  लग  गये  थे .......      : p

 
पर  दादी  मम्मी  को  अपनी  'बेटी'  से  भी  ज्यादा  प्यार  करती  थी :) बबलू  ने  'कान'  पकडे  और  कभी  भी 
 मेकअप   के  सामान  को  हाथ  नहीं  लगाऊंगा,ऐसा  कह  कर  बबलू  रोता  हुआ  बहार  भाग  गया | तभी  बबलू  ने  देखा  की  ''रामलीला''  के  आर्टिस्ट  आज  के  शो  की  प्रक्टिस  कर  रहे  थे | बबलू  बहुत  देर  तक  उनको  देखता  रहा, और बडे होकर  मै  ''रावण''  बनूगा ये  सोच  कर  घर  चला आया  : D 

 
मम्मी  से  बबलू  बोला  ''मम्मी  मै  बडे  होकर  रावण  जैसा  बनूगा''  मम्मी  ने  बबलू के  'दो चपत' लगा  दी  और  बोली ''न जाने कहाँ से ये सब सीख  कर  आता है'' बबलू  रोने  लगा  और  रोते -रोते  बोला  अब  आपसे कभी   बात   नहीं   करूँगा | मगर  थोड़ी  देर  में  ही ,आकर  बोला मम्मी  पतंग  लाने  के  लिए  पैसे  दो  न ......पतंग  लेकर  बबलू  छत्त  पर  चला  गया......और  पतंग  लुटने  के  चक्कर  में ........इतनी  में बबलू की  आंखे  खुल  गयी  वो  बेड  के  नीचे  था .....!:)        


चलते-चलते = अब  तो  रात  के  पल  भी  हसीं  नज़र  आते  हैं
                       हमे  तो  अब  बिस्तर  के  नीचे  भी  सितारे  नज़र  आते  हैं ||:)

Sunday, January 1, 2012

mano ya na mano ''mera sapna'' ''ANIKET"

Orkut Scraps Flower
                                          ''अनिकेत'' 


अनिकेत  को  'विंटर  सीजन'  बहुत  पसंद  है, रंग-बिरंगे  खिले   हुएय   फूल  भीनी-भीनी  खुशबू  घना  कोहरा सब कुछ  वातावरण  को  ऐसा  बना  देता  है, की  ऐसा  लगता  है  की  जैसे  स्वर्ग  में  आ गए  हो | आज  अनिकेत  को ''सुगंधा'' की बहुत  याद  आ  रही  थी,'काका' से  बहार  लोन  में  चाय  लाने  को  कहकर,अनिकेत  बहार   लगे  झूले  पर  आकर  बैठ  गए |

झूले  पर  बैठते  ही  अनिकेत  अपनी  यादों  में  खो  गए,सुगंधा  से  उनकी  पहली  मुलाक़ात  बड़ी  मजेदार  तरीके  से  हुई  थी | वह  सुगंधा  से  पूर्णिमा  दीदी  के  यहाँ  मिले  थे, सुगंधा  'पूर्णिमा दी'  के  घर  के  पास  ही  रहती  थी | उस  दिन  जैसे  ही  अनिकेत  'दी' घर  में  घुसे  'पेस्ट्री' खाती  सुगंधा   से  टकरा   गए  थे, और  सारी                  पेस्ट्री  सुगंधा  की  नाक  पर  लग  गयी  थी | : )  :)

अनिकेत  का  तो  उस  दिन  पूरा  दिन  ही  सुगंधा  को    'सॉरी'  कहने  में  ही  बीता  था | और  फिर  तो  कुछ  ही  दिनों  में  ''वो  दोनों  दो  जिस्म  एक  जान  हो  गये''  थे | साथ  जीने  -मरने  की  कसमे  भी  खा  ले  थी, और  अपनी  बनाने  का  वादा  करके  अनिकेत  बुझे  मन  से   अपने  घर  लौट  आये  थे  | पर  वापस  घर   आने   के  बाद  वो  फिर  कभी  पूर्णिमा दी  के  घर  नही  जा  पाए  और  ना  ही  सुगंधा  से  फिर  मिल  पाए...........!

