
''अनिकेत''
अनिकेत को 'विंटर सीजन' बहुत पसंद है, रंग-बिरंगे खिले हुएय फूल भीनी-भीनी खुशबू घना कोहरा सब कुछ वातावरण को ऐसा बना देता है, की ऐसा लगता है की जैसे स्वर्ग में आ गए हो | आज अनिकेत को ''सुगंधा'' की बहुत याद आ रही थी,'काका' से बहार लोन में चाय लाने को कहकर,अनिकेत बहार लगे झूले पर आकर बैठ गए |
झूले पर बैठते ही अनिकेत अपनी यादों में खो गए,सुगंधा से उनकी पहली मुलाक़ात बड़ी मजेदार तरीके से हुई थी | वह सुगंधा से पूर्णिमा दीदी के यहाँ मिले थे, सुगंधा 'पूर्णिमा दी' के घर के पास ही रहती थी | उस दिन जैसे ही अनिकेत 'दी' घर में घुसे 'पेस्ट्री' खाती सुगंधा से टकरा गए थे, और सारी पेस्ट्री सुगंधा की नाक पर लग गयी थी | : ) :)
अनिकेत का तो उस दिन पूरा दिन ही सुगंधा को 'सॉरी' कहने में ही बीता था | और फिर तो कुछ ही दिनों में ''वो दोनों दो जिस्म एक जान हो गये'' थे | साथ जीने -मरने की कसमे भी खा ले थी, और अपनी बनाने का वादा करके अनिकेत बुझे मन से अपने घर लौट आये थे | पर वापस घर आने के बाद वो फिर कभी पूर्णिमा दी के घर नही जा पाए और ना ही सुगंधा से फिर मिल पाए...........!
पापा ने उनको अब्रोड भेज दिया था, आगे पढने के लिए और अनिकेत उस दुनिया में जाकर इतना खो गए की सुगंधा को कुछ समय के लिए उन्होने अपनी 'यादो की डायरी' में छुपा लिया था | और जब वो पांच साल के लम्बे समय के बाद घर लौटे तो, सीधे सुगंधा से मिलने जा पहुचे | पर वहां पर जाकर उन्हे पता चला की सुगंधा अब इस दुनिया में नही है ..... : '( !!!
कारण वो स्वयं थे , सुगंधा ने किसी को भी ये पता नही चलने दिया था की, उसकी इस हालत का जिम्मेदार कौन है !!! और अचानक ही वो सुगंधा -सुगंधा कहकर जाग उठे .........उनकी आँखों से अश्रु धरा बह रही थी .......... :'(
चलते- चलते = आज फिर अश्क आँखों में झलक आये हैं
तेरी भीनी -भीनी यादों के दायरे सीमट कर
कुछ इस तरह से आज बरसे की कभी हम
संभल ना पायेंगे,तेरी यादों से कभी निकल ना पायेंगे||

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