पापा  ने  उनको  अब्रोड  भेज  दिया  था, आगे  पढने  के  लिए और  अनिकेत  उस  दुनिया  में  जाकर  इतना  खो  गए  की  सुगंधा  को  कुछ  समय  के  लिए  उन्होने  अपनी   'यादो  की  डायरी'  में  छुपा  लिया  था | और  जब  वो  पांच  साल  के  लम्बे  समय  के  बाद  घर  लौटे  तो, सीधे  सुगंधा  से  मिलने  जा  पहुचे | पर  वहां  पर जाकर  उन्हे  पता  चला  की  सुगंधा  अब इस  दुनिया  में  नही  है .....       : '(       !!!
कारण  वो  स्वयं  थे , सुगंधा   ने  किसी  को  भी  ये  पता  नही  चलने  दिया  था  की, उसकी  इस  हालत  का  जिम्मेदार  कौन  है !!! और  अचानक  ही  वो  सुगंधा -सुगंधा  कहकर जाग  उठे .........उनकी  आँखों  से  अश्रु धरा  बह  रही  थी ..........    :'(  

चलते- चलते = आज  फिर अश्क  आँखों  में  झलक  आये  हैं
                      तेरी  भीनी -भीनी यादों के  दायरे सीमट  कर
                       कुछ  इस  तरह  से  आज  बरसे  की  कभी  हम
                        संभल  ना  पायेंगे,तेरी  यादों  से  कभी  निकल  ना  पायेंगे||
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Monday, December 12, 2011

mano ya na mano ''mera sapna DOLL''



Orkut Scraps - Doll                                                                      
                                                                           ''डॉल''
मनुषा  को  अपनी  ''डॉल''  से  बहुत  प्यार  था, स्कूल  से  आने  के  बाद  वो  बस  अपनी  डॉल  में  ही  लगी  रहती  थी | बहुत  सालो  तक  उसने  डॉल  को  अपने  से  दूर  नहीं  किया | पर  धीरे- धीरे  वो  डॉल  अब  गन्दी  होने  लगी, थी  |मनुषा  की  मम्मी  ने  उसकी  डॉल  को  उठा  कर  फेक   दिया  | मनुषा  ने  अपनी  डॉल  को  बहुत  ढूंडा  पर  वो  नहीं  मिली | धीरे- धीरे  मनुषा  सब  भूलने  लगी, उसके  पापा  ने  उसको  पहली  डॉल  से  भी  सुंदर  दूसरी  डॉल  जो  लाकर  दे  दी  थी |

मनुषा  रात - दिन  अब  अपनी  नयी  डॉल  के  साथ  रहने  लगी |मनुषा   डॉल  को  अपने  साथ  ही  लेकर  सोती, खेलती, और यहाँ  तक  की  पढ़ती  भी  उसी  को  लेकर  थी | एक  दिन  उसकी  ''बर्थडे''  थी, मनुषा  के  बहुत  से  'फ्रेंड'  मनुषा  के  घर  आये  हुएय  थे | मनुषा  अपने  सभी  दोस्तों  को  लेकर, अपने  घर  की  छत्त  पर  चली  गयी|

सभी  बच्चे  फूटबाल  खेलने  लगे, मनुषा  के  घर  की  बगल  में  ही  एक  खाली   प्लाट  पड़ा  था | फूटबाल  खेलते  समय  बच्चो  से, फूटबाल  उस  खाली  प्लाट  में  चली  गयी | सब  बच्चे  फूटबाल  को  लेने, उस  खाली  प्लाट  में  गए | वहां  पर, मनुषा  की  पुरानी  डॉल  भी  पड़ी  हुई  थी | मनुषा  उसे  देख कर  रोने  लगी ,उसने  वो  डॉल  उठा  ली | घर  आकर  उसने  अपनी  मम्मी  से  रोते  हुएय  कहा,  की  मम्मी  ''मुझे  अपनी  बर्थडे  पर  मेरी  इसी  डॉल  को  में  अपने  साथ  रख  सकू  इसका  गिफ्ट  दे  दो '' उसकी  मम्मी  की  आंखे  भर  आई, और  उन्होने  फिर  उसकी , उस  गन्दी  पुरानी  डॉल   को  साफ़  करके  फिर  से  नया  बना  दिया | इतनी  में  ही  मनुषा  की  आँख  खुल  गयी  ,और  उसने  अपनी  डॉल  को  कस  कर  पकड़  कर  सीने  से  लगा  लिया |          

चलते-चलते= मिलने  आयेंगे   आपसे  खवाबो  में,
                      ज़रा  जलते  चिराग  अपने  से  दूर  कर  दीजिए,
                      बस  अब  और  नहीं  होता  आपसे  दूर  रह  कर  इंतज़ार,
                      ज़रा  अपनी  पलकों  के  चिलमन  गिरा  लीजिये ||


Orkut Scraps - Doll

Thursday, December 1, 2011

mano ya na mano ''mera sapna BANSURI''



                                                                    ''बांसुरी''

रोहित  ने  आज  फिर  कृष्ण  भगवान्  के  मंदिर  में  रखी,  उनकी  गुल्लक  में  से  पैसे  ले  लिए,  और  भगवान्  जी  से  उन्हे  लौटने  का  वादा  करते  हुएय,  मार्केट  चला  गया|  अपनी  मनपसंद  चीज  लेने   के   लिए  उसने,  पहले  अपनी  मनपसंद  टोफ्फी  को  मोर  की  आकृति  में  बनवा  कर  लिया |उसके  यहाँ    टोफ्फी    मनचाही  आकृति  में  बनवा  कर  ली  जा  सकती  थी | उसके  बाद  उसने  टॉय  खरीदा  और  घर  आ  गया |

घर  पहुचते  ही  माँ  की  आवाज़  आई  ''मंदिर  में  से  पैसे  तुमने  लिए  हैं''? रोहित  ने  साफ़  झूट  बोल  दिया  नहीं  माँ |और  रोहित  जनता  था  की  ,अब  सारा  गुस्सा  छोटू  पर  उतरेगा |मगर  यह  क्या?!  माँ  ने  उसको  भी  कुछ  नहीं  कहा |धीरे -धीरे  समय  बीतता गया,रोहित  collage में  आ गया था,परन्तु  मंदिर  से  पैसे   लेने  का  उसका  क्रम  जारी  था | मंदिर  से  पैसे  गायब  होने  के  बावजूद  भी,  माँ  ने  मंदिर  में  पैसे  रखना  नही  छोड़ा  था |

मगर  आज  तो  रोहित  की  निगाह  कृष्ण  की  सोने  की  'बांसुरी'  पर  थी,  उसने  सोचा  माँ  के  सोने  के  बाद  ..........................!!और  फिर  कृष्ण  भी  तो  घर  के  ही  हैं !सोने  की  लूँगा  तो  हीरे  की  बनवा  कर  दे  दूंगा  !!        
और  यह  सोच  कर  रोहित  एक  खम्बे  की  आड़  में  बैठ  गया |और  तभी  उसकी अन्तेरात्मा चीत्कार उठी-----  |तभी  माँ की  आती  आवाज़  से  रोहित  की नींद खुल गयी ''क्या हुआ मेरे लाल तुझे क्या हो गया''|            

चलते-चलते = तेरे  सिवा  कोई  मेरे  ज़ज्बात  में  नहीं 
                        आँखों  में  वो  नमी  है  जो  बरसात  में  नहीं 
                       खता  हो  गयी  मुजसे  बहुत  बड़ी 
                       क्या  करू  वही  लकीर  तो  तुने  मेरे  हाथ  में  दी ! 

good night Scraps, graphics and Comments

Tuesday, November 1, 2011

mano ya na mano (mera sapna)CHETAN


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                                                            ''चेतन'' 
चेतन  ने  अपनी  घडी  में  टाइम  देखा  सुबह  के  तीन  बजे  थे  वह  रूम  से बहार  निकलकर  'लोन'  में   आ   गया  वह   ''पालनखेत''  इसीलिए  आया   था, की  सुबह-सुबह  मुह अँधेरे  वह  घुमने  जायेगा | किसी  का  न  कोई  डर,  न  कोई  चिंता, प्रकृति   की  छांव  में  अपनी   दिलचस्प   कहानियां  लिखेगा  | बहुत  सारे  प्लाट  उसके  दीमाग   में  थे, वो  सोच  रहा   था, की  देखो  आज  उसकी  कलम  किस  टोपिक  पर  चलती  है .........| 

और  आज  उसकी  कलम (वह लपटॉप में ड्राफ्ट सेव कर रहा था ) चली  एक  ''फेनटेसी नोवेल''  पर,  उस  नोवेल   के   हीरो   का  नाम  था  ''अलादीन'' अलादीन   एक  ''जादुई गुफा'' में  फस  जाता  है, नीले और काले  रंग  की  वह  गुफा  सोने,चाँदी  और  हीरे-जवाहरात   के  'आभूषण'  से  जगमगा  रही  थी |चारो  तरफ  बर्फीला  पानी  टपक  रहा  था, पैदल  जाने  का  रास्ता  बंद  था, अलादीन  को  समझ  नहीं  आ  रहा  था  की ,वह  आगे  कैसे  बढे |

अलादीन  के  पास  बस  एक  तलवार  थी | अलादीन  को  एक  घास  का  गट्ठर  दिखाई  दिया, वो  उस  पर    कूद  कर  पहाड़  पर  लहराती  बेल  को   पकड़ना  चाहता  था | अलादीन  उस घास  के  गट्ठर  पर  कूदा मगर  यह  क्या ....! गट्ठर उपर  उठ  गया,  अलादीन  ने  बेल  को  पकड़  लिया  और  उस  बेल  के  सहारे  वो  पहाड़  तक  पहुच  गया  |अब  उसे  दुसरे  पहाड़  तक  पहुचने  के  लिए  जबरदस्त  'ट्रिक'  लगनी  पड़ी  उसे  ऐसे  कूदना  था  की  वो  उसी  पहाड़  के  दुसरे  छोर  पर  पहुच  जाए | अलादीन  अपनी  सारी  ताकत  लगा  कर  अपना  'बैलेंस' आगे  की  तरफ  करकर,  पहाड़ी  के  दुसरे  छोर  पर  कूद  गया |धीरे-धीरे  वह  ढलान  से  नीचे  उतरा  तो  सामने  ''आदमखोर मछलियों''  से  भरी  एक  छोटी  से  नदी  थी  | मछलियाँ  आदमखोर  हैं  इसका  पता  अलादीन  को  ऐसे  लगा  की,'ज्यूँही  उसने  अपना  पाव   नदी  में  डाला  मछलियों   ने  उसके  पाव  में  दात से  काट  डाला'' |अलादीन  ने  देखा  की  वहां  पर  'गोल्ड के पत्थर'  पडे  हैं  अलादीन  उनको  उठा  कर पानी  में फकने  लगा  मगर  वो  चार  ही  पत्थर  थे  इसलिए, उसने  इस  स्टाइल  में  पत्थर  फेके  की  चारों  पत्थर  समान  दूरी  पर  गिरे | अब  अलादीन  उन  पर  कूद - कूद  कर  नदी  के  पार  पहुच  गया, तभी  वहां  'चमकीली सफ़ेद'  चांदनी  बरसी  और ........!इतने  में  ही  चेतन  की  नींद  टूट  गयी ..........!!             

चलते -चलते =बहुत  हो  चुकी  है  रात  अब  सो  भी  जाइये  
                       खयालो  में  अपनों  के  खो  भी  जाइये 
                       जो  करते  हैं  प्यार बेइन्तहा  आपको  
                       एक  बार  सपनो  में  जाकर  उनसे  मिल  तो  आइये 

orkut scrap

Saturday, October 1, 2011

mano ya na mano ''mera sapna BRIJ''

orkut scraps
                                                                    ''ब्रिज''

ब्रिज  'होर्रोर  शो'  देख  रहा  था,वो शो  पूरा  देखने  के  बाद, उठा  और  फ्रिज  में  से  पानी  निकलने  लगा  उसने  वाटर  bottel  निकली  और  जैसे ही पानी  पीने लगा,  उसकी  नज़र  छत  पर  गयी | उसने  एक  बड़ी  विचित्र  सी परछाइ  देखी, ब्रिज  ने  डरते  हुएय  कांच  की  विंडो  में  से  झांक  कर  देखा | तो  उसकी  एक  लम्बी  चीख  निकल  गयी........    

सुरभा  ने  पुछा  ''क्या हुआ'' पर  ब्रिज  ने  कोई  उत्तर  नहीं  दिया, ब्रिज  का  कोई  उत्तर  न  पाकर, सुरभा  जल्दी  से   कमरे  बहार  की  और  भागी ........... देखा  ब्रिज  वहां  नहीं  था, सुरभा  ने  पूरा  घर  छान  मारा  पर  ब्रिज  कहीं  भी  नहीं  मिला  सुरभा  ने  सेल  उठाया  और  ब्रिज  का  नंबर  मिलाया  देखा  फ़ोन  वही  ब्लिंक  हो  रहा था  और  बज  रहा है .....!

सुरभा  ने  मम्मा  को  फ़ोन  लगाया, फ़ोन  नहीं  उठा ! तभी  अक्षत  वहां  आ  गया  बोला  ''मॉम क्या हुआ'' सुरभा  ने  सब  बता  दिया ....| अक्षत  गेट  खोल  कर  बहार  भाग  गया........इतने में  ब्रिज  की  नींद  टूट  गयी...........!           
chaltey- chaltey =
''It's when you know that he cant msg you
but every time light blinks in your mobile
you see with feeling that it might be his/her msg.....!

 Good Night Graphics
                           

Monday, September 5, 2011

mano ya na mano "mera sapna" RADHIKA

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*****यह  केवल  रात  में  देखा  गया  एक  सपना  है  वास्तविक  दुनिया  से  इसका  कोई  लेना  या  देना  नहीं है | अगर  इस  पोस्ट  की  बाते  किसी  से  मिलती  हैं,  तो  इसे  महज़  एक  संयोग  ही  कहा  जायेगा |    
                                                                     ''राधिका''
राधिका  घंटो  शहर  से  मिलो  दूर  पोंड  के  पास  बैठी  रही, वो  बिलकुल  अकेले  बैठी  थी | उसे  तालाब  के   पास   घंटो  ऐसे  ही  बैठना  अच्छा  लगता  था, जिस  जगह  पर  वो  बैठती  थी,  वहां  कोई  आता - जाता  भी  नहीं  है | उस  तालाब  में  गोल्डेन  मछली  उसे  बहुत  पसंद  थी, जैसे  उस  मछली, से  राधिका  की  बहुत  गहरी  दोस्ती  हो  गयी  थी |

राधिका  उस  मछली  से  अपने  दिल  की  हर  बात  कर  लेती  थी,  एक  तो  राधिका  को  सिक्रेट  लीक  हो  जाने  का  डर  नहीं  रहता  था | राधिका  उस ''गोल्डेन फिश''  के  लिए  घर  से  आटे  की  गोलिया  बना  कर  ले  जाती  थी | और  फिश  को  खिलाती  रहती  थी |

उस  दिन  भी  राधिका  ''गोल्डेन फिश''  के  लिए  खाना  ले,  कर  गयी  थी | बहुत  सी  बाते  उसने  ''फिश''  के  साथ  शेयर  की, राधिका  का  मन  बहुत  हल्का  हो  चूका  था |राधिका  घर  में  अकेली  रहती  थी,  उसके  पति काम  के  सिलसिले  में  घर  के  बहार  रहते  थे | राधिका  फिश  से  बात  करने   के  बाद  काफी  देर  तक  लैपटॉप  पर  खेलती  रही |

राधिका  देर  रात  घर  आई  उसने  रिमोट  हाथ  में  लेकर, सारे  घर  की  लाइट  ऑन  की  पल  भर  में  ही   सारा   घर  लाइट  में  नहा  गया | पर  घर  का  एक  कोना  अभी  भी  अंधेरे  में  था, राधिका  धीरे- धीरे  उस  अंधेरे  कोने  की  तरफ  बढने  लगी | तभी   उसे  ''नुपुर  ध्वनी'' सुनाई  दी, बड़ी  ही  मधुर  ध्वनी  थी | तभी  एक हाथ  उसके  कंधे  पर  पड़ा  राधिका  की  चीख  निकल  पड़ी,  वो   जल्दी  से  उठ  बैठी  फिर गिलास  का  पानी  गटागट  पी  गयी| ये  सपना  उसने  पहली  बार  देखा  था, वो  अपने  बेड  पर थी |

चलते-चलते= रात  को  सपनो  में  आती  है ''परी''
                      मीठे-मीठे  सपने  लाती  है ''परी''
                      भूल  के  सारे  गम, खो  जाओ  और   
                      चुपके  से  नींद  के  आगोश  में  सो  जाओ  ||

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Tuesday, July 12, 2011

mano ya na mano(aapkey anmol pal)'' pahla pyaar''

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                                      ''pahla pyar''


Rishabh ko Gwaliar jana tha, vo ek chotey se gao{village)ke hain unhey apni train ek badey shaher se pakadni thi   vo vahan us shaher me gaye, aur vahan se apni seat dhund kar train me baith gaye.train aagey badhney lagi,train ek station par ruki .vahan se kafi log jo ek hi pariwaar ke the chadhey,sabney apni-apni seat le li.Rishabh ke saamney wali birth  par ek koi 15-16 saal ki ladki thi,uski khubsurti ki taarif karna bhi ''atishyukti'' hogi to yahan par me bina us ladki ki tarif kiye post likh rahi hu.

raat ka samya tha ladki apni seat par let gayi thi,Rishabh baithey the aur unki nazar us ladki se hat hi nahi rahi thi.achanak us ladki ne dekha ki rashabh uski taraf bina palkey jhapkaye dekh rahey hain.vo thoda muskrayi phir usney kuch kaha jo Rishabh ko samjh me nahi aaya.phir us ladki ne apni haath ki fingers se train ki deewar par kuch likha usney apna naam likha tha .phir usney train ki deewar par apni ungliyo se likh kar pucha  ki aapka naam kya hai??tab Rishabh ne bhi usi ki tarha likh kar apna naam bata diya.

 Rishabh ne us ladki ka naam mujhey nahi bataya,jab tak Gwalior nahi aa gaya tab tak dono chup chap aisey hi baat kartey rahey Rishabh aaj bhi us ladki ko apna pyar mantey hain.rishabh ki is baat ko ''bees saal''  beet gaye hain .Rishabh  vo raat aaj bhi  bhulaye nahi  bhultey.@chaltey chaltey me kuch mashoor panktiya
@aapney kabhi sotey waqt night me koi sapna(dream)dekha ho aur vo aap sab se share karna chahtey ho,to aap mujhey bata saktey hain,aur aap apney ya apney nephew,niece,brother,sister ke koi bhi manoranjak baatey ya pal agar mujh se share karna chahey to kar saktey hain mei uski aisi hi post nikal dungi.par aapkey sapney(dream) aur baatey ,pal sabko bataney layak honey chahiye .ye un logo ke liye meri ek pahal hai ,jo apni baat kisi ko batana bhi chahtey hai,prantu bata nahi patey . mei unki baato ka mano ya na mano aapkey anmol pal mei unka swagat karti hu . ` 
chaltey-chaltey=     
Zindagi Ka Safar Toh Ek Haseen Safar Hai 
Her Kisii Ko Kisii Na Kisii Ki Talash Hai
Kisii Ke Pass Manzil Hai Toh Raah Nahi
Aur Kisii Ke Pass Rah Hai Toh Manzil Nahi…
`
Vishwas Banke Log Zindagi Main Aatey Hai
Khwab Banke Aankhon Main Samaa Jaatey Hai
Pehle Yakeen Dilate Hai Ki Woh Hamare Hai
Phir Na Jaane Kyu Badal Jaatey Hai…
`
Zindagi Hai Nadan Isiliye Chup Hoon,
Hoth Keh Nahi Sakte Jo Fasana Dil Ka,
Shayad Nazron Se Vo Baat Ho Jaye,
Is Ummid Se Karte Hain Intezar Raat Ka,
Ke Shayad Sapne Me Mullakat Ho Jaye…
`
Jindagi Kisi Ki Amanat Nahi Hoti,
Amanat Main Kabhi Kayamat Nahi Hoti,
Dil Ko Sambhal Kar Rakhna,
Meri Dosti Ki Kaid Main Jamanat Nahi Hoti.
`
Dil Chahta Hai Tumse Pyari si Baat Ho,
Khamosh Taraane Hon, Lambi si Raat Ho,
Fir Unse Raat Bhar Yahi Meri Baat Ho,
Tum Meri Jindgi Ho,Tum Hi Meri Kaynaat Ho.
`


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